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क्या आप जानते है शिशुओं के लिए हल्दी के फायदे कितने होते हैं? जाने विस्तार से!

    क्या आप जानते है शिशुओं के लिए हल्दी के फायदे कितने होते हैं? जाने विस्तार से!

    यदि हम बात करें घरेलू नुस्खे कि तो इसमें सबसे पहला नाम हल्दी का आता है। दादी-नानी के मुंह से अक्सर आपने हल्दी के फायदों के बारे में सुना होगा। हल्दी एक ऐसा औषधिय पौधा है जिसमें बीटा-कैरोटीन, विटामिन सी, करक्यूमिन,आयरन, नियासिन, पोटेशियम, कैल्शियम, फ्लेवोनोइड, फाइबर,जिंक और कई अन्य उच्च पोषण सहित लगभग तीन सौ प्राकृतिक घटक पाए जाते हैं। हल्दी में कई प्रकार के ऐसे गुण पाए जाते हैं। जो कई प्रकार की बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं। हल्दी का उपयोग सभी उम्र के लोगों में किया जा सकता है। शिशुओं के लिए हल्दी के फायदे निम्नलिखित तरह से किया जा सकता है। शिशुओं में इसका प्रयोग 6 महीने से 8 महीने के बाद किया जा सकता है। शुरूआत में इसका उपयोग बहुत कम मात्रा में की जानी चाहिए।

    हल्दी दुनिया में सबसे प्रसिद्ध सुपरफूड्स में से एक है। हजारों साल पहले, हमारे प्राचीन ऋषियों ने इसके उपचार गुणों की खोज की थी। आयुर्वेद के अनुसार, हल्दी सभी “दोषों” को संतुलित करती है, रक्त को साफ करती है। इसके साथ ही हल्दी बच्चों के शरीर से विषाक्त पदार्थों को शुद्ध करती है। पाचन को मजबूत करती है और तंत्रिका तंत्र को स्वस्थ रखती है और त्वचा को चमक प्रदान करती है। हल्दी जो एक अद्भुत मसाला है, जो पोषक तत्वों से भरपूर होती है और इसके स्वास्थ्य लाभ सभी आयु वर्गों को मिलती है। हल्दी का उपयोग अस्थमा से पीड़ित बच्चे के लिए और गठिया से पीड़ित बुजुर्ग मरीज के लिए भी मददगार है।

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    शिशुओं को हल्दी कब दें सकते हैं?

    हल्दी, एक मसाले या अन्य कई रूपों में, शिशुओं को दिया जा सकता है जैसे ही वे ठोस खाना शुरू करते हैं, जो छह महीने की उम्र के आसपास है। आप सब्जी प्यूरी, सूप, दाल (दाल), और सब्जी अनाज में हल्दी की थोड़ी मात्रा डाल सकते हैं। इस प्रकार आप उन्हें हल्दी देना शुरू कर सकते हैं। हालांकि, यदि आपका बच्चा किसी प्रकार की दवाएं ले रहा है, तो हल्दी या अन्य चीजों का प्रयोग करने से पहले बाल रोग विशेषज्ञ से बात करें क्योंकि हल्दी में दवा के संभावित प्रभाव हो सकते हैं।

    शिशुओं के लिए हल्दी के फायदे

    शिशुओं के लिए हल्दी के फायदे अनगिनत हैं। शिशुओं को हल्दी का उपयोग करने की सलाह तब दी जाती है, जब शिशु कुछ ठोस आहार का सेवन करने लगता है। जो इस प्रकार से हो सकते हैं-

    एंटी-इंफ्लामेटरी

    हल्दी एक एंटी-इंफ्लामेटरी और एंटी- एलर्जिक है, यही कारण है कि यह दमा के बच्चों के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इसमें 1 चम्मच हल्दी के साथ एक कप दूध उबालें और इसे अपने बच्चे को दिन में एक बार दें। यह बलगम की समस्या को हटाने का कार्य करता है। चेस्ट की जकड़न कम करता है। जिससे बच्चे को सांस लेने में आसानी होती है।

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    मार्निंग सिकनेस

    हल्दी में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जिससे आपका बच्चा बहुत एक्टिव महसूस करते हैं। इससे मार्निंग सिकनेस दूर होती है।

    इम्यून सिस्टम

    हल्दी में ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत बनाते हैं। । नियमित रूप से एक कप हल्दी वाला दूध देने से आपका बच्चा बार-बार बीमार नहीं होगा। यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने का कार्य करता है।

    नाक बंद होने के समस्या से राहत

    शिशुओं के लिए हल्दी के फायदे में नाक बंद होने के समस्या से राहत मिल सकती है। हल्दी के साथ थोड़ा-सा घी मिलाकर नाक की अंदरूनी परत पर लगाएं। ऐसा करने से नाक से साइनस साफ हो जाते हैं। जिससे आपकी नाक के सेंस एक्टिव हो जाते हैं।

    गैस्ट्रिक समस्या

    गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोग में हल्दी का नियमित सेवन पित्त एसिड उत्पादन को तेज करता है। जिससे शरीर में पाचन शक्ति तेज हो जाती है। यह गैस्ट्रिक समस्या जैसे अपच, भूख में कमी, आंतों की गैस, और आईबीएस (IBS-Inflammatory Bowel Syndrome) के इलाज के लिए बेहतर उपाय माना जाता है।

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    फंगल संक्रमण

    यह आम त्वचा संक्रमण जैसे चकत्ते, मुंहासे और खुजली के लिए, हल्दी बहुत फायदेमंद है। आप शहद और हल्दी को मिला सकते हैं और इस पेस्ट को संक्रमण वाली जगह पर लगा सकते हैं। बच्चों में फंगल संक्रमण का इलाज करने के लिए, एक चम्मच एलोवेरा के साथ एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाएं और संक्रमित क्षेत्र पर लगाएं। इससे आपकी त्वचा रोगमुक्त हो सकती है।

    हड्डी जुड़ने में मददगार

    अपने बच्चे को एक गिलास गुनगुने दूध में लगभग आधा चम्मच हल्दी मिलाकर प्रतिदिन देने से टूटी हुई हड्डी जुड़ने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। इसका असर आपको कुछ ही दिनों में दिखाई देने लगेगा।

    सर्दी जुकाम से राहत

    सर्दी जुकाम को कम करने के लिए हल्दी से बेहतर दवा कुछ नहीं है। हल्दी को गुड़ में मिलाकर रात में खाएं। सुबह तक बच्चों को सर्दी जुकाम से राहत महसूस होने लगेगी।शिशुओं के लिए हल्दी के फायदे अनेक प्रकार से मिलते हैं, लेकिन सर्दी जुकाम में यह बहुत उपयोगी माना जाता है।

    कंजक्टिवाइटिस की समस्या

    शिशुओं के लिए हल्दी के फायदे में कंजक्टिवाइटिस की समस्या से राहत देना शामिल है। इससे राहत के लिए, एक भाग हल्दी लें और साफ पानी में इसे मिला दें। इस घोल में एक साफ कपड़ा डुबोएं और आंखों को ढक दे। इससे आपके शिशु की आंखें स्वस्थ, स्पष्ट और दर्द मुक्त रहेंगी।

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    बच्चों में पायरिया

    बच्चों में अक्सर दांत की समस्या होती है। जिसमें पायरिया शामिल है। नमक में थोड़ा सरसों का तेल और हल्दी मिलाकर प्रतिदिन ब्रश करने से पायरिया और मुंह से आने वाली बदबू कम हो जाती है। इससे बच्चों के दांत को बहुत फायदा होता हैं।

    हृदय स्वास्थ्य

    करक्यूमिन के एंटीऑक्सिडेंट थ्रोम्बोटिक गुणों के कारण, हल्दी का उपयोग हृदय स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है। बहुत कम शिशुओं में हृदय संबंधी समस्या होती है। इसलिए इसके उपयोग की आवश्यकता कम होती है। लेकिन हृदय संबंधी रोगियों के लिए यह उपयोगी हो सकता है।

    पेट का कीड़ा

    बच्चों में हल्दी के सेवन से पेट के कीड़े से राहत मिल सकती है। हल्दी को शहद में मिलाकर बच्चे को देने से पेट के कीड़ों से छुटकारा मिल सकता है।

    शार्प माइंड

    कई शोध से पता चलता है कि जो लोग नियमित रूप से हल्दी का सेवन करते हैं उनका दिमाग बहुत तेज होता है। उनकी सोचने-समझने की शक्ति बहुत तेज होती है। हल्दी बच्चों के विकासशील मस्तिष्क को बढ़ावा देने में मदद कर सकती है।

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    बुखार

    शिशुओं के लिए हल्दी के फायदे बुखार से राहत दिलाने में भी मददगार होते हैं। यदि आपके बच्चे को ठंड या कंपकपी वाला बुखार हुआ है, तो आप एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी का पाउडर व एक चुटकी काली मिर्च मिलाकर अपने बच्चे को पिलाए। इससे बुखार जल्द ही उतर जाएगा।

    स्किनकेयर

    कई अध्ययनों से पता चलता हैं कि हल्दी के मौखिक और सामयिक उपयोग से त्वचा के स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है। हल्दी शिशओं के त्वचा को स्वस्थ बनाने में मदद करता है।

    कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल

    यदि आप लंबे समय तक हल्दी का नियमित रूप से उपयोग करते हैं, तो इससे कोलेस्ट्रॉल, एलडीएल और ट्राइग्लिसराइड्स की समस्या कम हो सकती है। हालांकि, यह ज्ञात नहीं है कि क्या ये गुण किसी बच्चे को फायदा पहुंचा सकते हैं?

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    बाहरी चोट में हल्दी का उपयोग

    यदि कहीं गिरने या किसी भी चीज से बच्चों को चोट लग जाती है, तो हल्दी को सरसों के तेल में मिलाकर लगाने से चोट जल्दी ठीक हो जाता है। इससे ब्लड क्लॉट नहीं बनता है। चोट के दर्द से भी जल्दी राहत मिल जाता है।

    दर्द कम करने में मददगार

    हल्दी का मौखिक और सामयिक उपयोग प्रभावी दर्द प्रबंधन के साथ जुड़ा हुआ है। पूराने समय में चिकित्सा में, इसका उपयोग गठिया और पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस दर्द का इलाज करने के लिए किया जाता है। करक्यूमिन, हल्दी के पीले रंग का बायोएक्टिव यौगिक है जो मसाले को प्राकृतिक दर्द निवारक गुण देता है। जिसे दर्द में कमी आती है। हल्दी का सेवन करने से शिशुओं को दर्द से राहत मिलने में मदद मिलती है।

    शिशुओं में हल्दी का उपयोग करते समय सावधानी

    आप जानते होंगे हर चीज के दो पहलू होते हैं। जहां इसके अनगिनत फायदे हो सकते हैं, तो वहीं इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं। जो इस प्रकार से हैं-

    • वैसे तो हल्दी के एलर्जी शायद ही देखें गए हो। लेकिन कुछ संवेदनशील बच्चों में हल्दी से एलर्जी हो सकती है। तो संवेदनशील बच्चों में इसके प्रय़ोग से पहले सतर्क रहना चाहिए। यदि आपके बच्चे में एलर्जी के लक्षण दिखाई देते है, तो हल्दी युक्त किसी भी उत्पाद का उपयोग करने से बचें।
    • किसी ट्रस्टेड ब्रांड के हल्दी पाउडर का उपयोग करें।
    • यदि संभव हो तो, होममेड पाउडर का उपयोग करे।
    • हल्दी का प्रयोग कम मात्रा में ही करें।
    • बिना चिकित्सक सलाह के किसी दवा या हर्बल के साथ हल्दी का उपयोग करने से बचे।
    • बच्चों में अधिक मात्रा में हल्दी से हेपेटोटॉक्सिसिटी हो सकती है, इस स्थिति में लिवर को नुकसान पहुंचता है।
    • बच्चों की आंख के अंदर हल्दी का उपयोग न करें।

    उपर दी गई जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। इसलिए किसी भी घरेलू उपाय का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर करें।

    हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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    shalu द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 22/08/2020 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड