जानिए टॉडलर्स और प्रीस्कूलर्स बच्चों के स्वास्थ्य और देखभाल के बारे में

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट February 23, 2021 . 7 मिनट में पढ़ें
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टॉडलर्स और प्रीस्कूलर्स (Toddlers and Preschoolers) बच्चे इस उम्र में अच्छे से चलना, बोलना, दौड़ना और अन्य मोटर स्किल्स सीखते हैं। यह बच्चों के विकास (Kids Development) के महत्वपूर्ण पड़ावों में से एक है। इस उम्र में बच्चे को हर चीज के बारे में जानने की भी उत्सुकता रहती है। यह भी सच है कि इस उम्र में बच्चा खुद हर काम करना चाहता है और अपनी समस्याओं के बारे में स्वयं आपको बता सकता है। लेकिन माता-पिता के लिए उनकी पूरी करना देखभाल जरूरी है। जानिए, इस उम्र में कैसा होना चाहिए बच्चों का स्वास्थ्य (1-3 साल)(Kids Health), बच्चों के विकास (Kids Development) और डायट के बारे में जानना न भूले।

टॉडलर्स और प्रीस्कूलर्स (Toddlers and Preschoolers) में होने वाले प्रमुख फिजिकल डेवलपमेंट

हर माता पिता के लिए अपने बच्चे को बढ़ते हुए देखना एक अलग ही अहसास होता है। माता-पिता बच्चे से जुड़े हर पल को सहेज कर रखना चाहते हैं। फिर वो चाहे, उसकी पहली स्माइल हो, पहला शब्द, पहली बार उसका चलना या कुछ और। इस दौरान बच्चे में फिजिकली बहुत बदलाव (Physical Changes) आते हैं, जैसे: 

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बोलना (Speaking)

अपने बच्चों का स्वास्थ्य (1-3 साल) (Kids Health) की जानकारी में सबसे पहले है उसकी लैंग्वेज डेवलोपमेंट (Language Development)। जब बच्चा एक साल का हो जाता है तो वो अपने आसपास के लोगों को सुनकर बोलने की कोशिश करता है। धीरे-धीरे उसकी शब्दावली बढ़ती रहती है। जानिए उम्र के साथ बच्चे की लैंग्वेज डेवलोपमेंट कैसे होती है।

बच्चों का स्वास्थ्य (1-3 साल)

18 महीनों तक का बच्चा

  • आठ से दस शब्द बोलना सिख जाता है।
  • वो आपकी आदेशों जैसे “यहां आओ” आदि भी समझ जाता है।
  • लोगों या चीजों के नाम के अनुसार उन्हें पहचानता है। 
  • बड़बड़ाते समय उसके मुंह से कई तरह की आवाजें निकलती हैं। यह बच्चों के विकास (Kids Development) का संकेत है।

2 साल का बच्चा

तीन साल तक का बच्चा

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खेलना

खेलना भी बच्चों का स्वास्थ्य (1-3 साल) (Kids Health) कैसा है, इस के बारे में बहुत कुछ बता सकता है। अगर आपके बच्चे को खेलने से समस्या हो रही है तो यह लैंग्वेज डेवलोपमेंट (Language Development), फाइन और सकल मोटर डेवलपमेंट (Fine and Motor Development) सहित बच्चों के विकास (Kids Development) से जुडी अन्य समस्याओं की तरफ संकेत हो सकता है।  

18 महीनों तक का बच्चा

2 साल का बच्चा 

  • दूसरे बच्चों एक साथ खेलने में रूचि लेता है।
  • परिचित वस्तुओं के साथ कल्पनाशील खेल में सक्रिय रूप से शामिल होता है।

3 साल का बच्चा

  • खेल के बेसिक रूल जैसी शेयरिंग, अपनी बारी का इंतजार करना आदि सीखता है।
  • हर खेल को समझता है और भावनाओं को व्यक्त करता है।

Quiz: शिशु की देखभाल के जानने हैं टिप्स तो खेलें क्विज

ग्रॉस मोटर डेवलपमेंट (Gross Motor Development)

जानिए, इस उम्र में बच्चों का स्वास्थ्य (1-3 साल) (Kids Health) में ग्रॉस मोटर डेवलपमेंट कैसा होता है:

18 महीनों का बच्चा

  • सीढ़ियां चढ़ना सीख जाता है। 
  • आपके हाथ या किसी चीज का सहारा लेते हुए एक-एक करके सीढ़ी से नीचे उतरता है
  • बॉल को किक करने की कोशिश करता है।

2 साल का बच्चा 

  • एक गेंद को संतुलन खोए बिना आगे की ओर किक करता है।
  • अकेले सीढ़ियों से ऊपर-नीचे जा सकता है।
  • कूद सकता है।

तीन साल का बच्चा

  • पीछे की तरफ चल सकता है।
  • एक तिपहिया साइकिल चला सकता है।
  • बिना गिरे दौड़ सकता है।

बच्चों का स्वास्थ्य (1-3 साल)

फीडिंग स्किल्स (Feeding Skills)

आपने हमेशा लोगों को बच्चों के लिए कहते हुए सुना होगा कि खाने के साथ मत खेलो। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बच्चों का स्वास्थ्य (1-3 साल) (Kids Health) ही केवल खाने से नहीं जुड़ा होता बल्कि बच्चा उससे बहुत कुछ सीख सकता है और बच्चों के विकास (Kids Development) के लिए यह जरूरी है।

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18 महीने का बच्चा

  • अपना कप खुद उठा सकता है।
  • अपने चम्मच से खुद को खिला सकता है हालांकि कुछ मात्रा में गिरा भी देगा।
  • इस दौरान विभिन्न तरह के आहार खाने में दिलचस्पी लेता है।

2  साल का बच्चा 

3 साल का बच्चा

  • फोर्क के प्रयोग से खुद को खिलाने की कोशिश करता है।
  • नैपकिन से मुंह साफ़ कर सकता है
  • खुद खाना डालने की कोशिश करना

इस दौरान बच्चे में होने वाले इमोशनल या मेंटल चेंजेज (Emotional and mental changes)

इस दौरान बच्चों में शारीरिक, मानसिक के साथ ही भावनात्मक बदलाव भी आते हैं। बच्चों का स्वास्थ्य (1-3 साल) (Kids Health) में क्या परिवर्तन आते हैं, इसमें इमोशनल बदलाव भी शामिल हैं। जैसे:

  • इस उम्र में बच्चा अधिक जागरूक हो जाता है, जिसमें वो अपना हर काम खुद करना चाहता है।
  • बच्चा जो भी महसूस करता है, उसे एक्सप्रेस करता है।
  • तीन साल का होने पर अधिकतर बच्चे डर, शर्मिंदगी, सहानुभूति, ईर्ष्या और शर्म जैसी भावनाओं को समझने लगते हैं। 
  • छोटी-छोटी बातों पर परेशानी भी महसूस करेगा। 
  • वो इस बात को नहीं समझ पाएगा कि जो उसे चाहिए, वो उसे क्यों नहीं मिल रही है। ऐसे में उसका जिद्दी होना भी स्वभाविक है। 

आपके बच्चे को इन नई भावनाओं को समझने में मदद करने के लिए आपको धैर्य और उसे सपोर्ट करने की आवश्यकता है।

टॉडलर्स और प्रीस्कूलर्स (Toddlers and Preschoolers) की देखभाल कैसे की जाएं? 

टॉडलर्स और प्रीस्कूलर्स (Toddlers and Preschoolers) बच्चों का स्वास्थ्य (1-3 साल) (Kids Health) ही नहीं बल्कि उसकी सुरक्षा भी बहुत मुख्य चिंता का विषय है। जैसे ही बच्चा चलना शुरू करता है तो वो दुनिया को एक्सप्लोर करने के लिए तैयार रहता है। लेकिन, इसमें कुछ जोखिम भी हैं। बच्चे (kids) की सुरक्षा के लिए कुछ टिप्स इस प्रकार हैं:

पोइज़निंग (Poisoning)

छोटे बच्चे हर चीज को मुंह में डालते हैं, जबकि थोड़े बड़े अलमारियों में से नयी चीज़ें ढूंढते हैं। ऐसे में शिशु की सुरक्षा जरूरी है। इसके लिए कुछ उपाय करें, जैसे:

जलना (Burn)

बच्चे की छोटी उंगलियां हर जगह को छुने के लिए बेताब रहती है, ऐसे में बच्चे को जलने से भी बचाना चाहिए। इसके लिए टिप्स: 

  • जब आप खाना बना रही हों या कपड़े प्रेस कर रही हों, तो बच्चे (kids) को अपने पास ना आने दें। 
  • कभी भी बच्चे को रसोईघर में न आने दें। 
  • माचिस, लाइटर जैसी चीजों को भी बच्चे की पहुंच से दूर रखें।

बच्चे की सेहत

गिरना (Fall)

इस उम्र में बच्चा चलना सीखता है, तो बार-बार गिर भी सकता है। ऐसे में कुछ टिप्स इस प्रकार हैं:

  • सीढ़ियों के पास सेफ्टी गेट लगवाएं  और खिड़कियों को भी सुरक्षित कराएं। 
  • जब भी बच्चा फर्नीचर या अन्य चीजों पर चढ़ने की कोशिश करें उस पर नजर रखें ।
  • खेलते हुए भी उसके पास ही रहें।

चोकिंग (Chocking)

इस उम्र में बच्चे हर चीज को मुंह में डालते हैं, जिससे चोकिंग की संभावना बेहद बढ़ जाती है। इससे बचने के कुछ टिप्स इस प्रकार हैं:

  • जब तक बच्चा चार साल का नहीं हो जाता, उसे कुछ चीज़ें बच्चे (kids) को खाने को न दें। जैसे पॉपकॉर्न, पूरा अंगूर, कच्ची गाजर, मेवे, सख्त टॉफी आदि। 
  • कॉइन, बटन, सेफ्टी पिन आदि को बच्चे की पहुंच से दूर रखें।
  • उसके खिलोनें ऐसे हों जिनके छोटे भागों को बच्चा मुंह में न डाले

अन्य (Other)

  • जब आप अपने बच्चे को गाडी में ले जा रहे हों, बच्चे के लिए सेफ्टी सीट का प्रयोग करें ।
  • कभी भी अपने बच्चे को पानी के पास अकेला न छोड़े। 
  • बच्चों को हमेशा हाथ धोने की आदत डालें ताकि वो बीमारियों से बच सके
  • जब भी बच्चे (kids) बाहर खेले, उसके साथ किसी बड़े का होना जरूरी है।

टॉडलर्स और प्रीस्कूलर्स (Toddlers and Preschoolers) के पोषण का ध्यान कैसे रखें?

इसमें कोई संदेह नहीं कि बच्चों का स्वास्थ्य (1-3 साल) (Kids Health) उनकी डायट पर भी निर्भर होता है। इस दौरान बच्चे का विकास (Kids Development) हो रहा होता है। ऐसे में बच्चे (kids) को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, इस बात का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

बच्चे को क्या खिलाएं

इस उम्र में बच्चों के विकास (Kids Development) के लिए उन्हें हमेशा हेल्दी आहार दें, जैसे

  • ताजे फल और सब्जियां (पकाई हुई)
  • साबुत अनाज जैसी दलिया दूध के साथ 
  • डेयरी उत्पाद
  • खिचड़ी या दाल
  • पानी और अन्य स्वस्थ्य पेय पदार्थ

 क्या न खिलाएं 

  • स्लिपरी फ़ूड जैसी पूरा अंगूर, कैंडी
  • सख्त चीजें जैसी मेवे, पॉपकॉर्न, चिप्स
  • चिपकने वाली चीजें जैसी पीनट बटर (Peanut Butter)
  • जिनसे बच्चे (Kids) को एलर्जी हो जैसे जैसी दूध, अंडे, मूंगफली, सोयाबीन आदि

जो बच्चे खाने में नखरे दिखाते हैं उनके लिए टिप्स

  • बच्चे को रोजाना नयी चीज़ें खिलाएं, क्योंकि बच्चे (kids) बहुत जल्दी बोर हो जाते हैं।
  • हमेशा बच्चे के लिए खाने में एक से अधिक विकल्प तैयार रखें।
  • बच्चों के लिए कलरफुल फूड (Colorful Food) तैयार करें।
  • बच्चों के लिए सुन्दर और उनके लिए बनाए हुए प्लेट, कप, फोर्क या चम्मच का प्रयोग करें।
  • बच्चे (kids) को खाने के लिए फाॅर्स न करें।
  • अपने बच्चे के लिए एक रोल मॉडल बनें। यदि आप अच्छी तरह से खाते हैं, तो वे आपकी नकल कर सकते हैं।
  • हमेशा भोजन और नाश्ते के दौरान बच्चों के साथ बैठें और साथ में भोजन का आनंद लें।

बच्चे की सेहत

टॉडलर्स और प्रीस्कूलर्स  के लिए तीन हेल्दी रेसिपीज (Recipes for Toddlers and Preschoolers)

बच्चों के विकास (Kids Development) और स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। बच्चों का स्वास्थ्य (1-3 साल) (Kids Health) रहे सही, इन रेसिपीज से।

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इडली (Idli)

नरम और स्वास्थ्य के लिए अच्छी इडली आपके बच्चे (kids) को अवश्य पसंद आएगी।

सामग्री

  • चावल – 3 कप 
  • उरद दाल -1 कप 
  • नमक – स्वादानुसार
  • कुकिंग आयल- कुछ चम्मच

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कैसे बनाएं

  • चावल और दाल को अच्छे से धो कर सूखा लें और उसके बाद रात भर भिगों के लिए रख दें।
  • दोनों चीजों को अलग-अलग पीस कर पानी मिला कर एक गाढ़ा पेस्ट बना दें।
  • दोनों पेस्ट को साथ में मिला कर उसमें नमक ड़ाल दें।
  • अब इस पेस्ट को पूरी रात के लिए ऐसे ही रहने दें।
  • अब इडली मोल्ड में तेल लगाएं और हर मोल्ड में इस पेस्ट को थोड़ा-थोड़ा कर के ड़ाल दें।
  • अब इडली स्टैंड में पानी ड़ाल कर ऊपर इडली ट्रे रख कर कुछ देर स्टीम में पकाएं।
  • आपकी इडली तैयार है। बच्चे (kids) को सांभर या चटनी के साथ खाने को दें।

कर्ड राइस (Curd Rice)

यह डिश बच्चों के विकास (Kids Development) और पेट के लिए बहुत लाभदायक है और दही भी बच्चों को बेहद पसंद आता है।

सामग्री 

  • चावल -1 कटोरी 
  • पानी – 2 कटोरी
  • दही – 1 कटोरी 
  • नमक -स्वादानुसार
  • तेल – 2 चम्मच 
  • कड़ी पत्ता -3 -4 
  • सरसों के दाने – एक चम्मच 

कैसे बनाएं

  • चावलों को कुकर में पानी के साथ ड़ाल कर पकाएं। इसके बाद इसे एक या दो घंटे सेट होने के लिए अलग रख दें। 
  • अब इस चावल में दही और नमक मिला दें। 
  • इसके बाद एक पैन में तेल डालें और उसमें सरसों के दाने, कड़ी पत्ते ड़ाल दें। 
  • कुछ देर इसे पकाने के बाद इसमें दही वाले चावल ड़ाल दें और अच्छे से मिक्स कर लें।
  • अंत में धनिया पत्तों के साथ सजा कर बच्चे को दें।

गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिला के स्वास्थ्य के बारे में अधिक जानने के लिए क्लिक करें-

खिचड़ी (Khichdi)

खिचड़ी भी टॉडलर्स और प्रीस्कूलर्स (Toddlers and Preschoolers) को पचने में आसान होती है।

सामग्री 

कैसे बनाएं

  • मुंग दाल, चावल , हल्दी औरनमक को एक कटोरी पानी के साथ प्रेशर कुकर में डाल दें।
  • तीन और चार सीटियां लगवाएं।
  • ध्यान रहे खिचड़ी पतली और बिलकुल पकी हुई हो।
  • खिचड़ी तैयार है। आप चाहे तो इसे बच्चे (kids) के लिए सब्जियां डाल कर भी बना सकते हैं।

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टॉडलर्स और प्रीस्कूलर्स (Toddlers and preschoolers) बच्चों का स्वास्थ्य (1-3 साल) (Kids Health) कैसा होना चाहिए इस बारे में तो आप जान ही चुके होंगे। इसके साथ ही माता-पिता का इस समय अपने बच्चे को समझना बेहद जरूरी है। अपने बच्चे के विकास (Kids Development) के लिए आपको भी हर संभव कोशिश करनी होगी और धैर्य रखना होगा। अगर कभी भी आपको ऐसा महसूस होता है कि आपके बच्चे को कोई भी समस्या है तो डॉक्टर और एक्सपर्ट की सलाह लेने से पीछे न हटें।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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