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अच्छी बॉडी के लिए स्टेरॉइड्स का इस्तेमाल करने का है प्लान? तो जान लें इसके साइड इफेक्ट्स

अच्छी बॉडी के लिए स्टेरॉइड्स का इस्तेमाल करने का है प्लान? तो जान लें इसके साइड इफेक्ट्स

अगर आप फिटनेस या स्पोर्ट्स फील्ड से जुड़े हैं या कभी जुड़े रहे हैं, तो स्टेरॉइड का नाम आपके लिए कोई नया नहीं होगा। कभी साथ वाले लोगों या जिम कोच के द्वारा आपको इसका इस्तेमाल करने की सलाह जरूर मिली होगी। इसके साथ यह भी जरूर बताया होगा कि इसे लेने से बॉडी और मसल्स दमदार बन जाती है और आपका स्टेमिना भी बढ़ जाता है। कुछ लोगों ने हाल ही में स्टेरॉइड्स के बारे में जाना होगा, लेकिन इसकी अधूरी जानकारी खतरनाक हो सकती है। इसलिए अगर आपने भी स्टेरॉइड लेने का मन बना लिया है या किसी ने आपको ऐसा करने की सलाह दी है, तो सबसे पहले इस आर्टिकल में स्टेरॉइड्स और इसके साइड इफेक्ट के बारे में अच्छी तरह जान लें।

स्टेरॉइड (Steroid) क्या होते हैं?

Steroids- स्टेरॉइड

स्टेरॉइड के कई मायने निकल सकते हैं। कुछ इसे केमिकल कहते हैं, तो कुछ इसे हॉर्मोन कहते हैं। दरअसल स्टेरॉइड एक तरह का केमिकल होता है, जो आपके शरीर में मौजूद जरूरी हॉर्मोन को प्रभावित करते हैं। हॉर्मोन आपके शारीरिक अंगों, टिश्यू और सेल्स की कार्यक्षमता के लिए जिम्मेदार होते हैं। इसके अलावा, प्रेग्नेंट होने व सबसे जरूरी आपके व्यक्तिगत विकास के लिए भी हॉर्मोन सबसे अहम भूमिका अदा करते हैं। इन्हीं हॉर्मोन को बढ़ाने या घटाने के लिए स्टेरॉइड्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो कि मैन-मेड मेडिसिन होती हैं। स्टेरॉइड दो प्रकार के होते हैं, पहला कॉर्टिकोस्टेरॉइड (Corticosteroids) और दूसरा एनाबोलिक एंड्रोजेनिक स्टेरॉइड (Anabolic Androgenic Steroids), जिसे एनाबोलिक भी कहा जाता है।

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स्टेरॉइड कितने प्रकार के होते हैं और वह कैसे कार्य करते हैं?

जैसा कि हमने ऊपर बताया कि स्टेरॉइड दो प्रकार के होते हैं, जैसे- कॉर्टिकोस्टेरॉइड और एनाबोलिक स्टेरॉइड। अब जानें कि यह किस तरह से आपके शरीर को प्रभावित करते हैं।

कॉर्टिकोस्टेरॉइड क्या है?

कॉर्टिकोस्टेरॉइड एक तरह की दवा है, जो आपके शरीर में मौजूद सूजन के खिलाफ बहुत जल्द असर करती है। यह आपकी एड्रनल ग्लैंड द्वारा उत्पादित किए जाने वाले कॉर्टिसोल हॉर्मोन की तरह कार्य करती है। कॉर्टिसोल हॉर्मोन आपके इम्यून सिस्टम द्वारा सूजन पैदा करने और बढ़ाने वाले तत्वों के उत्पादन को रोकता है। कॉर्टिकोस्टेरॉइड को अस्थमा, क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसॉर्डर यानी सीओपीडी, रैशेज या एक्जिमा जैसे चर्मरोग, एलर्जी, रयूमेटाइड आर्थराइटिस (Rheumatoid arthritis), मल्टीपल स्क्लेरोसिस (Multiple sclerosis) और लूपस व अन्य ऑटोइम्यून डिसऑर्डर के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है। कॉर्टिकोस्टेरॉइड को आप डॉक्टरी सलाह के अनुसार ही सेवन कर सकते हैं। हालांकि यह पिल व लिक्विड, इनहेलर, शॉट, नेजल स्प्रे, स्किन क्रीम और इंजेक्शन के रूप में उपलब्ध होता है।

एनाबोलिक स्टेरॉइड क्या होते हैं?

एनाबोलिक स्टेरॉइड टेस्टोस्टेरोन के मैन-मेड वर्जन होते हैं। टेस्टोस्टेरोन एक मेल हॉर्मोन है, जो कि पुरुषों के शारीरिक विकास और अन्य शारीरिक क्रियाओं के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। इसके अलावा, मस्कुलर बॉडी बनाने के लिए और मसल्स बढ़ाने के लिए भी इसकी जरूरत होती है। लड़कों में यौवनावस्था जिसे प्यूबर्टी भी कहते हैं, आने में देर होने की स्थिति में भी एनाबोलिक स्टेरॉइड का उपयोग केवल डॉक्टरी सलाह पर किया जा सकता है। इसके अलावा पुरुषों में लो टेस्टोस्टेरोन और कैंसर, एड्स या अन्य हेल्थ कंडीशन की वजह से मसल्स लॉस होने पर भी डॉक्टर एनाबोलिक स्टेरॉइड्स की सलाह दे सकता है। इनका सीधा सेवन किया जा सकता है या फिर आप इन्हें इंजेक्शन के रूप में भी ले सकते हैं।

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लीगल स्टेरॉइड क्या होते हैं?

लीगल (कानूनी) स्टेरॉइड दरअसल एनाबोलिक स्टेरॉइड ही होते हैं, जो कि गैर-कानूनी कैटेगरी में नहीं आते हैं। इन्हें मल्टी इंग्रीडिएंट प्री-वर्कआउट सप्लीमेंट (Multi Ingredient pre-workout supplements; MIPS) भी कहा जाता है। लीगल स्टेरॉइड में मुख्य रूप से क्रिएटिन (Creatine), मैट्रिक्स मेटालोप्रोटीनस (Matrix metalloproteinase) और डायमिथाइल-एमिलामाइन (Dimethylamylamine) मिलते हैं।

सबसे ज्यादा फिटनेस और स्पोर्ट्स की फील्ड में क्यों होता है इस्तेमाल?

स्टेरॉइड्स बॉडी बिल्डिंग के लिए

स्टेरॉइड्स में सबसे ज्यादा एनाबोलिक स्टेरॉइड्स का इस्तेमाल होता है, वह भी फिटनेस और स्पोर्ट्स की फील्ड में लोग सबसे ज्यादा इसका उपयोग करते हैं। दरअसल स्टेरॉइड्स लेने से शरीर का स्टेमिना और ताकत दोनों को बढ़ाया जा सकता है और आपको सामान्य पोषण के द्वारा जिन परिणामों को मिलने में समय लगता है, उन्हें स्टेरॉइड की सहायता से बहुत जल्दी पाया जा सकता है। एनाबोलिक स्टेरॉइड का उपयोग करने से खिलाड़ी या एथलीट अपना मसल मास बढ़ाकर शारीरिक तेजी और ताकत को बढ़ाते हैं। इसके अलावा निम्नलिखित फायदों के लिए फिटनेस और स्पोर्ट्स फील्ड में स्टेरॉइड का इस्तेमाल किया जाता है। जैसे-

  • शरीर की बोन मिनरल डेंसिटी को बढ़ाने के लिए
  • शरीर में रेड ब्लड सेल्स का उत्पादन बढ़ाने के लिए
  • बॉडी फेट पर्सेंटेज घटाने के लिए
  • प्रोटीन सिंथेसिस की प्रक्रिया को तेज करके मसल्स टिश्यू में बढ़ोतरी
  • मसल्स स्ट्रेंथ और ताकत को बढ़ाने के लिए
  • वर्कआउट या चोट के बाद जल्दी रिकवर करने के लिए
  • मसल्स की एंडूरेंस बढ़ाने के लिए, आदि

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स्टेरॉइड्स के इस्तेमाल से होने वाले साइड इफेक्ट्स क्या हैं?

स्टेरॉइड्स का उपयोग करने से मिलने वाले संभावित फायदों के साथ-साथ आपको इसके इस्तेमाल से साइड इफेक्ट्स का भी सामना करना पड़ सकता है। जो कि आपके द्वारा इस्तेमाल किए गए स्टेरॉइड के ऊपर निर्भर करते हैं। इसके दूसरी तरफ, एनाबोलिक स्टेरॉइड्स से मिलने वाले साइड इफेक्ट का खतरा ज्यादा होता है, क्योंकि कॉर्टिकोस्टेरॉइड की सलाह अधिकतर डॉक्टरों द्वारा दी जाती है और वह उसके आशंकित दुष्परिणामों पर बराबर नजर बनाए रखते हैं और जरूरत पढ़ने पर उसकी डोज को संयमित भी कर सकते हैं।

लेकिन एनाबोलिक स्टेरॉइड्स का उपयोग अधिकतर डॉक्टरों की देखरेख में नहीं किया जाता। जिससे इससे मिलने वाले साइड इफेक्ट्स का खतरा ज्यादा हो जाता है। आइए हम स्टेरॉइड्स का उपयोग करने से मिलने वाले साइड इफेक्ट्स के बारे में जानते हैं।

स्टेरॉइड्स का उपयोग और संभावित साइड इफेक्ट्स

  1. एनाबोलिक स्टेरॉइड को रेसिस्टेंस एक्सरसाइझ के साथ उपयोग करने पर ब्लड प्रेशर और दिल के लेफ्ट वेंट्रिक्ल का आकार बढ़ने की संभावना होती है। इसके कारण आपको दिल संबंधित बीमारियों के बढ़ने की आशंका होती है, जो कि जानलेवा भी साबित हो सकती है।
  2. एनाबोलिक स्टेरॉइड पर निर्भर होने से बॉडी इमेज डिसऑर्डर का कारण बन सकता है, जो कि एक मेंटल डिसऑर्डर भी होता है।
  3. स्टेरॉइड का उपयोग करने से मेल टीनएजर और वयस्कों में आक्रामकता और इंपल्सिविटी बढ़ सकती है।
  4. स्टेरॉइड का ओरल सेवन करने से आपके शरीर में लिवर डिस्फंक्शन होने का खतरा बढ़ता है।
  5. स्टेरॉइड का उपयोग करने से गाइनेकोमास्टिया (Gynecomastia) का खतरा हो सकता है। जिसमें हॉर्मोन असंतुलन होने की वजह से मेल ब्रेस्ट टिश्यू में सूजन हो सकती है।
  6. स्टेरॉइड लेने से टेस्टोस्टेरोन का स्तर प्रभावित होता है, जो कि शरीर में उसके नेचुरल उत्पादन को कम कर सकता है।
  7. स्टेरॉइड के उपयोग से स्पर्म प्रोडक्शन कम हो सकता है, जिससे पुरुषों में बांझपन का खतरा हो सकता है।
  8. इसके अलावा, इसके इस्तेमाल से मेल पैटर्न बाल्डनेस भी हो सकता है।

महिलाओं में स्टेरॉइड के साइड इफेक्ट्स

  1. स्टेरॉइड का इस्तेमाल करने से महिलाओं की आवाज भारी हो सकती है।
  2. महिलाओं के चेहरे पर फेशियल हेयर की ग्रोथ हो सकती है।
  3. इसके अलावा, स्टेरॉइड्स का उपोयग महिलाओं के मासिक धर्म को भी अनियमित कर सकता है।
  4. महिलाओं के स्तनों का आकार भी इसकी वजह से प्रभावित हो सकता हैऔर

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स्टेरॉइड के इस्तेमाल से होने वाले अन्य साइड इफेक्ट्स

ऊपर बताए गए साइड इफेक्ट्स के अलावा आपको निम्न दुष्प्रभावों का भी सामना करना पड़ सकता है।

  • सामान्य से ज्यादा वजन बढ़ना
  • चेहरा पर सूजन आना
  • जी मिचलाना
  • मूड स्विंग्स होना
  • नींद आने में परेशानी महसूस होना
  • मुंहासे आना
  • ब्लड शुगर का स्तर बढ़ना
  • कमजोर इम्यून सिस्टम
  • हड्डियां कमजोर होना
  • बच्चों के विकास की गति को कम करना
  • मसल्स की कमजोरी
  • डायबिटीज की समस्या
  • बैड कॉलेस्ट्रॉल में बढ़ोतरी
  • स्ट्रोक आने की संभावना
  • पेट में दर्द महसूस होना
  • अपच की समस्या
  • सीने में जलन महसूस होना
  • स्ट्रेच मार्क्स आना
  • त्वचा का पतला होने की समस्या
  • एलर्जी की समस्या
  • रक्त धमनियों का पतला होना
  • सांस फूलना या सांस लेने में परेशानी होना
  • अनियमित हृदयगति
  • छाती में जकड़न महसूस होना
  • न्यूरोलोजिकल डिसऑर्डर
  • मानसिक रोग
  • स्टेरॉइड युक्त क्रीम के इस्तेमाल से त्वचा के रंग में बदलाव
  • पीलिया की समस्या
  • पुरुषों में पेशाब करते हुए दर्द

स्टेरॉइड्स का उपयोग करने से आपको इन दिए गए दुष्प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन, जरूरी नहीं है कि आपको सिर्फ इन्हीं साइड इफेक्ट्स का सामना करना पड़े। इन दुष्परिणामों के अलावा आपको अन्य दुष्प्रभावों का भी सामना करना पड़ सकता है या फिर आपको इनमें से एक से ज्यादा साइड इफेक्ट्स का भी सामना करना पड़ सकता है।

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स्टेरॉइड से इंफेक्शन का खतरा

अधिकतर एनाबोलिक स्टेरॉइड का इस्तेमाल करने से इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ सकता है। क्योंकि अधिकतर ऐसे स्टेरॉइड गैर-कानूनी लैब में बनते हैं, जो कि कमर्शियल लैब जितनी सावधानी नहीं बरतते। इसके अलावा, जिन स्टेरॉइड्स का इंजेक्शन लगाया जाता है, उनसे संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। जिसमें एचआईवी का खतरा बहुत होता है।

स्टेरॉइड्स की लत

हालांकि स्टेरॉइड्स का लगातार उपयोग करने से शारीरिक आदत के होने का कोई प्रामाणिक सबूत नहीं है, लेकिन इससे आपको मानसिक स्तर पर निर्भरता बढ़ सकती है।

प्रेग्नेंसी में स्टेरॉइड का इस्तेमाल

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक प्रेग्नेंसी में सिर्फ डॉक्टर की सलाह के बाद ही कुछ स्टेरॉइड टैबलेट्स का सेवन करना सुरक्षित हो सकता है। लेकिन ऐसा जरूरी भी नहीं है। इससे संबंधित पूरी जानकारी के लिए आपको अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए। क्योंकि प्रेग्नेंसी में आपको डॉक्टर की सलाह के बिना किसी भी चीज की शुरुआत या बंद नहीं करनी चाहिए। इससे गर्भवती महिला के साथ-साथ उसके गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। इसके अलावा, स्तनपान कराते हुए भी आपको स्टेरॉइड्स युक्त क्रीम का इस्तेमाल करने से भी बचना चाहिए या फिर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। इसके अलावा, अगर आप प्रेग्नेंट होने के लिए सोच भी रही हैं, तो भी आपको इसका इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टरी सहायता लेनी चाहिए, क्योंकि इससे आपकी फर्टिलिटी पर बुरा असर पड़ सकता है।

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स्टेरॉइड्स का इस्तेमाल कैसे रोकें?

स्टेरॉइड्स का इस्तेमाल एकदम रोक देना गलत तरीका हो सकता है। क्योंकि इससे आपके शरीर में हॉर्मोन असंतुलन, मूड स्विंग्स, थकान, मसल्स में दर्द, डिप्रेशन आदि हो सकता है। इसके अलावा, इसे एकदम रोकने से आपकी सेक्स ड्राइव भी कम हो सकती है। दूसरी तरफ, अगर आप किसी शारीरिक समस्या के इलाज के लिए यह ले रहे हैं, तो ऐसा करने से उस समस्या के लक्षण दोबारा देखने को मिल सकते हैं। इसलिए स्टेरॉइड्स का उपयोग या डोज धीरे-धीरे कम करना एक सुरक्षित तरीका हो सकता है। लेकिन इसके लिए भी आपको डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए और उसकी निगरानी में ही कोई बदलाव करना चाहिए।

बॉडी बनाने के लिए स्टेरॉइड्स का विकल्प

चूंकि, अधिकतर स्टेरॉइड्स का इस्तेमाल शरीर की ताकत, स्टेमिना और मसल्स बढ़ाने के लिए किया जाता है। इसलिए आप स्टेरॉइड्स की जगह अन्य विकल्प का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो कि शायद उनकी तरह जल्दी रिजल्ट तो न दें, लेकिन यह विकल्प पूरी तरह सुरक्षित होते हैं। आइए, मसल्स, ताकत और स्टेमिना बढ़ाने के लिए स्टेरॉइड्स के प्रभावी विकल्प के बारे में जानते हैं।

वेट वर्कआउट रुटीन

मसल्स बढ़ाने के लिए आप एक अच्छा वेट वर्कआउट रुटीन को अपना सकते हैं। जिससे आप शरीर के सभी अंग जैसे- चेस्ट, शोल्डर, आर्म्स, बाइसेप्स, लेग्स, बैक आदि की मसल्स बढ़ा सकते हैं। रोजाना खुद के लिए एक चुनौतीपूर्ण वर्कआउट रुटीन को अपनाएं। मसल्स और ताकत बढ़ाने के लिए यह एक बेहतर तरीका होता है।

डायट

मसल्स ग्रोथ, ताकत और स्टेमिना के लिए आप स्वस्थ और पोषणयुक्त डायट का उपयोग कर सकते हैं। जिसमें प्रोटीन, फाइबर, ओमेगा-3, हेल्दी फैट्स, अमिनो एसिड हों। इसके लिए आप अपने आहार में अंडे, ग्रीक योगर्ट, किनोआ, मूंगफली, चना, फिश, तोफू आदि को शामिल कर सकते हैं।

पर्सनल ट्रेनर

अपने स्टेमिना और मसल्स ग्रोथ को बढ़ाने के लिए आप एक पर्सनल ट्रेनर का विकल्प भी इस्तेमाल कर सकते हैं। क्योंकि एक ट्रेनर मसल्स ग्रोथ के बारे में आपसे ज्यादा जानता है और वह आपकी व्यक्तिगत मसल्स ग्रोथ और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर बेहतर एक्सरसाइज और डायट का चुनाव करवा सकता है।

अगर आप स्टेरॉइड से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं, तो इससे जुड़े विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।

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हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

Are Steroids Worth the Risk?/ https://kidshealth.org/en/teens/steroids.html /Accessed on 28/1/2020

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What are anabolic steroids?/https://www.drugabuse.gov/publications/drugfacts/anabolic-steroids/Accessed on 24/11/2020

 

लेखक की तस्वीर badge
Surender aggarwal द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 30/11/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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