Ventricular Arrhythmia: वेंट्रिकुलर एरिथमिया क्या है? जानिए इसके लक्षण, कारण और इलाज

    Ventricular Arrhythmia: वेंट्रिकुलर एरिथमिया क्या है? जानिए इसके लक्षण, कारण और इलाज

    चेस्ट पेन, पसीना आना, बेहोश होना ऐसे ही कई और लक्षण दिल से जुड़ी बीमारी की ओर इशारा करते हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (World Health Organisation) में पब्लिश्ड साल 2016 की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार भारत में तकरीबन 17.9 मिलियन लोगों की मौत कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (Cardiovascular diseases [CVDs]) के कारण हुई। हालांकि दिल की बीमारी से बचा जा सकता है, लेकिन बीमारी की जानकारी जबतक ना हो तबतक यह कठिन हो सकता है। दिल की बीमारी की लिस्ट में तो कई बीमारी शामिल है, लेकिन आज हम आपके साथ वेंट्रिकुलर एरिथमिया (Ventricular Arrhythmia [VA]) से जुड़ी जानकारी शेयर करेंगे।

    • वेंट्रिकुलर एरिथमिया क्या है?
    • वेंट्रिकुलर एरिथमिया की समस्या कितने तरह की होती है?
    • वेंट्रिकुलर एरिथमिया के कारण क्या हैं?
    • वेंट्रिकुलर एरिथमिया के लक्षण क्या हैं?
    • वेंट्रिकुलर एरिथमिया का निदान कैसे किया जाता है?
    • वेंट्रिकुलर एरिथमिया का इलाज कैसे किया जाता है?
    • किन-किन स्थितियों में वेंट्रिकुलर एरिथमिया की संभावना बढ़ सकती है?

    चलिए अब वेंट्रिकुलर एरिथमिया (Ventricular Arrhythmia) से जुड़े इन सवालों का जवाब क्या है यह समझने की कोशिश करते हैं।

    वेंट्रिकुलर एरिथमिया (Ventricular Arrhythmia) क्या है?

    Ventricular Arrhythmia: वेंट्रिकुलर एरिथमिया

    वेंट्रिकुलर एरिथमिया (VA) की आसान शब्दों में समझें, तो यह एब्नॉर्मल हार्ट रिदम है और यह हार्ट के लोअर चैंबर से जुड़ी समस्या है। लोअर चेंबर ही हार्ट को पूरे शरीर में ब्लड पंप करने में सहायता प्रदान करता है। इसलिए लोअर चैंबर (Lower chambers) से जुड़ी समस्या गंभीर भी हो सकती है। क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) में पब्लिश्ड रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार वेंट्रिकुलर एरिथमिया बढ़ती उम्र में आम समस्या है और इससे नुकसान नहीं पहुंचता है, लेकिन अगर किसी व्यक्ति को दिल की बीमारी है, तो उनके लिए ये चिंता का विषय है। वेंट्रिकुलर एरिथमिया की समस्या अलग-अलग तरह की हो सकती है।

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    वेंट्रिकुलर एरिथमिया की समस्या कितने तरह की होती है? (Types of Ventricular Arrhythmia)

    नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार वेंट्रिकुलर एरिथमिया की समस्या तीन अलग-अलग तरह की होती है, जो इस प्रकार हैं-

    1. वेंट्रीकुलर टैकीकार्डिया (Ventricular tachycardia (VT)
    2. वेंट्रिकुलर फाइब्रिलेशन (Ventricular fibrillation [VFib])
    3. टोरसेड्स डी पॉइंट्स (Torsades de pointes)

    1. वेंट्रिकुलर टेककार्डिया (Ventricular tachycardia (VT)-

    जब प्रति मिनट 100 बार से ज्यादा हार्ट बीट हो, तो इसे मेडिकल टर्म में वेंट्रिकुलर टेककार्डिया कहते हैं। वेंट्रिकुलर टेककार्डिया की स्थिति सिर्फ कुछ मिनट या कुछ घंटे की भी हो सकती है। दिल की धड़कन जब ज्यादा तेजी से धड़कने लगती है, तो ऐसी स्थिति में हार्ट के वेंट्रिकल्स पूरी तरह से कॉन्ट्रैक्ट नहीं कर पाते हैं जिस वजह से शरीर में ब्लड सप्लाई कम होता है।

    2. वेंट्रिकुलर फाइब्रिलेशन (Ventricular fibrillation [VFib])-

    हृदय के अंदुरुनी हिस्से में जब सूचनाओं का आदान-प्रदान ठीक तरह से ना हो, तो ऐसी स्थिति वेंट्रिकुलर फाइब्रिलेशन कहलाती है और ऐसे में हार्ट बीट (Heartbeat) पर बुरा प्रभाव पड़ता है। कुछ केसेस में कार्डियक अरेस्ट का कारण वेंट्रिकुलर फाइब्रिलेशन को माना जाता है।

    3. टोरसेड्स डी पॉइंट्स (Torsades de pointes)-

    टोरसेड्स डी पॉइंट्स फ्रेंच वर्ड है, जिसका अर्थ है हार्ट की वेंट्रिकल्स का अत्यधिक तेजी से धड़कना। इस दौरान अट्रिया (Atria), हार्ट बीट और सेल्स (Cells) भी एक साथ अपना काम नहीं कर पाते हैं।

    वेंट्रिकुलर एरिथमिया के ये तीन अलग-अलग प्रकार हैं, लेकिन ऐसी स्थिति किन कारणों से शुरू होती है इसे आगे समझेंगे।

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    वेंट्रिकुलर एरिथमिया के कारण क्या हैं? (Cause of Ventricular Arrhythmia)

    वेंट्रिकुलर एरिथमिया के कारण कई हो सकते हैं। जैसे:

    • कार्डियोमायोपैथी (Cardiomyopathy)
    • कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (Cardiovascular disease)
    • कॉनजेनाइटल हार्ट कंडिशन (Congenital heart conditions)
    • इलेक्ट्रोलाइट इम्बैलेंस (Electrolyte imbalances)
    • हार्ट अटैक (Heart attack)
    • हार्ट फेलियर (Heart failure)
    • हार्ट इन्फ्लेमेशन (Heart inflammation)
    • हार्ट सर्जरी (Heart surgery)
    • हार्ट वाल्व डिजीज (Heart valve diseases)
    • शरीर में ऑक्सिजन (Oxygen) की कमी
    • दवाओं (Medications) का सेवन

    ऊपर बताई गई शारीरिक स्थिति या दवाओं का सेवन वेंट्रिकुलर एरिथमिया की स्थिति पैदा कर सकती है। ऐसे में वेंट्रिकुलर एरिथमिया के लक्षण को समझना जरूरी है।

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    वेंट्रिकुलर एरिथमिया के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of Ventricular Arrhythmia)

    वेंट्रिकुलर एरिथमिया के लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं। जैसे:

    • दिल का तेजी से धड़कना (Racing Heart)।
    • बेचैनी महसूस होना।
    • सीने में दर्द (Chest pain) महसूस होना।
    • हल्का सिरदर्द (Lightheadedness) होना।
    • बेहोश (Fainting) होना।
    • अत्यधिक पसीना (Sweating) आना
    • सांस लेने में तकलीफ (Shortness of breath) महसूस होना।

    ऐसे लक्षण वेंट्रिकुलर एरिथमिया की ओर इशारा करते हैं। इसलिए इन लक्षणों को इग्नोर ना करें और जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें।

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    वेंट्रिकुलर एरिथमिया का निदान कैसे किया जाता है? (Diagnosis of Ventricular Arrhythmia)

    वेंट्रिकुलर एरिथमिया के इलाज के लिए जब डॉक्टर से कंसल्ट किया जाता है, तो डॉक्टर सबसे पहले बीमारी के लक्षणों को समझने की कोशिश करते हैं। इस दौरान डॉक्टर पेशेंट्स की मेडिकल हिस्ट्री, मेडिकेशन और लाइफस्टाइल के बारे में पूछते हैं। इसके अलावा डॉक्टरों इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम टेस्ट (ECG Test or EKG Test) की मदद से हार्ट के इलेक्ट्रो सिग्नल की जानकारी मिलती है। इस टेस्ट की सहायता से इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलती है। हार्ट कंडिशन को समझने के साथ ही वेंट्रिकुलर एरिथमिया का इलाज शुरू करते हैं।

    वेंट्रिकुलर एरिथमिया का इलाज कैसे किया जाता है? (Treatment for Ventricular Arrhythmia)

    Ventricular Arrhythmia: वेंट्रिकुलर एरिथमिया

    वेंट्रिकुलर एरिथमिया का इलाज पेशेंट की उम्र और हेल्थ कंडिशन को ध्यान में रखकर शुरू किया जाता है। अगर वेंट्रिकुलर एरिथमिया के लक्षण गंभीर हैं या इस वजह से पेशेंट को ज्यादा परेशानी हो रही है तो ऐसी स्थिति में इलाज जल्द से जल्द किया जाता है और निम्नलिखित तरह से ट्रीटमेंट किया जाता है-

    एंटीरैडमिक ड्रग्स (Antiarrhythmic drugs)

    वेंट्रिकुलर एरिथमिया के इलाज के लिए रनोलॉजीन (Ranolazine), बीटा-ब्लॉकर्स (Beta-blockers), ऐमियोडैरोन (Amiodarone), सोटालोल (Sotalol) एवं आइडोकेनिन (Lidocaine) प्रिस्क्राइब की जाती हैं। जर्नल ऑफ एरिथमिया (Journal of Arrhythmia) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार इन दवाओं का सेवन कम वक्त तक या ज्यादा समय तक किया जा सकता है। हालांकि दवाओं का सेवन कबतक करना है यह वेंट्रिकुलर एरिथमिया की स्थिति पर निर्भर करता है और डॉक्टर इस बारे में आपको सलाह देंगे।

    नोट : यहां वेंट्रिकुलर एरिथमिया के लिए दवाओं की सिर्फ जानकारी शेयर की गई है। वैसे तो ये दवाएं प्रिस्क्राइब्ड ड्रग्स की श्रेणी में आती है, लेकिन आपको यह हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि जितनी डोज पेशेंट को लेनी की सलाह दी गई है उतनी ही दवाओं का सेवन करना चाहिए। डोज से कम या ज्यादा पेशेंट के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

    इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफिब्रिलेटर (Implantable cardioverter defibrillator [ICD])

    इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफिब्रिलेटर एक छोटी सी डिवाइस है जिसे चेस्ट के अंदर इम्प्लांट किया जाता है। इस डिवाइस से एब्नॉर्मल हार्ट रिदम हार्ट को इलेक्ट्रिकल शॉक (Electric Shock) भेजने का काम करता है, जिससे हार्ट रेट को नॉर्मल करने में मदद मिल सकती है।

    कैथेटर एब्लेशन (Catheter ablation)

    कैथेटर एब्लेशन को मेडिकल टर्म में रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन भी कहा जाता है। इस प्रोसेस के दौरान हार्ट टिशू के छोटे से हिस्से को डिस्ट्रॉय किया जाता है और रेडियोफ्रीक्वेंसी एनर्जी का इस्तेमाल किया जाता है। रेडियोफ्रीक्वेंसी एनर्जी अनियमित हार्ट बीट की स्थिति पैदा करने वाले टिशू को नष्ट करने में सक्षम होते हैं।

    नोट: नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार वेंट्रिकुलर एरिथमिया के इलाज में कैथेटर एब्लेशन (Catheter ablation) प्राइमरी ट्रीटमेंट के रूप में भी मददगार जो सकती है। वहीं वेंट्रिकुलर एरिथमिया के इलाज के लिए दी जानी वाली ड्रग्स फायदेमंद हो सकती हैं, लेकिन इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफिब्रिलेटर की सहायता से इलाज कार्डियोलॉजिस्ट के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

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    किन-किन स्थितियों में वेंट्रिकुलर एरिथमिया की संभावना बढ़ सकती है? (Risk factor for Ventricular Arrhythmia)

    निम्नलिखित शारीरिक परेशानियों को ज्यादा वक्त तक इग्नोर करने से वेंट्रिकुलर एरिथमिया की संभावना बढ़ सकती है ,

    • फेमली में हार्ट डिजीज (Heart disease) की बीमारी होना।
    • स्मोकिंग (Smoking) करना
    • एल्कोहॉल और ड्रग्स (Alcohol or drugs) का सेवन करना।
    • सांस से जुड़ी (Respiratory disease) समस्या होना।
    • शरीर का वजन (Obesity) जरूरत से ज्यादा बढ़ना।
    • डायबिटीज (Diabetes) की समस्या होना।
    • हाय ब्लड प्रेशर (High blood pressure) की शिकायत रहना।
    • थायरॉइड से जुड़ी बीमारी (Thyroid disease) होना।
    • स्लीप एप्निया (Sleep apnea) की समस्या होना।

    ये शारीरिक परेशानियां वेंट्रिकुलर एरिथमिया की समस्या पैदा कर सकते हैं। इसलिए वेंट्रिकुलर एरिथमिया के लक्षण समझ आने पर इसे इग्नोर ना करें और जल्द से जल्द डॉक्टर से कंसल्ट करें।

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    दिल की बीमारी वेंट्रिकुलर एरिथमिया से बचाव कैसे संभव है? (Tips to Ventricular Arrhythmia)

    वेंट्रिकुलर एरिथमिया या दिल से जुड़ी किसी भी बीमारी में निम्नलिखित टिप्स को फॉलो करना चाहिए, जो इन बीमारियों से बचाव के साथ-साथ आपको स्वस्थ रहने में भी मदद कर सकते हैं। जैसे:

    इन 5 बातों को ध्यान में रखकर स्वस्थ रहने में मदद मिल सकती है।

    अगर आप वेंट्रिकुलर एरिथमिया (Ventricular Arrhythmia) या हार्ट डिजीज से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं, तो आप हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर पूछ सकते हैं। हमारे हेल्थ एक्सपर्ट आपके सवालों का जवाब जल्द से जल्द देने की कोशिश करेंगे। हालांकि अगर आप वेंट्रिकुलर एरिथमिया (Ventricular Arrhythmia) या किसी अन्य हेल्थ या हार्ट कंडिशन के शिकार हैं, तो डॉक्टर से कंसल्टेशन करें, क्योंकि ऐसी स्थिति में डॉक्टर आपके हेल्थ कंडिशन को ध्यान में रखकर इलाज कर सकते हैं।

    स्वस्थ्य रहने के लिए अपने दिनचर्या में नियमित योगासन शामिल करें। योग की शुरुआत करने से पहले नीचे दिए इस वीडियो लिंक पर क्लिक करें और योग के फायदे (Benefits of yoga) और योग करने के लिए क्या है सही तरीका इसे समझें। ध्यान रखें गलत तरीके से योग करने से शारीरिक परेशानी बढ़ सकती है।

    हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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    लेखक की तस्वीर badge
    Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 27/01/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड