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कितने प्रकार के होते हैं ईटिंग डिसऑर्डर?

के द्वारा मेडिकली रिव्यूड डॉ. हेमाक्षी जत्तानी · डेंटिस्ट्री · Consultant Orthodontist


Smrit Singh द्वारा लिखित · अपडेटेड 05/05/2021

कितने प्रकार के होते हैं ईटिंग डिसऑर्डर?

भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर) या समान्य शब्दों में इसे समझे तो ये खाने से जुड़ा एक ऐसा डिसऑर्डर जो एक खतरनाक व्यवहारात्मक समस्या है। इसमे इंसान को बहुत कम खाने या बहुत अधिक खाने की लत सी हो जाती है। इसके अतिरिक्त इंसान अपने शेप, साईज और वेट को लेकर बहुत ही कॉनेसेस या चिंतित हो जाता है। खाने के बारे में अत्यधिक चिंतित होना भी शामिल है। खाने के विकारों की वजह से हृदय और गुर्दा समस्याएं या कभी-कभी मृत्यु भी हो सकती है। आज हम ईटिंग डिसऑर्डर के कारण, लक्षण और बचाव के विषय में बात करेंगे। भोजन विकार के प्रकार, जो मुख्य होते हैं, इस आर्टिकल में बताए जाएंगे।

ईटिंग डिसऑर्डर होने के कारण

भोजन संबंधित विकार होने का कोई एक कारण नहीं होता है। जीन्स, पर्यावरण और तनावपूर्ण माहौल जैसे कारण ईटिंग डिसऑर्डर विकसित होने के पीछे मेन रोल निभाते हैं। इसके अलावा बॉडी इमेज, वजन या लुक्‍स पर बहुत ज्‍यादा ध्‍यान देने, कम उम्र में ही डायटिंग करने, कोई ऐसा स्‍पोर्ट खेलना जिसमें वजन पर ध्‍यान दिया गया हो, परिवार में किसी सदस्‍य को ईटिंग डिसऑर्डर होने, एंग्‍जायटी, डिप्रेशन जैसे मानसिक विकारों की वजह से भी ईटिंग डिसऑर्डर हो सकता है।

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एनोरेक्सिया नर्वोसा

इस भोजन विकार के प्रकार के कारण इंसान बहुत कम खाने लगता है। जिस कारण उसका वजन कम हो जाता है। कम वजन होने के बावजूद होते इस बीमारी में रोगी अपना वजन बढ़ाने से डरता है। इस विकार के कारण इंसान बहुत पतला हो जाता है, लेकिन इसके बाद भी उसे ऐसा महसूस होता है कि उसका वजन ज्यादा है।

एनोरेक्सिया के कारण

इस बीमारी का सीधा संबंध इंसान की शारीरिक, मानसिक और सामाजिक बनावट से जुड़ा है। इन्हीं तीन हिस्सों या किसी एक हिस्से पर ठेस पहुंचने या किसी कमी के कारण पीड़ित खुद खाने-पीने की अधिकता या लापरवाही करने लगता है और अंत में निराश हो जाता है। परिवार और सामाजिक दबाव के कारण भी एनोरेक्सिया हो सकता है।

माता-पिता या रिश्तेदार जब बच्चों के शारीरिक बनावट, वेट, साईज को लेकर उन्हें ताना देते हैं, तो ऐसी स्थिती में उन बच्चों को एनोरेक्सिया हो सकता है। स्ट्रेसफुल लाइफ स्टाईल एनोरेक्सिया को ट्रिगर कर सकता है। इस भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर) के लिए जेनिटिक कारक भी जिम्मेदार हो सकते है।

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भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर) एनोरेक्सिया के लक्षण

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बुलिमिया नर्वोसा

इस भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर) से पीड़ित इंसान खूब खा पीकर उसे उगलने की कोशिश करता है। मुंह में उंगली डालकर उल्टी करके खाने को बाहर निकालने का प्रयास करते हैं,। क्योंकि वे खुद को ज्यादा खाने के लिए दोषी मानते हैं। बार-बार जुलाब का प्रयोग करना और जबरदस्ती बार-बार उल्टी करने से उनके पाचन तंत्र और आहार नली को नुकसान पहुंचाता है।

बुलिमिया नर्वोसा के लक्षण

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बिंज-भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर)

बिंज-भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर) में इंसान को ज्यादा खाना खाने की लत हो जाती है। वह खुद को खाने पीने से रोक नहीं पाता और उससे होने वाले शारीरिक नुकसान को अनदेखा करता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं को खाने के विकार होने की संभावना ज्यादा होती है।

बिंज-ईटिंग के लक्षण

  • जरुरत से ज्यादा खानपान
  • बिना भूख के भी भोजन की बड़ी मात्रा खाना
  • शर्मिंदगी के कारण अकेले भोजन करना
  • निराश या उदास महसूस करना

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पाइका भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर)

पाइका एक दूसरा भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर) है, जिसमें मरीज को खाने की चीजों के अलावा दूसरी चीजें खाने का मन करता है। इसमें पीड़ित को आइस, धूल, मिट्टी, चॉक, साबुन, पेपर, हेयर, ऊन, लॉन्ड्री डिटर्जेंट आदि खाने का मन करता है। यह भोजन विकार बच्चों, युवाओं और टीनएजर को हो सकता है। यह डिसऑर्डर ज्यादातर बच्चों, चिल्ड्रन, प्रेग्नेंट महिलाओं और मेंटल डिसेब्लिटीज से ग्रसित लोगों में देखने को मिलता है। पाइका भोजन विकार से पीड़ित लोगों में इंफेक्शन, गट इंजरी और पोषक तत्वों की कमी जैसी परेशानियां देखने को मिलती हैं।

भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर) किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि महिलाओं में भोजन संबंधी मानसिक विकार पुरुषों की तुलना में ज्यादा देखने को मिलता है। हमेशा याद रखें कि आहार संबंधी विकार से पीड़ित व्यक्तियों को इलाज के दौरान बहुत सहयोग और सहायता की जरूरत होती है। इसलिए आप रोगी के प्रति सहानुभूति रखें। 

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अवॉइडेंट/ रेस्ट्रिक्टिव फूड इनटेक भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर) 

इस भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर) से पीड़ित व्यक्ति डेली रूटीन के लिए जरूरी पोषक तत्वों को प्राप्त नहीं कर पाता। क्योंकि उसका इंटरेस्ट खाने की तरफ नहीं रहता। इसमें डिसऑर्डर से ग्रसित व्यक्ति कुछ निश्चित कलर, टेक्सचर, स्मेल और टेस्ट को अवॉइड करता है। इस डिसऑर्डर में में चोकिंग और वेट बढ़ने के डर से भी खाना अवॉइड किया जाता है। इस भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर) के कारण वेट लॉस और बचपन में वजन न बढ़ पाना आदि परिणाम देखने को मिलते हैं। इसके साथ ही शरीर में पोषक तत्वों की कमी सीरियस हेल्थ प्रॉब्लम्स का भी कारण बन जाती है।

रूमिनेशन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर)

भोजन विकार के प्रकार में यह हाल ही में जुड़ा है। इस स्थिति में व्‍यक्‍ति खाने को बार-बार चबाता है और फिर उसे निगल लेता है या थूक देता है। यह विकार आमतौर पर खाना खाने के बाद 30 मिनट के अंदर शुरू होता है।

यह ईटिंग डिसऑर्डर शिशु, बच्‍चे या वयस्‍क व्‍यक्‍ति को हो सकता है। 3 से 12 महीने के शिशु को यह विकार हो सकता है और यह अपने आप ठीक भी हो जाता है। बच्‍चों और वयस्‍कों में इसके इलाज के लिए थेरेपी की जरूरत पड़ती है।

यदि नवजात शिशु में यह ठीक नहीं होता है, तो रूमिनेशन विकार की वजह से वजन में कमी और गंभीर रूप से कुपोषण हो सकता है। जो कि घातक साबित हो सकता है। इस विकार से ग्रस्‍त वयस्‍क व्‍यक्‍ति कम मात्रा में खाना खाता है, जिससे उनका वजन घट सकता है।

रूमिनेशन डिसऑर्डर हर उम्र के व्‍यक्‍ति को कभी भी प्रभावित कर सकता है। ये लोग खाना खाते ही उसे बार-बार चबाते हैं और फिर उसे निगल लेते हैं या थूक देते हैं।

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अन्य भोजन विकार के प्रकार

जबरदस्ती खाना निकालना: आज कल लोग अपनी डायट पर इसलिए ध्यान देने लगे हैं ताकि उनका वजन व आकार न बड़े और इसके लिए वह अनेक तरह के उपाय अपनाते हैं। जैसे उल्टी, जुलाब, मूत्रवर्धक दवाएं या अत्यधिक व्यायाम करके अपने वजन को कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं।

नाइट ईटिंग सिन्ड्रोम: इस सिन्ड्रोम से पीड़ित व्यक्ति को रात में बहुत भूख लगती है, जिस वजह से वह बहुत खाना खाते हैं। 

इसके अलावा कई ऐसे भी ईटिंग डिसऑर्डर होते हैं: जब व्यक्ति खाने को लेकर बहुत चुनाव करने लग जाता है। वह सिर्फ हेल्दी खाना खाने के लिए जूनूनी हो जाता है। जिसके कारण वह अपनी हेल्दी डायट से कई जरूरी फूड्स को हटा देता है और कुपोषण का शिकार हो जाता है। यह बीमारी व्यक्ति को इतना इफेक्ट करती है कि वह घर से बाहर तक जाने से डरता है, जो भावनात्मक रूप से उसपर बुरा प्रभाव डालती है।

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बच्चों में भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर) क्या है?

अगर कोई बच्चा ठीक मात्रा में खाना नहीं खा रहा है, तो वह बढ़ती उम्र के साथ बहुत सी परेशानियों से घिर सकता है। ठीक से न खाने से बच्चों को अपनी हाइट से समझौता करना पड़ सकता है। माता-पिता को बच्चों में ईटिंग डिसऑर्डर को डायग्नोसिस करने के लिए भी बहुत कोशिश करनी पड़ती है। माता-पिता के लिए यह समझना मुश्किल होता है कि बच्चों में ईटिंग डिसऑर्डर है या वह खाने में नखरे दिखा रहा। अवॉइडेंट/रिस्ट्रिक्टिव फूड इनटेक डिसऑर्डर (Avoidant/Restrictive Food Intake Disorder ) भी बच्चों के ईटिंग डिसऑर्डर के रूप में है।

माता-पिता बच्चों में ईटिंग डिसऑर्डर के लिए जिम्मेदार नहीं हैं, वह अपने बच्चों को इससे उबरने में मदद करने के लिए एक पॉजिटिव फोर्स हो सकते हैं। बहुत छोटे बच्चों को उनके माता-पिता इस परेशानी से बाहर निकाल सकते हैं।

भोजन के इन विकार से बचने के लिए रोगी को तुंरत ही किसी अस्पताल या डॉक्टर से संपर्क करने के लिए बोलें। सार्थक प्रयास, पारिवारिक सहयोग और मित्रों के साथ से रोगी को इस समस्या से दूर जाने में कम समय लगेगा। भोजन विकार किसी को भी हो सकता है, इसलिए जरूरी है कि सेहतमंद आहार लें। भ्रम से बचें और किसी के बहकावे में अपने शरीर और वजन को लेकर शंका ना करें।

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भोजन विकार के प्रकार का निदान

मनोचिकित्सक आपकी हिस्ट्री, लक्षण, सोच और खाने की दिलचस्पी देखकर आपके डायट प्लान को चेंज करने की सलाह दे सकते हैं। डॉक्टर आपका वजन और आपकी हाइट से आपके पहले के ग्रोथ चार्ट को देखकर मापेंगे और यह पता लगाएंगे की इस विकार के कारण आपकी ग्रोथ पर तो प्रभाव नहीं पड़ रहा है। यह जांच कर के वह आपको बतायेंगे कि इस बीमारी का मूल कारण क्या है। ताकि इलाज की प्रक्रिया तय करने में आसानी हो।

डिस्क्लेमर

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