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पिंसर ग्रैस्प: कितना जरूरी है शिशु की ग्रोथ का यह पड़ाव?

पिंसर ग्रैस्प: कितना जरूरी है शिशु की ग्रोथ का यह पड़ाव?

जन्म के बाद से ही शिशु का निरंतर विकास यानी ग्रोथ होती है। बच्चों की ग्रोथ के साथ ही वो विभिन्न डेवलपमेंट स्टेजेस से भी गुजरते हैं और इसके साथ ही उनमें कई नए स्किल्स भी विकसित होते हे। इन्हीं में से एक है पिंसर ग्रैस्प (Pincer Grasp), जो एक बेसिक फाइन मोटर स्किल (Basic Fine Motor Skill) है। इस फाइन मोटर स्किल्स में हाथों और उंगलियों की छोटी मसल्स शामिल होती हैं, जिससे वो चीजों का पकड़ सकते हैं और अपनी मर्जी से उनका इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे हाथों को मूवमेंट करने में आसानी होती है और इन मसल्स को मजबूती भी मिलती है ताकि बच्चे अपने रोजाना के कार्यों को आसानी से कर सकें। अगर आप पिंसर ग्रैस्प (Pincer Grasp) के बारे में नहीं जानते हैं तो कोई बात नहीं। आज हम आपको इसके बारे में पूरी जानकारी देने वाले हैं। जानिए क्या है यह बेसिक फाइन मोटर स्किल?

पिंसर ग्रैस्प क्या है? (Pincer Grasp)

पिंसर ग्रैस्प (Pincer Grasp) हाथ के अंगूठे और पहली उंगली के बीच किसी चीज को पकड़ने की क्षमता को कहा जाता है। यह स्किल आमतौर पर नौ से दस महीने के शिशुओं में विकसित होता है। लेकिन इसे जरूरी फाइन मोटर माइलस्टोन माना जाता है और बच्चे पिंसर ग्रैस्प (Pincer Grasp) का प्रयोग चीजों को उठाने में करते हैं। जैसे किसी छोटी खाने की चीज को उठाया और उसके बाद अपने मुंह ड़ाल लिया। जब बच्चे स्कूल जाना शुरू करते हैं तो इस स्किल से वो अच्छे से पेंसिल का प्रयोग करना भी सीख जाते हैं। जैसे ही वो थोड़े और बड़े होते हैं वो पूरा हाथ, हथेली और सभी उंगलियों का अच्छे से इस्तेमाल करना भी सीख जाते हैं ताकि बड़ी चीजों को उठा सकें।

जब बच्चों में ग्रैस्प पैटर्न विकसित हो जाता है तो यह बहुत अलग मूवमेंट से शुरू होता है, जिसमें पूरा हाथ या हथेली शामिल होते हैं। इस समय बच्चे लार्ज मूवमेंट पैटर्न (Large Movement Pattern) पर पहले फोकस करते हैं जैसे बैठना, क्रॉलिंग, चीजों को पकड़ कर खड़े होने की कोशिश आदि। यह सब भी बच्चों के विकास के लिए जरूरी है। अब जानिए क्या होती है इस स्किल की उम्र?

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पिंसर ग्रैस्प की उम्र (Pincer Grasp Age)

आमतौर पर आठ से नौ महीने के बच्चो में यह स्किल विकसित हो जाती है। दस से बारह महीने के बच्चों में यह स्किल और भी बेहतर हो जाता है। इसकी शुरुआत होती है जब बच्चा छोटी चीजों जैसे फिंगर फ़ूड को अपनी पहली उंगली और अंगूठे से उठा कर अपने मुंह में डालता है। जैसा की आप जानते हैं कि इस स्किल की जरूरत बच्चे को उस दौरान भी पड़ती है, जब वो स्कूल जाना शुरू करता है। उस दौरान बच्चा लिखने के लिए पेंसिल पकड़ना सीखता है। यानी, तीन साल से पांच साल की उम्र में भी इसका प्रयोग होता है।

इसके साथ ही जब बच्चा पांच से दस साल का हो जाता है तो आप यह नोटिस करेंगे कि वो पिंसर ग्रैस्प (Pincer Grasp) का प्रयोग भारी चीजों को पकड़ने और चीजों को खोलने या बंद करने में करता है। अब जानते हैं पिंसर ग्रैस्प (Pincer Grasp) के विकसित होने के पड़ावों के बारे में?

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पिंसर ग्रैस्प स्किल कैसे विकसित होता है? (Development of Pincer Grasp)

आमतौर पर बच्चे से इस स्किल के विकसित होने की उम्र एक साल के होने से पहले ही मानी गई है। हो सकता है कि आपके बच्चे में पिंसर ग्रैस्प स्किल (Pincer Grasp Skill) तब तक विकसित न हो जब तक वो एक साल का न हो जाए। लेकिन, बच्चे के एक साल का होने के तक वो कई फाइन मोटर डेवलपमेंट चरणों से गुजरता है। यह ग्रेस्पिंग माइलस्टोन्स इस प्रकार हैं:

रिफ्लेक्सिव ग्रैस्प (Reflexive grasp)

नवजात शिशु उन सब चीजों को जल्दी से मुट्ठी में बंद कर लेता है, जो भी चीजें उसके हाथ पर रखी जाती हैं। इसे पालमर रिफ्लेक्स ग्रैस्प (Palmar reflexive grasp) भी कहा जाता है। इसे आप इस स्किल का पहला पड़ाव मान सकते हैं।

क्रूड पालमर ग्रैस्प (Crude palmar grasp)

बच्चे के चार महीने के होने पर बच्चा अपने पास पड़ी चीजों को हाथों से पकड़ लेता है, इसे क्रूड पालमर ग्रैस्प (Crude palmar grasp) कहा जाता है। यही नहीं, इस दौरान बच्चा चीजों को पकड़ने की कोशिश भी करने लगता है।

अलनर पालमर ग्रैस्प (Ulnar palmar grasp)

क्रूड पालमर ग्रैस्प के बाद में बच्चे में अलनर पालमर ग्रैस्प विकसित (Ulnar palmar grasp) होता है। इस तरीके में बच्चा अंगूठे का प्रयोग न करते हुए केवल हाथों का प्रयोग कर के चीजों को पकड़ने की कोशिश करता है।

पिंसर ग्रेप्स

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रैकिंग ग्रैस्प (Raking grasp)

जब बच्चा 6 महीने का हो जाता है तो वो चीजों को उठाने के लिए रैकिंग ग्रैस्प का प्रयोग करता है। इसमें वो चीजों को उठाने के लिए एक साथ सभी उंगलियों का इस्तेमाल करता है

रेडियल पालमर ग्रैस्प (Radial palmar grasp)

पिंसर ग्रैस्प (Pincer Grasp) का अगला पड़ाव है रेडियल पालमर ग्रैस्प (Radial palmar grasp)। इसमें बच्चा पहली बार किसी चीजों को पकड़ने के लिए अपने अंगूठे का प्रयोग करना शुरू करता है।

सीज़र्स ग्रैस्प (Scissors grasp)

जैसे ही बच्चों के अंगूठे की दक्षता बढ़ती है, वो छोटी चीजों को पकड़ने में भी अच्छे से सक्षम होने लगते हैं। इसे सीज़र्स ग्रैस्प (Scissors grasp) कहा जाता है और ऐसा बच्चे के आठ महीने के होने पर होता है।

रेडियल डिजिटल ग्रैस्प (Radial digital grasp)

जब आपका शिशु नौ महीने का होता है, तो वो अपने अंगूठे और उंगली के बीच में चीज़ों को पकड़ने लगता है। अब उसे चीज को स्थिर रखने के लिए हथेली की जरूरत नहीं होती।

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इन्फीरियर पिंसर ग्रैस्प (Inferior pincer grasp)

रिफाइंड पिंसर ग्रैस्प से पहले बच्चे इन्फीरियर पिंसर ग्रैस्प (Inferior Pincer Grasp) का इस्तेमाल करते हैं। इस ग्रिप में बच्चे अंगूठे और तर्जनी अंगुली के बीच में छोटी चीजों को पकड़ लेते हैं। इसमें चीज हाथ के अंगूठे वाली तरफ अधिक होती है।

सुपीरियर पिंसर ग्रैस्प (Superior pincer grasp)

जब बच्चा एक साल का होने लगता है तो उसमें फाइन पिंसर ग्रैस्प (Pincer Grasp) पूरी तरह से विकसित होता है। बच्चे अंगूठे और इंडेक्स फिंगर यानी तर्जनी अंगुली की मदद से छोटी चीजों को उठाने में सक्षम होते हैं। यही नहीं वो अपनी पसंदीदा चीजों के बारे में एक उंगली से इशारा करके भी आपको बता सकते हैं।

यह सब तो थे पिंसर ग्रैस्प (Pincer Grasp) के पड़ाव। लेकिन, ऐसा जरूरी नहीं है कि सभी बच्चे इस तरह से ही इन पड़ावों को पार करें। हर बच्चा अलग होता है ऐसे ही उसका विकास भी अलग तरह से होता है। लेकिन, आप कुछ एक्टिविटीज़ से बच्चों और शिशुओं में इस स्किल को सुधारने की कोशिश कर सकते हैं। अब जानते हैं शिशुओं और बच्चों की पिंसर ग्रैस्प (Pincer Grasp) एक्टिविटीज के बारे में।

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शिशुओं के लिए पिंसर ग्रैस्प एक्टिविटीज (Pincer Grasp Activities for Babies)

कुछ आसान सी एक्टिविटीज से आप शिशुओं में पिंसर ग्रैस्प (Pincer Grasp) स्किल्स को सुधार सकते हैं। यह एक्टिविटीज़ इस प्रकार हैं:

ब्लॉक्स (Blocks)

शिशुओं को पिंसर ग्रैस्प (Pincer Grasp) के प्रयोग के बारे में सिखाने का बेहतरीन तरीका है उनका ब्लॉक्स से खेलना। यह खेल आमतौर पर हर बच्चा खेलता है। छोटी उम्र में बच्चे चीजों को उठा कर मुंह में डालते हैं। यह उनकी आदत होती है। हो सकता है कि शुरू में वो ब्लॉक को उठा कर भी सीधा अपने मुंह की तरफ ले जाएं। लेकिन धीरे धीरे वो उन्हें एक-दूसरे के ऊपर रखना और खेलना सीख जाएंगे। इससे उनका यह स्किल सुधरेगा

लाइंस बनाना (Drawing Lines)

इसमें कोई संदेह नहीं है कि शिशुओं को क्रेयॉन या मार्कर देना सुरक्षित नहीं होता। लेकिन, अगर आप शिशु के साथ होंगे और उन्हें सही तरीके से इसका प्रयोग सिखाएंगे, तो वो इसका प्रयोग करना भी सीखेंगे और इसके साथ ही उसके पिंसर ग्रैस्प (Pincer Grasp) स्किल में भी सुधार होगा।

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कैंची का प्रयोग (Scissor Cutting)

शिशुओं को प्लास्टिक की कैंची दें और इस एक्टिविटी को अपनी निगरानी में ही कराएं। एक कागज़ का टुकड़ा और कैंची शिशु को दे कर उसे अपनी इच्छा से काटने दें। इससे वो इन चीजों को होल्ड करना भी सीखेगा।

क्ले से खेलना (Play with Clay)

क्ले से खेलने के लिए शिशु और टोडलर के हैंड मसल्स का भी विकास होगा और उनमें पिंसर ग्रैस्प (Pincer Grasp) डेवलपमेंट भी होगी। इस बात का ध्यान रखें कि यह क्ले आपके शिशु और टोडलर के लिए सुरक्षित हो और वो इसे मुंह में न डालें। इसके साथ ही शिशु और टोडलर इन एक्टिविटीज से भी इस स्किल में सुधार कर सकते हैं:

  • किताबों के पेज पलटना
  • खुद को चीजों को खिलाने के लिए हाथों से पकड़ना
  • पानी के साथ खेलना जैसे किसी कंटेनर के साथ पानी को निकलना और दूसरों पर डालना
  • टिश्यू बॉक्स से टिश्यू निकालना
  • किसी कंटेनर के ढक्कन को खोलना और उसमें चीजों को डालना
  • ऐसे किसी खिलौने का प्रयोग जिसमें घुमाने के लिए नॉब या डायल्स मौजूद हों
  • ऐसे किसी खिलौने का प्रयोग करना जो स्क्वीज़ या पिंचिंग मूवमेंट को बढ़ाता हो

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बच्चों के लिए पिंसर ग्रैस्प एक्टिविटीज (Pincer Grasp Activities for kids)

केवल शिशुओं को ही पिंसर ग्रैस्प स्किल (Pincer Grasp Skill) की प्रैक्टिस की जरूरत नहीं होती। जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं कि बच्चों को भी चीजों को पकड़ने के लिए अंगूठे और इंडेक्स फिंगर का प्रयोग करने की प्रैक्टिस करने की जरूरत होती है। इसकी प्रैक्टिस के लिए वो इन एक्टिविटीज को कर सकते हैं:

  • बोर्ड गेम्स जैसे मोनोपोली (Monopoly), स्नेक एंड लेडर (Snake and Ladder) को खेलना
  • कार्ड गेम्स (Card Games) को खेलना
  • क्ले के साथ खेलने से भी उनकी प्रैक्टिस हो सकती है
  • स्पिनिंग टॉप्स (Spinning Tops), जेन्गा (Jenga) जैसे खेल
  • स्लाइम (Slime) के साथ खेलना

यह तो थी पिंसर ग्रैस्प (Pincer Grasp) को सुधारने के लिए शिशुओं और बच्चों के लिए कुछ एक्टिविटीज। इस बात का ध्यान रखें कि बच्चे इन एक्टिविटीज को आपके मार्गदर्शन में ही करें। जिन बच्चों का ग्रैस्प सही नहीं होता, उन्हें छोटे खिलौनों को उठाने में समस्या होती है जैसे ब्लॉक्स या बीड्स आदि। यही नहीं, थोड़ा बड़े होने पर उन्हें खुद से कोई भी काम करने में परेशानी हो सकती है जैसे बटन बंद करना, ज़िप लगाना, जूते पहनना य खुद से अच्छे से खाना आदि। स्कूल जाने वाले बच्चों में इससे उनके फाइन मोटर डेवलपमेंट पर भी प्रभाव पड़ता है। जिन बच्चों का पिंसर ग्रैस्प (Pincer Grasp) कमजोर होता है उनके लिए पेंसिल को कंट्रोल करना मुश्किल होता है। ऐसे में वो अच्छे से लिख नहीं पाते या ड्रॉइंग भी अच्छे से कर पाने में सक्षम नहीं होते।

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अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिशंस (American Academy of Pediatricians) के अनुसार दो साल से पांच साल की उम्र के बच्चे सेल्फ प्ले बिहेवियर (Self Play Behavior) से न केवल प्रेरित होते हैं बल्कि इससे उनका मोटर स्किल्स भी विकसित होता है। इसमें पिंसर ग्रैस्प (Pincer Grasp) भी शामिल है। इसलिए, आप अगर बच्चों में पिंसर ग्रैस्प स्किल (Pincer Grasp Skill) को विकसित करना चाहते हैं तो उसे खुद कुछ काम करने दें जैसे खुद खाना, चीजों को पकड़ना, अपनी चीजों को जगह पर रखना आदि। इससे न केवल बच्चे में पिंसर ग्रैस्प स्किल (Pincer Grasp Skill) विकसित होगा बल्कि पूरी तरह से ग्रो होने में मदद मिलेगी।

हालांकि हर बच्चे का हर एक माइलस्टोन को प्राप्त करने का समय अलग होता है, लेकिन अगर आप पिंसर ग्रैस्प (Pincer Grasp Skill) को लेकर अपने बच्चे के लिए चिंतित हैं तो अपने डॉक्टर से सलाह लेना और अधिक जानकारी लेना न भूलें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 09/08/2021 को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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