कैसे रखें मानसून में शिशु का ख्याल?

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अपडेट डेट अगस्त 12, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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मानसून और बारिश का मौसम सबको बहुत अच्छा लगता है, लेकिन बारिश में बहुत तरह के स्वास्थ्य संबंधी खतरों की संभावना बढ़ जाती है। बारिश के मौसम में टॉडलर्स यानी शिशु में बड़ों की अपेक्षा इंफेक्शन और बीमार होने का खतरा अधिक रहता है। नवजात का इम्यूनिटी भी बड़ों की अपेक्षा बहुत कमजोर होती है। मदरहुड हॉस्पिटल, पुणे के चीफ कंसल्टेंट पीडियाट्रिक, डॉ तुषार पारीख ने हैलो स्वास्थ्य को बताया कि, ”बारिश और मानसून के समय मौसम में आने वाले बदलाव से शिशु में सर्दी, खांसी, दस्त, डायरिया, पीलिया, टायफॉइड, वायरल बुखार आदि जैसी परेशानी होने के चांसेस बढ़ जाते हैं। बारिश के दौरान छोटे बच्चों का ख्याल रखना बहुत मुश्किल होता है।”

मानसून में शिशु का ख्याल रखने के टिप्स

मानसून में शिशु का ख्याल रखने के टिप्स: मच्छरों से बचाव करें

मानसून में शिशु का ख्याल रखना चाहते हैं तो मच्छरों से बचाव करना सबसे जरूरी है। बारिश के मौसम में हमारे आसपास गंदगी का भरमार होना सामान्य, लेकिन चिंता तब बढ़ जाती है जब हम किसी शिशु की जिम्मेदारी संभाल रहे हों। मानसून में मच्छर का पैदा होना काफी आम है। ऐसे में जरूरी होता है कि शिशु को इनसे बचाया जाए। क्योंकि ये मच्छर ‘डेंगू’ और ‘मलेरिया’ का कारण भी बनते हैं। हमेशा शिशु को मच्छरदानी में सुलाएं।

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मानसून में शिशु का ख्याल रखने के टिप्स:  कपड़ों की सफाई का रखें ध्यान

मानसून के आने के बाद शिशु का बिस्तर, शिशु के कपड़े और शिशु के खिलौने को हमेशा साफ रखना चाहिए। मानसून के मौसम में शिशु को अरामदायक कपडे़ ही पहनाएं। क्योंकि मानसून में वातावरण में नमी बढ़ जाने से कई कीटाणु जन्म लेते हैं। यह कीटाणु कपड़ों के माध्यम से शिशु के संपर्क में आ सकते हैं, और फिर उनमें प्रवेश कर शिशु की त्वचा को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए मानसून में शिशु का ख्याल रखने के लिए उन्हें अच्छी तरह से धुले हुए और साफ कपड़े ही पहनाए जाना चाहिए। साफ और पतले कपड़ों में हवा को सही प्रवाह होता है। इससे शिशु को किसी प्रकार का इंफेक्शन होने से रोका जा सकता है

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मानसून में शिशु का ख्याल रखने के टिप्स: शिशु को रोज नहलाएं

गर्मी के मौसम में हर किसी को पसीना की समस्या होती है। शिशु को भी पसीना बहुत आता है। मानसून और बारिश के दौरान हवा में उमस की मात्रा बढ़ने की वजह से पसीने की गंदगी से कई तरह की बैक्टीरिया का जन्म होता है। अतः मानसून में शिशु का ख्याल रखने के लिए उन्हें प्रतिदिन एक बार एंटीसेप्टिक साबुन से नहाना चाहिए। शिशु के नहाने के पानी में डिटॉल की कुछ बूंदें मिलाने से भी इन बैक्टीरिया संबंधी इंफेक्शन से शिशु को सिक्योर्ड किया जा सकता है। यह शिशु की त्वचा में संक्रमण होने से रोकता है। मानसून में शिशु का ख्याल रखना ज्यादा जरूरी हो जाता है। 

मानसून में शिशु का ख्याल रखने के टिप्स: नाखून को रखें साफ

मानसून में शिशु का ख्याल रखने के लिए हाथ को हमेशा साफ रखना चाहिए। देखा जाता है कि, शिशु अक्सर अपनी उंगलियों को अपने मुंह के अंदर डाल लेते हैं। नाखून के अंदर समाई गंदगी शिशु को नुकसान पहुंचा सकती। इसलिए शिशु के नाखून पर ध्यान देना बहुत आवश्यक है। गंदे नाखून बहुत सारे कीटाणु को जन्म देते हैं। जब शिशु मुंह में उंगली हाथ में डालते हैं, तब ये कीटाणु शिशु के पेट में जाते हैं, यह कई बिमारियों को बुलाया देते हैं।

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मानसून में शिशु का ख्याल रखने के टिप्स: शिशु को गीले डायपर में न छोड़ें

मानसून में शिशु का ख्याल रखने के लिए शिशु को लंबे समय तक एक डायपर में न छोड़ें। क्योंकि इससे रैशेज की समस्या हो सकती है। जो शिशु के लिए बहुत तकलीफ दायक होता है। बारिश में शिशु के गीले डायपर में रहने से उसे ठंड लगने के पूरे चांसेस हैं। थोड़े-थोड़े अंतराल पर डायपर को चेक करते रहें कि कहीं शिशु ने उसमें पेशाब तो नहीं कर दिया।

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बारिश में शिशु का ख्याल रखते हुए भी कहीं-न-कहीं पेरेंट्स से कोई चूक हो ही जाती हैं। कई बार शिशु गीले डायपर पहने रह जाते हैं, जिससे उन्हें ठंड और सर्दी की शिकायत होती हैं। पेरेंट्स इसे सामान्य बात समझते हैं। बारिश में शिशु को सर्दी, जुकाम, आदि की शिकयत होने पर नजरंदाज नहीं करें।

मानसून में शिशु का ख्याल कैसे रखना है ये तो आप समझ गईं होगी। अब हम आपको गर्मियों में शिशु की देखभाल करने की टिप्स बता रहे हैं।

गर्मियों में शिशु की देखभाल के लिए टिप्स:

शिशु को हाइड्रेड रखें

गर्मियों में शरीर से पसीना निकलने की वजह से बॉडी को लिक्विड की ज्यादा जरूरत पड़ती है। अगर शिशु को ब्रेस्टफीडिंग करा रही हैं तो जल्दी-जल्दी बच्चे को स्तनपान कराना सुनिश्चित करें। गर्मियों में शिशु की देखभाल के लिए सबसे सही होगा कि शिशु को हाइड्रेटेड रखें। छह महीने से ज्यादा के बच्चों को ताजे फलों का रस भी दिया जा सकता है।

एक बच्चे को सामान्य रूप से अपने वजन के प्रति पाउंड 2 औंस दूध की जरूरत होती है। हालांकि, बच्चे के शरीर की यह आवश्यकता गर्मियों के मौसम में 50 फीसदी तक बढ़ जाती है। अगर सामान्य रूप से आप बच्चे को प्रतिदिन 20 औंस दूध पिलाती हैं, तो गर्मियों के मौसम में उसे 30 औंस दूध की खुराक दें। मां को भी गर्मियों की डायट में पोषक तत्वों के साथ-साथ ताजे फलों के जूस की मात्रा बढ़ानी चाहिए।

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शिशु को पहनाएं ढीले कपड़े 

गर्मियों में शिशु की देखभाल के लिए शिशु को ढीले कपड़े पहनाएं जिससे बच्चा आसानी से सांस ले सके। शिशु को हल्के रंग के कॉटन के कपड़े पहनाएं। कॉटन फैब्रिक आरामदायक होता है शरीर का पसीना यह आसानी से सोख लेता है। वहीं, धूप में बाहर निकलते समय शिशु को फुल आस्तीन के कपड़े पहनाएं। सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे के बीच घर से बाहर निकलना अवॉयड ही करें।

बच्चे को हमेशा ताजा खाना ही खिलाएं 

अगर बच्चा सॉलिड फूड खाने लगा है तो उसे ताजा खाना ही खिलाएं। इस मौसम में बच्चों को पेट के इंफेक्शन की आशंका अधिक रहती है। वहीं, छह महीने के या इससे छोटे बच्चे का इम्यूनिटी कम होती है इसलिए शिशु को एक्स्ट्रा केयर की जरूरत होती है। पेट के इन्फेक्शन को रोकने के लिए शिशु को उबला हुआ पानी पिलाएं।

घमौरियों से बचाव है जरूरी 

गर्मियों में बच्चों को हीट रैशेज या घमौरियां होना काफी आम हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नहाने के पानी में दो चम्मच चंदन पाउडर डालकर शिशु को नहलाएं। शिशु को ढीले-ढाले कपड़े पहनाएं और ऑयली लोशन या क्रीम का उपयोग न करें, जिनसे रोम छिद्र बंद हो सकते हैं।

हम उम्मीद करते हैं कि मानसून में शिशु का ख्याल कैसे रखें विषय पर आधारित यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा। किसी प्रकार की अन्य जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी प्रकार की चिकित्सा सलाह, उपचार और निदान प्रदान नहीं करता।

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