World Polio Day: पोलियो क्या है, जानें इसके लक्षण और इलाज

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट अक्टूबर 1, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
अब शेयर करें

पोलियो एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो गंभीर रूप में नर्वस सिस्टम पर अटैक करती है। इस बीमार का कारण पोलियो वायरस है। यह वायरस एक मरीज से दूसरे मरीज में फैलता है और गंभीर मामलों में मस्तिष्क तथा रीढ़ की हड्डी तक को नुकसान पहुंचाता है। कुछ मामलों में  इस संक्रमण के कारण सांस लेने में परेशानी होती है और कभी-कभी यह मौत का कारण भी बन सकता है। भारत में वाइल्ड पोलियो वायरस का आखिरी केस 2011 में  18 माह की रुखसार खातून में रिपोर्ट हुआ था। रुखसार का जन्म पश्चिम बंगाल के हावड़ा में हुआ था। पोलियो के खिलाफ विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अभियान की शुरूआत की थी। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, 80 के दशक में दुनिया के 125 देशों में पोलियो के कारण हर साल 3.50 लाख मरीज लकवाग्रस्त हो रहे थे। वहीं 2017 में यह आंकड़ा घटकर महज 22 रह गया। अमेरिका में स्वाभाविक रूप से पोलियो होने का आखिरी मामला 1979 में रिकॉर्ड किया गया था। पोलियो को खत्म करने के लिए लगातार हो रहे प्रयास के बावजूद आज भी एशिया और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में पोलियो वायरस बच्चों और वयस्कों को प्रभावित करता है।

रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (The Centers for Disease Control and Prevention,CDC) पोलियो से बचने के लिए सावधानी बरतने की सलाह देता है। अगर आप कहीं ऐसी जगह यात्रा कर रहे हैं जहां लोगों को पोलियो है, तो पोलियो का खतरा हो सकता है। जिन लोगों को पोलियो का टीका लगाया गया है और जो उस क्षेत्र की यात्रा करने की योजना बनाते हैं ,जहां पोलियो हो रहा है। उन्हें इम्यूनिटी बूस्टर पोलियोवायरस वैक्सीन (आईपीवी) की एक खुराक लगवानी चाहिए। एक बूस्टर को लगाने से काफी समय तक इम्यूनिटी ठीक रहती है।

पोलियो फ्री इंडिया: 

भारत को WHO द्वारा पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में 27 मार्च 2014 को पोलियो-मुक्त सर्टिफिकेशन प्राप्त हुआ। भारत में पोलियो का आखिरी मामला 2011 में रिपोर्ट हुआ था और इसे 8 साल हो गए हैं। पोलियो को रोकने में सबसे कठिन माने जाने वाले देश में पिछले आठ साल में एक भी केस सामने न आना मील का पत्थर माना जाता है।

पोलियो के लक्षण

हालांकि, पोलियो के कारण लकवा और मौत हो सकती है। लेकिन, वायरस से संक्रमित अधिकांश लोग बीमार नहीं पड़ते हैं और उन्हें पता नहीं होता है कि वे संक्रमित हो गए हैं। इसलिए पोलियो पीड़ित को किसी भी संक्रमण से बच कर रहना चाहिए। दरअसल संक्रमण की वजह से अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। 

और पढ़ें : चिकनगुनिया (Chikungunya) के नई वैक्सीन को रेफ्रिज्रेट करने की आवश्यकता नहीं; रिसर्च

नॉनपैरालिटिक पोलियो

कुछ लोग जिनमें पोलियो वायरस के लक्षण होते हैं वे नॉनपैरालिटिक प्रकार के पोलियो से पीड़ित होते हैं, जिससे लकवा नहीं होता। यह आमतौर पर एक हल्के फ्लू जैसे लक्षण और अन्य वायरल बीमारियों के लक्षणों का कारण बनता है।

लक्षण, जो 10 दिनों तक रह सकते हैं

पैरालिटिक पोलियो

पोलिया का यह सबसे गंभीर और दुर्लभ रुप है। पैरालिटिक पोलियो के शुरुआती लक्षण जैसे बुखार और सिरदर्द अक्सर नॉन पैरालिटिक पोलियो की तरह होते हैं। हालांकि, एक हफ्ते के अंदर दूसरे लक्षण दिखाई देते हैं, जिनमें शामिल हैं:

और पढ़ें : त्वचा के इस गंभीर रोग से निपटने के लिए मिल गयी है वैक्सीन

पोस्ट-पोलियो सिंड्रोम

पोस्ट-पोलियो सिंड्रोम के कारण पोलियो होने के कुछ सालों के बाद लोगों को यह प्रभावित करता। इसके लक्षणों में शामिल हैं:

कैसे फैलता है पोलियो

  • पोलियो वाले किसी व्यक्ति द्वारा बनाए हुए खाने से
  • सीवेज के माध्यम से अनट्रीटेड वॉटर से जो पोलियो वायरस से दूषित हो गया हो
  • पोलियो वायरस से संक्रमित व्यक्ति के नाक और गले के डिस्चार्ज के संपर्क में आने से

और पढ़ें : बच्चे का वैक्सिनेशन, जानें कब और कौन सा वैक्सीन है जरूरी?

जोखिम 

पोलियो मुख्य रूप से 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। हालांकि, जिस किसी को टीका नहीं लगाया गया है, उसे बीमारी विकसित होने का खतरा ज्यादा होता है। इसलिए बच्चे को आवश्यक वैक्सीन दिलवायें। 

कॉन्प्लिकेशन

पैरालिटिक पोलियो से अस्थायी या स्थायी मसल पैरालिसिस, विकलांगता, हड्डी विकृति और आखिरी में मौत होने की आशंका रहती है। इसलिए डॉक्टर के बताये गये सलाह का पालन करें और समय-समय पर डॉक्टर से मिलते रहें। 

बचाव

पोलियो से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका टीकाकरण है।

इलाज

पोलियो का कोई इलाज नहीं है, केवल लक्षणों को कम करने के लिए उपचार हैं। हीट और फिजिकल थैरेपी का उपयोग मांसपेशियों के दर्द को कम करने के लिए किया जाता है और मांसपेशियों को आराम देने के लिए एंटीस्पास्मोडिक दवाएं(antispasmodic drugs) दी जाती हैं। हालांकि यह लक्षण को कम कर सकता है, यह स्थायी पोलियो को ठीक नहीं कर सकता।

पोलियो को टीकाकरण के माध्यम से रोका जा सकता है। पोलियो वैक्सीन, कई बार दिया जाता है, इसको देने से बच्चा जीवन भर के लिए सुरक्षित हो सकता है।

पोलियो के लिए सबसे सामान्य ट्रीटमेंट क्या है?

इसके लिए डॉक्टर पेशेंट को निम्नलिखित सलाह देते हैं। जैसे-

  • आराम करने की सलाह (बेड रेस्ट) डॉक्टर पेशेंट को देते हैं
  • दर्द से राहत मिलने की दवा लेने की सलाह दी जाती है। ये दर्द की दवाएं डॉक्टर ही प्रिस्क्राइब करते हैं
  • मसल्स को आराम देने के लिए एंटीस्पास्मोडिक ड्रग्स
  • यूरिनरी ट्रेक इंफेक्शन से बचने के लिए एंटीबायोटिक दवा
  • सांस लेने में सहायता हो इसलिए पोर्टेबल वेंटिलेटर की मदद दी जा सकती है
  • फिजिकल थेरिपी
  • करेक्टिव ब्रेसेस जिससे चलने में सहायता हो सके और परेशानी कम हो
  • मांसपेशियों में दर्द और ऐंठन को कम करने के लिए हीटिंग पैड या गर्म तौलिये से सेकने की सलाह दी जाती है 
  • पोलियो से बचाव का सबसे अच्छा तरीका टीकाकरण है। बच्चों को टीकाकरण अवश्य करवाएं। इसकी जानकारी शिशु के जन्म के बाद ही दे दी जाती है कि बच्चे को कब-कब कौन सी वैक्सीन दी जायेगी। 

अगर आप पोलियो से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

क्या यह आर्टिकल आपके लिए फायदेमंद था?
happy unhappy
सूत्र

शायद आपको यह भी अच्छा लगे

Fever : बुखार क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

जानिए बुखार (Fever) की जानकारी in hindi,निदान और उपचार, बुखार के क्या कारण हैं, लक्षण क्या हैं, घरेलू उपचार, जोखिम फैक्टर, Fever का खतरा, जानिए जरूरी बातें।

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Ankita Mishra
हेल्थ कंडिशन्स, स्वास्थ्य ज्ञान A-Z जून 2, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें

Tick Bite: टिक बाइट क्या है?

जानिए टिक बाइट क्या है in hindi, टिक बाइट के कारण और लक्षण क्या है, tick bite को ठीक करने के लिए क्या उपचार है जानिए यहां।

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pooja Daphal
के द्वारा लिखा गया Kanchan Singh
हेल्थ कंडिशन्स, स्वास्थ्य ज्ञान A-Z अप्रैल 30, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

मलेरिया से जुड़े मिथ पर कभी न करें विश्वास, जानें फैक्ट्स

जानिए मलेरिया से जुड़े मिथ और फैक्ट्स क्या हैं, Myths and Facts about Malaria in hindi, मलेरिया से जुड़े मिथ से कैसे दूर रहें, Malaria se jude myths, malaria se kaise bachav kareien, मलेरिया से कैसे बचें।

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Surender Aggarwal
स्वास्थ्य बुलेटिन, लोकल खबरें अप्रैल 25, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

जानें शिशु को घमौरी होने पर क्या करनी चाहिए?

जानें शिशु को घमौरी क्यों होती है और इसका कारण क्या है। साथ ही पढ़ें इसके घरेलू उपचार व लक्षणों के बारे। Heat rashes in babies in hindi.

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Shivam Rohatgi
बच्चों की देखभाल, पेरेंटिंग अप्रैल 14, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

Recommended for you

बच्चों के लिए ओट्स

बच्चों के लिए ओट्स, जानें यह बच्चों की सेहत के लिए कितना है फायदेमंद

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Satish singh
प्रकाशित हुआ अगस्त 18, 2020 . 7 मिनट में पढ़ें
बच्चे का मल

बच्चे का मल कैसे शिशु के सेहत के बारे में देता है संकेत

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pooja Daphal
के द्वारा लिखा गया Satish singh
प्रकाशित हुआ जुलाई 17, 2020 . 9 मिनट में पढ़ें
वायल बुखार के घरेलू उपाय

वायरल बुखार के घरेलू उपाय, जानें इस बीमारी से कैसे पायें निजात

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Satish singh
प्रकाशित हुआ जुलाई 14, 2020 . 6 मिनट में पढ़ें
अन्नप्राशन

क्या है अन्नप्राशन संस्कार, कब और किस तरीके से करना चाहिए, क्या है इसके नियम

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Satish singh
प्रकाशित हुआ जुलाई 6, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें