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लेजर ट्रीटमेंट से होगा स्पाइडर वेन का इलाज, जानें इस बीमारी के बारे में जरूरी बातें

लेजर ट्रीटमेंट से होगा स्पाइडर वेन का इलाज, जानें इस बीमारी के बारे में जरूरी बातें

स्पाइडर वेन (Spider Vein) पतली, लाल-बैंगनी नसें होती हैं, जो त्वचा के बेहद करीब होती हैं, जिस वजह से यह काफी उभरी हुई दिखाई देती हैं। यह नसें आपके त्वचा पर भद्दी नजर आ सकती हैं। काफी लंबे समय तक लगातार खड़े होकर या बैठकर काम करने वाले, ओवरवेट, स्मोकिंग या तंबाकू उत्पाद का सेवन करने वाले लोगों में ये बीमारी ज्यादा देखी जाती है। इसके अलावा गर्भवती, उम्रदराज, जेनेटिक या हैवी लिफ्टिंग करने वाले लोगों में भी ये समस्या नजर आ सकती है। देशभर में 1 करोड़ से ज्यादा लोग अपने पैरों या शरीर पर ब्लू वेन (नीली नसें) से ग्रसित हैं, लेकिन उन्हें इस समस्या के बारे में जानकारी नहीं है। ब्लू वेन शुरुआती चरण में दर्दरहित होती हैं, जिससे करीब 90 प्रतिशत लोग इसका इलाज करवाने से बचते रहते हैं। इन ब्लू वेन को वैरिकोज वेन भी कहा जाता है और यह खतरनाक बीमारी है। भारत में महिलाएं लंबी ड्रेस पहनकर या सेलिब्रिटी शूट के दौरान बॉडी कंसीलर पहनकर वैरीकोज या स्पाइडर वेन को छुपाने की कोशिश करते हैं।

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स्पाइडर वेन (Spider Vein) का इलाज कैसे होता है?

पिछले कुछ सालों में वैरीकोज वेन के ट्रीटमेंट में असामान्य बदलाव आए हैं, जिसमें ओपन सर्जिकल प्रोसीजर से लेकर नसों को अंदर से बंद करने के लिए हीट की मदद से मिनिमल इंवेसिल लेजर और रेडियो फ्रीक्वेंसी एब्लेशन शामिल हैं। हाल ही में हीट की जगह ग्लू जैसे मेटीरियल को नसों को बंद करने के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा, ताकि मरीज को होने वाली असुविधा और जटिलताओं को कम किया जा सके।

स्पाइडर वेन का इलाज करने के लिए वीडियो की मदद से होने वाली एग्जोथर्म (Exotherme) तकनीक एक नई नॉन-इंवेसिव और ज्यादा प्रभावशाली तकनीक है। जिसमें, इंजेक्शन के बिना ही टॉपिकल लेजर की मदद से स्पाइडर वेन का ट्रीटमेंट किया जाता है। यह स्क्लेरोथेरेपी जैसी पुरानी तकनीक से बिल्कुल अलग है, जिसमें मरीजों को दर्दनाक अनुभव प्राप्त होता था।

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स्पाइडर वेन का इलाज करने के लिए क्या लेजर ट्रीटमेंट सुरक्षित है?

स्पाइडर वेन का इलाज करने के लिए लेजर ट्रीटमेंट बिल्कुल उचित है और यह लेटेस्ट मेथड न के बराबर असुविधा और खतरे के साथ वांछनीय परिणाम देता है। हालांकि, लेजर ट्रीटमेंट गर्भवती महिलाओं या इलाज कीए जाने वाले एरिया पर स्किन वायरल अटैक या इंफेक्शन से ग्रसित व्यक्तियों के लिए सही नहीं है। त्वचीय वेसेल (Cutaneous Vessels) के फैलाव और वेनस पैथोलोजी (venous pathology) के कारण सुपरफीशिअल वैस्क्युलर घाव हो जाते हैं। जिनमें, टेलांजैकटेजिआ और एनजियोमा सबसे आम सुपरफीशिअल वैस्क्युलर बीमारी हैं।

वेनस डिजीज एक विकासशील बीमारी होती है, जो कि बिना ट्रीटमेंट के सही नहीं होती है। अपने वेनस डायग्नोज के लिए सही डॉक्टर से संपर्क करें और इस बीमारी को जल्द से जल्द सही करवाएं। इससे आपको नई सुपरफीशिअल वैस्क्युलर लेजन होने का खतरा सीमित हो जाएगा।

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क्या लेजर ट्रीटमेंट प्रभावशाली होता है?

लेजर प्रिंसिपल थर्मल एक्शन के उत्पादन पर निर्भर करता है। लेजर लाइट एपिडर्मिस के जरिए त्वचा के भीतर जाती है और डर्मिस के भीतर वेसल को छूती है। इसके बाद यह लाइट हीट में बदल जाती है और वेसल बाधित करती है, जिससे धीरे-धीरे यह गायब हो जाती है। लेजर स्क्लेरोथेरेपी के अतिरिक्त भी इस्तेमाल की जा सकती है और इससे घुटनों के अंदरुनी, टखने और पैरों जैसे मुश्किल एरिया में कार्य किया जा सकता है।

लेजर ट्रीटमेंट से पहले और बाद में बरतीं जाने वाली सावधानियां

  • ट्रीटमेंस से करीब 2 हफ्ते पहले से सूर्य की रोशनी के संपर्क में न आना।
  • ट्रीटमेंट के बाद प्रभावित क्षेत्र पर मॉइश्चराइज करना और अगले 2 हफ्तों तक सूर्य की रोशनी के संपर्क में न आना।

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प्रभावशाली और नई तकनीक एग्जोथर्म लेजर

Spider Vein- स्पाइडर वेन

स्पाइडर वेन जो की वैरीकोज वेन की शुरुआती स्टेज होती है, आमतौर पर कॉस्मेटिक इश्यू होता है जिसे ट्रांसक्यूटेनस लेजर से टारगेट करके ट्रीट किया जा सकता है। इस तकनीक में, एक लेजर लाइट को निश्चित वेवलेंथ के साथ स्पाइडर वेन पर अप्लाई किया जाता है। इससे 2 एमएम के डायामीटर के भीतर स्पाइडर वेन की लोकल बर्निंग होती है, जो कि त्वचा के बिल्कुल पास होती है। इस प्रभाव को पाने के लिए विभिन्न तरह के डिवाइस उपलब्ध हैं। लेकिन, इस केयर का करंट स्टैंडर्ड एग्जोथर्म डिवाइस है, जिसमें इनबिल्ट कैमरा होता है। इस कैमरा की मदद से हम स्पाइडर वेन को 10 टाइम जूम करके आसानी से टारगेट कर सकते हैं और आसपास की स्किन को 5 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा कर सकते हैं। इसके अलावा, यह पेटेंट तकनीक आसपास के टिश्यू के लिए पूरी तरह से सुरक्षित रहते हुए पूरा प्रभाव डालती है। इस तकनीक के नतीजे धीरे-धीरे दिखने शुरू होते हैं और 4 से 6 हफ्तों के अंदर परमानेंट हो जाते हैं। हालांकि, डॉक्टर इस तकनीक और ट्रीटमेंट को कई बार भी करवाने की सलाह दे सकता है।

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डॉ. सौरभ जोशी द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 09/03/2020 को
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