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क्यों होती है पैरों में झनझनाहट? जानिए इसके घरेलू उपाय

क्यों होती है पैरों में झनझनाहट? जानिए इसके घरेलू उपाय

काफी देर तक असहज तरीके से बैठे रहने पर पैरों में झुनझुनी चढ़ जाता है। किसी भारी सामान को काफी देर तक पकड़े रहने से और काफी देर गलत तरीके से बैठे रहने पर झुनझुनी महसूस होना आम बात है। यह समस्या इतनी आम है कि हर कोई इससे जूझता है, लेकिन कई बार यह आम समस्या किसी के लिए काफी परेशानी का कारण बन जाता है। झनझनाहट पैरों (Feet tingling) में उस समय ज्यादा गंभीर हो जाती है, जब आप कहीं भी बैठ जाएं और आपका पैर सुन्न हो जाए। फिर कुछ मिनट तक पैर हिलाने पर उसमें झुनझुनी महसूस होती है। इस समस्या से ग्रसित लोगों की रुटीन लाइफ बिगड़ जाती है।

झनझनाहट की समस्या को डॉक्टर लोगों की भाषा में पैरेस्थेसिया कहा जाता है। इस बीमारी में ज्यादातर हाथ और पैर सुन्न होते हैं। पैरेस्थेसिया में अंग सुन्न होने के बाद उस हिस्से में काफी झनझनाहट महसूस होती है। अगर आपको कभी-कभार गलत तरीके से बैठने पर झनझनाहट महसूस होता है, तब यह सामान्य बात है, लेकिन जब यह रोज-रोज होने लगे, तब चिंता का विषय हो सकता है। इसलिए इस आर्टिकल में हम पैरों में झुनझुनी (Feet tingling) के कारण और उपाय जानेंगे।

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अस्थायी झनझनाहट के कारण क्या हैं? (Cause of feet tingling)

इसके निम्नलिखित कारण हो सकते हैं। जैसे-

  • हाइपोथायरॉइडिज्म (Hypothyroidism) होने पर पैरों में झनझनाहट (Feet tingling) हो सकती हैं। दरअसल थायरॉइड की स्थिति बहुत है और इससे कोई भी पीड़ित हो सकता है। थाइरॉइड एक छोटी सी ग्रंथि है, जो हार्मोन के उत्पादन से किसी व्यक्ति के शरीर के चयापचय (Metabolism) को असंतुलित कर सकती है। इसके हार्मोन हमारे शरीर के तापमान से लेकर मेटाबॉलिज्म तक हर चीज को नियंत्रित करती है। यह ग्रंथियां आपके मूड से लेकर आपके पीरियड्स (मासिक धर्म) तक को प्रभावित करती हैं।
  • ट्यूमर की समस्या होने पर पैरों में झनझनाहट हो सकती है। दरअसल देखा जाए तो ब्रेन ट्यूमर (Brain tumor) असामान्य कोशिकाओं के बढ़ने की वजह से होता है, जो ज्यादातर ब्रेन (मस्तिष्क) के सामान्य कार्यों को नुकसान पहुंचाता है। ट्यूमर भी अलग-अलग तरह के होते हैं और साथ ही यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि ट्यूमर सेल कहां पर है, और क्या वह कैंसर (Cancer) का कारक है या नहीं। ध्यान रखें की शरीर में कोई भी हुए ट्यूमर कैंसर नहीं होता है। इसलिए शरीर में गांठ (Lumps) समझ आने पर डॉक्टर से जल्द से जल्द संपर्क करें।

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इन बीमारियों के साथ-साथ निम्नलिखित बीमारियों के कारण भी पैरों में झनझनाहट हो सकती है –

  • नसों में परेशानी होने पर पैर में झाझनाहट हो सकती है।
  • नसों में ब्लड सर्क्युलेशन (Blood circulation) में दिक्कत होने पर
  • एस्ट्रोजन अनबैलेंस होने पर
  • हर्निएटेड डिस्क, जो नर्व ट्रामा पर दवाब डालती है।
  • ऑटोम्यून्यून डिफोर्मेशन
  • रिपिटेटिव मूवमेंट, ट्रॉमा या चोट
  • तंत्रिका संबंधी (Nervous system) बीमारी
  • गुर्दे की बीमारियां
  • लिवर की बीमारियां
  • विटामिन-बी1, बी6, बी12, बी3 या विटामिन ई की कमी
  • कीमोथेरिपी (Chemotherapy) की दवाएं
  • पॉइजन या केमिकल का बॉडी में जाना

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पैरों में झनझनाहट के उपाय (Tips to avoid Tingling in the feet)

साइप्रस का तेल – पैरों में झनझनाहट से राहत पाने के लिए साइप्रस का तेल काफी कारगर है। इस तेल से रोजाना मालिश करने पर क्षतिग्रस्त नसों की मरम्मत होती है। इस तेल से आप दिन में एक बार किसी भी समय मालिश करें। इस तेल को आप जैतून या नारियल के तेल में मिलाकर मालिश करें।

लैवेंडर का तेल – हाथ-पैरों में झनझनाहट से राहत पाने के लिए लैवेंडर के तेल में नारियल का तेल मिला लें। इस तेल को उस जगह पर लगाएं, जो हमेशा सुन्न होता है। तेल को पूरा दिन, पूरी रात लगे रहने दें। इस तेल की मालिश से तंत्रिका संबंधी बीमारी ठीक होती है, क्योंकि लैवेंडर का तेल एक कारगर एसेंशियल ऑयल है। लैवेंडर का तेल एंटी इंफ्लमेटरी गुणों से भरपूर होता है, जो नसों की मरम्मत करता है और झनझनाहट की समस्या को दूर करता है।

मसाज थेरिपी – मसाज थेरिपी (Massage therapy) से झनझनाहट की समस्या काफी हद तक दूर होती है। मसाज थेरिपी से क्षतिग्रस्त नसों की मरम्मत होती है। मसाज थेरिपी से ब्लड सर्क्युलेशन (Blood circulation) नॉर्मल होता है।

सेब का सिरका – सेब के सिरके में एसिटिक एसिड होता है। यह एंटी इंफ्लमेटरी की तरह काम करता है। नसों की मरम्मत के लिए आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। जिन लोगों को पैरों में हमेशा झनझनाहट रहती है। उनके लिए सेब का सिरका काफी फायदेमंद है। सेब के सिरके में कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में ऊर्जा बढ़ाने का काम करता है।

वॉर्म कंप्रेस – वॉर्म कंप्रेस की मदद से नसों में ब्लड सर्क्युलेशन को ठीक किया जा सकता है। जब नसों में ब्लड सर्क्युलेट नहीं हो पाता है, तभी झुनझुनी होती है। यह नसों की ब्लॉकेज को ठीक करता है। अगर आपको पैरों में ज्यादा झनझनाहट महसूस होता है। तब आप वॉर्म कंप्रेस को दिन में दो या तीन बार कर सकते हैं।

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दालचीनी (Cinnamon) का इस्तेमाल करें

दालचीनी के इस्तेमाल से भी अपने हाथ पैरों में झनझनाहट को दूर कर सकते हैं, क्योंकि इसके सेवन से आपके शरीर में मैग्नीशियम, और पोटैशियम के तत्वों की कमी पूरी होती है और साथ ही आपके ब्लड सर्क्युलेशन (Blood circulation) ठीक होने में भी मदद मिलती है। इससे बचने के लिए आपको एक गिलास में दालचीनी पाउडर को उबाल कर उसके गुनगुना रहने तक उसका सेवन करना चाहिए।

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व्यायाम (Workout) करें

यदि आपके पैरों में भी दर्द एवं झनझनाहट (Feet tingling) की समस्या बनी रहती है, तो आपको अपने दिनचर्या में व्यायाम को शामिल करने की जरूरत है, क्योंकि व्यायाम करने से न केवल आपका ब्लड सर्क्युलेशन (Blood circulation) सुचारू रूप से चलता है, बल्कि आपकी कोशिकाओं को भी बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है।

इन्हीं के साथ-साथ शरीर में विटामिन-बी1 (Vitamin-B1), बी6 (B6), बी12(B12), बी3 (B3) या विटामिन ई (Vitamin-E) की कमी न होने दें। इसलिए विटामिन-बी 1 की कमी होने पर आहार में नट्स (Nuts), ओट्स (Oats), अंडे (Egg), चावल, ब्राउन पास्ता, साबुत अनाज और संतरे (Orange) का सेवन करना चाहिए।

विटामिन-बी 6 की कमी को दूर करने के लिए रोजाना अंडे, हरी सब्जियां (Green vegetables), सोयाबिन्स (Soybeans), मछली (Fish), ब्राउन राईस और चिकेन का सेवन करना चाहिए।

तो अगर आपको पैर में झुनझुनी (Tingling in the feet) की शिकायत रहती है, तो आप इन घरेलू उपायों को अपनाकर अपनी समस्या का हल कर सकते हैं, लेकिन अगर समस्या ज्यादा बढ़े तो डॉक्टर से सलाह जरूर करें।

अगर आप पैर में झुनझुनी (Tingling in the feet) की परेशानी महसूस करते हैं, तो इसे इग्नोर ना करें। क्योंकि पैर में झुनझुनी (Tingling in the feet) की वजह से कोई और शारीरिक परेशानी शुरू हो सकती है। इसलिए देर ना करें और जल्द से जल्द डॉक्टर से कंसल्टेशन करें। पैर में झुनझुनी या शरीर के किसी भी अंग में झुनझुनी की समस्या हो सकती है। वहीं अगर आप पैर में झुनझुनी (Tingling in the feet) से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं, तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।

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Sidharth Chaurasiya द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 18/05/2021 को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड