इस समय पर होते हैं सबसे ज्यादा मिसकैरिज, जानिए गर्भपात के मुख्य कारण

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अपडेट डेट जनवरी 10, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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मिसकैरिज का सबसे ज्यादा खतरा गर्भधारण के बाद 20वें हफ्ते तक रहता है। गर्भपात होने पर महिला के मन में कई बातें आती हैं जैसे- मिसकैरिज क्यों हुआ, इसके लक्षण क्या होते हैं? मिसकैरिज के बाद कौन-सी सावधानियां बरतनी चाहिए आदि। “हैलो स्वास्थ्य” के इस आर्टिकल में गर्भपात से जुड़ी लगभग सभी जानकारियां दी जा रही हैं। जिससे जो महिलाएं गर्भवती हैं या बेबी प्लानिंग कर रही हैं उन्हें मदद मिल सके।

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मिसकैरिज क्या है?

गर्भावस्था के 20वें सप्ताह से पहले गर्भ में ही भ्रूण की मृत्यु हो जाना मिसकैरिज के नाम से जाना जाता है। मेडिकल भाषा में इसे स्वत: गर्भपात (स्पॉन्टेनियस मिसकैरिज) कहते हैं। अमेरिकन सोसायटी फॉर रिप्रोडक्टिव मेडिसन की एक रिपोर्ट के हिसाब से दुनिया भर में कम से कम 30% प्रेग्नेंसी, गर्भपात की वजह से खत्म हो जाती है।

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इस समय पर होते हैं ज्यादातर मिसकैरिज?

ज्यादातर मिसकैरिज गर्भावस्था के शुरूआती 20 हफ्तों में होते हैं। मिसकैरिज को झेलने वाली पांच में से एक महिला का मिसकैरिज गर्भावस्था के 20वें सप्ताह से पहले होता है।

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गर्भपात के कितने प्रकार हैं?

मिसकैरिज कई तरह का हो सकता है और यह आपकी गर्भावस्था की स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए, हर महिला के गर्भपात के लक्षण भी अलग-अलग हो सकते हैं।

  • मिस्ड मिसकैरिज (Missed miscarriage) : इस तरह के गर्भपात में न ही ब्लीडिंग होती है और न ही किसी तरह के लक्षण दिखाई देते हैं। कुछ मामलों में तो गर्भपात के बाद भी भ्रूण गर्भ में ही रहता है। इसका पता तब लगता है जब गर्भ में भ्रूण का विकास रुक जाता है। अल्ट्रासाउंड से इसका पता चल पाता है।
  • अधूरा गर्भपात (Incomplete miscarriage) : इस तरह के मिसकैरिज में महिला को हैवी ब्लीडिंग और पेट के निचले हिस्से में असहनीय दर्द होता है। इसमें भ्रूण का कुछ ही भाग बाहर आ पाता है। यही कारण है कि इसे अधूरा गर्भपात कहा जाता है। इसका पता भी अल्ट्रासाउंड से किया जा सकता है।
  • पूर्ण गर्भपात (Complete Abortion): जैसा कि नाम से पता चलता है। पूर्ण गर्भपात में भ्रूण पूरी तरह से बाहर आ जाता है। पेट में तेज दर्द और भारी रक्तस्राव होना पूर्ण गर्भपात के लक्षण हो सकते हैं।
  • संक्रमित (सेप्टिक) गर्भपात : गर्भ में संक्रमण के कारण गर्भपात हो जाता है।
  • इनएविटेबल गर्भपात (Inevitable ) : इसमें रक्तस्राव होता रहता है और गर्भाशय ग्रीवा (cervix) खुल जाती है, जिससे भ्रूण बाहर आ जाता है। इस दौरान पेट में लगातार ऐंठन होती रहती है।
  • संभावित गर्भपात : इसमें कम ब्लीडिंग होती है और भ्रूण जीवित रहता है। इसमें महिला को कम्प्लीट बेड रेस्ट की सलाह दी जाती है।

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गर्भपात के मुख्य कारण क्या हैं?

  • क्रोमोसोम असामान्यता ।
  • हार्मोनल असंतुलन 
  • ब्लड क्लॉटिंग की समस्या ।
  • थायरॉयड या डायबिटीज जैसी बीमारियां ।
  • गर्भ या गर्भाशय में किसी तरह की समस्या ।
  • बहुत ज्यादा धूम्रपान ।
  • मां की उम्र ज्यादा होना ।
  • गर्भाशय असामान्यताएं और कमजोर सर्विक्स ।
  • इम्यूनोलॉजी डिसऑर्डर (अस्थमा, एलर्जी, ऑटोइनफ्लमेटरी सिंड्रोम) आदि।

मिसकैरिज के सामान्य लक्षण क्या हैं?

  • ब्लीडिंग-वजायनल ब्लीडिंग (स्पॉटिंग) और खून के थक्के आना, गर्भपात के सबसे आम लक्षणों में से एक है। अगर ब्लीडिंग भूरे या गहरे लाल रंग की हो। इसके साथ ही ब्लीडिंग के दौरान तेज ऐंठन होती हो, तो ये सारे संकेत खतरे की तरफ इशारा करते हैं।
  • पेट दर्द (Abdominal Pain)-अगर पेट के निचले हिस्से में तेज ऐंठन के साथ दर्द हो तो यह मिसकैरिज का लक्षण हो सकता है।
  • व्हाइट डिस्चार्ज-गर्भावस्था में व्हाइट डिस्चार्ज होना आम बात है लेकिन, अचानक यह डिस्चार्ज ज्यादा या स्मेल के साथ हो तो यह इंफेक्शन का संकेत हो सकता है।
  • पीठ में तेज दर्द-प्रेग्नेंसी के दौरान पीठ में असहनीय दर्द गर्भपात के संकेत की ओर इशारा करता है। कई बार इस दर्द के साथ ब्लीडिंग की भी समस्या होती है।

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गर्भपात से बचाव के लिए क्या करें?

वैसे तो मिसकैरिज को रोकने का कोई सटीक उपाय नहीं है लेकिन, कुछ उपायों के द्वारा गर्भपात की संभावनाओं को कम जरूर किया जा सकता है।

  • प्रेग्नेंसी के दौरान नियमित रूप से चेक अप कराएं। इससे किसी भी समस्या को रोकने और इलाज करने में मदद मिलेगी।
  • यदि आपका पहले मिसकैरिज हुआ है तो किसी प्रसूति-रोग विशेषज्ञ (जैसे पेरिनेटोलॉजिस्ट) को दिखाएं।
  • मिसकैरिज की संभावना को कम करने के लिए गर्भावस्था के दौरान और पहले फोलिक एसिड और अन्य विटामिन को संतुलित मात्रा में लें।
  • सिगरेट, तंबाकू और एल्कोहॉल गर्भपात का मुख्य कारण हो सकते हैं। इसलिए जब आप प्रेग्नेंसी के बारे में सोच रही हो, तो इन नशीले पदार्थों का सेवन बंद कर दें।
  • अच्छी लाइफस्टाइल अपनाएं।
  • वजन संतुलित रखें।

गर्भपात के बाद महिला को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

  • खाने-पीने का विशेष ध्यान रखें।
  • मिसकैरिज के बाद जब तक पूरी तरह से मानसिक और शारीरिक रूप से ठीक न हो जाएं दोबारा बेबी प्लान करने का न सोचें।
  • गर्भपात के बाद अगर आपको बुखार आ रहा है तो अनदेखा न करें क्योंकि यह गर्भपात के बाद इंफेक्शन का संकेत हो सकता है।
  • डॉक्टर की सलाह से गर्भपात के बाद नियमित रूप से व्यायाम करें और अपना वजन नियंत्रित रखें।
  • धूम्रपान और कैफीन का सेवन न करें।
  • किसी भी असामान्य वजायनल डिसचार्ज को इग्नोर न करें।

यह ध्यान रखें कि जितना आप अपना ख्याल रखेंगी उतनी ही जल्दी आप ठीक होंगी। हमारी सोसाइटी में मिसकैरिज होना एक बहुत बड़ी बात है लेकिन उससे भी बड़ी बात है प्रेग्नेंट मां को समझाना। मिसकैरिज किसी भी समय किसी भी प्रेग्नेंट महिला के साथ हो सकता है। इसके लिए किसी और को जिम्मेदार ठहराने से बेहतर है मां को सात्वना दें। मिसकैरिज को एक हेल्थ कंडिशन की तरह ही लें। इसके लिए खुद को दोषी मानना या फिर कभी प्रेग्नेंट नहीं हो पाऊंगी ऐसा सोचना बंद करें।

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