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मस्कुलर स्ट्रेंथ एक्सरसाइजेज: मसल्स स्ट्रेंथ में यह व्यायाम निभाते हैं महत्वपूर्ण भूमिका

मस्कुलर स्ट्रेंथ एक्सरसाइजेज: मसल्स स्ट्रेंथ में यह व्यायाम निभाते हैं महत्वपूर्ण भूमिका

मस्कुलर स्ट्रेंथ एक्सरसाइजेस हमारे पूरे स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। इससे न केवल हेल्थ सुधरती है, बल्कि आत्मविश्वास को बढ़ाने में भी यह मददगार साबित हो सकती है। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से मसल्स अच्छे से काम कर पाते हैं। यही नहीं, इससे एंड्यूरेंस भी बढ़ती है। मसल्स की स्ट्रेंथ को बढ़ाने के लिए कई व्यायाम आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं, लेकिन इन व्यायामों को करने से पहले किसी एक्सपर्ट की सलाह और मार्गदर्शन आवश्यक है। जानिए मस्कुलर स्ट्रेंथ एक्सरसाइजेज (Muscular strength exercises) के बारे में विस्तार से इस लेख में। मस्कुलर स्ट्रेंथ एक्सरसाइजेज (Muscular strength exercises) को करने से पहले किन चीजों का ध्यान रखना चाहिए, यह भी जानें। सबसे पहले जानते हैं कि मस्कुलर स्ट्रेंथ किसे कहा जाता है?

मस्कुलर स्ट्रेंथ क्या है? (Muscular strength)

मस्कुलर स्ट्रेंथ और मस्कुलर एंड्यूसर दोनों को एक ही माना जाता है, लेकिन इनमें कुछ अंतर भी हैं। मस्कुलर स्ट्रेंथ यानी मांसपेशियों की ताकत इस बात से निर्धारित होती है कि आप कितनी फाॅर्स लगा सकते हैं या कितना वजन उठा सकते हैं? वो एक्टिविटीज जो मस्कुलर एंड्यूरेंस बिल्ड करती हैं उनमें लॉन्ग डिस्टेंस रनिंग, साइकिलिंग या स्विमंग के साथ सर्किट ट्रेनिंग और बॉडीवेट एक्सरसाइजेज आदि शामिल हैं। मस्कुलर स्ट्रेंथ और एंड्यूरेंस को सुधारने के लिए तब तक रेपेटीटिव मूवमेंट्स बहुत जरूरी हैं, जब तक आप थक न जाएं। आसान भाषा में कहा जाए तो कोई खास एक्सरसाइज करते हुए अधिकतर अमाउंट में मसल फाॅर्स को जेनेरेट करने की एबिलिटी को मस्कुलर स्ट्रेंथ कहा जाता है।

यह चीजों को मूव करने या उठाने की क्षमता है। मस्कुलर स्ट्रेंथ को दो चीजों से मापा जाता है एक आप कितनी फाॅर्स लगा सकते हैं और दूसरी आप थोड़े समय के लिए कितना वजन उठा सकते हैं? मस्कुलर स्ट्रेंथ एक्सरसाइजेज (Muscular strength exercises) से पहले अब जानिए मस्कुलर स्ट्रेंथ क्यों जरूरी है?

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मस्कुलर स्ट्रेंथ के फायदे (Benefits of Muscular strength)

मस्कुलर स्ट्रेंथ से संपूर्ण हेल्थ सुधरती है और एथलेटिक एक्टिविटी बढ़ती है। अगर आपका शरीर स्ट्रांग है तो आपको ऐसी मूवमेंट्स और एक्टिविटीज करने में आसानी होती है, जिन्हें करने के लिए आपको अधिक पॉवर की जरूरत होती है। इसके कई अन्य फायदे भी हैं, जैसे:

  • मस्कुलर स्ट्रेंथ के कारण कैलोरीज को बर्न करके और बॉडी कम्पोज़िशन्स को बढ़ा कर हेल्दी बॉडी वेट को मेंटेन करने में मदद मिलती है।
  • स्ट्रेंथ को बिल्ड करने से मूड और एनर्जी लेवल बेहतर रहता है और इसके साथ ही स्लीप पैटर्न भी सुधरता है। इससे कॉन्फिडेंट्स बढ़ने में भी मदद मिलती है।
  • मस्कुलर स्ट्रेंथ से स्ट्रांग, हेल्दी मसल और बोन्स को बिल्ड होने में मदद मिलती है। इससे पोस्चर के सही रहने और बैक पैन से छुटकाना पाने में भी आसानी होती है।
  • अगर आपकी स्टेबिलिटी, बैलेंस और फलेक्सिबिलिटी सही रहती है, तो आपको इंजरी होने या गिरने का जोखिम कम रहता है।

मस्कुलर स्ट्रेंथ को बढ़ाने में मस्कुलर स्ट्रेंथ एक्सरसाइजेज (Muscular strength exercises) बहुत लाभदायक हैं। लेकिन, इन एक्सरसाइजेज को करना आसान नहीं है। खासतौर पर अगर अपने इन्हें अभी करना शुरू किया है। हालांकि, समय के साथ आपको ऐसा लगेगा कि यह व्यायाम करना बेहद आसान हैं। अब जानिए मस्कुलर स्ट्रेंथ एक्सरसाइजेज (Muscular strength exercises) के बारे में विस्तार से।

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मस्कुलर स्ट्रेंथ एक्सरसाइजेज (Muscular strength exercises)

जब बात मस्कुलर स्ट्रेंथ बढ़ाने की आती है, तो कंपाउंड एक्सरसाइजेज को बेहतर माना जाता है। कम्पाउंट एक्सरसाइजेज वो व्यायाम हैं जिसमें एक, दो या इससे अधिक जॉइंट्स और एक से अधिक मसल ग्रुप शामिल होते हैं। इन व्यायामों को मल्टी-जॉइंट मूवमेंट (Multi-joint movement) भी कहा जाता है। इन एक्सरसाइजेज के उदाहरणों में स्क्वाट्स, डेडलिफ्ट्स और प्लैंक्स आदि आते हैं। यही नहीं, मसल स्ट्रेंथ को बढ़ाने के लिए कम्पाउंट एक्सरसाइजेज के अलावा भी कई अन्य व्यायाम काम आ सकते हैं। आइए जानते हैं मस्कुलर स्ट्रेंथ एक्सरसाइजेज (Muscular strength exercises) कौन-कौन सी हैं:

वॉल स्क्वाट (Wall Squat)

वॉल स्क्वाट को वॉल्स सिट (Walls Sit) भी कहा जाता है। यह व्यायाम स्ट्रेंथ बिल्डिंग के साथ ही मस्कुलर एंड्यूरेंस के लिए बेहद प्रभावी है। यह एक्सरसाइज एब्डोमिनल मसल्स, ग्लूट्स, क्वाड्स आदि के लिए भी अच्छी मानी जाती है। अगर आप हिप या नी इंजरी के कारण स्क्वाट्स नहीं कर पाते हैं, तो यह व्यायाम आपके काम आ सकती है। जानिए किस तरह से किया जाता है इस व्यायाम को:

  • वॉल स्क्वाट करने के लिए सबसे पहले किसी वॉल यानी दीवार के सामने पीठ करके खड़े हो जाएं। आपके और दीवार के बीच में बारह इंच या उससे अधिक का अंतर होना चाहिए।
  • अब अपने घुटनों को मोड़ लें और बैठने जैसी पोजीशन ले लें। ध्यान रहे, इस दौरान आपकी पीठ दीवार के साथ टच होनी चाहिए अपनी पीठ को दीवार से न हटाएं।
  • बैठने के स्थिति में तब तक जमीन की तरफ अपने हिप्स को ले कर जाएं, जब तक यह जमीन को न छू लें। जब आप इस स्थिति में आ जाएं, तो अपनी एड़ी को पुश करते हुए अपनी पहले वाली पोजीशन में वापस आ जाएं।
  • इसी तरह से इस व्यायाम को अपनी क्षमता के अनुसार दोहराएं। मस्कुलर स्ट्रेंथ एक्सरसाइजेज (Muscular strength exercises) में अगला व्यायाम है डेडलिफ्ट्स।

मस्कुलर स्ट्रेंथ एक्सरसाइजेज

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डेडलिफ्ट्स (Deadlifts)

डेडलिफ्ट्स फुल बॉडी स्ट्रेंथ के लिए बेहद प्रभावी है। क्योंकि, इसे करने से कोर, लेग्स और पीठ की सभी मसल्स का वर्कआउट हो जाता है। स्ट्रेंथ को बढ़ाने के साथ ही पोस्चर को सुधारने में भी यह लाभदायक है। हमारे शरीर के लिए सही पोस्चर होना बेहद जरूरी है। क्योंकि, इससे पीठ के दर्द और अन्य कंडीशंस से छुटकारा पाने में मदद मिलती है। जानिए, कैसे किया जाता है यह व्यायाम:

  • डेडलिफ्ट को करने के लिए सबसे पहले आप सीधे खड़े हो जाएं।
  • इसके बाद अपने घुटनों को मोड़ें और नीचे रखें डंबल्स को पकड़ लें
  • अब इस डंबल्स को ऊपर की तरफ उठायें। इसे उठाते हुए आपके कंधें बिलकुल सीधे होने चाहिए।
  • इन डंबल्स को तब तक ऊपर उठाते रहें, जब तक वो हिप के लेवल तक न आ जाए।
  • इसके बाद इन्हें फिर से जमीन की तरफ ले जाएं।
  • इस प्रक्रिया को बार-बार दोहराएं।

मस्कुलर स्ट्रेंथ एक्सरसाइजेज में स्क्वाट (Squat)

स्क्वाट एक लोकप्रिय व्यायाम है जिसे हर कोई करना पसंद करता है। जब बात मस्कुलर स्ट्रेंथ एक्सरसाइजेज (Muscular strength exercises) की होती है, तो इससे बेहतर और कुछ नहीं है। स्क्वाट्स आपके हिप्स, पीठ, क्वाड्स और एब्डोमिनल मसल्स के लिए एक अच्छा व्यायाम है। अगर आप टोन्ड लेग्स चाहते हैं, तो यह एक्सरसाइज आपके लिए अच्छी साबित हो सकती है। जानिए किस तरह से किया जाता है यह व्यायाम:

  • स्क्वाट करने के लिए आप एक जगह पर खड़े हो जाएं।
  • इस दौरान आपके कंधे सीधे और आपके दोनों पैरों में थोड़ा अंतर होना चाहिए।
  • अब अपने हिप्स को थोड़ा जमीन की तरफ ले जाएं जैसे आप बैठ रहे हों। इस दौरान आपकी बाजुएं सीधे सामने होनी चाहिए। सुनिश्चित करें कि ऐसा करते समय आपकी पीठ भी सीधी रहे।
  • जब आपकी जांघें जमीन के पैरेलल हो, तो इसी पोजीशन में रुक जाएं।
  • अपनी एड़ियों को पुश करते हुए अपनी शुरुआती स्थिति में आ जाएं।
  • बार-बार इस प्रक्रिया को दोहराएं।

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बेंच प्रेस (Bench Press)

मस्कुलर स्ट्रेंथ एक्सरसाइजेज (Muscular strength exercises) में बेंच प्रेस एक आसान व्यायाम है।अगर आप कोई ऐसा व्यायाम करना चाहते हैं, जो आपकी अपर बॉडी मस्कुलर स्ट्रेंथ को बढ़ाएं। तो यह व्यायाम आपके लिए ही है। यह व्यायाम अधिकतर अपर बॉडी मसल्स पर काम करता है जैसे ट्राईकेप्स (Triceps), पेक्स (Pecs), डेल्टॉइड्स (Deltoids) और अधिकतर हैंड मसल्स (Hand Muscles) आदि। जानिए कैसे करते हैं यह व्यायाम:

  • बेंच प्रेस की शुरुआत करने के लिए एक बेंच पर सीधा लेट जाएं।
  • जिम में यह सुविधा उपलब्ध होती है। अब मध्यम विड्थ ग्रिप (Medium width grip) का प्रयोग करते हुए इस बार को उठाएं और इसे सीधा ऊपर ले जाएं।
  • इस दौरान अपनी बाजुओं को सीधा रखें।
  • अब इस स्थिति से बार को धीरे-धीरे नीचे ले आएं। इसे तब तक नीचे लाएं, जब तक तक यह पेक्स (Pecs) को न छु ले। इसी स्थिति में कुछ देर रहें।
  • इसके बाद धीरे से इस बार को शुरुआती पोजीशन में ले आएं।
  • अपनी क्षमता के अनुसार जितनी देर चाहे आप इस प्रक्रिया को दोहरा सकते हैं।

मस्कुलर स्ट्रेंथ एक्सरसाइजेज में पुल-अप (Pull-Up)

इस व्यायाम को कोई भी व्यक्ति कर सकता है, लेकिन इसे तभी कहें अगर एक्सपर्ट आपको यह करने की सलाह दी हो। यह व्यायाम पीठ, कंधों को मजबूत बनाने और ग्रिप स्ट्रेंथ को सुधारने में लाभदायक है। यह एक प्रभावी व्यायाम है, जिसकी मदद से आप अपर बॉडी मस्कुलर स्ट्रेंथ को बढ़ा सकते हैं। इस तरह से किया जाता है यह व्यायाम:

  • इस व्यायाम को करने के लिए आपको पुल-अप बार की जरूरत होती है।
  • पुल-अप बार के पास सीधा खड़ा हो जाएं और इस पुल-अप बार को दोनों हाथों में पकड़ लें।
  • इस दौरान आपके दोनों हाथों में उचित दूरी होनी चाहिए और पैरों को जोड़ लें।
  • अब अपने घुटनों को मोड़ें और अपने शरीर को ऊपर बार की तरफ तब तक पुल करें, जब तक यह बार आपकी ठोड़ी को टच न कर ले।
  • इसके बाद अपनी शुरुआती स्थिति में आ जाएं और इस व्यायाम को दोहराएं।

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पुश-अप (Push-Up)

पुश-अप्स भी अपर मस्कुलर स्ट्रेंथ एक्सरसाइजेज (Muscular strength exercises) में से एक है। यह कंधों, पेक्स और ट्राइसेप्स के लिए बेहद असरदार है। सम्पूर्ण स्ट्रेंग्थ में भी यह व्यायाम लाभदायक साबित हो सकता है। इस तरह से की जा सकती है यह एक्सरसाइज:

  • पुश-अप करने के लिए सबसे पहले आपको हाय प्लैंक पोजीशन में आना है। यानी, आपको पेट के बल जमीन पर इस तरह से लेटना है कि आपके पैरों की उंगलिया जमीन को छुएं और हथेलियां अच्छे से जमीन को टच करें। इस दौरान आपका शरीर जमीन से थोड़ा ऊपर उठा होना चाहिए।
  • अब अपने शरीर को जमीन की तरफ ले आएं सुनिश्चित करें कि आपका शरीर सिर से रीढ़ तक एक सीधी रेखा बना रहा हो।
  • अपने शरीर को तब तक नीचे ले जाएं, जब तक आपको छाती जमीन को टच न कर ले और इसी स्थिति में कुछ देर रहें।
  • उसके बाद हाथों को पुश करते हुए अपने शरीर को ऊपर उठा कर अपनी शुरुआती स्थिति में तब तक ले जाएं तब तक आपकी बाजुएं पूरी तरह से सीधी न हो जाएं।
  • इसके बाद अपनी शुरुआती स्थिति में आ जाएं और इस व्यायाम को दोहराएं।

मस्कुलर स्ट्रेंथ एक्सरसाइजेज में ब्रिज (Bridge)

अगर आप अपने ग्लूट्स और हैमस्ट्रिंग को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो इस व्यायाम को भी आप अपना सकते हैं। इस व्यायाम को इस तरह से किया जाता है:

  • इस एक्सरसाइज करने के लिए आपको अपनी पीठ के बल लेटना है और इस दौरान आपके घुटने मुड़े हुए होने चाहिए।
  • अब अपने हिप्स को जमीन से ऊपर उठाएं। ध्यान रखें कि आपके कूल्हे आपके घुटनों और कंधों से एलाईन्ड हों।
  • कुछ समय तक इसी स्थिति में रहें और उसके बाद अपनी शुरुआती स्थिति में आ जाएं।
  • इस व्यायाम को दोहराएं।

यह तो थी कुछ मस्कुलर स्ट्रेंथ एक्सरसाइजेज (Muscular strength exercises) । अब जानिए कि इन्हें करते हुए आपको किन चीजों का खास ध्यान रखना चाहिए?

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मस्कुलर स्ट्रेंथ एक्सरसाइजेज के लिए इन बातों का रखें ध्यान

अगर आपने मस्कुलर स्ट्रेंथ एक्सरसाइजेज (Muscular strength exercises) को अभी-अभी शुरू किया है, तो आपको खास सावधानियां बरतने की जरूरत है। ताकि, चोट या अन्य समस्याओं से बचा जा सके। इनसे बचने के लिए आप इन तरीकों को अपना सकते हैं:

  • मस्कुलर स्ट्रेंथ एक्सरसाइजेज (Muscular strength exercises) की शुरुआत धीरे-धीरे करनी चाहिए और समय के साथ व्यायाम की इंटेंसिटी बढ़ानी चाहिए।
  • अपने शरीर की सुनें और अगर आपको दर्द अनुभव हो, तो व्यायाम करना बंद कर दें या ब्रेक ले लें।
  • व्यायाम करते हुए हमेशा सही फॉर्म और तकनीक का प्रयोग करें। इस बात को भी सुनिश्चित करें कि आप अपने वर्कआउट का पूरा लाभ उठा रहे हैं या नहीं।
  • जब आप हैवी लिफ्टिंग कर रहे हैं, तो हमेशा स्टेडी और कंट्रोल्ड मूवमेंट का प्रयोग करें। सेट्स के बीच में रेस्ट के लिए समय अवश्य निकालें।
  • शरीर के उन हिस्से का व्यायाम करते हुए सावधानी बरतें, जहां चोट और दर्द की संभावना अधिक होती है जैसे गर्दन, कंधें, पीठ, जोड़ आदि।
  • व्यायाम को करने का सही तरीका जानने के बाद आप इंजरी से बच सकते हैं। इसमें एक प्रोफेशनल ट्रेनर आपकी मदद कर सकते हैं।
  • हफ्ते में कम से कम दो बाद मेजर मसल ग्रुप का वर्कआउट करें। इन व्यायामों को बीस मिनट्स तक करने की सलाह दी जाती है। अगर आप स्ट्रांग हैं, तो अधिक समय तक भी इन्हें कर सकते हैं।
  • सेशंस के बीच में अपनी एक्सरसाइज्ड मसल्स को पूरे दिन का आराम दें। किसी भी व्यायाम को करने से पहले अपने डॉक्टर, एक्सपर्ट और ट्रेनर की सलाह अवश्य लें।

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यह तो थी मस्कुलर स्ट्रेंथ एक्सरसाइजेज (Muscular strength exercises) के बारे में पूरी जानकारी। इन एक्सरसाइजेज को आराम से करना चाहिए। मसल्स और एंड्यूरेंस को बिल्ड करने में समय लगता है, लेकिन इन व्यायामों से आपको सभी शारीरिक और मानसिक लाभ प्राप्त होते हैं। सेशन के बाद भी मसल्स को अच्छे से स्ट्रेच करना न भूलें। अगर मस्कुलर स्ट्रेंथ एक्सरसाइजेज के बारे में आपके मन में कोई भी चिंता या सवाल है तो किसी एक्सपर्ट से इस बारे में पूछना न भूलें।

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सूत्र

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AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 27/09/2021 को
और Hello Swasthya Medical Panel द्वारा फैक्ट चेक्ड