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क्या आपकी लॉन्ग टाइम वाली सिटिंग जॉब है? हो सकता है आपको "डॉर्मेंट बट सिंड्रोम"

क्या आपकी लॉन्ग टाइम वाली सिटिंग जॉब है? हो सकता है आपको "डॉर्मेंट बट सिंड्रोम"

अगर आप घंटों डेस्क पर बैठे रहते हैं, तो आपको एक डिस्कंफर्ट और दर्द का अनुभव हो सकता है। इसके साथ ही घुटने के दर्द, कूल्हे की जकड़न, लॉक बैक की समस्या भी आपको परेशान करती है, तो आपको डॉर्मेंट बट सिंड्रोम (Dormant butt syndrome) हो सकता है। इसे लोअर क्रॉस सिंड्रोम (Lower cross syndrome ), डेड बट सिंड्रोम (Dead butt syndrome) और ग्लूटस मेडियस सिंड्रोम (Gluteus medius syndrome) जैसे कई नामों से जाना जाता है। यह ज्यादातर लंबे समय तक बैठने के कारण होता है। ऐसे में डॉर्मेंट बट सिंड्रोम ट्रीटमेंट (Dormant butt syndrome treatment) के रूप में व्यायाम काफी कारगर साबित होते हैं। डेडलिफ्ट, स्क्वॉट्स के साथ ही कुछ लोअर बॉडी एक्सरसाइज करना आपके ग्लूट्स और हैमस्ट्रिंग को मजबूत बनाने में मदद कर सकता हैं। तो आइए जानते हैं कि डॉर्मेंट बट सिंड्रोम (Dormant butt syndrome) से निपटने के लिए कौन-सी एक्सरसाइजेज सबसे सही रहती हैं।

हेल्दी ग्लूट्स (Glutes) जरूरी क्यों है?

ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी वेक्सनर मेडिकल सेंटर (Ohio State University Wexner Medical Center) के विशेषज्ञों के अनुसार, कमजोर कूल्हे होना बहुत आम है। हालांकि यह कई मामलों में कूल्हे और घुटने के दर्द का मुख्य कारण बन सकता है। शोधकर्ताओं की माने तो शरीर के निचले हिस्से को मजबूत और स्वस्थ बनाए रखने में कूल्हे अहम भूमिका निभाते हैं। ग्लूट्स पेल्विक एरिया का सपोर्ट करने और शरीर को उचित एलाइनमेंट में रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में ग्लूट्स (कूल्हे की मसल्स) को मजबूत बनाने के लिए कुछ व्यायाम करने की जरूरत होती है।

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डॉर्मेंट बट सिंड्रोम (डीबीएस) के लक्षण क्या हैं?

डॉर्मेंट बट सिंड्रोम के लक्षण इस प्रकार हैं:

  • लंबे समय तक बैठने के बाद, आपके कूल्हों में मौजूद ग्लूटल मांसपेशियां (ग्लूट्स) में थोड़ी-सी सुन्नता या दर्द महसूस हो सकता है। हालांकि, थोड़ी देर वॉक या स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज से यह समस्या ठीक हो जाती है।
  • अधिक गंभीर मामलों में, डेड बट सिंड्रोम के लक्षण के रूप में अधिक दर्द और हिप एरिया में कठोरता देखने को मिलती है। साथ ही एक या दोनों कूल्हों, पीठ के निचले हिस्से और घुटनों में दर्द का भी अनुभव कर सकते हैं।
  • यदि डॉर्मेंट बट सिंड्रोम ट्रीटमेंट न लिया जाए, तो आपके ग्लूट्स और कूल्हे फ्लेक्सर्स को नुकसान भी हो सकता है। यहां तक कि अगर कूल्हे ज्यादा कमजोर हो गए तो हिप इंजरी भी हो सकती है।
  • ग्लूटस मेडियस सिंड्रोम की वजह से हिप बर्सा (Hip bursa) में सूजन भी हो सकती है। हिप बर्सा तरल पदार्थ से भरी एक थैली होती है, जो हिप जॉइंट्स के मूवमेंट को आसान बनाता है।
  • डॉर्मेंट बट सिंड्रोम के चलते पैर के निचले हिस्से में दर्द भी हो सकता है।

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डॉर्मेंट बट सिंड्रोम ट्रीटमेंट

डॉर्मेंट बट सिंड्रोम या ग्लूटस मेडियस सिंड्रोम ट्रीटमेंट के लिए कुछ एक्सरसाइज की जा सकती है जिससे आपके ग्लूट्स को मजबूती मिलती है जैसे-

ग्लूटस मेडियस सिंड्रोम ट्रीटमेंट : सिंगल-लेग डेडलिफ्ट (Single leg deadlift)

डॉर्मेंट बट सिंड्रोम-Dormant butt syndrome

  • प्रत्येक हाथ में डंबल पकड़ें और अपने बाएं पैर को जमीन से थोड़ा ऊपर उठाएं।
  • अपनी पीठ को न्यूट्रल रखें और बाएं पैर को ऊपर उठाते हुए अपने पूरे धड़ (टोरसो) को आगे की ओर झुकाएं। इसमें डम्बल जमीन की ओर होगा।
  • अब अपनी पीठ को सीधे रखते हुए पहले की स्थिति में वापस आएं। इस तरह एक रेप (Repetition) पूरा होगा। फिर जैसे-जैसे आपके रेप्स बढ़ेंगे अपने मूवमेंट को थोड़ा तेज करें।
  • इस तरह 10-15 रेप्स सिंगल-लेग डेडलिफ्ट करें।

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ग्लूटस मेडियस सिंड्रोम ट्रीटमेंट : हैमस्ट्रिंग कर्ल (Hamstring curl)

डॉर्मेंट बट सिंड्रोम-Dormant butt syndrome

  • हिप्स को मजबूत बनाने के साथ ही अपर बॉडी को शेप में लाने के लिए यह व्यायाम बहुत ही अच्छा है। इसके लिए मैट पर उल्टा लेट जाएं। दोनों हाथों को एक दूसरे के ऊपर रखकर माथे को उस पर रखें।
  • दोनों घुटनों को ऐसे मोड़ें जिससे पैर छत की ओर ऊपर को हो जाएं। अब एड़ी को एक सीध में रखते हुए घुटनों को थोड़ा अलग करें।
  • अब अपनी ग्लूटियल मांसपेशियों को कसें। इसे 3 तक गिनने तक ऐसे ही रखें और फिर अपने कूल्हों को छोड़ दें। 10 बार दोहराएं और फिर आराम करें।

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ग्लूटस मेडियस सिंड्रोम ट्रीटमेंट : ग्लूट ब्रिज

डॉर्मेंट बट सिंड्रोम-Dormant butt syndrome

  • पीठ के बल लेट जाएं। अब अपने घुटनों के बल झुकें और पैरों को फर्श पर सपाट रखें। सुनिश्चित करें आपके पैर घुटनों के नीचे हों सामने नहीं। हथेलियों को अपने दोनों ओर रखें।
  • अब अपने कूल्हों को ऊपर की ओर उठाएं, अपने कोर को घुमाएं और अपने बट को थोड़ा कसें। ध्यान दें इस पोजीशन में आपका शरीर, कंधे से घुटने तक एक लाइन में होना चाहिए।
  • कुछ सेकंड के लिए इस ही स्थिति में रहें। फिर धीरे-धीरे कूल्हों को नीचे लाएं। इस तरह एक रेप्स पूरा होता है।

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ग्लूटस मेडियस सिंड्रोम ट्रीटमेंट : सिंगल-लेग ब्रिज (Single leg bridge)

डॉर्मेंट बट सिंड्रोम-Dormant butt syndrome

  • अपनी पीठ के बल लेट जाएं और स्टेबिलिटी के लिए अपने हाथों को फर्श पर रखें क्योंकि इसमें एक पैर को मोड़ना होगा और दूसरे पैर को ऊपर की तरफ उठाना होगा।
  • अब अपनी एड़ी को फर्श पर दबाते हुए, शरीर को एक ब्रिज की स्थिति में रखें और अब अपने पेल्विक एरिया को ऊपर उठाएं।
  • इसके बाद धीरे-धीरे अपने शरीर को फर्श पर लाएं। इस तेह एक रिपीटिशन पूरा होता है। इसे पांच बार दोहराएं।

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ग्लूटस मेडियस सिंड्रोम ट्रीटमेंट : रोमानियन डेडलिफ्ट (Romanian Deadlift)

डॉर्मेंट बट सिंड्रोम-Dormant butt syndrome

  • दोनों हाथों में मध्यम-वजन के डम्बल पकड़े और सीधे खड़े हो जाइए, अब घुटने को थोड़ा मोड़ें।
  • अपनी बाहों को सीधा रखते हुए और घुटनों को थोड़ा मोड़ते हुए, अपनी पीठ को मोड़ें बिना धीरे-धीरे कूल्हों पर झुकें और जितना संभव हो डम्बल को नीचे जमीन से टच करने की कोशिश करें।
  • अब धीरे से अपने आप को ऊपर खींचने के लिए अपने ग्लूट्स को कसें। इस तरह से एक रेप्स पूरा होता है।

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ग्लूटस मेडियस सिंड्रोम ट्रीटमेंट : वेटेड ग्लूट ब्रिज (Weighted Glute Bridge)

डॉर्मेंट बट सिंड्रोम-Dormant butt syndrome

  • मध्यम से हैवी वेट के डम्बल लें। 20 पाउंड यानी लगभग 9 किलोग्राम का वेट लेना सही रहेगा।
  • अब अपने घुटनों के बल झुकें और पैरों को फर्श पर सपाट रखें। सुनिश्चित करें पैरों को अपने घुटनों के नीचे रखें, सामने नहीं।
  • डम्बल को अपने निचले एब्डोमिनल हिस्से (पेट के निचले और कूल्हे की हड्डियों के ऊपर) पर रखें। दोनों हाथों से डम्बल को अपने हाथों से पकड़ें।
  • अब कूल्हों को ऊपर की ओर उठाएं और अपने कूल्हों की मांसपेशियों को कसें। ध्यान दें आपका शरीर, कंधे से घुटने तक एक लंबी सीधी लाइन में रहे।
    इस स्थिति में तीन सेकंड के लिए रुकें। फिर धीरे-धीरे शरीर को जमीन पर वापस लाएं। इस तरह एक रेप्स पूरा होता है।

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ग्लूटस मेडियस सिंड्रोम ट्रीटमेंट : स्क्वॉट्स

डॉर्मेंट बट सिंड्रोम ट्रीटमेंट - Dormant Butt Syndrome

  • यह व्यायाम आपके ग्लूट्स, क्वाड्रिसेप्स, हैमस्ट्रिंग और पेट की मांसपेशियों पर अच्छा काम करता है। आप इसे वेट के साथ या बिना वेट के भी कर सकते हैं।
  • इसके लिए सीधे खड़े रहें और कंधों को कसकर रखें।
  • अब अपनी कोर मसल्स को कसने के साथ, धीरे-धीरे अपने घुटनों को मोड़ें ताकि आपकी थाइज जमीन के लगभग समानांतर रहें।
  • फिर धीरे-धीरे अपनी पहले की स्थिति में लौट आएं। यह एक रेप्स पूरा होता है।
  • सप्ताह में कुछ दिनों के लिए 12 से 15 रेप्स करें।

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डॉर्मेंट बट सिंड्रोम से बचाव

  • डॉर्मेंट बट सिंड्रोम से बचाव का सबसे अच्छा तरीका है कि आप लंबे समय तक बैठना अवॉयड करें। लॉन्ग सिटिंग आवर्स जॉब के दौरान समय-समय पर छोटी-छोटी वॉक करें। लंच टीम में नीचे जाने के लिए आप चाहें, तो लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।
  • यदि आप काम में इतना बिजी हो जाते हैं कि बीच-बीच में ब्रेक देना याद ही नहीं रहता है तो इसके लिए आप हर घंटे का एक रिमाइंडर भी सेट कर सकते हैं। हर घंटे में किया गया मूवमेंट ब्लड फ्लो को उत्तेजित करता है जिससे ग्लूट्स में सुन्नता या दर्द से बचाव होता है।
  • सामान्य तौर पर, जितना ज्यादा हो सके सीढ़ियों से ही आने जाने को कोशिश करें। यह न केवल डॉर्मेंट बट सिंड्रोम से प्रभावित मांसपेशियों और टेंडॉन्स (Tendons) को सक्रिय करता है, बल्कि एक बेहतरीन वेट लॉस और कार्डियोवैस्कुलर वर्कआउट भी है।

डॉर्मेंट बट सिंड्रोम ट्रीटमेंट के रूप में व्यायाम को अपनाकर, आप अपने ग्लूट्स को मजबूती दे सकते हैं। अगर ऊपर बताई गई ग्लूट्स को हेल्दी रखने की कसरते आप हर दिन करते हैं तो आपको डेड बट सिंड्रोम जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, ध्यान रखें कि यदि आप अपने ग्लूट्स और हिप फ्लेक्सर्स को मैनेज नहीं करते हैं और रनिंग या अन्य कोई तेज गतिविधि करते हैं, तो आप डॉर्मेंट बट सिंड्रोम के लक्षणों को फिर से महसूस करना शुरू कर सकते हैं।

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Shikha Patel द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 09/12/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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