Blue waffle: ब्लू वॉफल डिजीज को सच न समझें, यह है महज एक अफवाह!

    Blue waffle: ब्लू वॉफल डिजीज को सच न समझें, यह है महज एक अफवाह!

    सेक्शुअल ट्रांसमिटेड डिजीज (Sexually transmitted disease) के बारे में तो आप जानते ही होंगे। सेक्शुअल ट्रांसमिटेड डिजीज (Sexually transmitted disease) या सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन (Sexually transmitted Infection) उन इंफेक्शंस को कहा जाता है, जो सेक्शुअल कॉन्टेक्ट के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे तक फैलते हैं। यह कॉन्टेक्ट आमतौर पर वजाइनल, ओरल और एनल सेक्स होता है। लेकिन, यह कई बार यह अन्य इंटिमेट फिजिकल कॉन्टेक्ट के माध्यम से फैल सकती हैं। यह बात तो थी एसटीआई (STI) के बारे में। क्या आपने ब्लू वॉफल (Blue Waffle) का नाम सुना है? आज हम इसी समस्या के बारे में आपको जानकारी देने वाले हैं। आइए जानें ब्लू वॉफल (Blue Waffle) के बारे में विस्तार से।

    ब्लू वॉफल किसे कहा जाता है? (Blue Waffle)

    ब्लू वॉफल (Blue Waffle) एक फिक्शनल यानी काल्पनिक सेक्शुअल ट्रांसमिटेड डिजीज (Sexually transmitted disease) को कहा जाता है। ऐसा माना जाता रहा है कि यह रोग केवल फीमेल्स को ही प्रभावित करती है। ब्लू वॉफल (Blue Waffle) शब्द में वॉफल एक स्लैंग टर्म है, जिसका इस्तेमाल वजाइना के लिए किया जाता है और ब्लू इस फेक कंडिशन के इमेजिनरी लक्षणों को कहा जाता है। हालांकि, यह सेक्शुअल ट्रांसमिटेड डिजीज (Sexually transmitted disease) इंटरनेट पर शुरू हुई एक अफवाह से बढ़कर कुछ नहीं है। इस रोग के होने को लेकर कोई भी मेडिकल एविडेंस मौजूद नहीं है।

    ऑनलाइन सोर्सेज के मुताबिक यह डिजीज वो कंडिशन है, जिसमें पीड़ित महिला के वल्वा और वजाइनल एरिया को नुकसान होता है और इसके कारण यह क्षेत्र नीला हो सकता है। ऐसी कई एसटीडी हैं, लेकिन इनमें से किसी के भी कारण योनि नीली नहीं होती है। सेक्शुअल हेल्थ के बारे में यह गलत खबर भयानक हो सकती है। यही नहीं, सेक्शुअल हेल्थ संबंधी सलाह के लिए इंटरनेट की मदद लेने वाले युवा लोगों को भी इससे गलत जानकारी मिल सकती है और वे असुरक्षित सेक्स प्रैक्टिसेज में शामिल हो सकते हैं। आइए जानें ब्लू वॉफल (Blue Waffle) के बारे में सच क्या है?

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    ब्लू वॉफल (Blue Waffle) कितना सच है और कितनी अफवाह?

    यह तो आप समझ ही गए होंगे कि ब्लू वॉफल (Blue Waffle) एक गलत खबर से ज्यादा और कुछ नही है। ब्लू वॉफल (Blue Waffle) के बारे में अफवाहें 2010 के आसपास शुरू हुई थी। ऐसा तब हुआ था जब इंटरनेट पर परेशान करने वाली कुछ तस्वीरें फैली जिसमें नीले रंग की, पस से भरी और घाव युक्त वजाइना को दर्शाया गया था। ऑनलाइन यूजर्स से यह दावा किया था कि यह सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन का परिणाम है। इन तस्वीरों को झूठा पाया गया। अब जानते हैं रियल सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शंस के बारे में।

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    ब्लू वॉफल (Blue Waffle) और रियल सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शंस (Sexually transmitted infections)

    इसमें कोई संदेह नहीं है कि ब्लू वॉफल (Blue Waffle) डिजीज एक अफवाह ही है। लेकिन, कुछ अन्य सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन (Sexually transmitted infections) हमें सच में प्रभावित कर सकते हैं। अगर आप सेक्शुअल एक्टिव होते हैं, तो आपको सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन के जोखिम के बारे में पता होना चाहिए। आइए जानें कुछ सामान्य सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शंस के बारे में।

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    सामान्य सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शंस: पाएं पूरी जानकारी

    ब्लू वॉफल (Blue Waffle) के कारण बहुत से लोगों के बेवकूफ बनने और इस अफवाह पर बहुत से लोगों द्वारा विश्वास करने का सबसे बड़ा कारण यह था कि कुछ लोगों ने इस बीमारी के लक्षणों को अन्य एसटीआई बीमारियों के लक्षणों के रूप में डिस्क्राइब किया था। यह बीमारियां इस प्रकार हैं:

    बैक्टीरियल वैजीनाइटिस (Bacterial vaginosis)

    ब्लू वॉफल (Blue Waffle) सच नहीं है लेकिन बैक्टीरियल वैजीनाइटिस पूरी तरह से सच है। बैक्टीरियल वैजीनाइटिस (Bacterial vaginosis) महिलाओं को होने वाला सबसे सामान्य वजाइनल इंफेक्शन है, जो आमतौर पर 15 से 44 तक की साल की महिलाओं को प्रभावित करता है। इसका कारण है वजाइनल में पाए जाने वाले बैक्टीरिया में असंतुलन। इसके लक्षण इस प्रकार हैं वजाइनल रेडनेस और सूजन, खुजली, वजाइनल डिस्चार्ज, असामान्य दुर्गंध, मूत्र त्याग के दौरान जलन होना, सेक्स के दौरान ब्लीडिंग आदि।

    क्लैमिडिया (Chlamydia)

    क्लैमिडिया (Chlamydia) भी एक सामान्य एसटीआई (STI) है, जो किसी महिला या पुरुष किसी को भी हो सकती है और वजाइनल, एनल या ओरल सेक्स के माध्यम से फैलती है। अगर इसका सही से इलाज न हो, तो यह समस्या गंभीर हो सकती है। इस रोग के लक्षण इस प्रकार हैं वजाइनल रेडनेस और सूजन, वजाइनल खुजली, डिस्चार्ज, इंटरकोर्स के दौरान दर्द होना, सेक्स में ब्लीडिंग, पेट के निचले हिस्से या पेल्विक में दर्द होना आदि

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    गोनोरिया (Gonorrhea)

    ब्लू वॉफल (Blue Waffle) के बारे में यह जानकारी आपको पसंद आ रही होगी। अब जानते हैं गोनोरिया (Gonorrhea) के बारे में। सभी सेक्शुअल एक्टिव लोग इस समस्या से पीड़ित हो सकते हैं। गोनोरिया (Gonorrhea) के कारण रोगी के जेनिटल, रेक्टम और गला प्रभावित हो सकते हैं। यह समस्या वजाइनल, एनल और ओरल सेक्स के माध्यम से दूसरे लोगों तक फैल सकती है। कई मामलों में इस समस्या के कोई भी लक्षण नजर नहीं आते हैं। लेकिन, इसके लक्षण भी अन्य सेक्शुअल ट्रांसमिटेड डिजीज (Sexually transmitted disease) यानी एसटीआई (STI) के जैसे हो सकते हैं जैसे वजाइनल रेडनेस और सूजन, वजाइनल डिस्चार्ज, वजाइना में खुजली, यूरिनेशन के साथ दर्द, पेट के निचले हिस्से या पेल्विक में दर्द, इंटरकोर्स के दौरान दर्द होना आदि।

    जेनिटल हर्पीस (Genital herpes)

    जेनिटल हर्पीस जैसा रोग दो तरह के हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस (Herpes simplex virus) के कारण हो सकता है जिन्हें HSV-1 और HSV-2 के नाम से जाना जाता है। यह प्रयमरीली सेक्शुअल कांटेक्ट के माध्यम से फैलती है। यह रोग अधिकतर HSV-2 वायरस के कारण होता है। इस रोग का कोई भी इलाज नहीं है। इसके लक्षण इस प्रकार हैं वजाइनल रेडनेस और सूजन, वजाइना में खुजली और जलन, पेनफुल वजाइनल ब्लिस्टर्स और घाव, वजाइनल डिस्चार्ज आदि।

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    ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (Human papillomavirus)

    ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (Human papillomavirus) सबसे सामान्य सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन है। नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (National Cancer Institute) के अनुसार ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के दो सौ से भी अधिक प्रकार हैं। सेक्शुअल एक्टिव लोग जीवन में कभी न कभी इस रोग का सामना कर सकते हैं। यह स्किन-टू-स्किन कांटेक्ट के माध्यम से यह रोग पास हो सकता है और रोगी के जेनिटल, रेक्टम, माउथ और गले को प्रभावित कर सकता है। कुछ स्ट्रेन जेनिटल वार्ट्स का कारण बन सकते हैं और अन्य के कारण कुछ खास कैंसरस हो सकते हैं जिसमें सर्विक्स, रेक्टम, माउथ और गले का कैंसर शामिल है। इस रोग के सामान्य लक्षण हैं वजाइना में खुजली, दर्दरहित जेनिटल वार्ट्स आदि।

    यह तो आप जान ही गए होंगे कि ब्लू वॉफल (Blue Waffle) सच नहीं है और यह एक काल्पनिक रोग है। इसकी खबर को अनजान लोगों ने लोगों के मन में इस रोग को लेकर भय पैदा करने के लिए फैलाया था। लेकिन, ऊपर दिए सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन पूरी तरह से सच हैं। इनसे बचाव भी संभव है और इनका उपचार भी हो सकता है। इनके लक्षणों को समझें और उनके अनुसार मेडिकल हेल्प लेकर सही उपचार कराएं

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    यह तो थी ब्लू वॉफल (Blue Waffle) के बारे में जानकारी। इस समस्या के लक्षणों को अन्य वजाइनल इंफेक्शन में होने वाली समस्याओं के जैसा ही बताया गया था। इस झूठे रोग के बारे में फैली ख़बरों से कई लोगों को प्रभावित किया। इस काल्पनिक बीमारी के बारे में फैली अफवाहें यह भी बताती हैं कि लोगों को पर्याप्त यौन शिक्षा नहीं मिल रही है। इसलिए, लोगों को यही सलाह दी जाती है इंटरनेट पर बताई बातों या जानकारी पर तब तक विश्वास न करें, जब तक इसके बारे में कोई ठोस सुबूत आपके पास न हो। इसके साथ ही कम उम्र के लोगों को सही सेक्स एजुकेशन देना जरूरी है, ताकि वो किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें और भविष्य में कई समस्याओं से बच सकें। अगर इस रोग के बारे में आपके मन में कोई भी सवाल है, तो इस बारे में अपने डॉक्टर से बात करें।

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    AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 18/01/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड