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ये हैं ब्रेन और नर्वस सिस्टम की तकलीफें और कुछ ऐसे होता है इनका उपचार!

ये हैं ब्रेन और नर्वस सिस्टम की तकलीफें और कुछ ऐसे होता है इनका उपचार!

मस्तिष्क मानव शरीर का सबसे जटिल हिस्सा और नियंत्रण केंद्र है। हमारा दिमाग नर्वस सिस्टम का हिस्सा है, जिसमें रीढ़ की हड्डी और नसों और न्यूरॉन्स का एक बड़ा नेटवर्क भी शामिल है। यह नर्वस सिस्टम आपकी इंद्रियों से लेकर आपके पूरे शरीर की मांसपेशियों तक को नियंत्रित करता है। मस्तिष्क वो महत्वपूर्ण अंग है जो हमारे विचारों (Thoughts), याददाश्त (Memory), भावनाओं (Emotions) ,मोटर स्किल्स (Motor Skills), दृष्टि (vision) श्वास (Breathing), तापमान (Temperature), भूख (Hunger) आदि के साथ हमारे शरीर को नियंत्रित करने वाली हर प्रक्रिया को कंट्रोल करता है। ब्रेन और नर्वस सिस्टम की तकलीफें (Brain and Nervous Systems Problems) हमारे पूरे शरीर को प्रभावित कर सकती हैं। आइए, जानते हैं अब नर्वस सिस्टम के बारे में:

नर्वस सिस्टम और उसके कार्य क्या हैं?

नर्वस सिस्टम एक जटिल सिस्टम है जो शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित और समन्वयित करता है। यह दो प्रमुख विभाजनों से बना है, जो इस तरह से हैं:

  • सेंट्रल नर्वस सिस्टम (Central nervous system): इसमें मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी शामिल हैं।
  • पेरीफेरल नर्वस सिस्टम (Peripheral nervous system) : इसमें पेरीफेरल नर्वस और ऑटोनोमिक नर्वस सहित अन्य सभी न्यूरल एलिमेंट्स शामिल हैं।

यह भी पढ़ें: ब्रेन स्ट्रोक के कारण कितने फीसदी तक डैमेज होता है नर्वस सिस्टम?

तंत्रिका तंत्र के चार मुख्य कार्य हैं:

  • ‘होमियोस्टैसिस’ को बनाए रखने के लिए शरीर के अंदर के वातावरण पर नियंत्रण रखना।
  • जीन बोन रिफ्लेक्स प्रोग्रामिंग
  • याद रखना और सीखना
  • मूवमेंट पर नियंत्रण

ब्रेन और नर्वस सिस्टम की तकलीफें

विभिन्न ब्रेन और नर्वस सिस्टम की तकलीफें कौन सी हैं? (Various Brain and Nervous Systems Problems)

विभिन्न ब्रेन और नर्वस सिस्टम की तकलीफें (Brain and Nervous Systems Problems) में कोई भी स्थिति या अक्षमता शामिल हो सकती है जो मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम को प्रभावित करती है। कुछ ब्रेन और नर्वस सिस्टम की तकलीफें (Brain and Nervous Systems Problems) इस प्रकार हैं:

सिरदर्द (Headache)

सिरदर्द सबसे सामान्य न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है और यह कई तरह की हो सकती है जैसे माइग्रेन, क्लस्टर सिरदर्द आदि। सिरदर्द लगातार हो सकती है या कभी-कभी भी हो सकती है। इसके लक्षण इस प्रकार हैं

  • जी मचलना (Nausea)
  • उलटी आना (Vomiting)
  • आंखों में दर्द (Pain in the eyes)
  • वर्टिगो (Vertigo)
  • सिर में अकड़न (Tightness Sensation in the Head)
  • स्ट्रोक (Stroke)

कारण और रिस्क फैक्टर (Causes and Risk Factors)

ब्रेन और नर्वस सिस्टम की तकलीफें (Brain and Nervous Systems Problems) आपके पूरे जीवन को प्रभावित कर सकती हैं। सिरदर्द कई स्वास्थ्य स्थितियों के कारण हो सकती है जैसे आर्थराइटिस, तनाव, स्लीप एपनिया आदि। इसके साथ ही भूख, कम सोना या पोस्चर का सही न होना भी इसके कारण हैं। इससे जुड़े रिस्क फैक्टर इस प्रकार हैं।

  • हाय ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure)
  • इंफेक्शंस (Infections)
  • टेम्पोरल आर्टरीटिस (Temporal Arteritis)
  • ट्यूमर (Tumors)

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निदान और उपचार (Diagnosis and Treatment)

सिरदर्द के निदान के लिए डॉक्टर यह जानेंगे कि आपके लक्षण और पारिवारिक हिस्ट्री आदि क्या है। इसके साथ ही लक्षणों से सिरदर्द के प्रकार के बारे में भी पता लगाया जा सकता है। सिरदर्द का उपचार कुछ दवाइयों के साथ किया जा सकता है या हेल्दी लाइफस्टाइल से भी आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।

स्ट्रोक (Stroke)

स्ट्रोक तब होता है जब दिमाग के अंदर या बाहर की धमनियां कमजोर हो जाती है। इसके कारण दिमाग के उत्तकों को बहुत नुकसान होता है। आमतौर पर स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानना मुश्किल होता है, लेकिन इसके कुछ लक्षण हैं आंखों में धुंधलापन (Blurred Vision), बोलने और समझने से समस्या (Trouble in Speaking or understanding) ,संतुलन न बनाए रख पाना (Loss of Balance), बहुत अधिक सिरदर्द (Severe Headache)।

“इस बारे में फोर्टिस हॉस्पिटल, मुलुंड की फिजिशियन एंड इंफेक्शन डिजीज स्पेशलिस्ट डा. अनीता मैथवे का कहना है कि तनाव से अटैक और स्ट्रोक खतरा बढ़ जाता है। इसलिए इन मरीजों को अपने लाइफस्टाइल और खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। तनाव का स्ट्रोक और अटैक से बहुत गहरा संबंध है। मस्तिष्क में स्ट्रोक या हार्ट अटैक की कंडीशन (Heart Attack Condition) तब होती है, जब ऑक्सिजन की आपूर्ति हो जाती है। जिस कारण मस्तिष्क में रक्त का रिसाव, मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनी में थक्का या मस्तिष्क को ऑक्सिजन की आपूर्ति और हदय में ऑक्सिजन की आपूर्ति होने लगती है। तनाव जब बहुत अत्यधिक हो जाता है, तब इसका प्रभाव सबसे पहले हार्ट (Heart) और ब्रेन (Brain) पर ही पड़ता है।”

कारण और रिस्क फैक्टर्स

कुछ बीमारियां जैसे हाय ब्लडप्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल या मोटापा आदि स्ट्रोक के कारण हो सकते हैं। इसके अलावा स्लीप एप्निया भी इसका कारण है। इससे जुड़े कुछ रिस्क फैक्टर इस प्रकार हैं :

  • हाय ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure)
  • स्मोकिंग (Smoking)
  • डायबिटीज (Diabetes)
  • हाय ब्लड कोलेस्ट्रॉल लेवल (High Blood Cholesterol Level)
  • अधिक शराब पीना (Heavy Drinking)
  • अधिक नमक और वसा युक्त आहार (High salt and Fat Diet)
  • एक्सरसाइज न करना (Lack of exercise)

यह भी पढ़ें: ब्रेन स्ट्रोक की बीमारी शरीर के किस अंग को सबसे ज्यादा डैमेज करती है?

उपचार और निदान (Diagnosis and Treatment)

स्ट्रोक का उपचार इसके प्रकार पर निर्भर करता है। डॉक्टर इसके लिए हेड सिटी स्कैन (head CT Scan) या मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (Magnetic resonance imaging) कराने के लिए कह सकते हैं। अन्य टेस्ट में ब्लड टेस्ट, इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम(electrocardiogram), इकोकार्डियोग्राफी(echocardiography) आदि शामिल हैं। जब कोई व्यक्ति स्ट्रोक का सामना करता है तो डॉक्टर का लक्षण उन्हें दूसरे स्ट्रोक से बचाना होता ह। इसके लिए वो दवाइयों का प्रयोग कर सकते हैं। इसके साथ ही डॉक्टर सही व्यायाम और सही आहार लेने की सलाह भी देंगे।

सीज़र्स (Seizures)

सीज़र्स मस्तिष्क की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी (Electrical Activity) में परिवर्तन हैं। यह एक आम बीमारी है। सीज़र्स के लक्षण आपके सीज़र्स की गंभीरता के आधार पर भिन्न हो सकते हैं, लेकिन सबसे आम लक्षण इस प्रकार हैं:

  • कॉग्निटिव या इमोशनल लक्षण जैसे ड़र, एंग्जायटी आदि (Cognitive or Emotional Symptoms)
  • चेतना या जागरूकता में कमी (Loss of Consciousness or Awareness)
  • अस्थायी भ्रम (Temporary Confusion)

कारण और रिस्क फैक्टर्स (Causes and Risk Factors)

एक सीजर अक्सर मिर्गी का परिणाम है, लेकिन इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं। इससे जुड़े रिस्क फैक्टर्स इस प्रकार हैं:

  • अधिक शराब पीने से (Alcohol abuse)
  • सिर का आघात (Head Trauma)
  • अधिक बुखार (High Fever)
  • नींद कम आना (Lack of Sleep)
  • लौ ब्लड सोडियम (Low Blood Sodium)
  • दर्द से राहत पहुंचाने वाली दवाईयां (Pain Relieving Drugs) )

निदान और उपचार(Diagnosis and Treatment)

सीज़र के बाद डॉक्टर की सलाह और उपचार जरूरी है। प्रारंभिक उपचार और दवा आपके सीज़र्स को नियंत्रित कर सकते हैं, और आप दीर्घकालिक जटिलताओं जैसे मेमोरी लोस्स और ब्रेन डैमेज से बचेंगे।

पार्किंसंस रोग डिजीज (Parkinson’s Disease)

पार्किंसंस रोग एक प्रोग्रेसिव नर्वस सिस्टम विकार है जो आपके मूवमेंट को प्रभावित करता है। आमतौर पर, यह 60 साल की उम्र के आसपास के लोगों को प्रभावित करना शुरू कर देता है, और लक्षण धीरे-धीरे समय के साथ खराब हो जाते हैं। इसके सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं

  • कब्ज (Constipation)
  • मांसपेशियों में अकड़न (Muscle stiffness)
  • किसी चीज की गंध न आना (Reduced smell)
  • चेहरे में अकड़न (Stiff face)
  • बोलने में समस्या (Speech changes)

यह भी पढ़ें: वृद्धावस्था में दिमाग कमजोर होने से जन्म लेने लगती हैं कई समस्याएं, ब्रेन स्ट्रेचिंग करेगा आपकी मदद

कारण और रिस्क फैक्टर्स (Causes and Risk Factors)

पार्किंसंस रोग मस्तिष्क के भाग में नर्व सेल्स को नुकसान होने के कारण होता है। जिसे सुब्स्टेन्शिया नाइग्रा (substantia nigra) कहा जाता है। जीन और एनवायर्नमेंटल ट्रिगर्स भी इस समस्या का कारण हैं। इन स्थितियों में इसका जोखिम बढ़ सकता है:

  • उम्र (Age)
  • आनुवंशिकता (Heredity)
  • लिंग (Sex)
  • टॉक्सिंस के संपर्क में आना (Exposure to toxins)

ब्रेन स्ट्रोक

निदान और उपचार (Diagnosis and Treatment)

आपके डॉक्टर आपके लक्षणों को जानकर पार्किंसंस रोग का निदान करेंगे। इसके साथ ही शारीरिक जांच भी की जाएगी। कई मामलों में, आप लक्षणों को कम करके और दवा के माध्यम से पार्किंसंस रोग को प्रभावी ढंग से प्रबंधित कर सकते हैं।

अल्जाइमर रोग (Alzheimer’s Disease)

अल्जाइमर रोग एक न्यूरोलॉजिक विकार है जिसके कारण दिमाग सिकुड़ जाता है और मस्तिष्क की कोशिकाएं मर जाती हैं। अल्जाइमर रोग डिमेंशिया (dementia) का सबसे आम कारण है। इसके लक्षण इस प्रकार होते हैं:

  • मेमरी लॉस (Memory Loss)
  • कॉग्निटिव डेफीसीट्स (Cognitive Deficits)
  • किसी चीज या व्यक्ति को पहचानने में मुश्किल होना (Problems with Recognition)
  • बोलने, पढ़ने या लिखने में समस्या (Problems with Speaking, Reading, or Writing )
  • व्यक्तित्व या व्यवहार में परिवर्तन (Personality or Behavior Changes)

अल्जाइमर रोग के कारण (Cause of Alzheimer’s Disease)

अल्जाइमर रोग के सही कारणों को पूरी तरह से समझा नहीं गया है। लेकिन ऐसा माना जाता है कि जब ब्रेन प्रोटीन सामान्य रूप से कार्य करने में विफल रहता है तो न्यूरॉन्स क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। जिसके कारण यह समस्या हो सकती है। इस रोग से जुड़े रिस्क फैक्टर इस प्रकार हैं:

  • अधिक उम्र (Aging)
  • फैमिली हिस्ट्री (Family History)
  • जीन (Genes)

अल्जाइमर रोग का निदान और उपचार (diagnosis and Treatment of Alzheimer’s Disease)

अल्जाइमर में व्यक्ति मेमरी लॉस, कॉग्निटिव डिक्लाइन या बिहेवियरल चेंज का सामना करता है जिससे उनका जीवन प्रभावित होता है। इस समस्या के निदान के लिए व्यक्ति के लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री आदि के बारे में जाना जाएगा। इसके साथ ही यह टेस्ट भी कराए जा सकते हैं:

  • न्यूरोलॉजिकल फंक्शन टेस्ट्स (Neurological Function Tests)
  • ब्लड या यूरिन टेस्ट (Blood or Urine Tests )
  • दिमाग का सिटी स्कैन या MRI स्कैन (CT scan or MRI scan of the Brain)
  • जेनेटिक टेस्टिंग (Genetic Testing)

अल्जाइमर रोग का कोई इलाज नहीं है। हालांकि, इसके लक्षणों को कम करके व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता का बढ़ाया जा सकता है, जैसे:

  • कोलेलिनेस्टरेज़ इन्हिबिटर्स (Cholinesterase Inhibitors) नामक ड्रग्स कॉग्निटिव लक्षणों को कम कर सकते हैं।
  • सभी चरणों का इलाज करने के लिए डोनेपजिल (Donepezil)
  • हल्के-से-मध्यम चरणों का इलाज करने के लिए गैलेंटामाइन (Galantamine)
  • हल्के से मध्यम चरणों का इलाज करने के लिए रिवास्टिगमिन (rivastigmine)

इसके साथ ही डॉक्टर जीवनशैली में सुधार और इमोशनल व बिहेवियर ट्रीटमेंट के लिए कुछ अन्य दवाईयों को तरीकों की सलाह दे सकते हैं।

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ब्रेन और नर्वस सिस्टम की तकलीफें दूर करने के लिए कौन सी थेरेपीज हैं? (Therapies for Brain and Nervous Systems Problems)

ब्रेन और नर्वस सिस्टम की तकलीफें (Brain and Nervous Systems Problems) दूर करने में कुछ थेरेपीज महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। सही थेरेपीज का चुनाव किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत जरूरतों, चिकित्सा स्थिति और डॉक्टर की देखरेख में होना चाहिए। जानिए कौन सी हैं यह थेरेपीज:

  • इलेक्ट्रोकन्वल्सिव थेरेपी (Electroconvulsive Therapy): इलेक्ट्रोकंवल्सिव थेरेपी में गंभीर मानसिक विकारों के इलाज के लिए इलेक्ट्रिक करंट का उपयोग किया जाता है। इस प्रकार की थेरेपी आमतौर पर तभी की जाती है जब अन्य उपचारों (जैसे एंटीडिप्रेसेंट दवा या मनोचिकित्सा) के बाद किसी मरीज की बीमारी में सुधार नहीं होता है।
  • वेगस नर्व स्टिमुलेशन (Vagus Nerve Stimulation): वेगस स्टिमुलेशन (VNS) त्वचा के नीचे प्रत्यारोपित एक उपकरण के माध्यम से काम करता है जो बाईं वेगस की नसों के माध्यम से इलेक्ट्रिकल पल्स को भेजता है। वेगस नर्वसमस्तिष्क से शरीर के प्रमुख अंगों (जैसे दिल, फेफड़े और आंत) और मस्तिष्क के उन क्षेत्रों में संदेश ले जाती हैं जो मूड, नींद और अन्य कार्यों को नियंत्रित करते हैं।
  • रेपेटिटिव ट्रांसक्रानियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन (Repetitive Transcranial Magnetic Stimulation): रेपेटिटिव ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन में मस्तिष्क को सक्रिय करने के लिए एक चुंबक का उपयोग किया जाता है। इसका प्रयोग अवसाद, मनोविकार, चिंता और अन्य विकारों के उपचार के रूप में किया जाता है।
  • मैग्नेटिक सीज़र थेरेपी (Magnetic Seizure Therapy): मैग्नेटिक सीज़र थेरेपी में मस्तिष्क में बिजली के बजाय मैग्नेटिक पल्सेस का उपयोग करता है। इस थेरेपी का लक्ष्य कॉग्निटिव दुष्प्रभावों को कम करते हुए प्रभावशीलता को बनाए रखना है। मैग्नेटिक सीज़र थेरेपी मानसिक विकारों के लिए परीक्षण के प्रारंभिक चरण में है, लेकिन प्रारंभिक परिणाम आशाजनक हैं।

ब्रेन और नर्वस सिस्टम की तकलीफें कम करने के लिए अपनी जीवनशैली में क्या बदलाव लाने चाहिए? (Lifestyle changes for Brain and Nervous Systems Problems)

ब्रेन और नर्वस सिस्टम की तकलीफें रोगी को लंबे समय तक परेशान कर सकती हैं। हालांकि, इनका इलाज संभव है। लेकिन इन तकलीफों से बचने और राहत पाने के लिए आपको अपने जीवन में भी कुछ बदलाव लाने चाहिए। यह बदलाव इस प्रकार हैं :

यह भी पढ़ें: जानिए ब्रेन स्ट्रोक के बाद होने वाले शारीरिक और मानसिक बदलाव

  • सही आहार का सेवन (Right Diet) : अगर आप ब्रेन और नर्वस सिस्टम की तकलीफें (Brain and Nervous Systems Problems) कम करना चाहते हैं तो अपने आहार में फल, सब्जियों, साबुत अनाज और लीन प्रोटीन को शामिल करें
  • स्मोकिंग से बचे (Don’t Smoking) : तंबाकू हर तरह से ब्रेन और नर्वस सिस्टम के लिए हानिकारक है। इसलिए स्मोकिंग या तंबाकू का किसी भी रूप में उपयोग करने से बचे।
  • व्यायाम (Exercise) : एक्सरसाइज करने से खून अच्छे से प्रवाहित होता है और ब्रेन और नर्वस सिस्टम की तकलीफें (Brain and Nervous Systems Problems) कम होती है। इसलिए दिन में कुछ समय व्यायाम के लिए अवश्य निकालें।
  • मोटापा कम करें (Control Obesity) : मोटापा कई बीमारियों का कारण है जैसे हाय ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज या दिल संबंधी बीमारियां। ऐसे में हेल्दी वजन को बनाए रखने की कोशिश करें।
  • एल्कोहल का सेवन न करें (Stay away from Alcohol): एल्कोहल के सेवन से भी ब्रेन और नर्वस सिस्टम को नुकसान होता है ऐसे में इसका सेवन न करें या मात्रा सीमित रखें।
  • तनाव (Depression): शरीर की कई समस्याओं जिनमें ब्रेन और नर्वस सिस्टम की तकलीफें (Brain and Nervous Systems Problems) भी शामिल हैं, को कम करने के लिए तनाव को मैनेज करना बहुत जरूरी है। क्योंकि लगातार साइकोलॉजिकल प्रेशर से आपकी धमनी की दीवारों को नुकसान हो सकता है। इसके साथ ही कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों को भी नियंत्रण में रखना जरूरी है।

ब्रेन और नर्वस सिस्टम की तकलीफें

रोगी के परिवार के सदस्यों या देखभाल करने वालों के लिए टिप्स (Tips for Patient’s Family Members or Care Takers)

ब्रेन और नर्वस सिस्टम (Brain and Nervous Systems) रोग के रोगी की देखभाल भावनात्मक और शारीरिक रूप से कठिन हो सकती है। इस दौरान रोगी को आपकी हर तरह की मदद की जरूरत होती है। यह समय आपके और रोगी दोनों के लिए मुश्किल हो सकता है। रोगी के परिवार के सदस्यों या देखभाल वालों के लिए टिप्स इस प्रकार हैं:

  • किसी भी इमरजेंसी को रोकने के लिए आपको हर तरह से तैयार रहना चाहिए।
  • समस्याओं की पहचान करें, पता करें कि क्या आवश्यक है, और इसके माध्यम से पालन करें। दूसरों की सलाह और मदद लेने से न डरें।
  • हमेशा सकारात्मक रहें।
  • एक देखभाल करने वाले के रूप में अपनी खुद की ताकत और कमजोरियों को पहचानें। यह आपको सीमाएं निर्धारित करने और यह जानने में मदद करता है कि मदद कब मांगी जाए।
  • देखभाल करने वालों में से एक सबसे महत्वपूर्ण काम उस व्यक्ति के साथ खुलकर बात करना है जो बीमार है।
  • मरीज के साथ ही अपना भी ध्यान रखें

यह भी पढ़ें: Anti-Glomerular Basement Membrane: एंटी ग्लोमेरूलर बेसमेंट मेंब्रेन टेस्ट क्या है?

ब्रेन और नर्वस सिस्टम की तकलीफें (Brain and Nervous Systems Problems) सामान्य हैं। लेकिन, यह कभी-कभी गंभीर भी हो सकती हैं। इसलिए आपके लिए उनके लक्षणों के बारे में जानना और सही उपचार कराना जरूरी है। इसके साथ ही हमेशा पॉजिटिव सोच रखें। क्योंकि, शारीरिक रूप से स्वस्थ होने के लिए आपका मानसिक रूप से स्वस्थ होना आवश्यक है।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र
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Toshini Rathod द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 28/07/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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