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प्रेग्नेंसी में बीपी लो क्यों होता है ? जानिए उपाय

प्रेग्नेंसी में बीपी लो क्यों होता है ? जानिए उपाय

प्रेग्नेंसी में लो बीपी होना एक सामान्य स्थिति होती है। हार्मोन और रक्त प्रवाह में बदलाव होने के कारण अक्सर गर्भवती महिलाओं में ब्लड प्रेशर लो हो जाता है। खासतौर से पहली और दूसरी तिमाही में। लो ब्लड प्रेशर को हाइपोटेंशन भी कहा जाता है। प्रेग्नेंसी में लो ब्लड प्रेशर आमतौर पर किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या का कारण नहीं होता है और ज्यादातर महिलाएं इसका घर पर ही इलाज कर सकती हैं।

हालांकि, प्रेग्नेंसी में ज्यादा लो बीपी होना एक ध्यान योग्य स्थिति हो सकती है। कुछ महिलाओं को इसके कारण परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। इस लेख में आज हम आपको प्रेग्नेंसी में बीपी लो होने के कारण, इलाज, घरेलू उपाय और डॉक्टर के पास कब जाएं इस सब के बारे में बताएंगे। तो चलिए जानते हैं कि प्रेग्नेंसी में बीपी लो के बारे में विस्तार से।

और पढ़ें : गर्भावस्था में आप अखरोट खा सकती हैं या नहीं ?

प्रेग्नेंसी में लो बीपी क्यों होता है – Causes of low blood pressure in pregnancy

प्रेग्नेंसी में लो ब्लड प्रेशर

प्रेग्नेंसी के हर स्टेज पर नियमित रूप से डॉक्टर द्वारा हेल्थ चेक-अप करवाना बेहद जरूरी होता है। प्रेग्नेंसी में महिला का शरीर बच्चे के विकास के लिए कई प्रकार के बदलावों से गुजरता है। इसलिए सभी गर्भवती महिलाओं के लिए प्रेग्नेंसी के दौरान डॉक्टर द्वारा नियमित रूप से हेल्थ चेक-अप करवाना बेहद आवश्यक होता है।

इन चेक-अप के दौरान डॉक्टर महिला से उनकी जीवनशैली से जुड़े सवाल पूछ सकते हैं। हर बार डॉक्टर के पास जाने पर वह महिला के ब्लड प्रेशर की भी जांच करते हैं।

प्रेग्नेंसी में बीपी लो होने की समस्या ज्यादातर महिलाओं के ऊर्जा स्तर, घबराहट, जीवनशैली और स्ट्रेस के स्तर पर निर्भर करती है। हालांकि, दिन के समय के आधार पर प्रेग्नेंसी में बीपी लो और हाई दोनों में से कोई भी हो सकता है।

महिला का प्रेग्नेंसी के शुरूआती 24 हफ्तों के लिए बीपी लो हो सकता है। यह आमतौर पर रक्त संचार प्रणाली में बदलाव के कारण होता है। इस स्थिति में रक्त वाहिकाएं बड़ी हो जाती हैं ताकि वह गर्भाशय तक खून पहुंचा सके।

इसके अलावा भी कई अन्य अस्थायी कारण मौजूद हैं जैसे कि लंबे समय तक गर्म पानी में लेटे रहना या काफी देर तक खड़े रहना।

यह दोनों ही कारण बेहद आम होते हैं लेकिन इनके अलावा भी कई ऐसे कारक हैं जो इस समस्या को बढ़ावा देते हैं और जिनके कारण प्रेग्नेंसी में सामान्य से अधिक बीपी लो हो सकता है। प्रेग्नेंसी में लो बीपी के जोखिम कारकों में निम्न शामिल हैं :

प्रेग्नेंसी में लो बीपी कई बार दवाओं के सेवन के कारण भी हो सकता है। इसलिए महिलाओं के लिए बेहद आवश्यक होता है कि वह अपने डॉक्टर को सेवन कर रही दवाओं की जानकारी जरूर दें।

प्रेग्नेंसी में बीपी लो होना किसी गंभीर स्थिति का संकेत भी हो सकता है, जैसे कि एक्टोपिक प्रेग्नेंसी। इस स्थिति में फर्टिलाइज्ड एग गर्भाशय की जगह खुद को कहीं और इम्पलांट कर लेता है।

और पढ़ें : गर्भावस्था में अमरूद खाना सही है या नहीं, इसके फायदे और नुकसान को जानें

प्रेग्नेंसी का ब्लड प्रेशर पर क्या असर पड़ता है – Effects of pregnancy on blood pressure in Hindi

अगर आप गर्भवती हैं तो आपके डॉक्टर या नर्स आपकी डिलीवरी से पहले हुई हर विजिट में आपका ब्लड प्रेशर माप सकते हैं।

ब्लड प्रेशर वह बल होता है जो हृदय के धड़कने पर खून को धमनियों के विरुद्ध धकेलता है। दिन के किसी भी समय रक्त प्रवाह अधिक व कम जा सकता है और अगर आप उत्साहित या घबराहट महसूस कर रहे हैं तो भी इसमें बदलाव आ सकते हैं।

ब्लड प्रेशर की रीडिंग आपके और आपके शिशु के स्वास्थ्य के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है। इसकी मदद से डॉक्टर आप में किसी अन्य स्थिति के होने की भी पहचान कर सकते हैं जैसे प्रीक्लेम्पसिया डिजीज

प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में होने वाले बदलावों से आपके ब्लड प्रेशर पर भी प्रभाव पड़ता है। भ्रूण में शिशु होने पर आपके रक्त संचार की प्रणाली तेजी से फैलने लगती है जिसके कारण प्रेग्नेंसी में बीपी लो की समस्या उत्पन्न हो सकती है। प्रेग्नेंसी के शुरुआती 24 हफ्तों में बीपी लो होना एक सामान्य स्थिति होती है।

अन्य कारक जिनकी वजह से प्रेग्नेंसी में बीपी लो हो सकता है –

और पढ़ें – गर्भावस्था में जरूरत से ज्यादा विटामिन लेना क्या सेफ है?

प्रेग्नेंसी में ब्लड प्रेशर कितना होना चाहिए – Pregnancy mein blood pressure kitna hona chahiye

मौजूदा निर्देशों के अनुसार सामान्य ब्लड प्रेशर का स्तर 120 mm Hg सिस्टोलिक (सबसे अवल संख्या) से कम और 80 mm Hg डायास्टोलिक (सबसे कम संख्या) से अधिक की रीडिंग को लो ब्लड प्रेशर माना जाता है।

डॉक्टर आमतौर पर 90/60 mm Hg से कम रक्तचाप की रीडिंग को प्रेग्नेंसी में लो बीपी का लक्षण मानते हैं।

कुछ लोगों में सारी उम्र लो ब्लड प्रेशर रहता है और उनको इसके कोई लक्षण तक दिखाई नहीं देते हैं। हालांकि, कई मामलों में यह चिंता का विषय नहीं होता है।

प्रेग्नेंसी में लो ब्लड प्रेशर होने से क्या खतरा हो सकता है – Risk of Low blood pressure during pregnancy in Hindi

आमतौर पर प्रेग्नेंसी में बीपी लो होना किसी प्रकार गंभीर स्थिति नहीं होती है जबतक आपको कोई लक्षण न दिखाई दें। प्रेग्नेंसी में ब्लड प्रेशर में अधिक गिरावट आना कई गंभीर व जानलेवा स्थिति का संकेत हो सकता है।

अत्यधिक लो ब्लड प्रेशर एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का लक्षण हो सकता है। इसमें फर्टिलाइज्ड एग गर्भाशय की बजाए कहीं और इम्प्लांट हो जाता है।

गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर का बच्चे पर क्या प्रभाव पड़ता है – Blood pressure in pregnancy effects on baby

प्रेग्नेंसी में हाई ब्लड प्रेशर का शिशु पर क्या प्रभाव पड़ता है, इस विषय पर बड़ी संख्या में अध्ययन किए जा चुके हैं। हालांकि, प्रेग्नेंसी में बीपी लो होने पर बच्चे पर क्या असर पड़ता है इसकी जानकारी फिलहाल सीमित है।

कुछ अध्ययनों के अनुसार प्रेग्नेंसी में बीपी लो कई समस्याओं का कारण बन सकता है। जैसे कि स्टीलबर्थ (मृत बच्चा होना) और जन्म के दौरान शिशु का कम वजन। हालांकि, कुछ अन्य अध्ययनों में इन समस्याओं के अन्य जोखिम कारको के बारे में बताया है।

फिलहाल प्रेग्नेंसी में बीपी लो होने के कारण बच्चे के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों पर अधिक अध्ययन करने की आवश्यकता है।

और पढ़ें – प्रेग्नेंसी में नमक खाने के फायदे और नुकसान

गर्भावस्था में बीपी लो के लक्षण – Symptoms of low blood pressure during pregnancy in Hindi

नीचे प्रेग्नेंसी में लो ब्लड प्रेशर के लक्षण हैं जिनकी मदद से आप स्थिति की गंभीरता को पहचान कर उसके इलाज की प्राथमिकता चुन सकते हैं –

प्रेग्नेंसी में लो ब्लड प्रेशर के साथ ऊपर दिए गए किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर को संपर्क करें।

और पढ़ें – प्रेग्नेंसी में इम्यून सिस्टम पर क्या असर होता है?

गर्भावस्था में निम्न रक्तचाप की कैसे पहचान करें – How to check low blood pressure in pregnancy

गर्भावस्था में निम्न रक्तचाप की पहचान एक आसान से परीक्षण से की जाती है।

डॉक्टर या नर्स आपकी बांह पर बैंड बांधते हैं। इस बैंड को इनफ्लैटेबल कफ कहा जाता है। इसके साथ एक रक्त प्रवाह मांपने वाले उपकरण की मदद से आपके ब्लड प्रेशर की जांच की जाएगी।

यह टेस्ट डॉक्टर के ऑफिस में किया जा सकता है। लेकिन आप चाहें तो मेडिकल शॉप से रक्तचाप मांपने वाला यंत्र खरीद कर रोजाना घर पर ही अपने ब्लड प्रेशर की जांच कर सकती हैं।

अगर पूरी प्रेग्नेंसी में हाइपोटेंशन रहता है तो डॉक्टर आपको अन्य टेस्ट करवाने की सलाह दे सकते हैं। इन टेस्ट की मदद से अन्य किसी समस्या की जांच में मदद मिलती है। गर्भावस्था में हाइपोटेंशन का इलाज किया जा सकता है।

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प्रेग्नेंसी में बीपी लो का इलाज – Low bp in pregnancy treatment in Hindi

गर्भावस्था में कम रक्तचाप के इलाज के लिए किसी भी चीज की सलाह नहीं दी जाती है। यहां तक कि इस दौरान दवा लेने से भी मना किया जाता है। हालांकि, अगर स्थिति अधिक गंभीर है या लक्षणों के कारण महिला को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तो उन्हें कम करने के लिए हो सकता है डॉक्टर दवा की सलाह दें।

आपको बता दें कि इस स्थिति को साधारण से घरेलू उपायों की मदद से घर पर ही नियंत्रित किया जा सकता है। जीवनशैली में कुछ प्रकार के बदलावों से प्रेग्नेंसी में ब्लड प्रेशर को नियंत्रित किया जा सकता है। व्यायाम इसका एक बेहतरीन उदाहरण है। एक्सरसाइज की मदद से रक्त प्रवाह को बेहतर करने में मदद मिलती है। हालांकि, किसी भी प्रकार की एक्सरसाइज करते समय उठने और बैठने का खास ध्यान रखें। इसके अलावा व्यायाम शुरू करने से पहले डॉक्टर से अवश्य सलाह लें।

हल्के व्यायाम जैसे स्ट्रेचिंग का इस्तेमाल करें। ऐसा करने के लिए हाथों, पैरों, कमर और कूल्हों को स्ट्रेच करें। आमतौर पर यह देखा गया है कि प्रेग्नेंसी की आखरी तिमाही तक रक्त प्रवाह का स्तर अपने आप उठने लगता है।

प्रेग्नेंसी में लो बीपी की समस्या से बचने के लिए सेल्फ केयर

जैसा कि हम आपको पहले ही बता चुके हैं कि प्रेग्नेंसी में लो बीपी होने पर आमतौर पर ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं पड़ती है बल्कि कुछ घरेलू उपाय की मदद से गर्भावस्था में लो बीपी की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। आप सेल्फ केयर के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखेंगी तो आपको प्रेग्नेंसी में इस समस्या से निजात मिल जाएगा।

  • आप गर्भावस्था के दौरान अगर लेटी हुई हैं या फिर बैठी हुई हैं तो अचानक से बिस्तर या कुर्सी से न उठे बल्कि धीमे से उठ कर चले। ऐसा करने से आप चक्कर या बेहोशी की समस्या नहीं होगी।
  • आप एक ही जगह पर लंबे समय तक न बैठे। अगर आप बैठी हैं तो कुछ समय के लिए मूवमेंट जरूर करें।
  • दिनभर में खाना छोटी मील्स में लें न कि एक साथ खाएं।
  • अगर सर्दी का मौसम है तो अधिक गर्म पानी से नहाएं बल्कि गुनगुने पानी से नहांए।
  • कपड़े ऐसे न पहने जो बहुत टाइट हो। बेहतर होगा कि आप प्रेग्नेंसी के दौरान लूज कपड़े पहनें।
  • प्रीनेटल सप्लीमेंट लेना न भूलें। अगर आप हेल्दी डायट, सही समय पर दवाओं का सेवन और उपरोक्त बातों का ध्यान रखेंगी तो प्रेग्नेंसी में आप लो बीपी की समस्या से बच सकती हैं।

और पढ़ें – प्रेग्नेंसी में मीठा खाने से क्या होता है? जानिए इसके नुकसान

प्रेग्नेंसी में हाइपोटेंशन के घरेलू उपाय – Low blood pressure in pregnancy home remedies

प्रेग्नेंसी में दवाओं और अन्य प्रकार के इलाज का आपके व आपके शिशु के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में प्रेग्नेंसी में घरेलू उपचार की मदद से आप प्राकृतिक रूप से अपने ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर सकती हैं। घरेलू उपाय बिलकुल सुरक्षित होते हैं और आप इनका इस्तेमाल बिना किसी जोखिम के कर सकते हैं।

गर्भावस्था में कम रक्तचाप का इलाज है नमक का पानी – Pregnancy mein namak ke pani se kare low bp ka ilaj

आमतौर पर लो ब्लड प्रेशर के मरीजों को नमक का सेवन करने की सलाह दी जाती है। नमक में मौजूद सोडियम रक्त प्रवाह को बढ़ाने में मदद करता है। हालांकि, इसके अत्यधिक सेवन के कारण आपको अन्य प्रकार की समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है। इसीलिए 1/2 छोटा चम्मच नमक एक गिलास पानी में मिला कर पिएं।

प्रेग्नेंसी में लो ब्लड प्रेशर का घरेलू उपाय है किशमिश – Raisins home remedy for low bp during pregnancy in Hindi

गर्भावस्था में लो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने का सबसे बेहतरीन उपाय है किशमिश। यह हाइपोटेंशन का एक बेहद पुराना नुस्खा है। बेहतर परिणामो के लिए किशमिश को रात भर पानी में भिगो कर रख दें। इसके बाद सुबह खाली पेट इसका सेवन करें।

तुलसी से करें प्रेग्नेंसी में ब्लड प्रेशर नियंत्रित – Tulsi se kare pregnancy me blood pressure control

तुलसी में विटामिन सी, मैग्नीशियम, पोटैशियम और पैंटोथेनिक एसिड होते हैं जो लो ब्लड प्रेशर की समस्या को खत्म कर के रक्त प्रवाह को नियंत्रित बनाते हैं। इसके साथ ही तुलसी प्रेग्नेंसी में स्ट्रेस से भी राहत दिलाने में मदद करती है।

चकुंदर है ब्लड प्रेशर का घरेलु उपचार – Beetroot juice home remedy for bp in Hindi

एक हफ्ते तक रोजाना चकुंदर का जूस पीने से रक्तचाप नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

और पढ़ें – प्रेग्नेंसी में अजवाइन खानी चाहिए या नहीं?

अदरक से करें ब्लड प्रेशर कंट्रोल – Ginger control blood pressure in Hindi

अदरक हाई व लो ब्लड प्रेशर दोनों को नियंत्रित करने में मदद करती है। इसमें मौजूद रसायन और एंटीऑक्सीडेंट रक्त प्रवाह के स्तर में फेर बदल होने की आशंका को कम करते हैं।

लेमन से करें ब्लड प्रेशर कंट्रोल – Lemon control blood pressure in Hindi

प्रेग्नेंसी में लो बीपी की समस्या से बचने के लिए आप लेमन यानी नींबू का सेवन भी कर सकती हैं। नींबू खाने के साथ लेने से या फिर पानी के साथ नींबू का सेवन करने से हाइपोटेंशन की समस्या से राहत मिल सकती हैं। नींबू पानी में थोड़ा नमक का इस्तेमाल भी आपके लिए फायदेमंद रहेगा। अगर आपको नींबू से एलर्जी है तो आप इसका सेवन बिल्कुल भी न करें। साथ ही एक बात का ध्यान रखें कि नींबू एसिडिक होता है। अगर आपको एसिडिटी की समस्या है तो नींबू का सेवन न करें। आप इस बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से भी परामर्श कर सकती हैं।

प्रेग्नेंसी में बीपी लो होने के घरेलू उपायों के अलावा पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ का सेवन करें। किसी भी प्रकार के घरेलू उपचार को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर माना जाता है।

डिलीवरी के बाद रक्त प्रवाह – Postpartum blood pressure in Hindi

डिलीवरी के बाद आपका रक्त प्रवाह प्रेग्नेंसी से पहले के स्तर पर वापिस आ जाना चाहिए। मेडिकल चिकित्सक डिलीवरी के कई घंटों और दिनों तक आपके ब्लड प्रेशर की जांच करते रहते हैं। गर्भावस्था में कम रक्तचाप होना एक सामान्य स्थिति होती है। इस स्थिति में परेशान व घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। हालांकि, अगर आपको किसी प्रकार के संकेत या लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

उपरोक्त जानकारी किसी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। अगर इससे जुड़ा आपका कोई सवाल है, तो अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। हम आशा करते हैं कि आपको इस आर्टिकल की मदद से गर्भावस्था में हाइपोटेंशन या प्रेग्नेंसी में लो बीपी के बारे में जानकारी मिल गई होगी। आप स्वास्थ्य संबंधि अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं।

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अपनी नियत तारीख का पता लगाने के लिए इस कैलक्युलेटर का उपयोग करें। यह सिर्फ एक अनुमान है - इसकी गैरेंटी नहीं है! अधिकांश महिलाएं, लेकिन सभी नहीं, इस तिथि सीमा से पहले या बाद में एक सप्ताह के भीतर अपने शिशुओं को डिलीवर करेंगी।

सायकल लेंथ

28 दिन

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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लेखक की तस्वीर
21/04/2020 पर Shivam Rohatgi के द्वारा लिखा
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