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दिल के साथ-साथ हार्ट वॉल्व्स का इस तरह से रखें ख्याल!

दिल के साथ-साथ हार्ट वॉल्व्स का इस तरह से रखें ख्याल!

दिल हमारे शरीर का एक मस्कुलर ऑर्गन है, जो सर्कुलेटरी सिस्टम की ब्लड वेसल्स के माध्यम से रक्त पंप करता है। हमारा दिल यानी हार्ट एक मिनट में 60 से लेकर 100 बार धड़कता है। यह हर एक धड़कन के साथ शरीर में खून भेजता है, जो हर सेल तक ऑक्सीजन ले कर जाता है। खून ऑक्सीजन को कोशिकाओं तक पहुंचाने के बाद फिर से हार्ट तक वापस आ जाता और हमारा दिल खून को फेफड़ों तक और अधिक ऑक्सीजन लाने के लिए भेजता है। यह तो था हार्ट के काम करने का तरीका। लेकिन, क्या आप हार्ट वॉल्व और उससे जुड़ी समस्याओं के बारे में जानते हैं? आइए जानते हैं, हार्ट वॉल्व डिसऑर्डर्स (Heart Valve Disorders) के बारे में विस्तार से:

हार्ट वॉल्वस क्या हैं? (What are Heart Valves)

हार्ट वॉल्व डिसऑर्डर्स (Heart Valve Disorders) के बारे में जानने से पहले जानते हैं कि हार्ट वॉल्वस हैं क्या? हमारे हार्ट में चार चैम्बर्स होते हैं जो 2 -एट्रिया (अपर चैम्बर्स) और 2 वेंट्रिकल्स (लोअर चैम्बर्स) हैं। इसमें एक वॉल्व होता है, दिल के हर चैम्बर से बाहर निकलने से पहले खून इस वॉल्व से होकर गुजरता है। वॉल्वस खून के बैकवर्ड फ्लो को रोक सकते हैं। ये वॉल्व वास्तव में वो फ्लैप हैं, जो दो वेंट्रिकल्स के हर सिरे पर स्थित होते हैं। वे वेंट्रिकल के एक तरफ खून के लिए वन वे इलेट्स (One-Way Inlets) के रूप में कार्य करते हैं और एक वेंट्रिकल के दूसरी तरफ के खून के लिए वन वे आउटलेट (One-Way Outlets) के रूप में काम करते हैं। यह चार हार्ट वॉल्व इस प्रकार हैं:

यह भी पढ़ें : हार्ट वॉल्व का क्या होता है काम? जानिए हार्ट वॉल्व से जुड़ी समस्याओं के बारे में

  • ट्राइकसपिड वॉल्व (Tricuspid valve) : ट्राइकसपिड वॉल्व दाहिने एट्रियम (Right Atrium) और दाहिने वेंट्रिकल (Right Ventricle) के बीच स्थित होता है।
  • पल्मोनरी वॉल्व (Pulmonary Valve) : पल्मोनरी वॉल्व दाहिने वेंट्रिकल (Right Ventricle) और पल्मोनरी आर्टरी (Pulmonary Artery) यानी धमनी के बीच में स्थित होता है।
  • मायट्रल वॉल्व (Mitral valve) : मायट्रल वॉल्व बाएं एट्रियम (Atrium) और बाएं वेंट्रिकल (Ventricle) के बीच में स्थित होता है।
  • एओर्टिक वॉल्व (Aortic valve) : एओर्टिक वॉल्व बाएं वेंट्रिकल और महाधमनी (Aorta) के बीच में स्थित होता है।

देखिए हार्ट से जुड़ा ये खास 3डी मॉडल –

हार्ट वॉल्वस कैसे काम करते हैं? (Heart Valves Functions)

जैसे- जैसे हमारी हार्ट मसल्स सिकुड़ती हैं और आराम करती हैं, वैसे ही यह वॉल्व खुलते और बंद होते हैं। हर हार्टबीट के साथ खून जो शरीर और फेफड़ों से वापस आता है, एट्रिया में भर जाता है, जो दिल के दो ऊपर के चैम्बर्स हैं। माइट्रल और ट्राइकसपिड वॉल्व इन चैम्बर्स के नीचे स्थित होते हैं। जैसे ही खून एट्रिया में जाता है, ये वॉल्व रक्त को वेंट्रिकल्स में प्रवाहित होने देते हैं। थोड़ी देर के बाद, जैसे ही वेंट्रिकल्स सिकुड़ने लगते हैं, माइट्रल और ट्राइकसपिड वॉल्व कसकर बंद हो जाते हैं। इससे रक्त वापस एट्रिया में बहने से रुक जाता है। जैसे-जैसे वेंट्रिकल्स सिकुड़ती हैं, वे पल्मोनरी और एओर्टिक वॉल्व के माध्यम से रक्त पंप करती हैं।

पल्मोनरी वॉल्व खुलता है, जिससे खून दाएं वेंट्रिकल से पल्मोनरी धमनी में प्रवाहित होता है। यह धमनी ऑक्सीजन प्राप्त करने के लिए फेफड़ों तक रक्त पहुंचाती है। उसी समय एओर्टिक वॉल्व खुल जाते हैं ताकि खून बाएं वेंट्रिकल से महाधमनी में प्रवाहित हो सके। महाधमनी शरीर को ऑक्सीजन युक्त रक्त पहुंचाती है। जैसे ही वेंट्रिकल्स आराम करते हैं, पल्मोनरी और एओर्टिक वॉल्व कसकर बंद हो जाते हैं। इससे रक्त वापस वेंट्रिकल में जाने से बच जाता है।

हार्ट वॉल्व डिसऑर्डर्स कौन से हैं? (Heart Valve Disorders)

अब हम बात करते हैं हार्ट वॉल्व डिसऑर्डर्स के बारे में। हार्ट वॉल्व डिसऑर्डर्स (Heart Valve Disorders) वो रोग होते हैं, जिसके कारण हमारे हार्ट का एक या एक से अधिक वॉल्व सही से काम नहीं करते हैं। दिल के चार वॉल्व सही दिशा में ब्लड फ्लो को बनाए रखने का काम करते हैं। लेकिन, कुछ मामलों में एक या एक से अधिक वॉल्व सही से खुल या बंद नहीं हो पाते। इससे दिल से शरीर तक ब्लड फ्लो में समस्या आ सकती है। हार्ट वॉल्व डिसऑर्डर्स (Heart Valve Disorders) इस प्रकार हैं:

रिगर्जटेशन (Regurgitation)

रिगर्जटेशन को वॉल्व में लीकेज होना भी कहा जाता है। जब एक या एक से अधिक वॉल्व अच्छे से बंद नहीं होते हैं। जिसके कारण वॉल्व से खून बैकवर्ड फ्लो कर सकता है। इसके परिणामस्वरूप वेंट्रिकल्स (माइट्रल और ट्राइकसपिड वॉल्व के मामले में) से वापस एट्रिया में रक्त का रिसाव होता है या वेंट्रिकल में रक्त लीक होता है (एओर्टिक और पल्मोनरी वॉल्व के मामले में)।

स्टेनोसिस (Stenosis)

स्टेनोसिस को वॉल्व का नैरो यानी तंग हो जाना भी कहा जा सकता है। जब वॉल्व जहां से खुलता है, वो ओपनिंग तंग हो जाती है या वॉल्व को कोई नुकसान होता है। तो वेंट्रिकल्स या एट्रिया से रक्त के प्रवाह रुक जाता है। इससे हार्ट ब्लड को पंप करने के लिए अधिक फाॅर्स की जरूरत होती है, ताकि यह खून तंग वॉल्व से मूव कर सके।

हार्ट वॉल्व एक ही समय में दोनों डिसऑर्डर का शिकार हो सकते है। यही नहीं, एक समय में एक से अधिक हार्ट भी प्रभावित हो सकते हैं। जब हार्ट वॉल्व सही से खुलने और बंद होने में असफल होते हैं। तो दिल के लिए काम करना मुश्किल हो सकता हैं। जिससे हार्ट की रक्त पंप करने की क्षमता में बाधा आ सकती है। हार्ट वॉल्व की समस्याएं हार्ट फेलियर का एक कारण हो सकती हैं।

मायट्रल वाल्व प्रोलैप्स (Mitral valve prolapse)

मायट्रल वाल्व प्रोलैप्स को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है जैसे फ्लॉपी वाल्व सिंड्रोम (Floppy Valve Syndrome), बैलून मायट्रल वाल्व (Balloon Mitral Valve) आदि। यह तब होता है जब मायट्ल वाल्व अच्छे से बंद नहीं होता है, कभी-कभी खून बाएं एट्रियम में वापस चला होता है। इस डिसऑर्डर में अधिकतर लोगों को कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं और न ही उपचार की जरूरत होती है।

बाकस्पिड एओर्टिक वाल्व डिजीज (Bicuspid Aortic Valve Disease)

बायकस्पिड एओर्टिक वाल्व डिजीज तब होती है जब किसी व्यक्ति के जन्म से ही एओर्टिक वाल्व में तीन की जगह दो फ्लैप्स हों। गंभीर मामलों में, इस तरह के डिसऑर्डर के लक्षण जन्म से ही दिखाई देते हैं। हालांकि कई लोगों को सालों तक इस बात का पता नहीं चलता है कि उन्हें ऐसी कोई बीमारी है।

हार्ट वाल्व डिसऑर्डर्स

हार्ट वॉल्व डिसऑर्डर्स के लक्षण (Symptoms of Heart Valve Disorders)

नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टिट्यूट (National Heart, Lung and Blood Institute) के अनुसार हार्ट वॉल्व डिसऑर्डर्स (Heart Valve Disorders) से पीड़ित बहुत से लोग किसी भी लक्षण का अनुभव नहीं करते हैं। इन हार्ट के रोग से पीड़ित कुछ लोगों की स्थिति पूरी उम्र सही रहती है और उन्हें कोई समस्या नहीं होती। यानी, उनमें माइल्ड से लेकर मॉडरेट हार्ट डिजीज में कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं। हालंकि, इसके कुछ लक्षण इस प्रकार हैं:

  • छाती में दर्द (Chest Pain)
  • दिल की धड़कन अनियमित होने के कारण पेलपिटेशन (Palpitations caused by Irregular Heartbeats)
  • थकावट (Fatigue)
  • चक्कर आना (Dizziness)
  • ब्लड प्रेशर का बढ़ना या कम होना (Low or High Blood Pressure) : यह वॉल्व डिसऑर्डर पर निर्भर करता है।
  • सांस लेने में समस्या (Shortness of Breath)
  • एंलार्जड लिवर के कारण पेट में दर्द (Abdominal Pain due to an Enlarged Liver)
  • टांग में सूजन (Leg Swelling)

हार्ट वॉल्व डिसऑडर्स के लक्षण किसी अन्य मेडिकल समस्या के समान भी हो सकते हैं। इसलिए निदान के लिए डॉक्टर की सलाह लें।

Heart Valve Disorders

कारण और रिस्क फैक्टर (Causes and Risk Factors)

हार्ट वॉल्व डिसऑर्डर्स (Heart Valve Disorders) कई बार जन्म के साथ ही होते हैं। यह बीमारियां कई कारणों और स्थितियों जैसे संक्रमण और अन्य हार्ट कंडीशंस की वजह से वयस्कों में भी हो सकती हैं। हार्ट वॉल्व समस्याओं के कारण इस तरह से हैं:

रीगरजीटेशन (Regurgitation)

इस स्थिति में वॉल्व फ्लिप होते हैं और अच्छे से बंद नहीं हो पाते। जिससे हार्ट बैकवर्ड लीक होता है। यह परेशानी आमतौर पर वॉल्व फ्लैप्स की बल्जिंग के कारण होती है, एक स्थिति जिसे प्रोलैप्स (Prolapse) कहा जाता है।

स्टेनोसिस (Stenosis)

स्टेनोसिस में, वॉल्व थिक या कठोर होता है। इससे संकुचित वॉल्व खुल जाता है और वॉल्व के माध्यम से रक्त के प्रवाह को कम हो जाता है।

अट्रेसिआ (Atresia)

इस स्थिति में, वॉल्व नहीं बनता है, और टिश्यू की एक ठोस शीट हार्ट चैम्बर्स के बीच ब्लड फ्लो को अवरुद्ध करती है। हार्ट वॉल्व डिसऑर्डर्स (Heart Valve Disorders) से जुड़े रिस्क फैक्टर इस प्रकार हैं:

  • अधिक उम्र (Older Age)
  • कुछ इन्फेक्शन की हिस्ट्री होना जो दिल को प्रभावित करती हैं (History of Certain Infections that can Affect Heart)
  • हार्ट अटैक या हार्ट की बीमारियों की हिस्ट्री होना (History of Certain Forms of Heart Disease or Heart Attack)
  • हाय ब्लड प्रेशर, हाय कोलेस्ट्रॉल,डायबिटीज और अन्य हार्ट समस्याएं (High Blood Pressure, High Cholesterol, Diabetes and other Heart Disease Risk Factors)
  • कॉन्जेनिटल हार्ट डिजीज (Congenital Heart Disease)

यह भी पढ़ें : Heart Infections: दिल को संक्रमण से बचाने के लिए इन लक्षणों को न करें इग्नोर

हार्ट डिजीज डिसऑर्डर्स का निदान (Diagnosis of heart valve disease)

हार्ट वॉल्व डिसऑडर्स (Heart Valve Disorders) के निदान के लिए डॉक्टर स्टेथोस्कोप से रोगी की दिल की धड़कन को जांचेंगे। यह हार्ट वॉल्व डिसऑडर्स (Heart Valve Disorders) के निदान का पहला स्टेप है। इसके साथ ही आपकी मेडिकल हिस्ट्री और अन्य लक्षणों को भी पूछा जाएगा। हार्ट मर्मर (Heart Murmur) जो हार्ट की एक एब्नार्मल आवाज है, अक्सर वॉल्व; रिगर्जटेशन(Valve Regurgitation) या स्टेनोसिस के कारण हो सकती है। वॉल्व के रोग और वॉल्व डैमेज के बारे में जानने के लिए डॉक्टर आपको यह टेस्ट कराने के लिए कह सकते हैं

  • इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (Electrocardiogram)
  • इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram )
  • ट्रांसइसोफेजिअल इकोकार्डियोग्राम (Transesophageal Echocardiogram )
  • चेस्ट एक्स-रे (Chest X-ray)
  • कार्डियक कैथेटेराइजेशन (Cardiac Catheterization)
  • मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (Magnetic Resonance Imaging )

हार्ट वॉल्व डिसऑर्डर का उपचार (Treatment for Heart Valve Disorders)

कुछ मामलों में डॉक्टर कुछ समय के लिए हार्ट वॉल्व से संबंधित समस्याओं को मॉनिटर करते हैं। हालांकि, हार्ट वॉल्व डिसऑर्डर्स (Heart Valve Disorders) के उपचार के लिए दवाइयां, सर्जरी से लेकर वॉल्व की रिपेयर या रिप्लसेमैंट भी किए जा सकते हैं। हार्ट वॉल्व डिसऑर्डर के प्रकार के अनुसार ही इसका उपचार संभव है जो इस तरह से है

दवाइयां (Medicines)

दवाइयां हार्ट वॉल्व डिसऑर्डर्स (Heart Valve Disorders) को सही नहीं करती हैं। लेकिन यह लक्षणों से छुटकारा पाने का अच्छा तरीका है। यह दवाइयां इस प्रकार हैं:

  • बीटा ब्लॉकर्स (Beta-blockers), डिजोक्सिन (digoxin) और कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स, हार्ट रेट को कंट्रोल कर के और असामान्य हार्ट रिदम को दूर करके हार्ट वॉल्व डिसऑर्डर्स (Heart Valve Disorders) के लक्षणों को कम करने में मदद करती हैं।
  • ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने वाली दवाइयां जैसे डाइयुरेटिक्स (Diuretics) या वासोडिलेटर (Vasodilator) का प्रयोग किया जा सकता है, ताकि हार्ट का काम आसान हो सके।

सर्जरी (Surgery)

सर्जरी की जरूरत खराब वॉल्व की रिपेयर या उन्हें रिप्लेस करने के लिए पड़ सकती है। सर्जरी में यह सब शामिल है:

यह भी पढ़ें : Heart Valve Replacement: हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट क्या है?

हार्ट वॉल्व रिपेयर (Heart Valve Repair)

कुछ मामलों में खराब वॉल्व की सर्जरी से लक्षण कम किए जा सकते हैं। जैसे हार्ट वॉल्व रिपेयर सर्जरी जिसमें रिमॉडलिंग एब्नार्मल वॉल्व टिश्यू शामिल है, ताकि वॉल्व सही से काम करे। प्रोस्थेटिक रिंग्स (prosthetic rings) का प्रयोग भी किया जा सकता है, ताकि डिलेटेड वॉल्व को नेरौ या तंग करने में मदद मिले। कई मामलों में, हृदय वॉल्व की रिपेयर एक बेहतर तरीका माना जाता है, क्योंकि इसमें रोगी के स्वयं के ऊतकों का उपयोग किया जाता है।

हार्ट वॉल्व रिप्लेसमेंट (Heart Valve Replacement)

जब हार्ट वॉल्व बहुत अधिक खराब हो जाते हैं तो उन्हें नए वॉल्व के साथ रिप्लेस कर दिया जाता है। यह रिप्लेसमेंट वॉल्व वो टिश्यू वॉल्व हो सकते हैं, जिनमें जानवरों और डोनटेड ह्यूमन एओर्टिक वॉल्व (Donated Human Aortic Valve) शामिल है। यह मैकेनिकल वॉल्व भी हो सकते हैं जो मेटल, प्लास्टिक या अन्य आर्टिफिशियल मटेरियल से बने होते हैं। .

लेकिन, कुछ वॉल्व रोगों जैसे एओर्टिक वॉल्व स्टेनोसिस (Aortic Valve Stenosis) या माइट्रल वॉल्व रीग्रेजेशन (Mitral Valve Regurgitation) का गैर-सर्जिकल तरीकों से भी इलाज किया जा सकता है। एक अन्य उपचार जो वॉल्व रिपेयर या रिप्लेसमेंट की तुलना में कम प्रभावी है, उसे बैलून वॉल्वुलोप्लास्टी (Balloon Valvuloplasty) कहा जाता है। यह एक नॉन सर्जिकल तरीका है। इस का उपयोग कभी-कभी पल्मोनरी स्टेनोसिस और कुछ मामलों में, एओर्टिक स्टेनोसिस (Aortic Stenosis) के इलाज के लिए किया जाता है।

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हार्ट वॉल्व डिसऑर्डर्स को मैनेज करने के लिए जीवनशैली में क्या बदलाव करें? (Heart Valve Disorders and Change in Lifestyle)

अपने हार्ट को हेल्दी बनाने और हार्ट वॉल्व डिसऑर्डर्स (Heart Valve Disorders) को मैनेज करने के लिए आप अपने लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव ला सकते हैं। यह बदलाव आपकी दिनचर्या या खानपान से जुड़े हो सकते हैं। जानिए इनके बारे में विस्तार से:

एल्कोहॉल का कम या बिलकुल भी सेवन न करें (Avoiding or Limiting Alcohol)

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (American Heart association) के अनुसार अगर आप एल्कोहॉल का सेवन करते हैं, तो इससे हार्ट संबंधित रोगों को बढ़ावा मिलता है। इसलिए, एल्कोहॉल का बिलकुल भी सेवन न करें या इसका सेवन सीमित मात्रा में करें।

रोजाना तरल की मात्रा को नोटिस करें (Notice Daily Fluid Intake)

यदि आपको हार्ट फेलियर की समस्या है, तो आपके शरीर में तरल की मात्रा बनाए रखना सामान्य है। इसलिए आपके डॉक्टर आपके लिक्विड इन्टेक को सीमित करने की सिफारिश कर सकते हैं। अपने डॉक्टर से सलाह लें कि आपको रोजाना कितनी मात्रा में तरल पदार्थों को लेना है।

खाएं हार्ट हेल्दी डायट (Eating a Heart-Healthy Diet)

अपने दिल को स्वस्थ रखने के लिए विभिन्न फल और सब्जियों, लौ फैट या फैट फ्री डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे साबुत अनाज, मछली आदि का सेवन करना चाहिए। लेकिन, अधिक चीनी या नमक, सैचुरेटेड या ट्रांस फैट का सेवन करने से बचें।

वजन को रखें सही (Maintaining a Healthy Weight)

अगर आपका वजन अधिक होगा तो इससे आपके दिल को नुकसान हो सकता है। इसके लिए आप व्यायाम,योग आदि करें। डॉक्टर की सलाह भी ले सकते हैं।

नियमित शारीरिक गतिविधियां हैं जरूरी (Regular Physical Activities)

शारीरिक रूप से एक्टिव रहना बेहद जरूरी है। इसके लिए दिन में कम से कम तीस मिनट निकालें। इस समय सैर करें, साइकिलिंग करें, कोई खेल खेलें।

हार्ट वाल्व डिसऑर्डर्स

तनाव से बचें (Managing Stress)

खुद और अपने दिल को फिट रखने के लिए तनाव से बचना जरूरी है। इसके लिए आप मेडिटेशन या योग कर सकते हैं या अपने परिवार और दोस्तों के साथ अच्छा समय व्यतीत करें।

कैफीन से दूर रहने में ही है भलाई (Avoid Caffeine)

अगर आप कैफीन के शौकीन हैं तो दिल की समस्याओं से बचने के लिए आपके लिए इससे दूरी बनाना भी बेहद जरूरी है।

तम्बाकू छोड़ दें (Avoid Tobacco)

अगर आप धूम्रपान करते हैं या तम्बाकू का सेवन करते हैं तो उसे छोड़ दें। इसके लिए आपके डॉक्टर भी आपका मार्गदर्शन कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें : टॉप 10 हार्ट सप्लिमेंट्स: दिल 💝 की चाहत है ‘सप्लिमेंट्स’

हार्ट वॉल्व डिसऑर्डर्स (Heart Valve Disorders) एक लाइफलॉन्ग स्थिति है। इस समस्या की जटिलताओं से बचने के लिए लक्षणों का ध्यान रखें और अगर आपको कोई भी लक्षण नजर आता है तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। अगर आपको इससे संबंधित कोई समस्या है, तो जरूरी है कि आप भविष्य में हार्ट संबंधी समस्या न हो, इस बात को लेकर सचेत रहें व पूरी सावधानियां बरतें। इसके लिए अपने डॉक्टर की सलाह का पालन करना और हेल्दी हैबिट्स अपनाना बेहद आवश्यक है

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

लेखक की तस्वीर
Dr. Pranali Patil के द्वारा मेडिकल समीक्षा
AnuSharma द्वारा लिखित
अपडेटेड 4 weeks ago
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