टीचर्स डेः आसान नहीं टीसर्च की जॉब, आपको पढ़ाने के लिए इतना कुछ सहते हैं वो

By Medically reviewed by Dr Sharayu Maknikar

घंटों क्लास रूम में खड़े होकर पढ़ाना। सभी बच्चों को सुनाई दे इसलिए तेज आवाज में पढ़ाते रहना। ब्लैक बोर्ड पर बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए लिखते रहना। हर दिन ऐसी कड़ी दिनचर्या से गुजरने के बाद भी टीचर कभी अपने स्टूडेंट्स को अपनी समस्याएं नहीं बताते। हम पढ़कर आगे बढ़ जाते हैं पर क्या आपने कभी सोचा है कि बच्चों का भविष्य सवांरते हुए टीचर्स को किन हेल्थ प्रॉब्लम्स का सामना करना पड़ता है। आज टीचर्स डे के मौके पर हम आपको बता रहे हैं कि कैसे एक टीचर आपको सफल बनाने के लिए क्या-क्या सहते हैं।

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टीचर्स को होने वाली हेल्थ प्रॉबल्म्स

जितना हम सोचते हैं, टीचर्स की जॉब उससे कई ज्यादा मुश्किल होती है। एक टीचर को आमतौर पर इन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता हैः

1.वेरिकोस वेंस की समस्या

वैरिकोस वेंस की समस्या उन शारीरिक समस्याओं में से एक है, जो दिखाई नहीं देती है और अक्सर लोग इन्हें अनदेखा भी कर देते हैं। क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि आपके पैर या शरीर के किसी अन्य अंग की नस में अचानक से अकड़न आ जाती है। अगर हां, तो इसी समस्या को वेरिकोस वेंस कहते हैं। लंबे समय तक (लगभग 3 से 4 घंटे) खड़े रहने से, या फिर एक ही जगह पर खड़े रहने से पीठ में दर्द, मांसपेशियों में दर्द, पैर में सूजन, थकान और शरीर के अन्य अंग में दर्द की समस्या हो सकती है। वैरिकोस वेंस की समस्या की वजह से ह्रदय की समस्या भी हो सकती है।

2.गले में खराश की समस्या

लगातार बात करने या फिर तेज गति से पढ़ाने के दौरान टीचर्स को गले में खराश की समस्या हो सकती है। इसके अलावा टीचर्स की आवाज पूरी क्लास में सुनाई दे, इसलिए उनको बहुत ही ऊंची में बोलना और पढ़ाना होता है जिसके कारण गले से जुड़ी समस्याएं हो सकती है। इससे बचने के लिए टीचर्स ताली बजाने या सीटी के माध्यम से भी अपने निर्देश बच्चों तक पहुंचा सकते हैं।

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3.सिरदर्द की ससमस्या

अध्यापकों को बच्चों की कॉपी चेक करने के दौरान लगातार कई घंटों तक काम करना पड़ सकता है। साथ ही एक ही जगह में बिना रूके ध्यान लगाने से सिर दर्द की समस्या भी हो सकती है। इससे बचने के लिए हर तीन या चार कॉफी चेक करने के बाद पांच मिनट का ब्रेक लेना चाहिए।

4.आंख में समस्या

एक टीचर को एक साथ कई बच्चों को हैंडल करना होता है। टीचर्स को बहुत अधिक ध्यान देकर बच्चों को पढ़ने की जरूरत होती है। इससे उनकी आंखों में खिंचाव आ सकता है। इससे बचने के लिए वे 20-20-20 नियम का पालन का तरीका आजमा सकते हैं। यानी हर 20 मिनट में कम से कम 20 सेकंड के लिए कम से कम 20 फीट की दूरी से देखें।

5.एलर्जी

पढ़ाते समय टीचर्स आज भी चॉक का इस्तेमाल किया करते हैं। कुछ टीचर्स को चॉक डस्ट से एलर्जी की समस्या हो सकती है।

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6. पीठ में दर्द की समस्या

लगातार खड़े रहने से पीठ दर्द की समस्या हो सकती है। पीठ दर्द के कारण खड़े होने या फिर बैठने में समस्या होती है। टीचर्स खड़े होकर क्लास में कई चक्कर लगाते हुए बच्चों को पढ़ाते हैं और उन पर नजर रखते हैं। ऐसे में उनका शरीर काफी ऊर्जा भी खर्च करता है। बहुत लंबे समय तक खड़े रहने से न केवल पैरों में बल्कि पीठ में भी दर्द होने की समस्या हो सकती है।

7.तनाव

माने या न मानें, लेकिन एक समय ऐसा भी रहा ही होगा जब आप अपने टीचर्स के तनाव का कारण रहे होंगे। आमतौर पर हर एक छात्र अपने टीचर्स को स्ट्रेस देते ही हैं। कुछ छात्र विशेष रूप से अपनी चिंता या व्यवहार संबंधी समस्याओं या विशेष आवश्यकताओं के कारण पढ़ाने के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। ऐसे में स्ट्रेस फ्री रहने के लिए शिक्षकों को कोशिश करनी चाहिए की उनकी क्लास में छात्रों की कम संख्या हो। साथ ही, उन्हें नियमित तौर पर योग भी करना चाहिए।

8.सुनने की क्षमता प्रभावित होना

स्वीडेन के गोथेनबर्ग विश्वविद्यालय में किए गए एक अध्ययन में कहा गया है कि 10 में से 7 शिक्षकों को अपनी नौकरी के दौरान या बाद में सुनने में परेशानी की समस्या से गुजरना होता है। क्योंकि शिक्षकों को नियमित रूप से ऊंची और तेज आवाज में बच्चों को पढाना होता है। उन्हें शांत कराने के लिए भी टीचर्स को ऊंची आवाज में ही बोलना रहता है। जिसके कारण उनके सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है और उन्हें टिनिटस (कान बजने की समस्या) यानी हमेशा कानों में कोई आवाज सुनने की भी समस्या हो सकती है।

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9.हाई ब्लड प्रेशर की समस्या

आपको जानकर हैरानी होगी कि आप अपने टीचर्स को जो भी तनाव देते हैं, उसके कारण उनका ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और उन्हें हाई ब्लड प्रेशर की समस्या भी हो सकती है।

10.बिमार होने पर भी पढ़ाना

आपने कई बार देखा भी होगा कि छोटी-मोटी बीमारी या सर्दी-खांसी होने पर भी आपके टीचर्स आपको पढ़ाने के लिए स्कूल आते हैं। लेकिन, उनकी यही छोटी बीमारी को बार-बार अनदेखा करना कई बार उनके स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी समस्या भी बन जाती है। जिसके कारण उन्हें गंभीर संक्रमण से भी गुजरना पड़ सकता है।

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हो जाता है मानसिक तनाव

ये सुनने में थोड़ा अजीब लगेगा लेकिन टीचर्स को मानसिक तनाव भी हो सकता है। फोर्टिस हॉस्पिटल कोलकाता के साइकैट्रिस्ट डाॅ. संजय गर्ग ने ‘हैलो स्वास्थ्य’ से टीचर्स की मानसिक समस्याओं के बारे में बात की। डाक्टर कहते हैं कि आज के समय में हाई एक्सपेक्टेशन के कारण टीचर्स पर प्रेशर बहुत ज्यादा आ गया है। पैरेन्ट्स को 99 परसेंट रिजल्ट चाहिए। आजकल का टीचिंग कल्चर भी बदल गया है। कई बार टीचर्स स्टूडेंट्स के बिहेवियर को कंट्रोल नहीं कर पाती हैं। सेक्शुअल एब्यूज भी मेंटल टेंशन का कारण हो सकता है। क्लास की परफॉमेंस, खुद की कम आंकी जा रही क्षमता या फिर स्टूडेंट्स का खराब रवैया टीचर्स में मानसिक तनाव को बढ़ा रहा है।

ऊपर दी गई सलाह किसी भी चिकित्सा को प्रदान नहीं करती हैं। इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए कृपया अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

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रिव्यू की तारीख अगस्त 26, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया दिसम्बर 25, 2019

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