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टाइप 1 पेशेंट्स में हायपोग्लाइसीमिया के कारण जेंडर डिफरेंसेस के बारे में क्या यह सब जानते हैं आप?

के द्वारा मेडिकली रिव्यूड Sayali Chaudhari · फार्मेकोलॉजी · Hello Swasthya


AnuSharma द्वारा लिखित · अपडेटेड 27/12/2021

टाइप 1 पेशेंट्स में हायपोग्लाइसीमिया के कारण जेंडर डिफरेंसेस के बारे में क्या यह सब जानते हैं आप?

डायबिटीज एक गंभीर बीमारी है और इसकी गंभीरता के अंदाजा हम इस बात से लगा सकते हैं कि इस समय पूरी दुनिया में लगभग 40 करोड़ से भी अधिक लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। डायबिटीज की यह समस्या हर व्यक्ति को अलग तरीके से प्रभावित करती है। टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 diabetes) को इंसुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज भी कहा जाता है। क्योंकि, टाइप 1 डायबिटीज के पेशेंट्स को लाइफलॉन्ग इंसुलिन थेरेपी की जरूरत होती है। आज हम आपको जानकारी देने वाले हैं टाइप 1 पेशेंट्स में हायपोग्लाइसीमिया के कारण जेंडर डिफरेंसेस (Gender differences in response to hypoglycemia in type 1 diabetes patients) के बारे में। लेकिन, टाइप 1 पेशेंट्स में हायपोग्लाइसीमिया के कारण जेंडर डिफरेंसेस से पहले हायपोग्लाइसीमिया (Gender differences in response to hypoglycemia in type 1 diabetes patients) के बारे में जान लेते हैं।

हायपोग्लाइसीमिया क्या है? (Hypoglycemia)

अगर बात की जाए टाइप 1 डायबिटीज की, तो यह समस्या अधिकतर बच्चों को होती है। इस समस्या में रोगी का शरीर इंसुलिन का पर्याप्त उत्पादन नहीं कर पाता है। हायपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) वो कंडिशन है जिसमें ब्लड शुगर लेवल सामान्य से कम हो जाता है। ग्लूकोज शरीर की एनर्जी का मुख्य सोर्स है। इस समस्या को अधिकतर डायबिटीज ट्रीटमेंट से जोड़ा जाता है। हालांकि, अन्य दवाईयां और कंडिशंस भी ब्लड शुगर लो होने का कारण बन सकती हैं। इस समस्या में तुरंत उपचार की जरूरत होती है। इसके उपचार में रोगी को हाय शुगर फूड या ड्रिंक या दवा देना शामिल है, ताकि ब्लड शुगर लेवल (Blood sugar level) सामान्य हो सके। इंसुलिन के कारण एक अन्य समस्या भी हो सकती है, जिसे इंसुलिन-इंड्यूस्ड हायपोग्लाइसीमिया (Insulin-induced hypoglycemia) कहा जाता है।

इंसुलिन जब ब्लड शुगर बहुत अधिक होती है, तो ब्लड शुगर को कम करने में मदद करती है। अगर किसी को टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 diabetes) या टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 diabetes) की समस्या है तो उसे ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए इंसुलिन की जरूरत हो सकती है। लेकिन, जरूरत से बहुत अधिक मात्रा में इंसुलिन लेने से ब्लड शुगर लेवल (Blood sugar level) बहुत कम हो सकता है, जिसके कारण हायपोग्लाइसीमिया जैसी परेशानी भी हो सकती है। यह तो थी जानकारी हायपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) के बारे में। अब जानते हैं टाइप 1 पेशेंट्स में हायपोग्लाइसीमिया के कारण जेंडर डिफरेंसेस (Gender differences in response to hypoglycemia in type 1 diabetes patients) के बारे में।

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टाइप 1 पेशेंट्स में हायपोग्लाइसीमिया के कारण जेंडर डिफरेंसेस (Gender differences in response to hypoglycemia in type 1 diabetes patients)

जैसा की पहले ही बताया गया है कि टाइप 1 डायबिटीज को इंसुलिन- इंड्यूज्ड डायबिटीज (Insulin-induced diabetes) भी कहा जाता है। अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन (American Diabetes Association) के अनुसार इंसुलिन इंड्यूज्ड हायपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) के कारण काउंटर-रेगुलेटरी हार्मोनल रिस्पॉन्सेस उत्तेजित होते हैं, जिनका मैग्नीट्यूड टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं या जिन्हें यह समस्या नहीं हैं, उनके मुकाबले पुरुषों में अधिक होता है। हालांकि, ग्लाइसेमिक थ्रेसहोल्ड जिस पर इन प्रतिक्रियाओं को ट्रिगर किया जाता है, दोनों लिंगों में समान होते हैं।

नॉन-डायबिटिक एडल्ट्स और टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित लोगों में, एंटेसेडेंट हायपोग्लाइसीमिया (Antecedent hypoglycemia) और व्यायाम का पुरुषों की तुलना में महिलाओं में काउंटररेगुलेटरी हार्मोनल रिस्पॉन्सेस के मैग्नीट्यूड पर कम प्रभाव पड़ता है। हायपोग्लाइसीमिया के लक्षणों की डिटेक्शन डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति को ब्लड ग्लूकोज में गिरावट के प्रति सचेत करती है, जिससे न्यूरोग्लाइकोपेनिया (Neuroglycopenia) के प्रभाव बढ़ने से पहले करेक्टिव एक्शन लिया जा सकता है। हायपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) के लक्षण, रिस्पॉन्सेस की एस्टैब्लिश्ड हीरारके (Established hierarchy) के पार्ट के रूप में जनरेट होते हैं और इनमें खास उम्र भी शामिल होती है। लेकिन, इसमें सेक्स डिफरेंसेस रिपोर्ट नहीं होते हैं।

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हालांकि, अभी तक किये गए अध्ययनों से यह अंतर स्पष्ट नहीं हो पाया है। सबसे आम हायपोग्लाइसीमिया लक्षणों को फिजियोलॉजिकल स्टडी में सबग्रुप्स में बांटा गया है और स्टेटिस्टिकल मेथोडोलोजी द्वारा फैक्टर एनालिसिस का उपयोग किया गया है। टाइप 1 पेशेंट्स में हायपोग्लाइसीमिया के कारण जेंडर डिफरेंसेस (Gender differences in response to hypoglycemia in type 1 diabetes patients) के बारे में अभी और स्टडीज की जानी जरुरी हैं। यह तो थी टाइप 1 पेशेंट्स में हायपोग्लाइसीमिया के कारण जेंडर डिफरेंसेस (Gender differences in response to hypoglycemia in type 1 diabetes patients) के बारे में जानकारी। अब जान लेते हैं टाइप 1 पेशेंट्स हायपोग्लाइसीमिया की समस्या को कैसे मैनेज किया जा सकता है।

टाइप 1 पेशेंट्स में हायपोग्लाइसीमिया के कारण जेंडर डिफरेंसेस

टाइप 1 पेशेंट्स हायपोग्लाइसीमिया की समस्या को कैसे मैनेज करें? (How to manage hypoglycemia)

अगर टाइप 1 पेशेंट्स हायपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) के लक्षणों को अधिक देर तक इग्नोर करें, तो वो बेहोशी महसूस कर सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारे ब्रेन को फंक्शन करने के लिए ग्लूकोज की जरूरत होती है। ऐसे में इसके लक्षणों को शुरुआत में ही पहचानना बेहद जरूरी है। क्योंकि, अगर इसका उपचार सही समय पर न हो, तो इसके कारण कई कॉम्प्लीकेशन्स हो सकती हैं। इस समस्या को इस तरह से मैनेज किया जा सकता है:

टाइप 1 पेशेंट्स में हायपोग्लाइसीमिया के कारण जेंडर डिफरेंसेस: ब्लड शुगर को मॉनिटर करें (Monitor blood sugar)

इस समस्या से पीड़ित रोगी को अपने ट्रीटमेंट के अनुसार लगातार अपने ब्लड शुगर लेवल (Blood sugar level) को रिकॉर्ड करना पड़ सकता है। इसके बारे में डॉक्टर की सलाह लें और इसके बाद नियमित रूप से अपने ग्लूकोज लेवल को मॉनिटर करें।

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अपने मील या स्नैक्स को स्किप न करें (Don’t skip meals or snacks)

अगर आप इंसुलिन या ओरल डायबिटीज मेडिकेशन ले रहे हैं, तो जिस आहार का आप सेवन कर रहे हैं उसकी मात्रा को लेकर कंसिस्टेंट रहें। यही नहीं, अपने मील या स्नैक को टाइमिंग को लेकर भी जागरूक रहें।

टाइप 1 पेशेंट्स में हायपोग्लाइसीमिया के कारण जेंडर डिफरेंसेस: दवाईयों का ध्यान रखें (Medications)

अपनी दवाईयों का पूरी तरह से ध्यान रखना बेहद जरूरी है। यही नहीं, इन्हें सही समय पर लें और उसी तरह से लें जैसे डॉक्टर न कहा है। अगर आपने फिजिकल एक्टिविटीज बढ़ाई ,हैं तो अपनी मेडिकेशन को एडजस्ट करें और अतिरिक्त स्नैक्स लें। यह एडजस्टमेंट आपके ब्लड शुगर टेस्ट के रिजल्ट्स, एक्टिविटी के प्रकार और लेंथ और जिस मेडिकेशन्स को आप ले रहे हैं, उन पर निर्भर करती है।

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लो ग्लूकोज रिएक्शंस को रिकॉर्ड करें (Record low glucose reactions)

लो ग्लूकोज रिएक्शंस को रिकॉर्ड करना बेहद जरूरी है। इससे आपको और आपके डॉक्टर को हायपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) का कारण बनने वाले कारणों को पहचानने में मदद मिलेगी। जिससे आपको बचने के उपाय जानने में भी सहायता मिल सकती है। अगर आप एल्कोहॉल का सेवन करते हैं, तो कभी भी खाली पेट इसका सेवन न करें, क्योंकि ऐसा करना हायपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) का कारण बन सकता है।

हेल्दी हेबिट्स को अपनाएं (Healthy habits)

अगर आप टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित हैं और आप हायपोग्लाइसीमिया को मैनेज करना चाहते हैं तो आपके लिए हेल्दी हेबिट्स को अपनाना बेहद जरूरी है। इससे बचने के लिए आपका आहार कैसा होना चाहिए इसके बारे में अपने डॉक्टर और डायटिशन से अवश्य पूछें, नियमित सही व्यायाम करें, तनाव से बचें, एल्कोहॉल के सेवन को सीमित करें। इसके साथ ही डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाईयों का सेवन करना और उनकी सलाह का पूरी तरह से पालन करना भी बेहद जरूरी है।

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टाइप 1 पेशेंट्स में हायपोग्लाइसीमिया के कारण जेंडर डिफरेंसेस (Gender differences in response to hypoglycemia in type 1 diabetes patients) के साथ ही यह जानकारी भी आपके लिए जरूरी है। अगर आपको डायबिटीज है, तो आप किसी तरह की डायबिटीज आइडेंटिफिकेशन को अपने साथ अवश्य रखें जैसे डायबिटीज ID ब्रेसलेट्स (Diabetic ID Bracelets) या नेकलेस, ताकि किसी भी इमरजेंसी के दौरान अन्य लोग यह जान पाएं कि आपको यह समस्या है। उम्मीद है कि टाइप 1 पेशेंट्स में हायपोग्लाइसीमिया के कारण जेंडर डिफरेंसेस (Gender differences in response to hypoglycemia in type 1 diabetes patients) के बारे में यह जानकारी आपको पसंद आई होगी।

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यह बात को साफ है कि महिला हो या पुरुष दोनों के लिए टाइप 1 पेशेंट्स में हायपोग्लाइसीमिया की समस्या गंभीर हो सकती है। ऐसे में अगर आपका ग्लूकोज लो हो, तो आपके लिए लगातार ग्लूकोज मॉनिटर करना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही डॉक्टर की सलाह का पूरी तरह से पालन करें और हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाएं। अगर आपके मन में इसके बारे में कोई भी सवाल है तो अपने डॉक्टर से इस बारे में अवश्य जाने।आप हमारे फेसबुक पेज पर भी अपने सवालों को पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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