Prinzmetal Angina: चेस्ट पेन हो सकता है प्रिंजमेटल एंजाइना का संकेत, जानिए इस समस्या के बारे में विस्तार से

    Prinzmetal Angina: चेस्ट पेन हो सकता है प्रिंजमेटल एंजाइना का संकेत, जानिए इस समस्या के बारे में विस्तार से

    मेडलाइनप्लस (MedlinePlus) के अनुसार एंजाइना, उस चेस्ट पेन या डिस्कम्फर्ट को कहा जाता है, जो कोरोनरी आर्टरी में स्पाज्म के कारण होते हैं। यानी, जब हमारी हार्ट मसल्स में पर्याप्त रक्त प्रवाह नहीं होता है, तो इस समस्या का अनुभव हो सकता है। एंजाइना तेज चेस्ट पेन और प्रेशर की तरह महसूस होती है। एंजाइना के एक प्रकार को प्रिंजमेटल एंजाइना (Prinzmetal Angina) के नाम से जाना जाता है, जो कोरोनरी आर्टरी में स्पाज्म के कारण होती है। इसके अन्य नाम वेरिएंट एंजाइना (variant angina) या वेसॉपस्टिक एंजाइना(Vasospastic angina) भी हैं। इसके लक्षणों में छाती में दर्द शामिल है जो रात को होती है जब आप आराम कर रहे होते हैं। संक्षेप में कहा जाए तो प्रिंजमेटल एंजाइना (Prinzmetal Angina), एंजाइना का एक दुर्लभ और गंभीर प्रकार है। आइए अब जानते हैं इस समस्या के बारे में विस्तार से।

    प्रिंजमेटल एंजाइना और एंजाइना के बीच में क्या अंतर है?

    एंजाइना की समस्या तब होती है अब आप कोई मेहनत वाला काम करते हैं या आपको कोई इमोशनल स्ट्रेस होता है। लेकिन प्रिंजमेटल एंजाइना (Prinzmetal Angina) जैसी परेशानी तब होती है जब आप रेस्ट या रिलेक्स कर रहे होते हैं। यह समस्या अधिकतर कम उम्र और हेल्दी लोगों को होती है। यह परेशानी महिलाओं या पुरुषों में किसी को भी प्रभावित कर सकती है। यह परेशानी उन लोगों को भी हो सकती है जिन्हें ब्लड वेसल स्पाज्म से जुड़ीं हुई अन्य कंडिशंस हों जैसे माइग्रेन, सिरदर्द आदि। यही नहीं, प्रिंजमेटल एंजाइना (Prinzmetal Angina) जिन लोगों को हाय कोलेस्ट्रॉल लेवल या हाय ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं हैं, उन्हें भी हो सकती है। आइए जानें क्या हैं इस रोग के लक्षण?

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    प्रिंजमेटल एंजाइना के लक्षण (Symptoms of Prinzmetal Angina)

    प्रिंजमेटल एंजाइना (Prinzmetal Angina) के बारे में की गई स्टडीज के अनुसार यह समस्या हेरेडिटरी भी हो सकती है। हालांकि, कुछ स्टडीज यह भी बताती है कि इस कंडिशन के कुछ जेनेटिक फैक्टर भी कारण हो सकते हैं। इसके कारणों के बारे में विस्तार में जानने से पहले इसके लक्षणों के बारे में जानकारी होना जरूरी है। अगर आपको यह समस्या है तो उसके लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं:

    • रेस्ट करते हुए चेस्ट पेन (Chest Pain) या डिस्कम्फर्ट की फीलिंग, आमतौर पर ऐसा मिडनाईट और सुबह आठ बजे के करीब होता है। यह दर्द बाजू, सिर और कंधे तक मूव कर सकती है।
    • पेन के रिकरंट एपिसोड्स, जो पांच से लेकर पंद्रह मिनटों तक या इससे भी अधिक समय तक रह सकते हैं।
    • इस दौरान होने वाली दर्द आमतौर पर रेस्ट करते हुए, रात को या अर्ली मॉर्निंग होती है। यही नहीं यह दर्द अधिकतर गंभीर होती है।
    • इसके अन्य लक्षणों में पसीना आना, जी मिचलाना या चक्कर आना आदि भी शामिल हैं। इन लक्षणों में दवा लेने के बाद आराम मिल जाता है। अब जानिए क्या हैं इसके कारण?

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    प्रिंजमेटल एंजाइना के कारण (Causes of Prinzmetal Angina)

    जैसा की पहले ही बताया गया है कि यह समस्या कोरोनरी आर्टरीज (Coronary arteries ) या उन आर्टरीज के स्पाज्म के कारण होती ,है जो हार्ट तक ब्लड और ऑक्सीजन ले जाती है। ऑक्सीजन की कमी के कारण इसमें दर्द महसूस हो सकती है। अगर यह समस्या अधिक समय तक रहे, तो हार्ट मसल्स में डैमेज का कारण बन सकती है। ऐसी कई चीजें है जो आपके हार्ट में आर्टरीज में स्पाज्म का कारण बन सकती हैं। यह समस्या इस प्रकार हैं :

    • दवाईयां (Medications) जो ब्लड वेसल को कंस्ट्रिक्ट यानि नेरौ कर सकती हैं जैसे माइग्रेन ट्रीटमेंट (Migrain treatment)।
    • इलीगल ड्रग्स (Use of drugs) का इस्तेमाल जैसे मारिजुआना (Marijuana) और कोकीन (Cocaine)
    • तंबाकू का इस्तेमाल (Smoking tobacco)
    • स्ट्रेस (Stress)
    • ठंड (Exposure to cold)
    • एक्सरसाइज (Exercise)

    यह तो थे प्रिंजमेटल एंजाइना (Prinzmetal Angina) के कुछ कारण। अब जान लेते हैं इसके निदान और उपचार के बारे में।

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    प्रिंजमेटल एंजाइना का निदान कैसे संभव है? (Diagnosis of Prinzmetal Angina)

    प्रिंजमेटल एंजाइना (Prinzmetal Angina) का निदान करने के लिए डॉक्टर सबसे पहले रोगी से इस समस्या के लक्षणों के बारे में जानेंगे। डॉक्टर को रोगी की मेडिकल हिस्ट्री के बारे में भी पता होना चाहिए। इसके साथ ही रोगी को निम्नलिखित टेस्ट्स की सलाह भी दी जा सकती है जैसे

    • स्ट्रेस टेस्ट (Stress test)
    • कोरोनरी एंजियोग्राफी (Coronary angiography)
    • एम्बुलेटरी इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (Ambulatory electrocardiogram)

    क्योंकि, ब्लॉक्ड आर्टरीज जैसी हार्ट प्रॉब्लम का कोई सबूत नहीं हो सकता है, ऐसे में डॉक्टर रोगी को एसिटाइलकोलिन (Acetylcholine) या एर्गोनोविन (Ergonovine) जैसे पदार्थों का उपयोग करके प्रिंज़मेटल एंजाइना (Prinzmetal Angina) के एक एपिसोड को प्रोवोक की कोशिश कर सकते हैं। इसके बाद वो देखेंगे कि प्रिंजमेटल एंजाइना (Prinzmetal Angina) के एपिसोड के दौरान रोगी को क्या समस्या होती है। इस दौरान स्पाज्म को प्रोवोक किया जाता है, इसलिए डॉक्टर इस बात पर ध्यान देते है कि आप कैसा महसूस करते हैं और इन एपिसोड्स के दौरान ECG कराने पर क्या होता है।

    इस रोग के कारण हार्ट अटैक (Hear attack) होना सामान्य नहीं है। लेकिन, इसके कारण हार्ट मसल्स को परमानेंट डैमेज हो सकता है। हालांकि, इस रोग के सही ट्रीटमेंट से कई कॉम्प्लीकेशन्स का रिस्क कम हो सकता है। यही नहीं, सही उपचार के बाद इससे पीड़ित लोग एक हेल्दी लाइफ जी सकते हैं। अब जानिए इसके उपचार के बारे में।

    प्रिंजमेटल एनजाइना

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    प्रिंजमेटल एंजाइना का उपचार (TreatmentPrinzmetal Angina)

    प्रिंजमेटल एंजाइना (Prinzmetal Angina) का उपचार दवाइयों और लाइफस्टाइल में बदलाव आदि से संभव है। इस तरह की ड्रग्स का इस्तेमाल इस समस्या का उपचार संभव है जैसे:

    • नाइट्रेट्स (Nitrates): इन्हें सबलिंगुअल टेबलेट्स (Sublingual tablets), ओरल टेबलेट्स (Oral tablets), कैप्सूल्स (Capsules) या पैचेज के रूप में दिया जा सकता है।
    • कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स (Calcium channel blockers): इन दवाईयों में डिल्टियाजम (Diltiazem), एम्लोडीपिन (Amlodipine), निकार्डिपिन (Nicardipine) आदि शामिल हैं।
    • फ्लूवास्टैटिन (Fluvastatin) : यह एक स्टैटिन मेडिकेशन है, जिसका ब्लड वेसल्स की लायनिंग पर पॉजिटिव इफेक्ट पड़ता है।

    बीटा ब्लॉकर (Beta blockers) और एस्पिरिन (Aspirin) जैसी मेडिकेशन्स का इस्तेमाल अन्य हार्ट कंडिशंस में किया जा सकता है, लेकिन प्रिंजमेटल एंजाइना (Prinzmetal Angina) में इनका प्रयोग नहीं होता। अब जान लेते हैं जीवनशैली में बदलाव के बारे में।

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    जीवनशैली में बदलाव

    अपनी जीवनशैली में बदलाव करने से भी इस समस्या को मैनेज किया जा सकता है। स्मोकिंग और कुछ चीजों को नजरअंदाज करना इस समस्या से राहत पाने में लाभदायक है क्योंकि यह चीजें स्पाज्म का कारण बन सकती हैं। यह समस्याएं इस प्रकार हैं:

    • ड्रग्स जैसे मारिजुआना या कोकीन
    • दवाईयां जो ब्लड वेसल्स को कंस्ट्रिक्ट करती हैं, जैसे कई माइग्रेन ट्रीटमेंट, नेजल डिकंजेस्टेंट, वेट लॉस मेडिकेशन्स (Weight loss medications) और एनर्जी ड्रिंक्स (Energy drinks)। यह दवाईयां भी इस कंडिशन का कारण बन सकती हैं।

    इसके साथ ही सही आहार का सेवन करना और नियमित व्यायाम करना भी जरूरी है। इसमें डॉक्टर और डायटीशियन आपकी मदद कर सकते हैं। हार्ट हेल्दी डायट लेने और व्यायाम करने से ब्लॉक्ड आर्टरीज के डेवलप होने को रोका जा सकता है। तनाव से बचाव भी जरूरी है। यही नहीं रोगी को डॉक्टर की सलाह का पूरी तरह से पालन करना चाहिए। ताकि, इस समस्या के लक्षणों को मैनेज किया जा सके। अब जानते हैं कि इस समस्या से बचाव कैसे किया जा सकता है?

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    प्रिंजमेटल एंजाइना की संभावना को कैसे कम किया जा सकता है? (Prevention of Prinzmetal Angina)

    जैसे की पहले ही बताया गया है कि इस समस्या के लक्षणों जैसे चेस्ट पेन को मैनेज करने और इससे बचाव के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाना बेहद जरूरी है। इसके लिए हेल्दी आहार का सेवन करें, व्यायाम करें, हेल्दी वेट को मेंटेन रखें, पर्याप्त नींद लें, स्ट्रेस को मैनेज करें आदि। इसके साथ ही अगर आप इस समस्या की संभावनाओं से बचना चाहते हैं तो :

    • स्मोकिंग न करें (Don’s Smoke)
    • कोकीन जैसी इलीगल ड्रग्स के सेवन से बचें Avoid illegal drugs)
    • अन्य सब्सटांस जैसे एफेड्रिन (Ephedrine) का इस्तेमाल भी न करें क्योंकि यह वेसल्स स्पाज्म का कारण बन सकती है। इसके साथ ही किसी भी दवा को लेने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

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    यह तो थी प्रिंजमेटल एंजाइना (Prinzmetal Angina) के बारे में जानकारी। यह कंडिशन घातक नहीं है। यह भी समझ लें कि एंजाइना एक लक्षण है, रोग नहीं। यह इस बात का संकेत हो सकती है कि आपके हार्ट तक ब्लड फ्लो में समस्या आ रही है। आगे चल कर इसका परिणाम हार्ट अटैक (Heart attack) या अन्य गंभीर समस्या हो सकती है। प्रिंजमेटल एंजाइना (Prinzmetal Angina) का होना हालांकि दुर्लभ है। लेकिन, अगर आप किसी भी तरह की चेस्ट पेन का अनुभव करें तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। ताकि सही समय पर इस समस्या का निदान और उपचार संभव हो सके। ऐसे में इसके लक्षणों को पहचाना और सही उपचार जरूरी है।

    अगर आप में प्रिंजमेटल एंजाइना (Prinzmetal Angina) का निदान हुआ है तो अपने जीवनशैली में बदलाव करना, सही दवाईयों का सेवन करना और डॉक्टर की सलाह का पालन करना बेहद जरूरी है। अगर इस समस्या से जुड़ा कोई भी सवाल आपके मन में है तो डॉक्टर से इस बारे में अवश्य जान लें। आप हमारे फेसबुक पेज पर भी अपने सवालों को पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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    AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 04/01/2022 को
    Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड