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उम्र के साथ बूढ़े होने लगते हैं आपके अंग, जानिए कैसे!

उम्र के साथ बूढ़े होने लगते हैं आपके अंग, जानिए कैसे!

आपने स्किन एजिंग के बारे में तो सुना ही होगा, लेकिन क्या एजिंग ऑर्गन्स (Ageing organs) के बारे में जानते हैं? जी हां, जिस तरह त्वचा पर बढ़ती उम्र का असर दिखता है, उसी शरीर के अन्य अंगों की उम्र बढ़ना (Ageing organs) भी एजिंग प्रक्रिया का ही हिस्सा है। उम्र बढ़ने के साथ ही आपके शरीर के सभी अंग भी बूढ़ने होने लगते हैं और उनके काम करने की क्षमता कम होने लगती है। आइए, जानते हैं अंगों की उम्र बढ़ना (Ageing organs) या एजिंग ऑर्गन्स आपको किस तरह से प्रभावित कर सकता है।

शरीर के सभी महत्वपूर्ण अंग उम्र बढ़ने के साथ-साथ प्रभावित होने लगते हैं। शरीर के कोशिकाओं, ऊतकों और अंगों (Organs) पर उम्र का असर दिखने लगता है। जीवित ऊतक (Living tissue) कोशिकाओं (cells) से बने होते हैं। कोशिकाएं अलग-अलग तरह की होती है, लेकिन उनकी आधारभूत सरंचना एक जैसी ही होती है। ऊतक एक जैसी ही कोशिकाओं की लेयर होती है जो कोई खास काम करती है। अलग-अलग तरह के ऊतक मिलकर ही अंग (Organs) बनते हैं।

अंगों की उम्र बढ़ना क्या है? (Aging organs)

आपके शरीर के अंग कितनी अच्छी तरह से काम करेंगे यह इस बात पर निर्भर करता है कि उन अंगों की कोशिकाएं (Cells) कितनी अच्छी है। बूढ़ी कोशिकाएं ज़्यादा बेहतर तरीके से काम नहीं कर पाती हैं। इतना ही नहीं कुछ अंगों की कोशिकाएं मर जाती हैं और रिप्लेस नहीं की जा सकती है, इसलिए कोशिकाओं की संख्या कम होने लगती है। वृषण (Testes), ओवरी (Ovaries), लिवर (Liver) और किडनी (Kidneys) में कोशिकों की संख्या जितनी कम होती जाती है, वह अंग उतने ही बूढ़े होने लगते हैं। इसे ही एजिंग ऑर्गन्स (Aging organs) कहते हैं। यही वजह है कि उम्र बढ़ने पर शरीर के बहुत से अंग ठीक से काम करना बंद कर देते हैं। हालांकि सभी अंग की कोशिकाओं की संख्या में कमी हो ऐसा जरूरी नहीं है, जैसा की मस्तिष्क (Brain)। एक स्वस्थ व्यक्ति की उम्र बढ़ने पर भी मस्तिष्क की कोशिकाओं की ज्यादा हानि नहीं होती है। यदि कोई अंग सही तरह से काम नहीं कर रहा है चाहे इसकी वजह अंगों की उम्र बढ़ना (Aging organs) हो या कोई डिसऑर्डर तो इसका असर दूसरे अंगों की कार्यप्रणाली पर भी हो सकता है। एथरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis), धमनियों में होने वाली एक प्रकार की बीमार के कारण यदि किडनी की रक्तवाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं, तो किडनी (Kidney) सही तरह से काम नहीं कर पाएगी, क्योंकि उस तक ब्लड फ्लो सही तरीके से नहीं होगा। उम्र बढ़ने का सबसे पहले असर मसल्स और हड्डियों पर दिखता है। फिर आंखें और कान इससे प्रभावित होती है। इसके अलावा एजिंग का असर शरीर के आंतरिक अंगों पर भी होता है।

और पढ़ें- Gum diseases: मसूड़ों की बीमारी को कहीं आप इग्नोर तो नहीं कर रहे हैं?

एजिंग ऑर्गन्स का शरीर के विभिन्न हिस्सों पर असर (Aging organs effects)

उम्र बढ़ने का शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर अलग तरह से असर होता है। हड्डियों से लेकर त्वचा तक और हृद्य से लेकर मस्तिष्क तक इसका असर अलग होता है।

हड्डियों और जोड़ (Bones and Joints)

हड्डियों की डेन्सिटी (Bone density) कम होने लगती है। कम मात्रा में डेन्सिटी कम होने को ऑस्टियोपेनिया (Osteopenia) कहते हैं, जबकि गंभीर रूपसे डेन्सिटी कम होने पर ऑओस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) या हड्डियों में फ्रैक्चर होता है। ऑस्टियोपोरोसिस हने पर हड्डियों कमजोर होकर टूट सकती हैं। महिलाओं मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजेन हार्मोन के कम होने की वजह से बोन डेन्सिटी (Bone density) कम होने लगती है। उम्र बढ़ने के साथ कैल्शियम (Calcium) और विटामिन डी (Vitamin D) की कमी से भी हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। शरीर के कुछ हिस्से की हड्डियां बाकी हस्सों की तुलना में अधिक प्रभावित होती है

मांसपेशियां और बॉडी फैट (Muscles and Body Fat)

30 की उम्र के बाद मसल्स टिशू (muscle tissue) और मसल्स स्ट्रेंथ (muscle strength) घटने लगती है और यह बढ़ती उम्र के साथ लगातार कम होती जाती है। इस कमी की वजह फिजिकली एक्टिविटी न करना, ग्रोथ हार्मोन टेस्टेस्टेरोन में कमी हो सकती है, जो मांसपेशियों के विकास को बाधित करता है। उम्र बढ़ने पर किसी व्यस्क के मसल्स मास और स्ट्रेंथ में 10 से 15 प्रतिशत तक कमी आती है। यदि किसी तरह की कोई बीमारी नहीं हो तो आप नियमित एक्सरसाइज करके मसल्स मास और स्ट्रेंथ को इससे अधिक हानि से बचा सकते हैं

आंखें (Eyes)

अंगों की उम्र बढ़ना (Aging organs) का असर आंखों पर भी दिखने लगता है जैसे-

  • लेंस सख्त (Stiff) हो जाते हैं जिससे नजदीक की चीजें देखने के लिए ज्यादा फोकस करना पड़ता है।
  • लेंस अधिक सघन (Denser) हो जाते हैं जिससे कम रोशनी में देखना मुश्किल हो जाता है।
  • आंखों की पुतली (Pupil) लाइट में होने वाले बदलाव पर धीमी प्रतिक्रिया देती है।
  • नर्व सेल्स की संख्या में कमी होना, जिससे गहराई से देखने में बाधा आती है
  • आंखों से कम तरल का स्राव होता है जिससे यह ड्राय हो जाती है
  • एजिंग का पहला साइन है दृष्टि (Vision) में बदलाव।

और पढ़ें- ओल्ड एज में मसल्स लॉस से बचने के लिए अपनाएं ये टिप्स

कान (Ears)

उम्र बढ़ने के अलावा सुनाई देने की क्षमता आवाज से भी प्रभावित होती है। जो व्यक्ति अधिक आवाज के संपर्क में रहता है जल्दी ही उसकी सुनाई देने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। हालांकि तेज आवाज के संपर्क में आने के अलावा एजिंग भी सुनने (Hearing) की क्षमता कम कर देता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है हाय पिच साउंड सुनने में दिक्कत होती है। इस बदलाव को बढ़ती उम्र से जोड़ा जाता है।

त्वचा (Skin)

Ageing organs- अंगों की उम्र बढ़ना

अंगों के उम्र बढ़ने (Ageing organs) की प्रक्रिया में त्वचा पतली हो जाती है, इसका लचीलापन कम हो जाता है, यह ड्राय हो जाती है और झुर्रियां (wrinkle) पड़ने लगती हैं। वैसे धूप में ज्यादा देर तक रहने पर भी त्वचा रफ हो जाती है और झुर्रियां जल्दी पड़ने लगती है। जो लोग धूप के संपर्क में कम आते हैं वह अपनी उम्र के अन्य लोगों से युवा नजर आते हैं। कोलेजन (collagen) और इलास्टीन (elastin) त्वचा को जवां बनाए रखते हैं, लेकिन उम्र बढ़ने के सात ही शरीर में उनका उत्पादन कम होने लगता है, जिससे स्किन डल और उम्रदराज दिखने लगती है। त्वचा के अंदर की फैट लेयर (Fat layer) भी पतली होने लगती है, यह लेयर स्किन के लिए कुशन का काम करती है और इसकी हिफाजत करती है। फैट लेयर शरीर की गर्मी को सरंक्षित करने में मदद करती है, इसलिए जब यह लेयर पतली हो जाती है तो झुर्रियां विकसित हो जाती है और शरीर ठंड के प्रति संवेदनशील हो जाता है। त्वचा की नर्व एंडिंग्स (Nerve endings) घटने लगती है। परिणमस्वरूप लोग दर्द, तापमान और दबाव के प्रति कम संवेदनशील हो जाते हैं और चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है।

पसीने की ग्रंथियो (sweat glands) और ब्लड वेसल्स की संख्या भी कम होने लगती है, जिससे त्वचा को रक्त प्रवाह सही तरीके से नहीं हो पाता है। साथ ही आपकी त्वचा धूप के संपर्क में आने पर विटामिन डी को कम मात्रा में अवशोषित करती है जिससे विटामिन डी (Vitamin D) की कमी हो जाती है।

हार्ट और ब्लड वेसल्स (Heart and Blood Vessels)

हृदय और रक्तवाहीनिया सख्त हो जाती है। हृदय तक रक्त बहुत ही धीमी गति से पहुंचता है। स्टिफ आर्टरीज में जब ज्यादा ब्लड पंप किया जाता है तो वह बहुत फैल नहीं पाती जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। इन बदलावों के बावजूद एक सामान्य बुजुर्ग इंसान का हृदय ठीक तरह से काम कर सकता है। बुजुर्गों और युवाओं के हृदय में बदलाव सिर्फ तभी नजर आता है जब हार्ट को ज्यादा ब्लड पंप करना पड़ता है, जैसे एक्सरसाइज या किसी बीमारी के समय। किसी बुजुर्ग का हृद्य उतनी तेजी और जल्दी ब्लड पंप (Blood pump) नहीं कर सकता जितना किसी युवा का हृदय (Heart) कर सकता है।

लंग्स और ब्रिदिंग मसल्स (Lungs and the Muscles of Breathing)

जब हम एजिंग ऑर्गन्स (Aging organs) की बात करते हैं तो इसमें फेफड़े (lungs) भी शामिल है। सांस लेने में मदद करने वाली मसल्स और पसलियों (Ribs) की मसल्स भी उम्र के साथ कमजोर पड़ने लगती है। फेफड़ों में मौजूद एयर सैक्स (air sacs) और कपिलरीस (capillaries) की संख्या भी कम होने लगती है, जिसके कारण सांस लेने पर फेफड़े कम मात्रा में ऑक्सीजन को अब्जॉर्व करते हैं। फेफड़ों का लचीलापन कम हो जाता है। जो लोग स्मोकिंग नहीं करते हैं उनकी डेली एक्टिविटी पर इन बदलावों का कोई खास असर नहीं होता है, लेकिन इनके लिए एक्सरसाइज करना मुश्किल हो जाता है। साथ ही ऊंचाई पर सांस लेने (Breathing) में भी दिक्कत होती है। आपके फेफड़े (Lungs) किसी तरह से इंफेक्शन से लड़ने में कम सक्षम होते हैं, क्योंकि वो कोशिकाएं जो संक्रमण पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों (Microorganisms) को वायुमार्ग (Airways) से बाहर निकालती है, वह कमजोर हो जाती है। कफ (Cough), जो फेफड़ों को साफ करने में मदद करता है, वह भी कमजोर हो जाता है।

मुंह और नाक (Mouth and Nose)

50 की उम्र के बाद आमतौर पर लोगों की स्वाद और सूखने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। जीभ सिर्फ 5 प्रकार के स्वाद को पहचान पाती है- मीठा, खट्टा, कड़वा, नकमीन और अपेक्षाकृत कोई नया स्वाद। उम्र बढ़ने के साथ जीभ (Tongue) की संवेदनशीलता (Sensitivity) में कमी आने लगती है। यह बदलाव कड़वे और खट्टे स्वाद की तुलना में मीठे और नमकीन स्वाद को अधिक प्रभावित करता है। सूंघने की क्षमता भी कम होने लगती है, क्योंकि नर्व एंडिंग में नाक की लाइनिंग पतली और सूखी हो जाती है। हालांकि, यह बदलाव मामूली होता है, इसलिए सूंघने की क्षमता बहुत प्रभावित नहीं होती है। हालांकि इस बदलाव के कारण कई खाद्य पदार्थों का स्वाद कड़वा लगता है और कम सुगंध वाले खाद्य पदार्थों में कोई स्वाद नहीं आता। मुंह भी अक्सर सूखा हुआ लगता है, क्योंकि लार का उत्पादन कम होता है। मुंह सूखने के कारण भी स्वाद प्रभावित होता है। उम्र बढ़ने के साथ मसूड़े थोड़े खिसक जाते हैं, जिससे दांत का निचले हिस्सा फूड पार्टिकल्स और बैक्टीरिया के संपर्क में आ जाता है। साथ ही टूथ इनेमल भी दूर होने लगते हैं। इन बदलावों के कारण मुंह ड्राय हो जाता है, जो दांतों को कैविटी (cavities) और नुकसान के प्रति संवेदनशील बना देता है।

और पढ़ें- कॉमन एजिंग कंडीशंस : बढ़ती उम्र में किन चीजों को नहीं करना चाहिए नजरअंदाज, जानिए

पाचन तंत्र (Digestive System)

Ageing organs- अंगों की उम्र बढ़ना

शरीर के अन्य अंगों की तुलना में पाचन तंत्र (Digestive system) पर उम्र का असर कम होता है। ग्रासनली या इसोफेग्स (esophagus) की मांसपेशियां ज्यादा ताकत से नहीं सिकुड़ती हैं, लेकिन इससे ग्रासनली से जाने वाले भोजन की गति पर कोई असर नहीं पड़ता है। भोजन को पेट से बाहर निकलने में थोड़ा अधिक समय लगता है और पेट बहुत अधिक भोजन को नहीं रख पाता है, क्योंकि इसका लचीलापन कम हो जाता है। हालांकि कुछ लोगों में यह बदलाव इतना कम होता है कि इसे नोटिस कर पाना मुश्किल होता है।

उम्र के साथ लिवर भी छोटा हो जाता है, क्योंकि इसकी बहुत सी कोशिकाएं घटने लगती है और इसके जरिए कम ब्लड फ्लो होता है। लिवर एंजाइम्स (liver enzymes) जो शरीर को दवा और दूसरे पदार्थों को प्रोसेस करने में मदद करता है, उसकी क्षमता भी कम हो जाती है। नतीजतन जिससे लिवर दवा और अन्य पदार्थों को सऱीर से बाहर निकालने में कम सक्षम होता है।

मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम (Brain and Nervous System)

मस्तिष्क में मौजूद नर्व सेल्स धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। हालांकि, मस्तिष्क इस नुकसान की कई तरीकों से आंशिक रूप से भरपाई कर सकता है।

  • कोशिकाओं के नुकसान के साथ ही बाकी बचे नर्व सेल्स में नए कनेक्शन बन जाते हैं।
  • अधिक उम्र में भी मस्तिष्क के कुछ हिस्से में नए नर्व सेल्स बनने लगते हैं।

उम्र संबंधी समस्याओं के कारण मस्तिष्क में रक्त प्रवाह कम हो जाता है। बुजुर्ग लोग युवाओं की तुलना में किसी काम के प्रति धीमी प्रतिक्रिया देते हैं। 70 साल की उम्र के बाद कुछ मानसिक क्रियकलाप जैसे वोकेब्लरी (vocabulary), शॉर्ट टर्म मेमरी, नई चीजे सीखने की क्षमता और शब्द याद रखने की क्षमता कम होने लगती है।

और पढ़ें- जानें बढ़ती उम्र में स्किन इलास्टिसिटी कम क्यों हो जाती है? ऐसे कर सकते इसमें सुधार

किडनी (Kidneys)

उम्र के साथ किडनी में मौजूद कोशिकाओं में कमी आने के कारण यह छोटी हो जाती है और किडनी के जरिए कम ब्लड फ्लो होता है। 30 की उम्र के बाद ही यह ज्यादा अच्छी तरह से ब्लड फिल्टर नहीं कर पाता है और जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है यह रक्त से कम मात्रा में अपशिष्ट निकालता है। यह बहुत अधिक पानी और कम मात्रा में नमक उत्सर्जित (excrete) करता है जिससे डिहाइड्रेशन (dehydration) की समस्या हो जाती है।

बढ़ती उम्र के साथ सेहत का ख्याल रखने के टिप्स

उम्र बढ़ने पर हड्डियों ले कर पाचन तक सब कुछ कमजोर होने लगता है ऐसे में स्वस्थ रहने के लिए कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें।

  • 40 की उम्र के बाद अक्सर चिड़चिड़ापन और तनाव बढ़ने लगता है, इससे बचने के लिए दिमाग को शांत रखें और मेडिटेशन करें। खुली हवा में सैर करें, म्यूजिक सुनें और अपना कोई पसंदीदा काम करें।
  • उम्र बढ़ने के साथ हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, साथ ही शरीर में अन्य पोषक तत्वों की भी कमी होने लगती है, इसलिए हेल्दी बैलेंस डायट लें। आपकी डायट में कैल्शियम, आयरन, विटामिन, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंड सबकुछ होना चाहिए।
  • शरीर की मांसपेशियां भी कमजोर पड़ने लगती है और इनका लचीलापन कम होने लगता है। ऐसे में इसे बनाए रखने के लिए रोजाना एक्सरसाइज और सैर करें।
  • पाचन तंत्र भी पहले जितना मजबूत नहीं रह जाता, इसलिए तेल, मसाले, तली-भुनी चीजों और जंक फूड से परहेज करें।
  • सिगरेट, शराब, तंबाकू आदि का सेवन न करें।
  • डायट में साबूत अनाज और हरी सब्जी व फल को अधिक से अधिक मात्रा में शामिल करें।

उम्र बढ़ने के साथ ही कोशिकाओं और ऊतकों की क्षति होने लगती है और इसके कारण आपके शरीर के सभी अंग पहले की तरह काम नहीं कर पातें यानी उन पर उम्र का असर दिखने लगता है, आपके ऑर्गन्स भी बूढ़े होने लगते हैं। हालांकि सही डायट, हेल्दी लाइफस्टाइल, एक्सरसाइज और खुद को तनावमुक्त रखकर आप काफी हद तक अपने शरीर के अंगों को बूढ़ा होने से बचा सकते हैं।

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Toshini Rathod द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 31/03/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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