दुनियां में आए हैं तो…तो गिरना ही पड़ेगा। पर क्या हंसना जरूरी है?

By Medically reviewed by Dr Sharayu Maknikar

”दुनिया में आए हैं तो जीना ही पड़ेगा, अगर है हम खड़े हैं तो गिरना ही पड़ेगा” । हां ठीक है, गाने की कुछ लाइनें बदल दी है मैंने, लेकिन बात तो ठीक ही है न? मतलब आप भी कभी न कभी तो गिरे ही होंगे। शायद खड़े-खड़े ही गिर गए होगे?  हमारे सामने अचानक से कोई गिर जाए तो चाहे हम कुछ भी कर लें, हंसी निकल ही जाती है। गिरना तो हमारी नियति में है लेकिन गिरते हुए इंसान को देखकर हंसना शायद हमारी नियति में नहीं है। ये एक मनोवैज्ञानिक कारण है। इसे ‘प्ले फ्रेम के रूप में जाना जाता है। आप भी तो जान लें कि आखिर कोई गिर जाए तो हम क्यों खिलखिला पड़ते हैं।

1. क्या है प्ले फ्रेम( Play frame)?

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने जानने कि कोशिश की कि आखिर क्यों हमें किसी के गिरने पर हंसी आती है ? उन्होंने बताया कि प्ले फ्रेम फिनाेमिना के कारण रीयल लाइफ ईवेंट भी नॉन सीरियस हो जाता है। प्ले फ्रेम के बारे में बताते हुए रिसचर्स ने कहा कि बीसवीं मंजिल से गिरते हुए इंसान को देखकर हमें हंसी नहीं आती है लेकिन सामने या फिर अचानक से किसी के गिरने पर हम खुद को हंसने से रोक नहीं पाते हैं।

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2. क्या ये अच्छा महसूस करने का तरीका है ?

हमें दूसरे के दर्द से खुशी मिलती है ? ऐसा मैं नहीं कह रही हूं। प्रसिद्ध दार्शनिक थॉमस होब्स ने दिलचस्प सिद्धांत दिया कि हमें दूसरों के दर्द में खुशी मिलती है। उन्होंने कहा है कि हंसी का संबंध श्रेष्ठता से जोड़ा जाता है। किसी की परेशानी में हंसी आना उसे परेशान महसूस कराने जैसा होता है। होब्स आगे कहते हैं कि सार्वजनिक रूप से किसी पर हंसना उसे मूर्ख साबित करने जैसी ही प्रतिक्रिया है। हो सकता है इस तरह के काम से आपको कुछ पल की खुशी ही मिल जाएं।

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3. पीड़ित के साथ सहानुभूति की कमी

सिद्धांतकारों ने इस बारे में भी सुझाव दिया है कि जब हम किसी पर ऐसे समय में हंसते हैं, तो उनसे हमारा भावनात्मक लगाव नहीं होता है। हमारी सहानुभूति उनके साथ नहीं होती है। उदाहरण के तौर पर जब कोई जोकर गिरेगा तो आपको उसे देखकर हंसी आ सकती है लेकिन जब आपका कोई करीबी अचानक से गिर जाए तो आप परेशान हो जाएंगे न कि हंसेंगे।

4.आप के साथ नहीं हुआ, शायद इसलिए ?

शोधकर्ताओं के अनुसार, हम उन चीजों पर ज्यादा हंसते है जो हमारे साथ नहीं हुई होती है। हमें पता होता है कि हमारे साथ ऐसा अक्सर नहीं होता या फिर इस तरह की सिचुएशन हमारे लिए आम नहीं है। आप ऐसे समझिए कि आपको कभी गिरने के कारण चोट लग गई हो। अब इसकी संभावना कम ही हो जाती है कि आप किसी को गिरते देखें और आपको हंसी आ जाए। लेकिन आपके साथ ऐसा नहीं हुआ है तो आपकी हंसी जरूर छूट जाएगी।

5. समाज के नियम को फॉलो करने का प्रेशर

दार्शनिक हेनरी बर्गसन इस बारे में बताते हुए कहते हैं कि समाज के नियम का पालन करने के कारण ही हमारी हंसी छूट जाती है। समाज से हमको ऐसा प्रशिक्षण मिलता है कि कुछ भी ऐसा वाकया हो तो हंसों जरूर, नहीं तो आपको मूक या गूंगा माना जाएगा।

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रिव्यू की तारीख सितम्बर 10, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया सितम्बर 10, 2019

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