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कितना फायदेमंद होता है पेल्विक पेन का आयुर्वेदिक इलाज?

कितना फायदेमंद होता है पेल्विक पेन का आयुर्वेदिक इलाज?

पेल्विक जिसे पेड़ू भी कहते हैं, पेट का सबसे निचला हिस्सा होता है, जिसमें आंत, गर्भाशय, मूत्राशय और अंडाशय जैसे अंग शामिल होते हैं। अक्सर महिलाओं को पेल्विक पेन (pelvic pain) की शिकायत होती है। पीरियड्स के समय तो ऐसा होना सामान्य है, लेकिन इसके अलावा भी यदि आपको अक्सर पेल्विक पेन की शिकायत होती है तो आपको डॉक्टर के पास जाने की जरूरत है। आयुर्वेद में भी इसके लिए कुछ उपचार बताए गए हैं। पेल्विक पेन का आयुर्वेदिक इलाज (ayurvedic medicine for pelvic pain) क्या है? जानिए इस आर्टिकल में।

पेल्विक पेन क्या है? (What is pelvic pain)

पेट के निचले हिस्से और हिप के पास पैरों के बीच वाले हिस्से को पेल्विक कहते हैं। पेल्विक पेन (pelvic pain) की समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक होती है। हालांकि पेल्विक में सामान्य दर्द होना आम है जैसे पीरियड्स के समय दर्द (periods pain) होना, लेकिन यह दर्द यदि तेज होता है या लगातार 6 महीने से अधिक समय तक बना रहता है तो इसे क्रॉनिक पेल्विक पेन (chronic pelvic pain) कहते हैं और ऐसे में आपको इलाज की जरूरत होती है। पेल्विक पेन के लिए कोई एक कारण जिम्मेदार नहीं होता है, बल्कि यह कई वजहों से हो सकता है। कारण का पता लगाने के बाद पेल्विक पेन का आयुर्वेदिक इलाज (ayurvedic medicine for pelvic pain) संभव है।

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पेल्विक पेन के लक्षण (symptoms of pelvic pain)

पेल्विक पेन का आयुर्वेदिक इलाज - ayurvedic medicine for pelvic pain

पेल्विक में हल्का दर्द होना तो सामान्य है, लेकिन यदि यह दर्द ज्यादा या लगातार बना रहे तो इसे हल्के में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए। पेल्विक पेन के लक्षणों में शामिल है-

  • गंभीर और लगातार दर्द (Severe and steady pain)
  • दर्द जो आता है और चला जाता है
  • धीम-धीमे दर्द होना (Dull aching)
  • तेज दर्द और ऐंठन (Sharp pains or cramping)
  • पेल्विक के अंदर दबाव या भारीपन महसूस होना (Pressure or heaviness deep within your pelvis)

इसके अलावा आपको निम्न लक्षण भी महसूस हो सकते हैं-

  • संबंध बनाने के दौरान दर्द (Pain during intercourse)
  • मल या मूत्र त्याग के समय दर्द होना (Pain while having a bowel movement or urinating)
  • ज्यादा देर तक बैठने पर दर्द (Pain when you sit for long periods of time)

ज्यादा देर तक खड़े रहने पर भी दर्द बढ़ सकता है, लेकिन लेट जाने पर आपको आराम मिलती है।

पेल्विक पेन के कारण (Causes of pelvic pain)

क्रॉनिक पेल्विक पेन या पेडू में दर्द किसी एक वजह से नहीं होता है, इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। कई बार यह किसी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति के कारण हो सकता है जैसे एंडोमेट्रिओसिस (endometriosis) और इंटरस्टिटियल सिस्टिटिस (interstitial cystitis)। पेड़ू में दर्द के कुछ कारणों में शामिल है।

एंडोमेट्रिओसिस (Endometriosis)- इस स्थिति में आपके गर्भाशय की लाइनिंग के टिशू गर्भाशय (uterus) के बाहर विकसित होते हैं और यह मेन्स्ट्रुअल साइकल को प्रभावित करता है। क्योंकि इस स्थिति में ब्लड और टिशू वजाइना (vagina) के जरिए शरीर से बाहर नहीं निकल पाते है, इसलिए पेट में ही जमा होकर दर्दनाक सिस्ट का कारण बनते हैं जिससे पेल्विक पेन होने लगता है।

मस्कुलोस्केलेटल समस्याएं (musculoskeletal problems)- आपकी हड्डियों, जोड़ों और कनेक्टिंग टिशू (मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम) पर असर डालता है जैसे- फाइब्रोमायल्जिया (fibromyalgia), पेल्विक फ्लोर मसल्स टेंशन (pelvic floor muscle tension), प्यूबिक जॉइंट में सूजन ((pubic symphysis) या हर्निया के कारण पेड़ू में दर्द हो सकता है।

क्रॉनिक पेल्विक इन्फ्लामेट्री डिसीज (Chronic pelvic inflammatory disease)- यह तब होता है जब आप लंबे समय से किसी तरह के इंफेक्शन का शिकार है, खासतौर पर सेक्सुअली ट्रांसमिटेड (sexually transmitted), इसके कारण पेल्विक अंग प्रभावित होते हैं और दर्द होता है।

ओवेरियन रेमनैंट (Ovarian remnant)- सर्जरी की मदद से गर्भाशय (uterus), अंडाशय (ovaries) और फैलोपियन ट्यूब (fallopian tubes) निकालने के बाद जब कभी गलती से ओवरी का छोटा हिस्सा अंदर ही छूट जाता है तो इसकी वजह से दर्दनाक सिस्ट विकसित हो जाते हैं और पेड़ू में दर्द का कारण बनते हैं।

फाइब्रॉएड (Fibroids)- यह नॉन कैंसरस होते हैं, लेकिन फाइब्रॉएड के विकसित होने से पेट के निचले हिस्से में दबाव या भारीपन महसूस होता है। वैसे तो इनकी वजह से कभी तेज दर्द नहीं होता है, लेकिन कभी ब्लड सप्लाई सही तरीके से न होने की वजह से पेल्विक में तेज दर्द हो सकता है।

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (Irritable bowel syndrome)- सूजन, कब्ज या दस्त के लक्षण भी पेड़ू में दर्द के कारण हो सकते हैं।

दर्दनाक ब्लैडर सिंड्रोम (Painful bladder syndrome)- इस स्थिति में मूत्राशय (bladder) में बार-बार दर्द होता है और बार-बार पेशाब जाने की इच्छा होती है। जब ब्लैडर भर जाता है तो आपको पेल्विक पेन हो सकता है, लेकिन ब्लैडर खाली करने के बाद आपको इससे राहत मिल जाती है।

मनोवैज्ञानिक कारण (Psychological factors)- डिप्रेशन (Depression), लगातार तनाव में रहना (chronic stress) या शारीरिक या यौन शोषण का शिकार होने वालों में भी क्रॉनिक पेल्विक पेन का खतरा बढ़ जाता है।

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पेल्विक पेन का आयुर्वेदिक इलाज (ayurvedic medicine for pelvic pain)

पेल्विक पेन का आयुर्वेदिक इलाज - ayurvedic medicine for pelvic pain

आयुर्वेद के अनुसार, वात, पित्त दोष में असंतुलन, गलत जीवनशैली, गलत खानपान और तनाव (stress) पेल्विक पेन (pelvic pain) के लिए जिम्मेदार होते हैं। पेल्विक पेन का आयुर्वेदिक इलाज सिर्फ किसी एक दवा से नहीं किया जाता, बल्कि इसमें आहार यानी भोजन में बदलाव, जीवनशैली में बदलाव (lifestyle changes) के साथ ही कुछ आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

पेल्विक पेन के आयुर्वेदिक इलाज में मदगार थेरेपी में शामिल है-

बस्ती कर्म- इसमें औषधिय गुणों से भरपूर काढ़े या तेल का इस्तेमाल किया जाता है और इसे ही एनिमा की तरह लार्ज इंटेस्टाइन (large intestine) में पहुंचाया जाता है। आमतौर पर शाम को खाली पेट इस थेरेपी का उपयोग किया जाता है। इस आयुर्वेदिक थेरेपी से पेल्विक को सही तरीके से काम करने में मदद मिलती है और किसी भी तरह की समस्या कम हो जाती है।

स्वेदन क्रिया- यह पंचक्रम क्रिया का ही हिस्सा है और इसमें पूरा फोकस शरीर से पसीना निकालने पर होता है। यह शरीर की अकड़न और भारीपन को दूर करने के साथ ही हानिकारक पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। पीरियड्स के कारण होने वाले पेल्विक पेन से राहत दिलाने में यह क्रिया मददगार है।

अभ्यंग- इस क्रिया में पेल्विक यानी पेट के निचले हिस्से की आर्युवेदिक तेल से मालिश की जाती है। जिससे अकड़न और भारीपन से राहत मिलती है और मालिश से दर्द भी कम होता है। इस थेरेपी से शरीर में एंटीबॉडी और व्हाइट ब्लड सेल्स की संख्या बढ़ती है, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत करने का काम करती है। यह थेरेपी कई अन्य बीमारियों को दूर करने में भी मददगार साबित होती है।

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पेल्विक पेन के आयुर्वेदिक इलाज में मदगार औषधियों में शामिल है-

शिव गुटिका- इसे कई सामग्री मिलाकर बनाया जाता है जैसे पिप्पली, कालीमिर्च, सोंठ, इलायची, नागकेसर, तिल का तेल और चीनी आदि। पेल्विक इन्फ्लामेट्री डिसीज के कारण होने वाले पेल्विक पेन से राहत दिलाने में यह मददगार है।

दशमूल क्वाथ- यह एक प्रकार का काढा है, जो डिस्मेनोरिया (Dysmenorrhea) की वजह से होने वाले पेड़ू के दर्द (pelvic pain) से राहत दिलाने में मददगार है।

अभ्यारिष्ट- इस मिश्रण को अमलिका, गुड, हरीतकी, पिप्पली के साथ ही कई अन्य जड़ी-बूटियों को मिलाकर तैयार किया जाता है। यह डिस्मेनोरिया (Dysmenorrhea) और कब्ज (constipation) की वजह से होने वाले पेल्विक पेन से राहत दिलाने में मदद करता है।

चंद्रप्रभा वटी- इसे त्रिफला, भृंगराज जैसी कई जड़ी-बूटियों के मिश्रण से बनाया जाता है और यह खासतौर पर यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (urinary tract infection) के इलाज में मदद करता है, जो पेड़ू में दर्द का एक कारण हो सकता है।

इसके अलावा एंडोमेट्रिओसिस (Endometriosis) के कारण होने वाले पेल्विक पेन से राहत लिए आयुर्वेद में अशोक, शतावरी, एलोवेरा जैसी कई औषधियों के इस्तेमाल की सलाह दी गई है। जो सूजन और दर्द को कम करने में सहायक है। किसी भी तरह की दवा का सेवन करने से पहले आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

पेल्विक पेन के आयुर्वेदिक इलाज के दौरान आहार में बदलाव

आयुर्वेद में किसी भी तरह के उपचार में आहार (diet) बहुत महत्व होता है, इसलिए पेल्विक पेन के आयुर्वेदिक इलाज (ayurvedic treatment) के दौरान भी आहार में बदलवा की सलाह दी जाती है।

  • शरीर को मजबूत बनाने वाले आहार जैसे घी, दूध, नट्स, खजूर, कद्दू के बीज, केसर, शहद और एवोकाडो को भोजन में शामिल करें।
  • ताजे और ऑर्गेनिक फल व सब्जियां, साबूत अनाज, प्रोटीन से भरपूर चीजें (बीन्स, मटर), मीठे और रसदार फल (आम, पीच, प्लम, पेर), ब्रोकोली, मसाले (अजवायन, जीरा, हल्दी) आदि को डायट में शामि करने की सलाह दी जाती है।
  • जड़ वाली सब्जियां, अनाज, प्याज, लहसुन आदि को भी आहार में शामिल करना चाहिए, क्योंकि यह पोषण देने के साथ ही ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने में मदद करते हैं।
  • उड़द दाल को हल्दी, जीरा, धनिया पाउडर और सौंफ के साथ पकाकर खाना और केले को घी, दालचीनी व इलायची के साथ पकाकर खाने से फर्टिलिटी बढ़ती है
  • काला तिल और गुड़ विटामिन ई और आयरन का बेहतरीन स्रोत है, इसके सेवन से महिलाओं को फायदा होता है।
  • पालक, बीन्स, कद्दू, टमाटर, बीट आदि आयरन से भरपूर होते हैं जो फर्टिलिटी बढ़ाने में मददगार हैं।

और पढ़ें- ये आदतें पैदा कर सकती हैं ब्लैडर में समस्या, रखें जरूरी सावधानी

आहार के साथ ही विहार यानी लाइफस्टाइल में बदलाव की सलाह भी आयुर्वेद में दी जाती है। एक्सरसाइज (exercise) , योग (yoga) और मेडिटेशन (meditation) से पेल्विक, पेट और पीठ के निचले हिस्से की मांसपेशियों को मजबूत बनाने और फर्टिलिटी बढ़ाने में मदद मिलती है। पेल्विक मसल्स (pelvic muscles) को मजबूत करने के लिए आप उत्तानपादासन, सुप्त पवनमुक्तासन और चक्की चालासन जैसे कुछ आसन नियमित रूप से कर सकते हैं।

पेल्विक पेन की समस्या से राहत पाने के लिए जीवनशैली और डायट में बदलाव बहुत जरूरी है। यदि किसी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति के कारण पेड़ू में दर्द है तो आपको हेल्थ एक्सपर्ट्स से परामर्श करने की जरूरत है जो आपकी स्थिति को देखते हुए दवा या सर्जरी की सलाह दे सकता है। इसके अलावा पेल्विक पेन के आर्युवेदिक इलाज के लिए किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह लें।

 

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Toshini Rathod द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 24/05/2021 को
और Admin Writer द्वारा फैक्ट चेक्ड
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