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डायबिटीज और कॉन्स्टिपेशन : जब एक के साथ चली आए दूसरी समस्या भी!

डायबिटीज और कॉन्स्टिपेशन : जब एक के साथ चली आए दूसरी समस्या भी!

डायबिटीज (Diabetes) अपने आप में एक गंभीर समस्या है, जिसे लाइफस्टाइल डिजीज के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन यह लाइफस्टाइल डिजीज कभी अकेले नहीं आती। ये अपने साथ लाती है अलग-अलग तरह की कॉम्प्लिकेशन को। इन्हीं कॉम्प्लिकेशन में से एक है कॉन्स्टिपेशन (Constipation)। डायबिटीज और कॉन्स्टिपेशन दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। डायबिटीज में व्यक्ति ब्लड शुगर लेवल (Blood sugar level) को सामान्य बनाए रखने की जद्दोजहद में लगा रहता है, लेकिन कॉन्स्टिपेशन को मैनेज करना अपने आप में एक बड़ी चुनौती साबित होती है। इसलिए डायबिटीज और कॉन्स्टिपेशन दोनों को एक साथ मेंटेन रखना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं डायबिटीज और कॉन्स्टिपेशन (Diabetes and constipation) का एक दूसरे से क्या ताल्लुक है, लेकिन उससे पहले जानते हैं डायबिटीज से जुड़ी कुछ खास जानकारी।

और पढ़ें : रिसर्च: हाई फाइबर फूड हार्ट डिसीज और डायबिटीज को करता है दूर

डायबिटीज : ऐसे होता है समस्या का आगाज

डायबिटीज (Diabetes) की तकलीफ का सीधा असर हमारे इम्यून सिस्टम पर पड़ता है। आमतौर पर जब व्यक्ति खाना खाता है, तो शरीर भोजन से मिले शुगर को तोड़कर उसका इस्तेमाल कोशिका में उर्जा बनाने के लिए करता है। इस कार्य को पूरा करने के लिए पैंक्रियाज को इंसुलिन का उत्पादन करना पड़ता है। इंसुलिन हॉर्मोन शरीर में एनर्जी बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन जब आप डायबिटीज की गिरफ्त में होते हैं, तो यही पैंक्रियाज पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन (Insulin) पैदा नहीं कर पाती। इसकी वजह से शरीर में ब्लड शुगर लेवल (Blood sugar level) बढ़ता चला जाता है। जब शरीर में ब्लड शुगर लेवल ज्यादा बढ़ जाता है, तो शरीर के कामकाज पर इसका प्रभाव पड़ता है और शरीर की कार्यप्रणाली कमजोर होती चली जाती है।

यदि समय पर ब्लड शुगर लेवल (Blood sugar level) को कंट्रोल ना किया जाए, तो डायबिटीज (Diabetes) अपने साथ-साथ कई अन्य जटिलताओं को भी साथ ले आता है। आपके साथ ऐसी स्थिति ना हो, इसलिए जरूरत है आपको डायबिटीज के लक्षण पहचानने की। आइए जानते हैं डायबिटीज के लक्षणों के बारे में।

और पढ़ें : डायबिटीज में फल को लेकर अगर हैं कंफ्यूज तो पढ़ें ये आर्टिकल

पहचानें डायबिटीज के लक्षणों को! (Symptoms of Diabetes)

यह तो सभी जानते हैं कि डायबिटीज (Diabetes) के दो प्रमुख प्रकार होते हैं, टाइप वन डायबिटीज (Type 1 Diabetes) और टाइप टू डायबिटीज (Type 2 Diabetes)। टाइप वन डायबिटीज में पैंक्रियाज (Pancreas) इंसुलिन बनाना बंद कर देता है, जिसकी वजह से बीमार व्यक्ति को इंसुलिन के इंजेक्शन लेने पड़ते हैं। वहीं टाइप टू डायबिटीज में पैंक्रियाज में इंसुलिन बनाने की रफ्तार कम हो जाती है, जिसकी वजह से ब्लड शुगर लेवल बढ़ने लगता है। लेकिन जब आपको डायबिटीज की समस्या रहती है, तब आपको यह लक्षण दिखाई दे सकते हैं –

  • बार-बार प्यास लगना जिसे पॉलीडिप्सिया (Polydipsia) कहते हैं
  • ज्यादा पेशाब होना, इस स्तिथि को पॉल्यूरिया कहते हैं
  • बिना किसी कारण के वजन घटना
  • जल्दी थकावट महसूस होना

ऐसे भी कुछ लक्षण हैं जो व्यक्तिगत रूप से किसी को महसूस हो सकते हैं और किसी को नहीं। जिनमें शामिल हैं:

  • मतली और उलटी (Nausea and vomiting)
  • धुंधला दिखाई देना
  • महिलाओं में बार-बार योनि संक्रमण।
  • मुंह सूखना
  • जख्म या कट्स भरने में ज्यादा समय लगना
  • त्वचा में खुजली होना, खासतौर पर कमर और जेनिटल एरिया के आस-पास।

जब आपको यह लक्षण दिखाई दें, तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। जितनी जल्दी आप डॉक्टर से संपर्क करेंगे, उतनी ही जल्दी आप ब्लड शुगर लेवल (Blood sugar level) को सामान्य स्तर पर ला सकते हैं। इसलिए समय रहते डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी माना जाता है। जैसा कि आपने जाना डायबिटीज (Diabetes) की समस्या आपको लंबे समय तक परेशान कर सकती है, इसलिए इससे जुड़ी कॉम्प्लिकेशन भी आपको परेशान करने के लिए काफी होती है। इन्हीं कॉम्प्लिकेशन में से एक है कॉन्स्टिपेशन (Constipation)। आइए अब जानते हैं डायबिटीज और कॉन्स्टिपेशन (Diabetes and constipation) एक साथ कैसे जुड़े हुए हैं।

डायबिटीज और कॉन्स्टिपेशन : है एक-दूसरे से गहरा संबंध (Diabetes and constipation)

डायबिटीज और कॉन्स्टिपेशन (Diabetes and constipation)

जैसा कि आप सभी जानते हैं डायबिटीज (Diabetes) की लॉन्ग टर्म कॉम्प्लिकेशन में से एक कॉम्प्लिकेशन है नर्वस सिस्टम डैमेज। टाइप वन और टाइप टू डायबिटीज की वजह से हाय ब्लड शुगर के चलते व्यक्ति को डायबिटिक न्यूरोपैथी (Diabetic neuropathy) की समस्या हो सकती है। इसके अलावा व्यक्ति को नर्व डैमेज की तकलीफ भी झेलनी पड़ सकती है। यदि डायबिटीज के कारण व्यक्ति की ऐसी नर्व डैमेज हो जाती है, जो आपका डाइजेस्टिव ट्रैक (Digestive track) कंट्रोल करती हो, तो आपको कॉन्स्टिपेशन (Constipation), डायरिया इत्यादि पेट से सम्बंधित समस्या हो सकती है। यदि आप लंबे समय तक हाय ब्लड शुगर की समस्या से जूझते हैं, तो इसका सीधा असर आपके पाचन तंत्र पर पड़ता है और आपको कॉन्स्टिपेशन हो सकता है। इसके अलावा डायबिटिक न्यूरोपैथी के चलते लोगों के कुछ खास तरह की दवाएं लेने की जरूरत पड़ती है, जिसके कारण पाचन तंत्र धीमा पड़ जाता है और इसकी वजह से आपको कॉन्स्टिपेशन की समस्या होती है। इसलिए डायबिटीज में दवाएं लेने से पहले आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए। आइए अब जानते हैं डायबिटीज और कॉन्स्टिपेशन (Diabetes and constipation) की समस्या को किस तरह ठीक किया जा सकता है।

और पढ़ें : Diabetes insipidus : डायबिटीज इंसिपिडस क्या है ?

डायबिटीज और कॉन्स्टिपेशन : कुछ ऐसे मिल सकता है समस्या में आराम (Treatment of Diabetes and constipation)

जैसा कि हमने पहले जाना डायबिटीज और कॉन्स्टिपेशन (Diabetes and constipation) एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि हाय ब्लड शुगर (High blood sugar) के कारण आपको अक्सर कॉन्स्टिपेशन की समस्या रह सकती है। लेकिन डायबिटीज और कॉन्स्टिपेशन (Constipation) की समस्या को मैनेज करते हुए कॉन्स्टिपेशन में आराम पाना हो, तो आपको यह उपाय आजमाने चाहिए।

डायबिटीज और कॉन्स्टिपेशन (Diabetes and constipation) : प्राकृतिक उपाय से करें शुरुआत

डायबिटीज और कॉन्स्टिपेशन की समस्या को ठीक करने के लिए आपको सबसे पहले प्राकृतिक उपाय आजमाने चाहिए। अपने खाने में फाइबर की मात्रा बढ़ाकर और ज्यादा से ज्यादा पानी का सेवन करके आप डायबिटीज और कॉन्स्टिपेशन (Diabetes and constipation) की तकलीफ में आराम पा सकते हैं। इसका दूसरा उपाय है फिजिकल एक्टिविटी। यदि आप रोजाना एक्सरसाइज करते हैं, तो आपका डायजेस्टिव सिस्टम (Digestive system) आसानी से काम करता है, इसलिए डायबिटीज और कॉन्स्टिपेशन (Constipation) की समस्या में रोजाना एक्सरसाइज करने की सलाह दी जाती है। यदि आप इन प्राकृतिक उपायों को अपनाते हैं, तो बड़ी आसानी से आप डायबिटीज और कॉन्स्टिपेशन की समस्या को सामान्य बनाए रख सकते हैं।

डायबिटीज और कॉन्स्टिपेशन : लैक्सेटिव हो सकता है एक उपाय (Laxative for constipation)

कई लोगों को डायबिटीज और कॉन्स्टिपेशन (Diabetes and constipation) की समस्या इतनी ज्यादा हो जाती है कि उन्हें लैक्सेटिव की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन लैक्सेटिव का इस्तेमाल हमेशा डॉक्टर की सलाह के अनुसार और सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। यदि आप लैक्सेटिव (Laxative) के इस्तेमाल के बारे में सोच रहे हैं, तो आपको अन्य उपायों को पहले जरूर मौका देना चाहिए। इलेक्टिव के भी अलग-अलग प्रकार होते हैं, इसलिए आपकी जरूरत के अनुसार लैक्सेटिव का कौन सा प्रकार जरूरी है, यह जानना भी जरूरी है। डायबिटीज और कॉन्स्टिपेशन (Constipation) की समस्या में डॉक्टर आपको ये लैक्सेटिव दे सकते हैं –

डायबिटीज और कॉन्स्टिपेशन (Diabetes and constipation) की समस्या में ये लैक्सेटिव आपकी मदद कर सकते हैं। लेकिन आपको इसके साथ-साथ लाइफस्टाइल में बदलाव और और रोजाना एक्सरसाइज की सलाह भी दी जाती है, जिससे आप लंबे समय तक डायबिटीज और कॉन्स्टिपेशन (Constipation) की समस्या को मैनेज कर सकें।

और पढ़ें : जानें कैसे स्वेट सेंसर (Sweat Sensor) करेगा डायबिटीज की पहचान

टाइप 2 डायबिटीज के बारे में अधिक जानकारी के लिए देखिए ये 3डी मॉडल

डायबिटीज और कॉन्स्टिपेशन (Constipation) : ब्लड शुगर मैनेजमेंट है बेहद जरूरी

जैसा कि हम पहले बता चुके हैं, हाय ब्लड शुगर (High blood sugar) के चलते आसानी से नर्व डैमेज होने की समस्या हो सकती है। जिसके चलते आपका पाचन तंत्र ठीक तरह से काम नहीं करता और आपको कॉन्स्टिपेशन हो सकता है। इसलिए डायबिटीज और कॉन्स्टिपेशन (Diabetes and constipation) की समस्या में आराम पाने के लिए सबसे अच्छा उपाय है ब्लड शुगर मैनेजमेंट (Blood sugar management)। यदि आप ब्लड शुगर को सामान्य बनाए रख सकते हैं, तो इससे बेहतर आपके लिए कुछ भी नहीं होगा। ब्लड शुगर लेवल (Blood sugar level) को सामान्य बनाए रखने के लिए आप सही दवाओं, लाइफस्टाइल चेंजेज और एक्सरसाइज की मदद ले सकते हैं। इसके साथ-साथ आप डॉक्टर की सलाह से समय समय पर अपना ब्लड शुगर लेवल जांच कर उसके अनुसार दवाओं को चेंज कर सकते हैं।

डायबिटीज और कॉन्स्टिपेशन (Constipation) की समस्या आपके लिए बड़ी मुसीबत पैदा करने वाली हो सकती है, इसलिए यदि लाइफस्टाइल में बदलाव, एक्सरसाइज और सही खानपान का ध्यान रखा जाए, तो डायबिटीज और कॉन्स्टिपेशन (Diabetes and constipation) के समस्या में आराम पाया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर आप इसके लिए मेडिकेशन या लैक्सेटिव का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। लेकिन इन उपायों के लिए डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी माना जाता है।

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Toshini Rathod द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ हफ्ते पहले को
Sayali Chaudhari के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड
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