अपने 19 सप्ताह के शिशु की देखभाल के लिए आपको किन जानकारियों की आवश्यकता है?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट November 26, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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विकास और व्यवहार

मेरे 19 सप्ताह के शिशु का विकास कैसा होना चाहिए?

अब आपका शिशु 19 सप्ताह का हो गया है। अभी तक शिशु आप से अपनी सभी जरूरतें रोकर के ही बता पाता होगा। इस अवस्था में शिशु के अंदर और भी कई भावनाएं पैदा होने लगती हैं। जब आप उन्हें अचानक डराने या हसाने की कोशिश करते हैं तो आपका शिशु इस पर अपनी प्रतिक्रिया देने लगा होगा।

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19 सप्ताह के शिशु निम्नलिखित चीजें कर सकते हैं, जैसे कि:

  • आपका शिशु बैठे हुए अपने शरीर को सीधा रख सकता है।
  • किसी भी एक दिशा की ओर घूम सकता है।
  • दूर से आनेवाली आवाजों पर ध्यान केंद्रित कर सकता है।
  • कुछ नए शब्द बोल सकता है

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19 सप्ताह के ज्यादातर शिशु पूरी रात सोन लगते हैं। अब आपको रात रात भर जागने की जरूरत नहीं होगी, लेकिन सभी बच्चे ऐसा नहीं करते। बच्चों को नियमित रूप से रात में सोने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए उनके बेड टाइम की दिनचार्या स्थापित करें। दिन की शुरुआत गुनगुने पानी से स्नान से करें। इसके बाद उन्हें कोई गाना या कहानी सुनाएं। कुछ देर बाद उनकी आंखे बंद होने लगेंगी। अपने बच्चे को खुद से पूरी तरह सुलाने की बजाय उसे पालने में लेटाने की आदत डालें। इससे वह सोने के लिए आप पर निर्भर नहीं रहेगा और खुद से सोना सिखेगा। दिन के समय आपके बच्चे को दो बार सोने की जरूरत होती है। एक सुबह के समय दूसरा दोपहर के लंच के बाद। बच्चे के थकने का इंतजार न करें। उन्हें पहले ही पालने में लेटा दें।

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मुझे 19 सप्ताह के शिशु के विकास के लिए क्या करना चाहिए?

यह वह समय है जब आपका शिशु भाषा और संवाद कौशल्य को तेजी से सीख रहा होता है। आप उससे बात करें। आपके शिशु को तरह तरह की आवाजें पसंद होती हैं। आप उन्हें विभिन्न प्रकार की अवाजे निकालने वाला ​खिलौना और झुनझुना भी दे सकती हैं।

स्वास्थ्य और सुरक्षा

मुझे अपने डॉक्टर से क्या बात करनी चाहिए?

शिशु की सेहत और स्वास्थ्य अनुसार आपका डॉक्टर निम्नि​लिखित चीजें कर सकते हैं।
अगर शिशु स्वस्थ है तो डॉक्टर उसे दूसरा टीका लगा सकते हैं। अगर पहले टीके से शिशु को कोई समस्या आई हो तो अपने डॉक्टर को जरूर बताएं।

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मुझे किन बातों की जानकारी होनी चाहिए?

यहां कुछ चीजे हैं जिनकी जानकारी आपको होनी चाहिए।

एक्यूट रेस्पिरेटरी वायरस:

एक्यूट रेस्पिरेटरी वायरस के संक्रमण के लक्षण लगभग सर्दी की तरह ही दिखाई देते हैं। यह वायरस आपको बीमार नहीं करते हैं, लेकिन इसके संक्रमण से कानों का संक्रमण, निमोनिया या दमा इत्यादि होने की संभावना बढ़ जाती है। दो वर्ष से कम आयु के शिशुओं में इसका खतरा ज्यादा होता है।

संक्रमण के शुरुआती दिनों में इसके लक्षण भले ही दिखाई न दें। लेकिन आगे चलकर यह संक्रमण भयावह रूप ले सकता है। आपके शिशु को सांस लेने में तकलीफ होने से लेकर छाती का फूलना, पेट की मांसपेशियों का कसना, तेजी से सांस लेना, होंठ और नाखूनों का सफ़ेद होना इत्यादि समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

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अगर आपका शिशु एक्यूट रेस्पिरेटरी वायरस का संक्रमण होता है तो आपको बिना समय बर्बाद किए अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर सबसे पहले तो आपके शिशु के लिए ब्रोन्कोडायलेटर्स लिखेंगे ताकि उसे सांस लेने की दिक्कत से राहत मिल सके। इस संक्रमण में एंटी-बायोटिक ज्यादा प्रभावी नहीं होती है। संक्रमण होने पर अपने शिशु को ज्यादा पानी पिलाएं और उसे धुएं से दूर रखें।

आप शिशु की नाक में ड्रॉप डाल सकती हैं ताकि उसे सांस लेने में दिक्कत न हो। शिशु को सुलाते समय उसका सिर ऊंचा रखें। बुखार की स्थिति में डॉक्टर से परामर्श के बाद आप शिशु को पेरासिटामोल दे सकती हैं। प्री-मेचुअर बेबी या फिर फेफड़ों की बीमारी से ग्रस्त शिशुओं को इस संक्रमण से बचने के लिए इसका टीका लगवाया जा सकता है।

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हार्ट मर्मर:

हार्ट मर्मर का अर्थ यह है कि जब आपके हृदय से रक्तप्रवाह होता है तब आपका दिल जोरों से आवाज करता है। दिल आपके शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग होता है। तो इससे जुड़ी कोई भी समस्या आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। लेकिन, अगर आपके शिशु में हार्ट मर्मर की समस्या है तो इसमें घबराने जैसी बात नहीं है।

यह आवाजें इसलिए भी आ सकती हैं क्योंकि आपके शिशु के हृदय अभी भी पूरी तरह से विकास नहीं हुआ है। इसके लिए आप अपने डॉक्टर से मिलकर सलाह ले सकती हैं।

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महत्वपूर्ण बातें

मुझे किन बातों का ख्याल रखना चाहिए?

शिशु की मालिश

शिशु की मजबूत मांसपेशियों के लिए उसकी मालिश नियमित रूप से जरूरी है। इसके अलावा, मालिश के बाद आपके शिशु को नींद भी अच्छी आएगी और उसका विकास भी बेहतर ढंग से होगा।

अगर आप शिशु की मालिश करना सीखना चाहती हैं तो बाजार में कई किताबें उपलब्ध हैं या फिर आप ऑनलाइन वीडियो देखकर भी इसे सीख सकती हैं। इसके अलावा आप निम्नलिखित स्टेप्स अपनाकर भी शिशु को मसाज कर सकती हैं।

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  • 19 सप्ताह के शिशु की मालिश के लिए अपनी सहू​लियत अनुसार एक समय निर्धारित करें।
  • एक सही जगह का चयन करें।
  • मसाज के लिए आयुर्वेदिक या बेबी ऑयल का इस्तेमाल करें
  • शिशु को हल्के हाथों का स्पर्श ज्यादा पसंद होता है। इसलिए हाथों में तेल लगाकर हल्के हाथों से शिशु के सिर, हाथ, पैर और पीठ इत्यादि की मालिश करें।
  • मालिश के दौरान हाथों को शिशु के शरीर पर गोल-गोल घुमाएं।
  • मालिश के दौरान शिशु से बात करती रहें।
  • मालिश करते समय शिशु की प्रतिक्रिया पर भी ध्यान दें, ताकि आप समझ पाएं कि आपका शिशु मालिश का आनंद उठा रहा है या नहीं।

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19 सप्ताह के शिशु की देखभाल में मदद करेंगे ये टिप्स

  • बच्चों को म्यूजिक बहुत पसंद होता है। 19 सप्ताह के शिशु के लिए आप कोई भी सॉन्ग चला सकते हैं। वो अपने आप ताली बजाएगा, हंसेगा और अपनी भाषा में गाना भी गाएगा। 19 सप्ताह के शिशु ठीक से बोल नहीं पाते, लेकिन वो बा बा, रा रा, ना ना करके बोलने की कोशिश करते हैं।
  • अपने बच्चे को खेलने के लिए सिम्पल, कलरफुल टॉयज दें। हर टॉय को उनके हाथ में देते हुए उसका नाम बताएं। इससे बेबी को नए शब्द पता चलेंगे।
  • अपने घर में बीजली की तारों, सॉकेट को कवर कर दें। घर में जहां टॉयलेट क्लीनर्स, शीशे के साफ करने वाला केमिकल आदि चीजों को एक अलमारी में लॉक करके रखें। आयरन, कर्लिंग आयरन, गर्म चाय का कप आदि चीजों को बच्चे की पहुंच से दूर रखें।

हमें उम्मीद है आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा। हैलो हेल्थ के इस आर्टिकल में 19 सप्ताह के शिशु की देखभाल से जुड़ी जानकारी दी गई है। यदि आपका इससे जुड़ा कोई प्रश्न है तो चाइल्ड स्पेश्लिस्ट से कंसल्ट करें।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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