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चिकनगुनिया (Chikungunya) के नई वैक्सीन को रेफ्रिज्रेट करने की आवश्यकता नहीं; रिसर्च

चिकनगुनिया (Chikungunya) के नई वैक्सीन को रेफ्रिज्रेट करने की आवश्यकता नहीं; रिसर्च

मच्छरों के द्वारा फैलने वाली वायरस चिकनगुनिया से बचने के इलाज के लिए लगातार शोध किए जा रहे हैं। अब वैज्ञानिकों को इसमें एक और सफलता हासिल हुई है। ‘यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल‘ और ‘फ्रेंच नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च‘ (CNRS) के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध में एक चिकनगुनिया के इलाज के लिए नई वैक्सीन का पता चला है। शोधकर्ताओं के अनुसार इसे रेफ्रिज्रेट किए बिना भी लंबी अवधि तक स्टोर किया जा सकता है।

साइंस एडवांस टुडे‘ मैगजीन ने चिकनगुनिया वैक्सीन पर इस अध्ययन के परिणाम को अपने अंक में प्रकाशित किया है। चिकनगुनिया के इलाज के लिए बनाए गए इस नए वैक्सीन को ‘CNRS’ और यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के शोधकर्ताओं द्वारा बनाई गई थी। शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर टेक्नोलॉजी की कंपनी ओरेकल के साथ मिलकर काम किया था।

शोध टीम के वैज्ञानिकों के मुताबिक अधिकांश वेक्टर-जनित रोगों के टीकों का उपयोग संबंधित जटिलताओं के कारण बंद हो जाते हैं। अब वैज्ञानिकों ने यह संभावना जताई है कि चिकनगुनिया के इलाज के लिए बनाए गए इस नए टीके को डिजाइन करने और बनाने के बाद इसे स्टोर करने के तरीकों में कई तरह की बदलाव आ सकते हैं। उन्होंने आगे यह भी कहा कि यह ‘सिंथेटिक वैक्सीन’ के निर्माण के साथ संभव हुआ है। इस नए टीके को रेफ्रिज्रेट करने की आवश्यकता नहीं होगी साथ ही गर्म तापमान पर भी इसे स्टोर किया जा सकता है।

फ्रेंच नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च (CNRS) के विशेषज्ञ वायरोलॉजिस्ट, पास्कल फेंडर ने कहा, “चिकनगुनिया के इलाज के लिए इस टीके को खोजने के लिए हम एक खास प्रोटीन के ऊपर काम कर रहे थे। यह प्रोटीन, वायरस से मिलता-जुलता मल्टीमेरिक पार्टिकल बनाता है। लेकिन इसके अंदर कोई आनुवंशिक गुण नहीं होता। इसलिए यह सुरक्षित है। फेंडर कहते हैं कि स्टडी में हमने पाया कि ये पार्टिकल कुछ महीने बाद भी बिना रेफ्रिज्रेट किए बिना भी अपनी अवस्था में सुरक्षित थे।”

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चिकनगुनिया को हल्के में न लें:

जानें क्या है चिकनगुनिया (Chikungunya)?

चिकनगुनिया एक प्रकार का वायरस है जो मच्छरों द्वारा फैलता है। चिकनगुनिया एक मच्छर जनित बीमारी है, जो चिकनगुनिया वायरस (CHIKV) के कारण होती है। यह वायरस दो प्रकार के मच्छरों द्वारा लोगों के बीच फैलता है: एडीज एल्बोपिक्टस (Aedes albopictus) और एडीज एजिप्टी (Aedes Aegypti) जो दिन में असामान्य रूप से काटता है। चिकनगुनिया के सामान्य लक्षणों में तेज बुखार और जोड़ों का दर्द शामिल है। हर साल बारिश के मौसम के बाद इसका आतंक बढ़ जाता है। यह वायरस सबसे ज्यादा असर हड्डियों पर डालता है, जिस वजह से मरीज साधारण काम को करने में भी असमर्थ होता है।चिकनगुनिया के इलाज के बाद भी महीनों तक मरीज की हड्डियों में दर्द बना रहता है।

हालांकि, एक हफ्ते के भीतर इलाज व उपचार न होने पर यह लक्षण बढ़ भी सकते हैं। जिनमें शामिल हैं:

संक्रमित मच्छर के काटने के बाद लक्षण आमतौर पर 4 से 8 दिनों के बीच नजर आते हैं। इस बीमारी के कुछ लक्षण डेंगू और जीका से मिलते हैं। इसलिए कई बार इसके लक्षणों को डेंगू के लक्षण समझने की गलती भी हो जाती है। इस बुखार में मृत्यु का खतरा नहीं होता है लेकिन इसके लक्षण बेहद गंभीर होते हैं। ऐसा भी हो सकता है ऊपर दिए गए लक्षणों में कुछ लक्षण शामिल न हो। यदि आपको किसी भी लक्षण के बारे में किसी भी तरह की शंका है, तो कृपया डॉक्टर से परामर्श करें। चिकनगुनिया के इलाज में किसी तरह की कोई देरी नहीं करनी चाहिए। यदि आपको ऊपर बताए गए लक्षण में से कोई नजर आएं तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें।

चिकनगुनिया (Chikungunya) के बारे में जानकर आप चौंक जाएंगे:

चिकनगुनिया कुछ बेहद खतरनाक वायरल डिजीज में से एक माना जाता है। चिकनगुनिया वायरस का पता सबसे पहले 1952 में तंजानिया में चला था। यह एक रायबोन्यूक्लिक एसिड (आरएनए) वायरस है जो टोगाविरीडे (Togaviridae) अल्फावायरस वर्ग से संबंधित है।

इसकी पहचान एशिया, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका के 60 से भी अधिक देशों में की गई है। यह किसी भी उम्र, किसी भी जेंडर के लोगों को प्रभावित कर सकती है।

चिकनगुनिया (Chikungunya) का कारण:

चिकनगुनिया मादा एडिस इजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर साफ पानी में पैदा होते हैं। इनके ऊपर धारियां होती हैं। ये मच्छर तड़के और शाम के वक्त ज्यादा काटते हैं।

चिकनगुनिया (Chikungunya) का खतरा किन स्थानों या लोगों पर ज्यादा होता है?

  • अगर आप ट्रॉपिकल देशों में रहते हैं।
  • अगर ऐसी जगह पर जाते हैं जहां ये वायरस फैला हुआ है।
  • अगर आप ऐसे क्षेत्र में निवास करते हैं जहां गंदगी रहती है।

यदि आप एक वयस्क हैं और उच्च रक्तचाप (हाई बीपी), डायबिटीज या हृदय रोग जैसी बीमारियों से ग्रसित हैं तो आपको इस बीमारी से संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है।

चिकनगुनिया (Chikungunya) का बचाव

पूरा शरीर ढकने वाले कपड़ों का चयन करें। शरीर के खुले हिस्सों पर मच्छरनाशक क्रीम लगाएं। सोते वक्त मच्छरदानी लगाकर सोएं। साथ में मच्छर भगानेवाले स्प्रे, मैट्स, कॉइल्स आदि का प्रयोग करना न भूलें। घर के आसपास मच्छरों को पैदा होने से रोकने के लिए कहीं भी खुले में पानी रुकने या जमा न होने दें। पानी को पूरी तरह ढककर ही स्टोर करें। बारिश के दिनों में कूलर का इस्तेमाल न करें। इसमें भी मच्छर के पनपने का डर रहता है। छत पर रखी पानी की टंकी को अच्छे से बंद करके रखें। किचन और बाथरूम के सिंक में भी पानी जमा न होने दें।

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चिकनगुनिया के इलाज में क्या किया जाता है?

चिकनगुनिआ वायरस (Chikungunya Virus) से बचने का कोई स्थायी टीका नहीं है। अगर समय पर चिकनगुनिया के इलाज को ले लिया जाए तो इसके बुखार के लक्षणों को कम किया जा सकता है। यदि चिकनगुनिया बुखार है तो डॉक्टर आमतौर पर मरीज को आराम करने की सलाह देते हैं। डीहाइड्रेशन से बचने के लिए अधिक तरल पदार्थ पीने और मच्छरों से बचने की सलाह दी जाती है।

दर्द और बुखार को कम करने के लिए, एसिटामिनोफेन या पैरासिटामोल जैसी दवा दी जाती हैं। डॉक्टर की अनुमति के बिना अन्य दवाएं नहीं लेनी चाहिए। यदि किसी अन्य बीमारी के लिए दवा ले रहे हैं, तो डॉक्टर को जरूर बताएं।

चिकनगुनिया (Chikungunya) की जांच कैसे की जाती है?

चिकनगुनिया की जांच के लिए RT-PCR टेस्ट किया जाता है। बुखार शुरू होने के एक दिन बाद से लेकर कभी भी करा सकते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि एक बार चिकनगुनिया होने पर एक साल तक इसका रिजल्ट पॉजिटिव आता है।

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Nikhil Kumar द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 26/02/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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