कोरोना वायरस एयरबॉर्न : WHO कोविड-19 वायु जनित बीमारी होने पर कर रही विचार

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट जुलाई 9, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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कोरोना वायरस हवा से फैलने वाली बीमारी है, इस बात की दावेदारी 32 देशों के 239 वैज्ञानिकों ने की है। जिसे संज्ञान में लेते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मंगलवार को इस बात को सबूतों के आधार पर सही बताया है। लेकिन अभी भी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस बात का पूरी तरह से पुष्टि नहीं की है कि कोरोना वायरस एयरबॉर्न है। आइए जानते हैं कि अगर कोरोना वायरस हवा से फैलने वाली बीमारी है तो हम खुद को किस तरह से सुरक्षित रख सकते हैं। 

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हवा से फैलने वाली बीमारी (Airborne Disease) क्या होती है?

जो बीमारियां हवा में फैले पैथोजन्स को सांस के द्वारा लेने से फैलती है, हम उसे एयरबॉर्न डिजीज या हवा से फैलने वाली बीमारी कहते हैं। एयरबॉर्न डिजीज किसी भी व्यक्ति को खांसने, छींकने या बात करने से फैलती है। क्योंकि इस दौरान व्यक्ति के मुंह या नाक से निकले हुए ड्रॉपलेट्स हवा में फैल जाते हैं और उनमें मौजूद वायरस या बैक्टीरिया सांसों के द्वारा दूसरे व्यक्ति को संक्रमित कर देते हैं। इसके साथ ही वे ड्रॉपलेट्स किसी सतह से जा कर चिपक जाते हैं और हाथों के द्वारा चेहरा, नाक, मुंह, आंख आदि छूने से शरीर के अंदर प्रवेश कर सकते हैं। कोरोना संक्रमण भी कुछ इसी तरह से अभी तक फैलने की बात विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को वैज्ञानिकों के द्वारा बताया गया है। 

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कोरोना वायरस एयरबॉर्न पर WHO का क्या कहना है?

6 जुलाई, 2020 को कोरोना वायरस को लेकर 32 देशों के 239 वैज्ञानिकों ने समूह बना कर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को एक खुला पत्र लिखा है। जिसमें वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरसएयरबॉर्न यानी कि कोविड 19 वायु जनित बीमारी के बारे में जिक्र किया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोना वायरस या SARS-CoV-2 हवा से फैल रहा है। इसे लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को अपने दिशा-निर्देशों में सुधार करने की अपील भी की है। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वैज्ञानिकों के पत्र को संज्ञान में लेते हुए कोरोना वायरस एयरबॉर्न की बात पर गौर किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) में कोविड-19 महामारी से जुड़ी टेक्निकल लीड डॉक्टर मारिया वा केरख़ोव ने मीडिया से मुखातिब होते हुए इस विषय पर कहा कि, “कोरोना वायरस हवा के द्वारा फैलने की आशंका है, ऐसा वैज्ञानिकों के हवाले से पता चला है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के लोग अभी इस बात पर विचार विमर्श कर रहे हैं।”

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इसी बात पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की चीफ साइंटिस्ट डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि, “जब हम खांसते हैं, बोलते हैं, चिल्लाते हैं, छींकते हैं तो हमारे मुंह से छोट-छोटे ड्रॉपलेट्स निकलते हैं। ये ड्रॉपलेट्स अलग-अलग साइज के होते हैं और एक से दो मीटर दूर तक फैल सकते हैं। जिससे उस ड्रॉपलेट में मौजूद बैक्टीरिया या वायरस किसी को भी संक्रमित कर सकता है। लेकिन इन्हीं ड्रॉपलेट्स में एक बहुत छोटा ड्रॉपलेट होता है, जिसका आकार 5 माइक्रोन से भी कम होता है। इतने छोटे ड्रॉपलेट्स को एरोसॉल्स कहते हैं। ये ड्रॉपलेट्स हवाओं के झोंकों के साथ उड़ कर इधर-उधर जा सकते हैं। जिसके बाद ये आसपास के क्षेत्रों में आसानी से फैल सकता है।”

कोरोना वायरस एयरबॉर्न है या नहीं, इस पर डॉ. सौम्या का कहना है कि, “अभी कोरोना वायरस एयरबॉर्न है या नहीं इस पर निर्णय लेना जल्दबाजी होगी। क्योंकि हवा से फैलने वाली बीमारी का संक्रमण दो तरह का हो सकता है- पहला तो ये कि किसी बीमारी से संक्रमित व्यक्ति द्वारा निकले हुए ड्रॉपलेट्स किसी सतह पर रुक जाए। इस तरह से ड्रॉपलेट्स में मौजूद बैक्टीरिया या वायरस अगले कितने घंटों तक उस सतह पर जिंदा रह सकते हैं, ये उस सतह पर निर्भर करता है। इस बीच अगर कोई व्यक्ति उस सतह के संपर्क में आता है तो संक्रमण उस तक पहुंच सकता है। वहीं, दूसरा ये है कि अगर ड्रॉपलेट्स बहुत छोटे हैं तो वो ठहरी हुई हवा में एक निश्चित दूरी तक 10 से 15 मिनट तक टिके रह सकते हैं। इस दौरान अगर कोई व्यक्ति उस क्षेत्र में आता है या उस क्षेत्र से गुजरता है तो ड्रॉपलेट में मौजूद बैक्टीरिया या वायरस से संक्रमित हो सकता है। क्योंकि व्यक्ति के सांसों के द्वारा वो ड्रॉपलेट्स उसके शरीर के अंदर जा सकता है।”

डॉ. सौम्या स्वामीनाथन का मानना है कि, “अभी कोरोना वायरस एयरबॉर्न है या नहीं ये एक जांच का विषय है। लेकिन जिस तरह से पर्सन-टू-पर्सन इसका संक्रमण देखा गया है, उस आधार पर कोरोना वायरस एयरबॉर्न भी हो सकता है। जिस तरह से मिजेल्स एक वायुजनित बीमारी है, उसी तरह से कोरोना वायरस एयरबॉर्न बीमारी हो सकती है। लेकिन लोगों को घबराने की जरुरत नहीं है, अभी तक बताए गए सभी दिशा-निर्देशों को अपना कर लोग कोरोना वायरस से सुरक्षित रह सकते हैं।”

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कोरोना वायरस एयरबॉर्न है तो इससे कैसे बचा जा सकता है?

कोरोना वायरस एयरबॉर्न है या नहीं इस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) अभी मंथन कर रहा है। लेकिन अगर ऐसा है भी तो हमें इससे अभी से बचना चाहिए। कोरोना वायरस हवा से फैलने वाली बीमारी से हम निम्न टिप्स को अपना कर खुद को सुरक्षित रख सकते हैं :

  • भीड़-भाड़ वाले इलाकों में ना जाएं, क्योंकि ज्यादा लोग जिस जगह पर होंगे वहां पर हवा से फैलने वाली बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं। 
  • अगर आप कहीं बाहर जा रहे हैं तो अपने चेहरे को, खासकर के नाक, मुंह और आंखों को ढक कर रखें। जिससे हवा में फैलने वाले ड्रॉपलेट्स आसानी से आपके शरीर के अंदर प्रवेश ना कर सके। इसके लिए आप बेहतरीन क्वालिटी का मास्क और पूरी तरह से आंखों को ढकने वाला चश्मा या फेस शील्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं। 
  • बाहर कहीं भी जाएं तो सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखें। लोगों से कम से कम 1 से 2 मीटर की दूरी बना कर रखें।
  • घर में या ऑफिस में वेंटिलेशन पर ध्यान रखें। खुले और हवादार कमरों में रहें।
  • खांसते या छींकते समय ध्यान रखें कि आपको खुले में नहीं छींकना या खांसना है। इस दौरान आपको अपने मुंह और नाक को अपने बाजुओं या कोहनी से या टिश्यू पेपर से ढक लेना है। 
  • अपने चेहरे, नाक, मुंह और आंखों को हाथों के द्वारा छूने से बचना चाहिए।
  • अपने हाथों को हर आधे से एक घंटे पर 20 सेकेंड तक अच्छे से साबुन और पानी की मदद से साफ करते रहें।
  • अगर आपके घर में या आसपास कोई बीमार है, उन्हें सर्दी-जुकाम, बुखार आदि जैसी समस्या है तो आपको उनकी देखभाल दूर से करनी चाहिए, उनके करीब ना जाएं। 
  • अगर आपको अपनी तबियत ठीक नहीं लगे तो घर पर अलग कमरे में रहें।

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इस तरह से आपने जाना कि कोरोना वायरस एयरबॉर्न हो सकती है। लेकिन अभी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस बात की पुष्टि नहीं की है। इसलिए हैलो स्वास्थ्य सिर्फ आपको डब्ल्यूएचओ के द्वारा बताई गई बातों के आधार पर ही जानकारी दे रहा है। इस विषय में अधिक जानकारी के लिए आप विश्व स्वास्थ्य संगठन की वेबसाइट पर जा कर अधिक जानकारी पा सकते हैं। इसके अलावा कोरोना वायरस हवा से फैलने वाली बीमारी को लेकर अगर मन में कोई भी डर है तो आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। 

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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