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Climate Change: क्लाइमेट चेंज का बच्चों पर असर को कैसे करें बेअसर?

Climate Change: क्लाइमेट चेंज का बच्चों पर असर को कैसे करें बेअसर?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), यूनिसेफ (UNICEF) और मेडिकल जर्नल द लांसेट (The Lancet) द्वारा पब्लिश्ड एक रिपोर्ट ‘अ फ्यूचर फॉर द वर्ल्ड्स चिल्ड्रन’ में ये बात सामने आई है कि है दुनिया में कोई ऐसा देश नहीं है, जो बच्चों की सेहत, उनके आसपास के वातावरण और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रहा हो। नहीं समझें! दरअसल ये रिपोर्ट जलवायु परिवर्तन से पैदा होने वाले खतरों की ओर ध्यान आकर्षित करती है। इस रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन (Climate change) समुद्र के जल स्तर में बढ़ना, मौसम में हो रहे बदलाव, खाने-पीने का संकट, अत्यधिक गर्मी और बढ़ते संक्रामक रोग की वजह बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ता नकारात्मक प्रभाव या यूं कहें कि क्लाइमेट चेंज का बच्चों पर असर (Climate change kids health) बेहद चिंता का विषय बनता जा रहा है।

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क्लाइमेट चेंज का बच्चों पर असर कैसे पड़ता है?

क्लाइमेट चेंज का बच्चों पर असर (Climate change kids health)

बच्चों की सेहत की बात आती है, तो सबसे बड़ी समस्या सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में है। पूरे विश्व में कुपोषण (Malnutrition) सबसे बड़ी समस्या है, जिसके पीछे गरीबी (Poverty) और स्वच्छता में कमी (Poor sanitation) अहम कारण माने जाते हैं। हालांकि संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के अनुसार क्लाइमेट चेंज का बच्चों पर असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है और बच्चों में कुपोषण से ज्यादा क्लाइमेट चेंज (Climate change) की भूमिका हो सकती है। क्लाइमेट चेंज की वजह से कार्बन प्रदूषण (Carbon pollution) की समस्या बढ़ती जा रही है, जिसका असर बढ़ता जा रहा है और फल, सब्जियां या खेतों में उपजने वाले खाद्य पदार्थों में पोषक तत्वों में कमी होते जा रही है। बच्चे सेंसेटिव होते हैं और उनपर क्लाइमेट चेंज का बच्चों पर असर (Climate change kids health) इसी वजह से ज्यादा देखा जाता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (American Academy of Pediatrics) के अनुसार क्लाइमेट चेंज का बच्चों पर असर निम्नलिखित तरह से करता है। जैसे :

  • गर्म मौसम या हीट वेव (Wave) सबसे ज्यादा बच्चों एवं नवजात शिशुओं पर पड़ता है।
  • अत्यधिक गर्मी, बाढ़, तूफान या जंगलों में आग लगने जैसी घटनाओं पर हम ध्यान ना दें, लेकिन ये सभी घटनाएं बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर नेगेटिव इम्पैक्ट डालता है। अगर ऐसी समस्या ज्यादा हो, तो बच्चों में मेंटल हेल्थ (Mental health) से जुड़ी परेशानी शुरू हो सकती है।
  • क्लाइमेट चेंज का बच्चों पर असर पड़ना तब और तय माना जाता है, जब प्रदूषण की समस्या बढ़ जाए। ऐसे में बच्चों में अस्थमा (Asthma) जैसे सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
  • क्लाइमेट चेंज का बच्चों पर असर गंभीर बीमारियों के रूप में भी देखा जा सकता है। रिसर्च रिपोर्ट्स के अनुसार लाइम डिजीज (Lyme Disease), डायरिया (Diarrhea) एवं पैरासाइट्स (Parasites) के खतरे को बढ़ा देता है, जो वयस्कों की तुलना में बच्चों के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है।
  • क्लाइमेट चेंज होने की वजह से खाद्य पदार्थों के पोषक तत्वों में भी कमी आती है।

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क्लाइमेट चेंज होने की वजह से कौन-कौन सी परेशानी बढ़ सकती है?

क्लाइमेट चेंज का बच्चों पर असर (Climate change kids health)

वक्त रहते अगर जलवायु परिवर्तन पर ध्यान ना दिया जाए तो बच्चों को निम्नलिखित स्थितियों में रहना पड़ सकता है। जैसे:

  • प्रदूषित वातावरण में
  • धरती पर जगह की कमी
  • समुद्री तल का बढ़ना
  • खाद्य पदार्थों की कमी
  • एक जगह से दूसरे जगह स्थान्तरण करना

भविष्य में इन परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।

और पढ़ें : विटामिन और सप्लिमेंट्स सिर्फ बड़ों को नहीं बच्चों के लिए भी है जरूरी, लेकिन कैसे करें पूर्ति?

क्लाइमेट चेंज का बच्चों पर असर ना हो, इसके लिए क्या हैं उपाय?

क्लाइमेट चेंज का बच्चों पर असर (Climate change kids health) ना हो, इसलिए निम्नलिखित स्टेप उठाए जा सकते हैं। जैसे:

  1. फैमिली, कम्यूनिटी एवं सोसायटी द्वारा कम से कम कचरा (Waste) फैलना
  2. कोयला (Coal), तेल (Oil) एवं गैस (Gas) का इस्तेमाल ना कर विंड एनर्जी (Wind Energy) और सोलर एनर्जी (Solar Energy) का इस्तेमाल करना।

इन दो बातों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

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क्लाइमेट चेंज का बच्चों पर असर को बेअसर करने के लिए क्या करें?

क्लाइमेट चेंज का बच्चों पर असर (Climate change kids health)

क्लाइमेट चेंज का बच्चों पर असर (Climate change kids health) ना हो, इसलिए निम्नलिखित टिप्स फॉलो करें। जैसे:

1. सामान्य शारीरिक परेशानियों पर ध्यान दें (Immediate Attention to Common Illness)

अगर बच्चे को सर्दी-जुकाम की समस्या हो, तो डॉक्टर से कंसल्ट करें। कभी-कभी सर्दी-जुकाम के घरेलू नुस्खों को हम अपना लेते हैं, लेकिन ज्यादा वक्त तक इनपर निर्भर ना रहें।

2. धूप में बच्चों को जाने ना दें (Limited Exposure to the Sun)

क्लाइमेट चेंज का बच्चों पर असर ना हो, इसलिए बच्चों को धूप में बाहर जाने ना दें। सूर्य की अल्ट्रा वॉयलेट रे बच्चों की त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। हालांकि विटामिन-डी (Vitamin-D) की पूर्ति के लिए सुबह की किरणें फायदेमंद हो सकते हैं, लेकिन 9 या 10 बजे के बाद धूप तेज होने लगती है और इससे स्किन को फायदे की जगह नुकसान पहुंचता है।

और पढ़ें : स्कूल के बच्चों का स्वास्थ्य कैसा होना चाहिए, जानिए उनके लिए सही आहार और देखभाल के तरीके के बारे में

3. तरल पदर्थों का सेवन ज्यादा करवाएं (Increase Fluids intake)

बच्चों को पानी एवं अन्य तरल पदार्थों का सेवन ज्यादा से ज्यादा करवाएं। इससे बच्चे को डिहाइड्रेशन (Dehydration) की समस्या नहीं होगी और बच्चा स्वस्थ्य रहेगा। इससे क्लाइमेट चेंज का बच्चों पर असर नहीं हो सकता है। दूषित एवं पैक्ड जूस (Packed juice) बच्चों को ना दें और खुद भी इनसे दूरी बनायें।

4. हाइजीनक इन्वायरमेंट (Hygienic Environment)

बच्चों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण दोनों ही बेहद आवश्यक हैं। शुद्ध वातावरण बच्चों के विकास के साथ-साथ उनके रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाने में मददगार होते हैं। इसलिए घर एवं आसपास के इन्वायरमेंट हाइजीन का ध्यान रखें।

5. बच्चों के डायट का ख्याल रखें (Healthy Diet)

क्लाइमेट चेंज का बच्चों पर असर (Climate change kids health) ना हो, इसलिए बच्चों के डायट का ध्यान रखें। 6 महीने से बड़े बच्चों को मां के दूध के साथ-साथ बेबी सीरियल्स भी दिया जा सकता है वहीं बढ़ते बच्चों को पौष्टिक आहार जैसे दाल, चावल, हरी सब्जियां, ताजे फल, डेयरी प्रोडक्ट्स, नट्स एवं नॉन वेजिटेरियन बच्चों को अंडा, मछली, मीट एवं चिकन दिया जा सकता है। आप बच्चों को फ्रेश एवं ऑर्गेनिक फूड खाने की आदत डालें। फास्ट फूड या जंक फूड (junk food) बच्चों को ना दें

और पढ़ें : पेरेंटिंग के बारे में क्या जानते हैं आप? जानिए अपने बच्चों की परवरिश का सही तरीका

6. बच्चों एजुकेट करना ना भूलें (Providing Basic Education to Children)

अगर आप ये सोच रहें हैं कि क्लाइमेट चेंज का बच्चों पर असर में चाइल्ड एजुकेशन से क्या लेना देना है, तो चलिए इससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी आपसे शेयर करते हैं। दरअसल यहां चाइल्ड एजुकेशन का मतलब है, उन्हें पढ़ाई-लिखाई के अलावा कुछ जरूरी बातों को बताना और उनके महत्व को समझना। जैसे खाने के पहले हाथों को अच्छी तरह से क्लीन करना, नाखूनों को छोटा रखना, ठीक तरह से बैठकर खाना खाना, फ्रूट्स खाने के पहले उन्हें पानी से धो लेना, किसी भी खाने की चीजों को नीचे गिरने पर उठाकर ना खाना या किसी का झूठा ना खाना। ये बातें बहुत साधारण हैं, लेकिन बच्चों को जानना बेहद जरूरी है। ऐसा करने से वो खुद को इंफेक्शन (Infection) की समस्या से बचा जा सकते हैं। अब देखिये ना कोरोना वायरस (Coronavirus) कितना भी गंभीर क्यों ना हो, लेकिन इसका इलाज तो हैंड वॉश (Hand wash) और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे सामान्य सी बातों में छिपा है।

इन 6 बातों या टिप्स को फॉलो कर क्लाइमेट चेंज का बच्चों पर असर (Climate change kids health) होने से बचाया जा सकता है।

अगर आप क्लाइमेट चेंज और क्लाइमेट चेंज का बच्चों पर पड़ने वाले असर (Climate change kids health) से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं, तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।

बच्चों को स्वस्थ्य रहने के लिए दूध का सेवन जरूर करवाएं। जानिए कैसे बच्चों को मिलता है दूध से संपूर्ण पोषण नीचे दिए इस क्विज में

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सूत्र

Children are the face of climate change: Knowing and responding to health risks of climate change/https://www.unicef-irc.org/article/931-children-are-the-face-of-climate-change-knowing-and-responding-to-health-risks-of.html/Accessed on 01/04/2021

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लेखक की तस्वीर
Dr. Pranali Patil के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Nidhi Sinha द्वारा लिखित
अपडेटेड 2 weeks ago
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