क्या आप जानते हैं सेक्शुअल रिस्पॉन्स साइकल के बारे में?

    क्या आप जानते हैं सेक्शुअल रिस्पॉन्स साइकल के बारे में?

    सेक्शुअल एक्टिविटी के दौरान शरीर में कई तरह के शारीरिक और भावनात्मक बदलाव होते हैं। जिन्हें 4 चरण में बांटा जाता है और इन्हीं चार चरणों के साइकल को सेक्शुअल रिस्पॉन्स साइकल (Sexual Response Cycle) कहा जाता है, जिसमें ऑर्गेज्म (Orgasm) सबसे छोटा चरण होता है। सेक्शुअल रिस्पॉन्स साइकल (Sexual Response Cycle) के चार चरण कौन-कौन से हैं जानिए इस आर्टिकल में।

    सेक्शुअल रिस्पॉन्स साइकल क्या है? (Sexual response cycle meaning)

    कपल्स के रिश्ते को मजबूत बनाने और उन्हें करीब लाने वाली सेक्शुअल एक्टिविटी (Sexual activity) को जितना सहज समझा जाता है यह उतना है नहीं और इसकी सही समझ न होने की वजह से कपल्स यौन संबंधों का पूरा आनंद नहीं ले पाते हैं। सेक्स के दौरान (During sex) शारीरिक और भावनात्मक बदलाव एक क्रम में होते हैं यानी धीरे-धीरे कपल्स ऑर्गेज्म (Orgasm) फील करते हैं यह अचानक नहीं हो जाता। सेक्शुअल एक्टिविटी के इसी क्रम को सेक्शुअल रिस्पॉन्स साइकल (Sexual Response Cycle) कहा जाता है। प्रत्येक साइकल को समझने और इस दौरान शरीर किस तरह से प्रतिक्रिया करता है इसकी जानकारी होने पर कपल्स सेक्स का अच्छी तरह आनंद उठा पाएंगे और यदि सेक्शुअल डिसफंक्शन (sexual dysfunction) की समस्या है उसका पता लगाकर और उपचार कराके अपने रिश्ते को बेहतर बना सकते हैं।

    सेक्शुअल रिस्पॉन्स साइकल के चरण (Sexual response cycle phase)

    सेक्स लाइफ का आनंद उठाने के लिए सबसे पहले सेक्स की इच्छा (Sexual desire) का होना जरूरी और फिर उत्तेजना जो ऑर्गेज्म (Orgasm) तक पहुंचाती है और उसके बाद मिलती है संतुष्टि जिसे सेक्शुअल सैटिसफैक्शन (Sexual satisfaction) कहा जाता है और यही सेक्शुअल रिस्पॉन्स साइकल (Sexual response cycle phase) के चार चरण हैं। महिला और पुरुष दोनों ही इन चरणों का अनुभव करते हैं, लेकिन इसका समय दोनों पार्टनर के लिए अलग-अलग हो सकता है। जैसे- जरूरी नहीं कि दोनों पार्टनर एक ही समय पर ऑर्गेज्म का अनुभव करें। इसके अलावा प्रत्येक चरण में कोई व्यक्ति कितनी तेजी से प्रतिक्रिया करता है यह भी अलग-अलग होता। बहुत सी महिलाएं इस क्रम में सेक्शुअल चरणों से नहीं गुजरती। सेक्शुअल एक्टिविटी (Sexual activity) के अलग-अलग चरणों में कई तरह के मनोवैज्ञानिक बदलाव होते हैं। कोई व्यक्ति इन सभी का अनुभव कर सकता है, कोई कुछ का तो किसी को कुछ भी अनुभव नहीं होता।

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    पहला चरण- इच्छा (Desire)

    Sexual Response Cycle: सेक्सुअल रिस्पॉन्स साइकल

    यौन संबंधों (Sex) का आनंद उठाने के लिए सबसे पहले सेक्स की इच्छा होना जरूरी है जिसे यौनइच्छा (Desire) कहते हैं। यह कुछ मिनट से लेकर कुछ घंटों तक के लिए हो सकती है। इस चरण में आपके शरीर में निम्न बदलाव होते हैं-

    • मांसपेशियों में तनाव बढ़ जाता है (Muscle tension increases)
    • दिल की धड़कन (Heart rate) बढ़ जाती है और सांसें तेजी से चलने लगती है
    • त्वचा लाल हो जाती है
    • निप्पल (Nipple) सख्त या उभरे हुए नजर आते हैं
    • जनानंगों (Genitals) में ब्लड फ्लो बढ़ जाता है, जिससे महिलाओं के क्लिटरिस (Clitoris) और लेबिया माइनोरा(Labia minora (inner lips) में सूजन हो जाती है और पुरुषों के पेनिस (Penis) में इरेक्शन (Erection) होता है।
    • वजायनल ल्यूब्रिकेशन (Vaginal lubrication) शुरू हो सकता है।
    • महिलाओं के ब्रेस्ट (Breasts) बड़े हो जाते हैं और वजाइना की दीवार (Vaginal walls) में सूजन आ जाती है।
    • पुरुषों के अंडकोष में सूजन आ जाती है, उनके स्क्रोटम (scrotum) टाइट हो जाते हैं जिसके बाद उससे लिक्विड निकलने लगता है।

    याद रखिए की हर व्यक्ति का सेक्शुअल अनुभव अलग-अलग होता है। हो सकता है ऊपर बताए गए बदलावों में से आप कुछ का ही अनुभव करें या कुछ लोग सभी का अनुभव करें। यह हर किसी व्यक्ति में अलग-अलग होता है यहां तक कि कुछ लोगों को उत्तेजना के बाद सेक्स की इच्छा होती है।

    दूसरा चरण- उत्तेजना (Arousal)

    यह सेक्शुअल एक्टिविटी (Sexual activity) का दूसरा फेज है। उत्तेजना बढ़ने पर ही व्यक्ति ऑर्गेज्म (Orgasm) प्राप्ति की ओर जाता है। इस चरण में आमतौर पर शरीर में निम्न बदलाव दिखते हैं।

    • पहले चरण में जो शारीरिक बदलाव होते हैं वह इस चरण में और तीव्र हो जाते हैं।
    • ब्लड फ्लो (Blood flow) बढ़ने से वजायना (Vagina) का साइज भी सूजन के कारण बढ़ता जाता है और इसकी दीवारें गहरे रंग की हो जाती है।
    • महिलाओं के क्लिटोरिस (Clitoris) बहुत संवेदनशील (Sensitive) हो जाते हैं और छूने पर दर्द होता है।
    • सांसें (Breathing), दिल की धड़कन (Heart rate) और ब्लड प्रेशर (Blood pressure) लगातार बढ़ता रहता है।
    • चेहरे, पैर और हाथों की मांसपेशियों में ऐंठन महसूस होने लगती है।
    • मांसपेशियों (muscles) में तनाव बढ़ता है।

    तीसरा चरण- ऑर्गेज्म (Orgasm)

    यह चरण सेक्शुअल रिस्पॉन्स साइकल (Sexual response cycle phase) का क्लाइमेक्स है। यह सबसे छोटा चरण है और बस कुछ सेकंड का ही होता है। इस चरण की विशेषताएं इस प्रकार हैं।

    • मांसपेशियों में संकुचन (muscle contractions) शुरू हो जाता है जिस पर आपका कंट्रोल नहीं रहता
    • तेजी से ऑक्सीजन लेने के कारण ब्लड प्रेशर (Blood pressure), हार्ट रेट और सांसे बहुत तेजी से चलती हैं।
    • पैरों की मांसपेशियों में ऐंठन।
    • सेक्शुअल टेंशन (Sexual tension) अचानक से कम हो जाती है।
    • महिलाओं में वजायना (Vagina) की मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं और गर्भाशय (Uterus) में रिदमिक (Rhythmic) संकुचन होता है।
    • पुरुषों में पेनिस की मांसपेशियों को रिदमिक संकुचन होता है जिससे इजैकुलेशन (Ejaculation) होता है।
    • पूरे शरीर में रैश (Rash) या सेक्स फ्लश (Sex flush) उभर सकते हैं।

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    चौथा चरण- संतुष्टि (Satisfaction)

    इस चरण को सेक्शुअल सैटिसफैक्शन (Sexual satisfaction) भी कहा जा सकता है। जिसमें ऑर्गेज्म की प्राप्ति के बाद शरीर अपने पुराने रूप और रंग में लौटकर सामान्य रूप से काम करने के लिए तैयार होता है। कुछ लोगों को थकान का अनुभव हो सकता है। कुछ महिलाएं इस चरण के बाद आगे की सेक्शुअल एक्टिविटी (Sexual activity) के लिए भी तुरंत तैयार रहती हैं यानी वह मल्टीपल ऑर्गेज्म (Multiple orgasm) का अनुभव कर सकती हैं, जबकि आमतौर पर पुरुषों को सामान्य होने और दोबारा यौन संबंध बनाने के लिए तैयार होने में वक्त लगता है इसे रिफ्रैक्टरी पीरियड (Refractory period) कहा जाता है, इसका मतलब है कि इस दौरान वह दोबारा ऑर्गेज्म तक नहीं पहुंच सकते। रिफ्रैक्टरी पीरियड (Refractory period) का समय हर किसी में अलग-अलग होता है और इस पर उम्र का भी असर होता है।

    क्या हर कोई एक जैसे ही सेक्शुअल रिस्पॉन्स साइकल (Sexual response cycle) से गुजरता है?

    नहीं, सेक्शुअल रिस्पॉन्स साइकल (Sexual response cycle) का हर किसी का अनुभव एक-सा नहीं होता। कुछ महिलाओं का ऑर्गेज्म का अनुभव नहीं होता तो कोई बहुत अधिक उत्तेजित नहीं हो पाता। किसी को सेक्स की इच्छा (Desire) उत्तेजना (Arousal) के चरण के बाद महसूस होती है। यानी यह हर व्यक्ति में अलग हो सकता है और किसी चरण का समय भी एक समान नहीं होता। हर व्यक्ति को सेक्शुअल फेज के दौरान होने वाले अपने शारीरिक और मानसिक बदलावों को नोटिस करना चाहिए।

    यदि आप सेक्शुअल रिस्पॉन्स साइकल (Sexual response cycle) पूरा नहीं करते हैं तो क्या होता है?

    यदि आप साइकल पूरा करना चाहते हैं, लेकिन नहीं कर पाते हैं तो आप निराश हो सकते हैं। साथ ही क्योंकि उत्तेजना (Arousal) से जनानंगों (genitals) में ब्लड फ्लो बढ़ता है ऐसे में ऑर्गेज्म तक नहीं पहुंच पाने पर पेल्विक कंजेशन (Pelvic congestion) या भारीपन महसूस हो सकता है।

    महिलाओं को ऑर्गेज्म तक पहुंचने में मदद करेंगी ये चीजें

    Sexual Response Cycle: सेक्सुअल रिस्पॉन्स साइकल

    पुरुषों की तुलना में महिलाओं के लिए ऑर्गेज्म (Orgasm) तक पुंहचना या इसे महसूस करना थोड़ा मुश्किल होता है। इसकी एक बड़ी वजह तो तनाव है। उन्हें ऑफिस से लेकर घर-परिवार तक की टेंशन होती है जिसकी वजह से वह सेक्शुअल एक्टिविटी (Sexual activity) को पूरी तरह से एंजॉय नहीं कर पाती। ऐसे में तनाव दूर करने की कोशिश करना तो जरूरी है ही। साथ ही पार्टनर भी इसमें उनकी मदद कर सकते हैं।

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    फोरप्‍ले (Foreplay) में ज्यादा वक्त दें

    यौन संबंध (Sex) बनाने का मतलब सिर्फ पेनिट्रेशन नहीं होता, बल्कि सेक्स की इच्छा (Sexual desire) होने पर पुरुष पार्टनर को महिला पार्टनर को उत्तेजित करने के लिए फोरप्ले में ज्यादा वक्त बिताना चाहिए, क्योंकि महिलाओं को उत्तेजित होने में थोड़ा समय लगता है। जब महिलाएं पूरी तरह उत्तेजित (Arouse) होंगी तभी ऑर्गेज्म (Orgasm) तक पहुंच जाएंगी और वैसे भी महिलाओं को पार्टनर का प्यार भरा स्पर्श बहुत पंसद आता है, क्योंकि उनके लिए सेक्स (Sex) सिर्फ शारीरिक ही नहीं भावनात्मक क्रिया भी है।

    कीगल एक्‍सरसाइज (Kegel exercise) से मदद

    पार्टनर के साथ रिश्तों को बेहतर बनाने और सेक्शुअल एक्टिविटी (Sexual activity) का भरपूर आनंद उठाने के लिए महिलाएं कुछ कीगल एक्सरसाइज कर सकती हैं, जिससे पेल्विक (Pelvic) की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं और यह एक्सरसाइज उन्हें उत्तेजित करने और ऑर्गेज्म (Orgasm) तक पहुंचने में भी मदद करता है। ब्रिज पोज, जंपिंग जैक, और स्‍क्‍वाट्स जैसी एक्सरसाइज घर पर भी की जा सकती है। ये सेक्स के क्‍लाइमेक्‍स को और बेहतर बनाने में मदद करते हैं।

    कामोत्तेजक अंगों को छूना

    महिलाओं और पुरुषों दोनों को एक-दूसरे के उत्तेजक अंगों के बारे में पता होना चाहिए इससे सेक्स का आनंद बढ़ जाता है। महिलाओं के उत्तेजक अंगों को छूने या सहलाने से वह जल्दी उत्तेजित हो जाती हैं। उनके कामोत्तेजक अंगों में शामिल है गर्दन, कान के पीछे का हिस्‍सा, पैर का निचला हिस्सा आदि।

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    सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के टिप्स

    कपल्स को करीब लगाने के साथ ही बेहतर सेक्स लाइफ उनके रिश्ते को भी मजबूत बनाती है। लेकिन इसके लिए दोनों पार्टनर को कुछ बातों का ध्यान रखने की जरूरत है।

    बेडरूम में न लाएं तनाव- बात चाहे ऑफिस की हो या घर की अंतरंग पलों के दौरान तनाव वाली बातें न करें, क्योंकि इससे आपकी सेक्स लाइफ पर असर पड़ता है। इसके विपरित यदि अंतरंग पलों का आनंद लेते हैं तो यह स्ट्रेस बस्टर का काम करता है।

    रोमांस बनाए रखें- सिर्फ बिस्तर पर ही नहीं, जब भी समय मिलें पार्टनर को प्यार जताना न भूलें। क्योंकि रोमांस ही सेक्स लाइफ को रोमांचक और जवां बनाए रखता है। इसके लिए पार्टनर के साथ कभी-कभार कैंडल लाइट डिनर पर जाएं, उन्हें कोई रोमांटिक तोहफा दें या प्यार से गले लगाएं।

    बातचीत बंद न करें- बिजी लाइफ से थोड़ा समय निकालकर अकेले में बात करें। कोई समस्या होने पर एक-दूसरे से बातचीत करके ही हल निकाला जाता है। वरना खामोश रहने पर पार्टनर के बीच गलफहमियां बढ़ जाती हैं और इसका सेक्स लाइफ पर असर पड़ता है।

    तनाव कम करें- तनाव सेक्स लाइफ का दुश्मन है। इसे कम करने के लिए मेडिटेशन प्रैक्टिस के साथ ही म्यूजिक सुनें और अपना पसंदीदा कोई काम करें।

    सेक्स पर बात- सेक्शुअल एक्टिविटी के दौरान पार्टनर की कौन सी बात या हरकत आपको ज्यादा पसंद आती है इस बारे में उन्हें बताएं। इससे उन्हें भी लगेगा कि आप सेक्स में दिलचस्पी ले रही हैं।

    एक्सपेरिमेंट- एक ही पोजिशन ट्राई करते रहने से सेक्स लाइफ बोरिंग हो जाती है। ऐसे में जगह बदलने के साथ ही अलग-अलग सेक्स पोजिशन ट्राई करें। सेक्स लाइफ को रोमांचक बनाने के लिए सेक्स टॉयज का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

    सेक्शुअल रिस्पॉन्स साइकल (Sexual Response Cycle) सेक्शुअल एक्टिविटी के दौरान होने वाले शारीरिक और भावनात्मक बदलाव है जिन्हें क्रमबद्ध किया गया है, लेकिन जरूरी नहीं कि हर कोई इसी क्रम में अंतरंग पलों का आनंद लें। सेक्शुअल प्लेजर हर किसी के लिए अलग हो सकता है। इसके लिए जरूरी है पार्टनर का एक-दूसरे को समझना और सहज रहना।

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    Toshini Rathod द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 16/06/2021 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड