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लिवर डिजीज और टाइप 1 डायबिटीज: जानिए कैसे मैनेज करें इन कंडीशंस को!

लिवर डिजीज और टाइप 1 डायबिटीज: जानिए कैसे मैनेज करें इन कंडीशंस को!

लिवर हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण ऑर्गन है, जो कई शारीरिक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका एक महत्वपूर्ण काम है ब्लड में ग्लूकोज कंसंट्रेशन को कंट्रोल करने में मदद करना यानी ब्लड ग्लूकोज लेवल (Blood Glucose level) को रेगुलेट करना। एक हेल्दी लिवर ब्लड शुगर लेवल के उतार -चढाव को कंट्रोल करता है क्योंकि हाय ब्लड शुगर लेवल (High Blood Sugar level) और लो ब्लड शुगर लेवल (Low blood sugar level) दोनों ही ह्यूमन बॉडी के लिए हानिकारक है। अगर ब्लड शुगर लेवल को सही समय पर कंट्रोल न किया जाए, तो यह कई कॉम्प्लीकेशन्स का कारण बन सकती है जैसे लिवर डिजीज। आज हम बात करने वाले हैं लिवर डिजीज और टाइप 1 डायबिटीज (Liver disease and type 1 diabetes) के बारे में। जानिए लिवर डिजीज और टाइप 1 डायबिटीज (Liver disease and type 1 diabetes) के बारे में विस्तार से। लेकिन, सबसे पहले टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 diabetes) के बारे में थोड़ा जान लेते हैं।

टाइप 1 डायबिटीज क्या है? (Type 1 diabetes)

यह बात तो आप जानते ही होंगे कि डायबिटीज एक गंभीर बीमारी है। यह मुख्यतया दो तरह की होती है एक टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 diabetes) और दूसरी टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 diabetes)। अगर बात की जाए टाइप 1 डायबिटीज की, तो यह एक क्रॉनिक डिजीज है जिसमें हमारे पैंक्रियास कम या बिलकुल भी इन्सुलिन नहीं बना पाते हैं। यह स्थिति आमतौर पर किशोरावस्था में नजर आती है। इसका इलाज संभव नहीं है। इन्सुलिन इंजेक्शन एकमात्र मेडिकेशन है, जिसका इस स्थिति में प्रयोग किया जाता है। इसके साथ ही इस समस्या से राहत पाने के लिए आपको अपने लाइफस्टाइल में भी परिवर्तन करने चाहिए। टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 diabetes) के उपचार की करंट स्ट्रेटेजीज में इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy), रिप्लेसमेंट थेरेपी (Replacement Therapy) और कॉम्बिनेशन थेरेपी (Combination therapy) आदि भी शामिल हैं। अब जानिए टाइप 1 डायबिटीज के लक्षण (Symptoms of Type 1 diabetes) क्या हैं?:

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टाइप 1 डायबिटीज के लक्षण (Symptoms of type 1 diabetes)

टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 diabetes) में हमारा शरीर इन्सुलिन की कमी के कारण ग्लूकोज को प्रोसेस करने में सक्षम नहीं होता है। ऐसे में, आपके फ़ूड से ग्लूकोज सेल्स तक नहीं पहुंच पाता है। इसके कारण ब्लड में बहुत अधिक ग्लूकोज रह जाता है। इस हाय ब्लड ग्लूकोज लेवल (High blood glucose level) के कारण कई शार्ट टर्म और लॉन्ग टर्म प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। टाइप 1 डायबिटीज के लक्षण (Symptoms of Type 1 diabetes) इस प्रकार हो सकते हैं:

  • अधिक भूख (Excessive hunger)
  • अधिक प्यास (Excessive thirst)
  • नजर का कमजोर होना (Blurred vision)
  • थकावट (Fatigue)
  • लगातार पेशाब आना (Frequent urination)
  • कम समय में अधिक वजन का कम होना (Weight loss in short period of time)

यह तो थे इस समस्या के सामान्य लक्षण। इसके गंभीर लक्षणों में सांस का तेज होना, त्वचा का रुखा होना या मुंह का सुखना, मुंह से फ्रूटी स्मेल आना, जी मिचलाना, उल्टी आना या पेट में दर्द आदि शामिल है। ऐसी स्थितियों में तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। अब जानते हैं कि लिवर डिजीज और टाइप 1 डायबिटीज (Liver disease and type 1 diabetes) में क्या कनेक्शन है?

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लिवर डिजीज और टाइप 1 डायबिटीज

लिवर डिजीज और टाइप 1 डायबिटीज में क्या लिंक है? (Liver disease and type 1 diabetes)

ऐसा माना जाता है टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 diabetes) से पीड़ित लोगों में क्रॉनिक लिवर डिजीज (Chronic liver disease) के विकसित होने की संभावना अधिक होती है, जिसमें सिरॉसिस (Cirrhosis) भी शामिल है। आइए जानते हैं लिवर डिजीज और टाइप 1 डायबिटीज (Liver disease and type 1 diabetes) के बीच के कनेक्शन के बारे में।

नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज और टाइप 1 डायबिटीज (Non-Alcoholic fatty liver disease and Type 1 diabetes)

डायबिटीज के कारण नॉन-एलकोहॉलिक फैटी लिवर (Non-Alcoholic fatty liver) डिजीज का खतरा बढ़ जाता है। जो एक ऐसी स्थिति हैं जिसमें चाहें आप एल्कोहॉल का सेवन करते हों या नहीं करते हों, उसके बाबजूद भी लिवर में अधिक फैट बिल्ड हो जाता है। यह स्थिति टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 diabetes) से टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 diabetes) से पीड़ित लोगों में अधिकतर पाई जा सकती है। हालांकि, यह भी स्पष्ट नहीं है कि यह स्थिति समान्य लोगों की तुलना में टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 diabetes) से पीड़ित लोगों में अधिक नजर आती है या नहीं। कुछ अन्य मेडिकल स्थितियां जैसे हाय कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर भी नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर (Non-Alcoholic fatty liver) डिजीज के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। यह दोनों स्थितियां डायबिटीज के रिस्क फैक्टर्स में शामिल है।

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फैटी लिवर डिजीज और टाइप 1 डायबिटीज (Fatty liver disease and Type 1 diabetes)

दूसरी तरफ फैटी लिवर डिजीज की स्थिति में अधिकतर लोगों को कोई भी लक्षण नजर नहीं आता है लेकिन इससे लिवर इंफ्लेमेशन (Liver inflammation) या सिरॉसिस (Cirrhosis) की संभावना बढ़ जाती है। यही नहीं, इसे लिवर कैंसर (Liver cancer), हार्ट डिजीज (Heart Disease) और किडनी डिजीज (Kidney disease) के बढ़ते जोखिम के साथ भी लिंक किया जाता है। फैटी लिवर भी टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 diabetes) की तुलना में टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 diabetes) की डेवलपमेंट में महत्चपूर्ण भूमिका निभाता है।

अगर किसी रोगी को डायबिटीज (Diabetes) और फैटी लिवर (Fatty Liver) दोनों समस्याएं होती हैं और इस स्थिति में वो ब्लड शुगर को सही से मैनेज नहीं कर पाते हैं, तो उनकी फैटी लिवर डिजीज बदतर हो सकती है। यही नहीं, शार्ट टर्म में टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 diabetes) से पीड़ित लोगों के ब्लड शुगर लेवल पर एल्कोहॉल बहुत अधिक प्रभाव ड़ाल सकती है।

लिवर और एल्कोहॉल (Liver and Alcohol)

समय के साथ अत्यधिक शुगर का सेवन करने से डायबिटीज से जुडी कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ सकती हैं। हमारा लिवर शरीर से एल्कोहॉल की प्रोसेसिंग और उसे रिमूव करने के लिए जिम्मेदार होता है। यही नहीं, यह ब्लड शुगर लेवल को मैनेज करने में भी शामिल है। अगर आपको टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 diabetes) है और आप एल्कोहॉल का सेवन करते हैं, तो आपका शरीर एल्कोहॉल से डील करने के लिए ब्लड शुगर की मैनेजमेंट को धीमा कर देता है। इससे एल्कोहॉल के सेवन के तुरंत बाद या बारह घंटे तक ब्लड शुगर कम हो सकती है। ऐसे में एल्कोहॉल के सेवन से पहले और बाद में ब्लड शुगर टेस्ट (Blood Sugar test) करना जरूरी है।

फैटी लीवर और टाइप 1 डायबिटीज (Liver disease and type 1 diabetes) के बीच में अन्य कनेक्शन भी है। डायबिटीज एक मेटाबोलिक डिसऑर्डर है और ऐसा माना जाता है कि जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर होती है, उन्हें यह समस्या होती है। फैटी लिवर की स्थिति में रोगी का मेटाबॉलिज्म कमजोर हो जाता है। इस वजह से डायबिटीज का जोखिम बढ़ जाता है। अब जानिए कि किस तरह से मैनेज किया जा सकता है लिवर डिजीज और टाइप 1 डायबिटीज (Liver disease and type 1 diabetes) को?

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लिवर डिजीज और टाइप 1 डायबिटीज को कैसे मैनेज करें? (Management of Liver disease and type 1 diabetes)

अगर आपको टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 diabetes) की समस्या है और आप लिवर डिजीज से बचना चाहते हैं, तो जरूरी है समय-समय पर डायबिटीज की जांच करना और डॉक्टर की सलाह का पालन करना। मेडलाइनप्लस (MedlinePlus) के अनुसार ब्लड टेस्ट से इस चीज को जांचा जा सकता है कि आपको डायबिटीज है या नहीं। अगर आपको टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 diabetes) है, तो आपको अपने पूरे जीवन में इन्सुलिन की जरूरत हो सकती है। अगर आपको टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 diabetes) है तो आप अपने लिवर को सुरक्षित रखने और नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर (Non-Alcoholic fatty liver) डिजीज से बचाव के लिए कई तरीकों को अपना सकते हैं। यह तरीके इस प्रकार हैं:

लिवर डिजीज और टाइप 1 डायबिटीज में हेल्दी फूड (Healthy Food)

ब्लड शुगर लेवल को सही बनाये रखने के लिए सबसे जरूरी है सही आहार का सेवन करना। इसके लिए आपको ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जो आपके ब्लड शुगर लेवल को मेंटेन रखें। आपको इस दौरान क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, इस बारे में आपके डॉक्टर या डायटीशियन भी आपकी मदद कर सकते हैं। अधिक चीनी युक्त और प्रोसेस्ड आहार को खाने से बचें।

वजन को रखें सही (Keep Right Weight)

अगर आपका वजन अधिक है तो अपने वजन को कम करें, क्योंकि मोटापे से डायबिटीज के साथ साथ लिवर संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। इसके लिए आप व्यायाम करें, अपने खानपान का ध्यान रखें और डॉक्टर की सलाह लें।

लिवर डिजीज और टाइप 1 डायबिटीज में रोजाना व्यायाम करें (Regular Exercise)

अगर आप लिवर डिजीज और टाइप 1 डायबिटीज (Liver disease and type 1 diabetes) को मैनेज करना चाहते हैं तो आपके लिए व्यायाम करना बेहद जरूरी है। दिन में कुछ समय एक्सरसाइज के लिए जरूर निकालें। कम से कम दिन में तीस मिनट सैर करना भी आपके लिए लाभदायक हो सकता है।

एल्कोहॉल से बचें (Avoid Alcohol)

अगर आप एल्कोहॉल का सेवन करते हैं तो या तो इसे पूरी तरह से बंद कर दें या फिर सीमित मात्रा में करें। क्योंकि, एल्कोहॉल लिवर संबंधी समस्याओं का एक कारण हो सकता है। इसके साथ ही अन्य स्वस्थ आदतों को भी अपनाएं जैसे तनाव से बचें, पर्याप्त नींद लें आदि। तनाव और नींद से संबंधित समस्याएं गंभीर भी हो सकती हैं। अगर आपको लगता है कि यह समस्या गंभीर है तो डॉक्टर से जांच अवश्य कराएं। यही नहीं, अपने ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) को सही बनाए रखें। इसके साथ ही लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन (Low-density lipoprotein) कोलेस्ट्रॉल और हाय ट्राइग्लिसराइड्स (High Triglycerides) लेवल को भी कंट्रोल में रखें।

लिवर डिजीज और टाइप 1 डायबिटीज (Liver disease and type 1 diabetes) को मैनेज करने का सबसे बेहतरीन तरीका है नियमित रूप से डायबिटीज की जांच करना, ब्लड शुगर लेवल को मैनेज करने और डॉक्टर की सलाह का पूरी तरह से पालन करना। अगर आपको डायबिटीज है तो डॉक्टर आपको लिवर के लिए अल्ट्रासाउंड टेस्ट (Ultrasound test) कराने की सलाह भी दे सकते हैं। इसके साथ ही आपको लिवर फंक्शन (Liver Function) को मॉनिटर करने के लिए नियमित रूप से ब्लड टेस्ट की सलाह भी दी जा सकती है।

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उम्मीद है कि लिवर डिजीज और टाइप 1 डायबिटीज (Liver disease and type 1 diabetes) के बारे में यह जानकारी आपको पसंद आई होगी। अगर टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) के किसी रोगी को कोई लिवर डिजीज जैसे फैटी लिवर की समस्या है, तो वो इसे नजरअंदाज न करें बल्कि जल्दी से इसका उपचार कराएं अन्यथा यह स्थिति घातक साबित हो सकती है। इन समस्याओं को मैनेज करने के लिए आपको सबसे पहले इनके लक्षणों को पहचनना होगा ताकि आप जटिलताओं से बच सकें। अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से सलाह लेना न भूलेंअगर आपके मन में कोई भी सवाल है तो आप हमारे फेसबुक पेज पर भी अपने सवालों को पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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सूत्र

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Liver – fatty liver disease. https://www.betterhealth.vic.gov.au/health/conditionsandtreatments/liver-fatty-liver-disease

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AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट एक हफ्ते पहले को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड