पेट के लिए लाभदायक सेतुबंधासन करने का आसान तरीका, फायदे और सावधानियों के बारे में जानें

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट जुलाई 22, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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सेतुबंधासन एक ऐसा आसन है जिसमें शरीर को U की आकृति में मोड़ना पड़ता है। इसमें शरीर एक पुल यानी ब्रिज की तरह लगता है। इसी कारण इस आसन का नाम सेतुबंधासन है। संस्कृत में सेतु का अर्थ होता है ‘पुल’, बांध का अर्थ होता है ‘बांधना’ और आसन का अर्थ है ‘पोजीशन’। यह आसन पीठ के निचले हिस्से में दर्द और टखने, कूल्हे, पीठ, जांघों और कंधे की अकड़ को दूर करने में के लिए प्रभावी है। सेतुबंधासन को खाली पेट करना चाहिए। इसके साथ ही इसे सुबह के समय इसे करना लाभदायक होता है। अगर आप इसे शाम को करने वाले हैं तो ध्यान रहे कि इसे खाना खाने से 5 या 6 घंटे पहले करें। जानिए सेतुबंधासन को कैसे किया जाता है और क्या हैं इसके फायदे।

सेतुबंधासन को करने का तरीका

सेतुबंधासन को करने का तरीका
सेतुबंधासन
  • सेतुबंधासन को करने के लिए सबसे पहले किसी शांत जगह पर मैट और दरी बिछा लें।
  • अब इस मैट पर पीठ के बल लेट जाएं।
  • अब अपने घुटनों को मोड़ें और अपने पैरों को जमीन पर एक दूसरे से कुछ दूरी पर रखें। यानी आपके पैर आपके पेल्विस (श्रोणि) से 10-12 इंच दूर होने चाहिए। लेकिन, घुटनों और टखनों के साथ यह एक सीधी रेखा में होने चाहिए।

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  • अपनी बाजुओं को अपने शरीर के अगल-बगल रखें और आपकी हथेलियां नीचे की तरफ होनी चाहिए।
  • अब सांस को अंदर की और खींचे और अपनी कमर के निचले, बीच वाले और ऊपरी हिस्से को धीरे-धीरे ऊपर उठायें। अपने कंधों को इस दौरान आराम से मोड़ें। ठोड़ी को नीचे लाए बिना छाती को ठोड़ी से स्पर्श करें
  • अपने शरीर के वजन को कंधों, बाजुओं और पैरों के सहारे संतुलित करें। अपने कूल्हों और शरीर को इस पोज में लाने की कोशिश करें। आपकी दोनों जांघें एक-दूसरे के और जमीन के समानांतर होनी चाहिए।
  • यदि आप चाहें और करने में सक्षम हों तो आप उंगलियों आपस में पकड़ सकते हैं और धड़ को थोड़ा और ऊपर उठाने के लिए हाथों से फर्श का सहारा ले सकते हैं। या आप अपनी हथेलियों से अपनी पीठ को सहारा दे सकते हैं
  • इस दौरान आराम से सांस लेते रहें।
  • इस स्थिति में कुछ देर रहें और जब इस पोज से बाहर निकलें तो सांस को बाहर छोड़ें।  
  • धीरे धीरे इस आसन से बाहर आएं।
  • फिर से सेतुबंधासन को दोहराएं।

सेतुबंधासन को करने के टिप्स 

  • अगर आप पहली बार इस आसान को कर रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि आप खुद अधिक स्ट्रेच न करें। क्योंकि. इससे आपकी गर्दन को नुकसान हो सकता है। 
  • यह भी सुनिश्चित करें कि जब आप पुल की मुद्रा में हों तो आपके कुल्हें दृढ़ हों। 
  • जब आप इस मुद्रा को लेकर जागरूक नहीं होंगे, तो सेतुबंधासन  को करने का आपका उद्देश्य व्यर्थ हो सकता है क्योंकि इससे पीठ के निचले हिस्से या पीठ में कोई खिंचाव नहीं होगा।

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सेतुबंधासन को करने के फायदे

सेतुबंधासन को करने के कई फायदे हैं, उनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

पाचन शक्ति को बढ़ाएं 

सेतुबंधासन पाचन शक्ति को बढ़ाने में मददगार है। जिससे पेट संबंधी समस्याएं जैसे कब्ज, गैस, अपच आदि से छुटकारा मिलता है। यानी पेट के लिए यह व्यायाम बेहद लाभदायक है।

तनाव से मुक्ति 

योग शारीरिक और मानसिक दोनों समस्याओं को दूर करने में प्रभावी है। वैसे ही यह योगासन भी तनाव, हलका डिप्रेशन और चिंता आदि से छुटकारा दिलाने में सहायक है। इसे करने से मन शांत होता है और दिमाग में सकारात्मक विचार आते हैं

पीठ की मांसपेशियां हों मजबूत

पीठ के लिए भी यह आसन बेहद लाभदायक है। इसे करने से छाती, गर्दन, रीढ़ की हड्डी और कूल्हे सभी स्ट्रेच होते हैं। जिससे पीठ, हैमस्ट्रिंग आदि की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।

रक्तचाप रहे संतुलित

सेतुबंधासन को करने से ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है। जिससे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से राहत मिलती है। इसके साथ ही अस्थमा के रोगियों के लिए भी यह योगासन फायदेमंद है।

लचीलापन बढ़े

शरीर के लचीलेपन को बढ़ाने और शरीर के पूरे प्रदर्शन के लिए यह आसान प्रभावी है। इस आसन को करने से फेफड़े पूरी तरह से खुल जाते हैं जिससे थायराइड की समस्या से भी छुटकारा मिलता है

 महिलाओं के लिए लाभदायक

रजोनिवृत्ति और मासिक धर्म के दर्द के लक्षणों से राहत देने में मदद करता है। यानी, महिलाओं के लिए भी यह आसन करना बेहद फायदेमंद है।

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दर्द से छुटकारा 

अगर आपको पीठ दर्द या सिरदर्द रहती है। तो सेतुबंधासन करने से आपको लाभ हो सकता है। क्योंकि सिर दर्द और पीठ दर्द को कम करने में यह योगासन मददगार है।

सेतुबंधासन को करते हुए बरते कुछ सावधानियां

  • इस बात का ध्यान रखें कि इस आसन को खाली पेट ही करें।
  • अगर आपकी पीठ में चोट लगी है तो इस आसन को करने से बचे।
  • अगर आप सेतुबंधासन कर रहे हैं तो अपने सिर और दाएं या बाएं न घुमाएं।
  • अगर आपके घुटनों में दर्द है तो इस योगासन को करते हुए सावधानी बरतें।
  • अगर आप पहली बार सेतुबंधासन को कर रहे हैं तो इसे करते हुए आपके लिए मार्गदर्शन लेना आवश्यक है।

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चेतावनी 

इन स्थितियों में इस आसन को न करें: 

  • जिन लोगों की गर्दन में चोट है, उन्हें इस आसन को नहीं करना चाहिए या फिर इसे करने से पहले डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ की सलाह लें।
  • गर्भवती महिलाएं इसे कर सकती हैं लेकिन पूरी तरह से नहीं । अगर आप गर्भवती हैं और इस आसन को कर रही हैं, तो आपको किसी योग एक्सपर्ट और डॉक्टर के मार्गदर्शन की जरूरत है। 
  • पीठ में दर्द होने की स्थिति में भी इस आसन को न करें। 
  • गंभीर माइग्रेन वाले लोगों को सेतुबंधासन को करने से बचना चाहिए।
  • जिनको पेट में समस्या रहती है या अगर आपको आंत संबंधी समस्या है, आप भी इस आसन को न करें।  क्योंकि, इस आसन को करने से पेट और आंत पर दबाव पड़ता है।
  • सर्वाइकल स्पाइन की समस्या, हाइपरएक्टिव थायराइड, हाई ब्लड प्रेशर की स्थिति में इस आसन को करते हुए अपने सिर को पीछे की तरफ न करें।

किसी भी योगासन को करने से पहले डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ की सलाह आवश्यक है। अन्यथा आपको योग के लाभ नहीं बल्कि नुकसान हो सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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