जानें शरीर में बनने वाले महत्वपूर्ण हाॅर्मोन और उनकी भूमिका

लेखक डॉ शैवाल चंदालिया एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और डायबिटोलॉजिस्ट

अक्सर आप यह सुनते होंगे कि शरीर की कोई भी बीमारी या विकार किसी प्रकार के हॉर्मोन की वजह से हुई होती है। ऐसे में सबसे पहला सवाल यह है कि हॉर्मोन क्या हैं और यह हमारे शरीर के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?

हॉर्मोन एक तरह के रसायन या केमिकल होते हैं। हॉर्मोन शरीर के अंगों को सुचारू रूप से कार्य करने में मददगार होते हैं। प्रजनन से लेकर मेटाबॉलिज्म तक और किडनी से लेकर दिमाग के सही काम करने तक में हॉर्मोन का हाथ होता है। शरीर में अनेक प्रकार के हॉर्मोन बनते हैं, जो हमारे स्वास्थ्य पर सीधा असर डालते हैं। आज हम बात करेंगे मुख्य एंडोक्राइन ग्लैंड की और उनमें बनने वाले हॉर्मोन की।

एंडोक्राइन ग्लैंड और उनमें बनने वाले हॉर्मोन के फायदे

1- हाइपोथैलमस ग्लैंड

हाइपोथैलमस थैलमस और पिट्यूटरी के बीच में होता है। यह नर्वस सिस्टम और एंडोक्राइन सिस्टम को जोड़ने में मददगार तो होता ही है, साथ ही शरीर की अधिकतर गतिविधियों पर नजर रखने और उन्हें नियंत्रित करने का भी काम करता है। हाइपोथैलमस हॉर्मोन की मदद से ही पिट्यूटरी ग्लैंड हॉर्मोन रिलीज करता है।

2- पिट्यूटरी ग्लैंड

पिट्यूटरी ग्लैंड को मास्टर ग्लैंड कहा जाता है क्योंकि यह अन्य सभी ग्लैंड के हॉर्मोन को नियंत्रित करता है। पिट्यूटरी ग्लैंड को एंटीरियर पिट्यूटरी और पोस्टीरियर पिट्यूटरी में विभाजित किया गया है। यह दोनों ही भाग अलग—अलग तरह के हॉर्मोन रिलीज करते हैं।

एंटीरियर पिट्यूटरी के हॉर्मोन

1- ग्रोथ हॉर्मोन (Growth Hormone)

ग्रोथ हॉर्मोन एक प्रकार का प्रोटीन होता है। यह शरीर के विकास के लिए जरूरी होता है। यह ह​ड्डी और शरीर के कई प्रकार के टिशू के लिए बहुत जरूरी होता है। ग्रोथ हॉर्मोन के ​कारण ही शरीर पोषक तत्वों का सही से उपयोग कर पाता है। ग्रोथ हॉर्मोन के कारण ही व्यक्ति की हाइट बढ़ती या घटती है। यदि यह कम रह जाता है तो हाइट कम और यदि यह बढ़ जाता है तो अतिरिक्त हाइट बढ़ सकती है।

2- थाइरॉयड स्टीमूलेटिंग हॉर्मोन या थायरोट्रोपिन (thyrotropin)

थायरोट्रोपिन हॉर्मोन का फायदा यह है कि यह थायरॉयड ग्लैंड को उत्तेजित कर थायरॉइड हॉर्मोन बनाने के लिए प्रेरित करता है।

3- प्रोलैक्टिन हॉर्मोन (prolactin)

बच्चे को अपना दूध पिलाने वाली महिलाओं के लिए यह हॉर्मोन बहुत जरूरी होता है। प्रोलैक्टिन हॉर्मोन का फायदा यही है कि इसी से दूध—मुंहे बच्चे को मां का दूध मिलता है। प्रोलैक्टिन हॉर्मोन महिलाओं के स्तन में ग्लैंड्यूलर टिशू को बनाने के काम आता है। इसकी सहायता से ही दूध बनता है।

4- कोर्टिकोट्रोपिक हॉर्मोन (corticotropic)

कोर्टिकोट्रोपिक अधिवृक्क ग्रंथि या एड्रेनल ग्लैंड को कई प्रकार के हॉर्मोन बनाने में मदद पहुंचाता है।

5- गोनाडोट्रोपिक हॉर्मोन (Gonadotropic hormones)

गोनाड यानी जननांगों, महिलाओं में ओवरी और पुरुषों में टे​स्टीस के सुचारू रूप से कार्य करने के लिए गोनाडोट्रोपिक हॉर्मोन ही जिम्मेदार होता है। गोनाडोट्रोपिक की वजह से ही इन अंगों का विकास संभव हो पाता है।

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पोस्टीरियर पिट्यूटरी के हॉर्मोन

1- एंटीडाययूरेटिक हॉर्मोन (antidiuretic)

एंटीडाययूरेटिक हॉर्मोन का फायदा यह है कि यह आपके शरीर में पानी के संतुलन को बनाए रखता है। चूंकि एंटीडाययूरेटिक हॉर्मोन का सीधा असर किडनी पर पड़ता है। इसके कारण किडनी सुचारू रूप से काम करने में सक्षम होती है। यदि एंटीडाययूरेटिक हॉर्मोन में कमी आ जाए तो शरीर से पानी का ज्यादा नुकसान होता है। शरीर पानी को नहीं रोक पाता और ज्यादा से ज्यादा पानी पेशाब के माध्यम से बाहर चला जाता है।

2- ऑक्सिटोसिन हॉर्मोन (oxytocin)

ऑक्सिटोसिन हॉर्मोन महिलाओं में प्रसव के समय कॉन्ट्रेक्शन में मददगार होता है। कॉन्ट्रेक्शन के कारण ही डिलिवरी का समय पता चलता है और डिलिवरी संभव हो पाती है। इसके साथ ही आॅक्सिटोसिन के कारण दूध बच्चे तक पहुंचता है। चूंकि यह दूध को बाहर आने के लिए बाध्य करता है।

3- पिनियल ग्लैंड(Pineal Gland)

पिनियल ग्लैंड मस्ति​ष्क के बीच में होता है। यह मेलाटोनिन हॉर्मोन रिलीज करता है। मेलाटोनिन हॉर्मोन नींद के लिए सहायक माना जाता है। माना जाता है कि यह अंधेरे में सक्रिय हो जाता है। मेलाटोनिन की मात्रा बताती है कि आपको कितनी अच्छी नींद आ सकती है। हाल ही में किए गए शोध में पाया गया है कि मेलाटोनिन हॉर्मोन का फायदा कई प्रकार के कैंसर और बीमारियों को कम करने में किया जा सकता है।

3- थाइरॉयड ग्लैंड

1- थायरोक्सिन(Thyroxine) और ट्राईयोडोथाइरोनिन (Triiodothyronine)

थाइरॉयड ग्लैंड से थायरोक्सिन(Thyroxine) और ट्राईयोडोथाइरोनिन (Triiodothyronine) नामक हॉर्मोन रिलीज होते हैं। थायरोक्सिन और ट्राईयोडोथाइरोनिन हॉर्मोन का फायदा यह है कि यह शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। दोनों ही हॉर्मोन को बनने के लिए आयोडीन की जरूरत होती है। यदि आयोडीन की कमी हो जाए तो यह दोनों ही हॉर्मोन नहीं बन पाते। इस कारण विकास में बाधा हो सकती है। जब यह हॉर्मोन न बन पाए तो गला बाहर को निकल आता है जिसे गोयटर कहा जाता है। ट्राईयोडोथाइरोनिन की कमी और इसकी अधिक मात्रा दोनों ही नुकसानदायक होती है।

2- कैलसिटोनिन हॉर्मोन

कैलसिटोनिन हॉर्मोन का फायदा यह है कि यह पैराथाइरॉयड हॉर्मोन द्वारा रक्त में कैल्शियम की अधिक मात्रा को कम करने या नियंत्रित करने की कोशिश करता है।

4- पैराथाइरॉयड ग्लैंड(ParaThyroid Gland)

1- पैराथाइरॉयड हॉमोन(Parathyroid Gland)

पैराथाइरॉयड ग्लैंड से पैराथाइरॉयड हॉर्मोन रिलीज होता है जो रक्त में कैल्शियम की मात्रा को बढ़ाने और उसका उपयोग करने के​ लिए बाध्य करता है। पैराथाइरॉयड यदि बढ़ जाए तो यह कैल्शियम को भी शरीर में बढ़ा देता है जो बीमारियों का कारण बन सकता है।

5- एड्रेनल ग्लैंड (Adrenal Glands)

एड्रेनल ग्लैंड दोनों तरफ की किडनी के उपर होते हैं। एड्रेनल ग्लैंड को पिट्यूटरी की तरह ही दो भागों में बांटा गया है। एड्रेनल कोर्टेक्स ओर एड्रेनल ​मेड्यूला। एड्रेनल कोर्टेक्स को निकाल भी दिया जाए तो व्यक्ति जिंदा नहीं रह सकता है लेकिन यदि एड्रेनल मेड्यूला को निकाल दिया जाए तो व्यक्ति जिंदा रह सकता है। एड्रैनल को​र्टेक्स कोर्टिकोस्टरॉयड हॉर्मोन बनाता है। इस हॉर्मोन का फायदा है कि यह शरीर में नमक और पानी का बैलेंस बनाए रखता है। यह मेटाबॉलिज्म, इम्युन सिस्टम और स्ट्रेस आदि के लिए भी फायदेमंद होता है।

1- एलडोस्ट्रोन हॉर्मोन(Aldosterone)

एलडोस्ट्रोन हॉर्मोन का फायदा है कि यह शरीर में नमक और पानी का बैलेंस बनाए रखता है। यह हॉर्मोन शरीर से किडनी के माध्यम से पोटेशियम को बाहर निकालकर सोडियम को शरीर में ही रहने देता है। यदि एल्डोस्ट्रोन ज्यादा बनने लगे तो हाइपरटेंशन की समस्या के साथ ही अन्य प्रकार की बीमारियां घर कर सकती हैं।

2- कोर्टिसोल हॉर्मोन

कोर्टिसोल हॉर्मोन का फायदा है कि यह ग्लूकोस का बैलेंस बनाता है।

3- गोनाडोकोर्टिकोयड हॉर्मोन (gonadocorticoids)

गोनाडोकोर्टिकॉयड हॉर्मोन जिन्हें महिलाओं में एस्ट्रोजेन और पुरुषों में एंड्रोजेन हॉर्मोन के नाम से जाना जाता है उसे एड्रेनल कोर्टेक्स ही रिलीज करता है। यह प्रजनन के लिए या जनानंगों के विकास के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।

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6- एड्रेनल मेड्यूला

1- इपनेफ्रून हॉर्मोन (epinephrine)

इस हॉर्मोन के कारण हृदय की गति और हृदय की गतिविधि बढ़ जाती है। यह ग्लाइकोजन से ग्लूकोज के उत्पादन को बढ़ाता है।

2- नोरइपनेफ्रून हॉर्मोन (norepinephrine)

यह न्यूरोट्रांसमिटर और हॉर्मोन दोनों की तरह काम कर सकता है। यह हॉर्मोन ब्लड प्रेशर कम होने या स्ट्रेस के स्तर के बढ़ने पर रिलीज होता है।

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7- पैनक्रियास ग्लैंड(Pancreas)

अग्न्याशय या पैनक्रियास इंसुलिन और ग्लूकागॉन बनाता है। इन हॉर्मोन का फायदा है कि यह रक्त में ग्लूकोज या शर्करा के स्तर को नियंत्रित करते हैं। शरीर में ऊर्जा को बनाए रखने के लिए इंसुलिन की आवश्यकता होती है। इसके साथ ही शरीर में ऊर्जा को स्टोर करने के लिए भी इंसुलिन काम आता है।

8- प्रजनन ग्रंथी (Reproductive Glands)

  • लड़की की ओवरी या अंडाशय में एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन बनता है। एस्ट्रोजेन हॉर्मोन का फायदा है कि वह लड़कियों में प्यूबर्टी लाता है। प्यूबर्टी का अर्थ है उन्हें वयस्क बनाता है। इसमें स्तनों का बढ़ना, मासिक धर्म आदि शामिल होता है। एस्ट्रोजने और प्रोजेस्टेरोन प्रेग्नेंसी में भी शामिल होते हैं।
  • लड़कों के अंडकोश में एंड्रोजेन हॉर्मोन बनता है। यह लड़कों में प्यूबर्टी लाने के जिए जिम्मेदार होता है। टेस्टेस्टेरोन हॉर्मोन के कारण पेनिस का साइज बढ़ना, आवाज का भारी होना, प्यूबिक हेयर और दाढ़ी व मूंछ आती हैं। स्पर्म के बनने को भी यही टेस्टेस्टेरोन हॉर्मोन ही नियंत्रित करता है।

हॉर्मोन का फायदा हर जगह है। यह जरूर है कि यदि यह बढ़ जाए या घट जाए तो शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए हॉर्मोन को कंट्रोल में रखने के लिए नियमित रूप से एक्सरसाइज और हेल्दी खान—पान आवश्यक माना जाता है।

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रिव्यू की तारीख जनवरी 12, 2020 | आखिरी बार संशोधित किया गया जनवरी 13, 2020

डॉ शैवाल चंदालिया एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और डायबिटोलॉजिस्ट

डाॅ. शैवाल चांदोलिया जसलोक हॉस्पिटल के एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और डायबिटोलॉजिस्ट हैं। इन्हें इस क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव प्राप्त है। यह डायबिटीज, थायराइड, पिट्यूटरी और कैल्शियम डिसऑर्डर के क्षेत्र में यह एक्सपर्ट हैं। इन्होंने टी.एन मेडिकल कॉलेज एंड नायर हॉस्पिटल, मुंबई से अंडर ग्रेजुएट की ट्रेनिंग कर रखी है। इन्होंने सेंट लुइस यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल, सेंट लुइस, यूएसए में अपना स्नातकोत्तर प्रशिक्षण (एमडी, जनरल मेडिसिन) पूरा किया और इन्हें 2005 में डिप्लोमेट, अमेरिकन बोर्ड ऑफ इंटरनल मेडिसिन से सम्मानित किया गया।

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