डायबिटीज एक लाइफटाइम समस्या है जिसके लक्षणों को मैनेज करना बेहद आवश्यक है। अगर एक बार किसी व्यक्ति में इस समस्या का निदान होता है, तो उसके बाद उसे अपने जीवन में हेल्दी बदलाव लाने चाहिए। अगर इसकी सही से मैनेजमेंट न की जाए तो यह कई गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। डायबिटीज के कई प्रकार हैं जैसे टाइप 1 डायबिटीज, टाइप 2 डायबिटीज और जेस्टेशनल डायबिटीज। डायबिटीज चाहे कोई भी हो, रोगी के लिए हेल्दी हैबिट्स अपनाना जरूरी है, जिनमें फिजिकल एक्टिविटी भी शामिल है। आज हम बात करने वाले हैं टाइप 1 डायबिटीज पेशेंट्स के लिए फिजिकल एक्टिविटी में बैरियर्स (Barriers to Physical Activity Among Type 1 Diabetes Patients) के बारे में। किंतु, टाइप 1 डायबिटीज पेशेंट्स के लिए फिजिकल एक्टिविटी में बैरियर्स से पहले टाइप 1 डायबिटीज (Barriers to Physical Activity Among Type 1 Diabetes Patients) के बारे में जान लेते हैं।
टाइप 1 डायबिटीज किसे कहा जाता है? (Type 1 diabetes)
इस को जुवेनाइल डायबिटीज (Juvenile diabetes) और इंसुलिन-डिपेंडेंट डायबिटीज के नाम से भी जाना जाता है। यह एक क्रॉनिक कंडिशन है, जिसमें रोगी के पैंक्रियाज कम या बिलकुल भी इंसुलिन नहीं बना पाते हैं। इंसुलिन उस हॉर्मोन को कहा जाता है, जो शुगर (ग्लूकोज) को एनर्जी पैदा करने के लिए सेल्स में एंटर करने में मदद करता है। कई फैक्टर्स जैसे जेनेटिक या कुछ वायरस भी टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) का कारण बन सकते हैं। हालांकि, टाइप 1 डायबिटीज के लक्षण आमतौर पर बचपन या किशोरावस्था में नजर आ सकते हैं। किंतु, वयस्कों में भी यह समस्या विकसित हो सकती है।
जुवेनाइल डायबिटीज (Juvenile diabetes) का कोई इलाज नहीं है। किंतु इसके उपचार का फोकस ब्लड शुगर लेवल के मैनेजमेंट, सही डायट या लाइफस्टाइल पर होता है, ताकि जटिलताओं से बचा जा सके। टाइप 1 डायबिटीज पेशेंट्स के लिए फिजिकल एक्टिविटी में बैरियर्स (Barriers to Physical Activity Among Type 1 Diabetes Patients) के बारे में जानने से पहले इसके लक्षणों के बारे में भी जान लेते हैं।
टाइप 1 डायबिटीज के लक्षण (Symptoms of type 1 diabetes)
टाइप 1 डायबिटीज के लक्षण अचानक नजर आ सकते हैं और यह लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं:
अगर आप खुद में या अपने बच्चों में इनमें से कोई भी लक्षणों को महसूस करें तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। जैसा की पहले ही बताया गया है कि टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) के लक्षणों को मैनेज करने के लिए शारीरिक एक्टिविटी बेहद जरूरी है। हम आज आपको जानकारी देने वाले हैं टाइप 1 डायबिटीज पेशेंट्स के लिए फिजिकल एक्टिविटी में बैरियर्स (Barriers to Physical Activity Among Type 1 Diabetes Patients) के बारे में। लेकिन, सबसे पहले टाइप 1 डायबिटीज पेशेंट्स के लिए फिजिकल एक्टिविटीज के महत्व को जान लेते हैं।
क्यों जरूरी है टाइप 1 डायबिटीज पेशेंट्स के लिए फिजिकल एक्टिविटीज?
नियमित फिजिकल एक्टिविटीज न केवल डायबिटीज के लक्षणों को मैनेज करने, बल्कि संपूर्ण रूप से हेल्दी रहने के लिए जरूरी है। टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए भी यह बेहद जरूरी है। क्योंकि, इससे पीड़ित लोगों द्वारा खाए जाने वाले भोजन और की जाने वाली फिजिकल एक्टिविटी साथ अपनी इंसुलिन डोजेज को बैलेंस करना बहुत महत्वपूर्ण है। नियमित व्यायाम करने से वजन भी सही रहता है, मूड सुधरता है और बेहतर स्लीप के लिए भी यह जरूरी है। लेकिन, नोट करने वाली बात यह है कि टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) से पीड़ित लोगों को एक्सरसाइज करने से पहले कई चीजों का ध्यान रखना चाहिए।
ऐसा इसलिए है क्योंकि नियमित एक्सरसाइज करने से डायबिटीज मैनेजमेंट के प्रति रोगी की एप्रोच में बदलाव आ सकता है। अधिक फिजिकल एक्टिविटी से ब्लड शुगर ड्राप हो सकता है। इससे ब्लड शुगर लेवल बहुत कम हो सकता है जिसे हायपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) कहा जाता है। यही नहीं, इंटेंस एक्सरसाइज से ब्लड शुगर लेवल बढ़ भी सकता है। अगर यह सामान्य लेवल से अधिक बढ़ जाए तो इसे हायपरग्लाइसीमिया (Hyperglycemia) कहा जाता है। इन तथ्यों के बावजूद, व्यायाम संपूर्ण स्वास्थ्य को बनाए रखने और टाइप 1 डायबिटीज मैनेजमेंट को सपोर्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
व्यायाम आपको स्वास्थ्य लक्ष्यों तक पहुंचने में मदद कर सकता है जैसे A1C टारगेट्स A1C targets, लोअर ब्लड प्रेशर (Lower blood pressure) और लेस डेली इंसुलिन। यानी, टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित लोगों को क्या एक्सरसाइज करनी चाहिए। लेकिन, इसके बारे में एक्सपर्ट या डॉक्टर से बात करनी जरूरी है। अब बात करते हैं टाइप 1 डायबिटीज पेशेंट्स के लिए फिजिकल एक्टिविटी में बैरियर्स (Barriers to Physical Activity Among Type 1 Diabetes Patients) के बारे में।

टाइप 1 डायबिटीज पेशेंट्स के लिए फिजिकल एक्टिविटी में बैरियर्स (Barriers to Physical Activity Among Type 1 Diabetes Patients)
जैसा की हम जानते ही हैं कि डायबिटीज के रोगियों के लिए व्यायाम करना बेहद जरूरी माना गया है। किंतु, जब बात आती है टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) या जुवेनाइल डायबिटीज (Juvenile diabetes) की, तो टाइप 1 डायबिटीज पेशेंट्स के लिए फिजिकल एक्टिविटी में कुछ बाधाएं भी शामिल हैं। यानी, अधिक फिजिकल एक्टिविटी करने से उन्हें कुछ समस्याएं हो सकती हैं। आइए जानें इसके बारे में।
टाइप 1 डायबिटीज पेशेंट्स के लिए फिजिकल एक्टिविटी में बैरियर्स (Barriers to Physical Activity Among Type 1 Diabetes Patients): पाएं पूरी जानकारी
नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलोटी इंफॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) के अनुसार टाइप 1 डायबिटीज पेशेंट्स के लिए फिजिकल एक्टिविटी में आने वाली बाधाओं को लेकर एक स्टडी की गई। इस स्टडी का उदेश्य टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) से पीड़ित लोगों को रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी करने से क्या समस्याएं हो सकती हैं, इस बारे में जानना था। इसमें इस समस्या से पीड़ित लगभग एक सौ वयस्कों को शामिल किया गया। उनसे इस फिजिकल एक्टिविटी के दौरान बैरियर्स और इससे संबंधित फैक्टर्स के बारे में मरीजों से सवाल पूछे गए।
इस स्टडी में यह पाया गया कि मरीजों में हायपोग्लाइसीमिया ( Hypoglycemia) का भय इस दौरान फिजिकल एक्टिविटी के लिए स्ट्रॉन्गेस्ट बैरियर है। इंसुलिन फार्माकोकाइनेटिक्स (insulin pharmacokinetics) के बारे में अधिक जानकारी और एक्सरसाइज-इंड्यूज हायपोग्लाइसीमिया (Exercise-induced hypoglycemia) को कम करने के लिए सही एप्रोच का उपयोग कम महसूस किए बैरियर्स से जुड़े फैक्टर्स थे।
इस स्टडी से यह निष्कर्ष निकाला गया कि हायपोग्लाइसीमिया का डर टाइप 1 डायबिटीज यानी जुवेनाइल डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए नियमित फिजिकल एक्टिविटी का एक बड़ा बैरियर है। ऐसे में इन रोगियों को हायपोग्लाइसीमिया मैनेजमेंट के लिए सही सलाह और सपोर्ट के बारे में अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए। यह तो थी जानकारी टाइप 1 डायबिटीज पेशेंट्स के लिए फिजिकल एक्टिविटी में बैरियर्स (Barriers to Physical Activity Among Type 1 Diabetes Patients) के बारे में। अब जानते हैं कि टाइप 1 डायबिटीज को मैनेज कैसे किया जा सकता है?
और पढ़ें: टाइप 1 पेशेंट्स में हायपोग्लाइसीमिया के कारण जेंडर डिफरेंसेस के बारे में क्या यह सब जानते हैं आप?
टाइप 1 डायबिटीज को कैसे मैनेज करें?
जुवेनाइल डायबिटीज (Juvenile diabetes) यानी टाइप 1 डायबिटीज पेशेंट्स के लिए फिजिकल एक्टिविटी में बैरियर्स (Barriers to Physical Activity Among Type 1 Diabetes Patients) के साथ ही यह जानकारी होना भी जरूरी है कि टाइप 1 डायबिटीज को मैनेज करने के अन्य तरीके कौन से हैं। टाइप 1 डायबिटीज को मैनेज करने का उद्देश्य ब्लड शुगर लेवल को सामान्य बनाए रखना होता है, ताकि किसी भी तरह की कॉम्प्लिकेशन से बचा जा सके। इसके मैनेज करने के लिए आपके लिए खुद का ख्याल रखना और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना बेहद जरूरी है। इस डायबिटीज को मैनेज करने के तरीके इस प्रकार हैं:
- टाइप 1 डायबिटीज को इंसुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज इसलिए कहा जाता है। क्योंकि, इससे पीड़ित लोगों को ब्लड शुगर लेवल को मैनेज करने के लिए इंसुलिन का इस्तेमाल करना जरूरी होता है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह के अनुसार इंसुलिन लें।
- खानपान का ध्यान रखना भी टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) को मैनेज करने के लिए जरूरी है। ऐसे अपने आहार में फल, सब्जियों और अनाज आदि को अवश्य शामिल करें। इसके साथ ही डॉक्टर या डायटीशियन भी इसमें आपकी मदद कर सकते हैं।
- नियमित व्यायाम करने से भी डायबिटीज कंट्रोल करने में मदद मिलती है। किंतु, टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित लोगों को व्यायाम डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करनी चाहिए।
- तनाव से बचें। तनाव, डायबिटीज का एक रिस्क फैक्टर है। इस समस्या से राहत पाने के लिए योगा या मेडिटेशन आपके लिए मददगार हो सकते हैं। अधिक परेशानी होने पर डॉक्टर की राय भी लें।
- अपने वजन को मैनेज करें। अधिक वजन कई शारीरिक समस्याओं का कारण बन सकता है। जिसमें डायबिटीज भी शामिल है। इसके लिए अपने खानपान का ध्यान रखें और व्यायाम करें।
टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) को मैनेज करने के लिए नियमित ब्लड शुगर की जांच और डॉक्टर की सलाह का पालन करना भी बेहद जरूरी है। उम्मीद है कि टाइप 1 डायबिटीज पेशेंट्स के लिए फिजिकल एक्टिविटी में बैरियर्स (Barriers to Physical Activity Among Type 1 Diabetes Patients) के बारे में जानकारी। टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) की स्थिति में पेशेंट्स के लिए नियमित व्यायाम जरूरी है। लेकिन, इसमें कुछ बाधाएं भी आ सकती है। यानी, अधिक, कम या सही से व्यायाम न करने से ब्लड शुगर लेवल अनियंत्रित हो सकता है। ऐसे में अगर आपके मन में इसके बारे में कोई भी सवाल है तो तुरंत डॉक्टर से इस बारे में बात करें।