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बच्चों में कैंसर की ओर इशारा करते हैं ये लक्षण, न करें इनको अनदेखा

बच्चों में कैंसर की ओर इशारा करते हैं ये लक्षण, न करें इनको अनदेखा

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (WHO) की एक रिपोर्ट के अनुसार 15 साल से कम उम्र के बच्चों की मौत भी कैंसर से हो रही है। अब बच्चों में कैंसर होना चौथी सबसे सामान्य बीमारी है। हालांकि, बच्चों और 15 साल से अधिक उम्र के लोगों में होने वाले कैंसर में अंतर होता है। बच्चों में कैंसर शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है। बड़ों की तुलना में बच्चों में कैंसर का पता लगाना भी कठिन होता है। वैसे कैंसर का नाम सुनते ही हर इंसान विचलित हो जाता है कि क्या किया जाए ? वहीं कैंसर एक्सपर्ट्स का मानना है कि सही समय पर अगर इलाज शुरू हो जाए तो कैंसर को मात दी जा सकती है। “हैलो स्वास्थ्य” के इस आर्टिकल में जानते हैं कि बच्चों में कैंसर के लक्षण, कारण और उपचार क्या हैं?

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बच्चों में होने वाले कैंसर

बच्चों में कैंसर के प्रकार वयस्कों की तुलना में अलग होते हैं। आमतौर पर इस तरह के कैंसर बच्चों में देखने को मिलते हैं-

  • बोन कैंसर (Bone Cancer)
  • ब्रेन कैंसर (Brain Cancer)
  • ल्यूकेमिया (एक तरह का ब्लड कैंसर)
  • हेपटोब्लास्टोमा (लिवर कैंसर)
  • लिम्फोमा (एक तरह का ब्लड कैंसर)
  • न्यूरोब्लास्टोमा (Neuroblastoma)
  • रैबडोमायोसरकोमा (Rhabdomyosarcoma)
  • रेटिनोब्लास्टोमा (आंखों में होने वाला कैंसर)
  • रबडॉइड ट्यूमर (Rhabdoid Tumors)
  • सार्कोमा (sarcoma)
  • स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर्स (Spinal Cord Tumors)
  • विल्म्स ट्यूमर (किडनी में होने वाला कैंसर)

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इन वजहों से बढ़ जाता है कैंसर का खतरा

  • जेनेटिक (अनुवांशिक) कारण भी हो सकता है।
  • पर्यावरण में हो रहे बदलाव की वजह से।
  • या फिर किसी अन्य कारणों से।

बच्चों में ब्रेन ट्यूमर, पेट में ट्यूमर, ल्यूकेमिया और लिम्फोमा होने पर सतर्क हो जाएं। अगर ल्यूकेमिया या ट्यूमर की जानकारी जल्दी मिल जाए तो शुरुआती स्टेज में इलाज संभव है और कैंसर पीड़ित बच्चे की जान बचाई जा सकती है।

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बच्चों में कैंसर की चेतावनी देने वाले लक्षण

हालांकि, बच्चों में कैंसर दुर्लभ है। लेकिन, किसी भी लक्षण की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। समय पर कैंसर का पता लग जाए, इसके लिए बेहद सतर्कता आवश्यक है। बच्चों में होने वाले कैंसर में सबसे आम मस्तिष्क या पेट में ट्यूमर, ल्यूकेमिया, लिंफोमा आदि हैं। नीचे बताए गए कोई भी लक्षण दिखने पर बच्चे में कैंसर की आशंका होती है। ऐसे में इन लक्षणों को ध्यान दें-

  • बिना किसी कारण बुखार शुरू होने के साथ स्वभाव में उदासी और वजन कम होना
  • आंखों में बदलाव का अहसास होना साथ देखने में दिक्कत होना
  • बार-बार चश्मे के पावर में बदलाव आना
  • बच्चे के बॉडी में किसी-किसी जगह में वजन बढ़ना
  • लम्बे वक़्त से सर दर्द ठीक नहीं हो रहा हो
  • सिर के आकर में बदलाव आना
  • दो हफ्ते से ज्यादा समय से सिर दर्द
  • सुबह उल्टी करना या बार-बार कभी भी उल्टी करना
  • मुंह या नाक से ब्लीडिंग होना
  • शरीर में दर्द होना या फिर पीठ दर्द होना
  • हड्डियों में दर्द होना और बच्चे का ठीक से नहीं चल पाना
  • घाव होने पर जल्दी ठीक ना होना
  • अचानक चर्बी बढ़ना (विशेषरूप से पेट, सिर, गर्दन और हाथ-पैर पर)
  • किसी बात पर ध्यान नहीं लगना और एंटीबायोटिक्स से असर नहीं पड़ना
  • मसूड़ों में सूजन आना या ब्लीडिंग होना

इनमें से किसी भी समस्या को नजरअंदाज ना करें सिर्फ डॉक्टर से जल्द से जल्द संपर्क करें।

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बच्चों में कैंसर का इलाज कैसे किया जाता है?

पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी (विशेषतः बच्चों में कैंसर का उपचार करने वाले) कैंसर से पीड़ित बच्चों को बेस्ट ट्रीटमेंट देने में मदद कर सकते हैं। बच्चों में कैंसर के उपचार के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रियाएं-

  • सर्जरी (surgery): कैंसर कोशिकाओं या ट्यूमर को हटाना
  • कीमोथेरेपी (chemotherapy): कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए दवाओं का उपयोग करना
  • रेडिएशन थेरेपी (radiation therapy): कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए रेडिएंट एनर्जी का उपयोग करना
  • बोन मैरो (स्टेम सेल) प्रत्यारोपण (bone marrow transplant): स्वस्थ स्टेम कोशिकाओं को ब्लड में डालना ताकि वे नई और हेल्दी अस्थि मज्जा और प्रतिरक्षा प्रणाली कोशिकाओं (immune system) को बना सकें

जिन बच्चों में कैंसर के लक्षणों की पुष्टि हो जाती है। उनके लिए डॉक्टर इनमें से एक या अधिक उपचार का उपयोग कर सकते हैं। उपचार के प्रकार की आवश्यकता बच्चे की उम्र, कैंसर के प्रकार और कैंसर कितना गंभीर है? इस बार पर निर्भर करता है।

कैसे करें बचाव?

विशेषज्ञों की मानें तो आजकल बच्चों की लाइफस्टाइल में भी बड़ों की तरह बदलाव देखा गया है। कम उम्र में ही कुछ बच्चे सिगरेट, तम्बाकु और शराब जैसी खतरनाक चीजों का सेवन करने लगे हैं। ये भी कैंसर होने का कारण माना जा सकता है। वैसे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होगी तब भी कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन ऐसा नहीं है कि इसका इलाज नहीं है। कैंसर का इलाज प्रायः सर्जरी और कीमोथेरेपी से किया जाता है तो ऐसे में कैंसर पीड़ित बच्चे का आहार भी पौष्टिक और खनिज तत्वों से भरपूर होना चाहिए। आहार के साथ-साथ हाइजीन का भी ख्याल रखना चाहिए। जैसे खाना बनाने और खिलाने के पहले हाथों की सफाई ठीक से होनी चाहिए। फ्रोजेन खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल नहीं करें एवं संतुलित आहार लें। बच्चों में कैंसर से बचाव के लिए खाद्य पदार्थों में ब्रोकली, लहसुन, गाजर, मशरूम जैसी चीजें शामिल करें।

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माता-पिता कैसे मदद कर सकते हैं?

बच्चों के कैंसर का इलाज करते समय उपचार के कुछ दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। ऐसे में पेरेंट्स के लिए जब भी संभव हो, बच्चों को उनके कैंसर उपचार में शामिल करें। उस भाषा का उपयोग करें जिसे आपका बच्चा कैंसर और उसके प्रभावों के बारे में समझ सके। वहीं, कई बच्चे कैंसर जैसी बीमरी के लिए खुद को दोषी महसूस कर सकते हैं। इस तरह की परेशानी को दूर करने के लिए मनोवैज्ञानिक, सामाजिक कार्यकर्ता और सपोर्ट ग्रुप की सहायता लें। इससे बच्चों को कैंसर के इलाज में काफी मदद मिलेगी। बच्चे को कैंसर होना किसी भी परिवार के लिए बहुत ही कष्टदायक स्थिति हो सकती है। लेकिन, आप अकेले नहीं हैं। सपोर्ट ग्रुप की मदद आपके बच्चे की मदद करने में सहायक साबित होंगे।

बच्चों में कैंसर जैसी बीमारी दुनिया के लिए खतरे की घंटी है। लेकिन, डॉक्टर्स की मानें तो कैंसर का इलाज संभव है। बशर्ते कैंसर के लक्षणों को जल्द से जल्द पकड़ा जा सके। ज्यादातर पेरेंट्स को चाइल्डहुड कैंसर का पता तीसरे या चौथे स्टेज में ही लगा पाते हैं, जिसकी वजह से बच्चे की जान बचा पाना लगभग नामुमकिन हो जाता है। ऐसे में कैंसर का जल्द से जल्द पता लगाना ही जोखिम से बचाव का रास्ता है।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

लेखक की तस्वीर
Dr. Shruthi Shridhar के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Nidhi Sinha द्वारा लिखित
अपडेटेड 28/08/2019
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