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बच्चों के लिए रेबीज वैक्सिनेशन के बारें में जानें सब-कुछ यहां!

बच्चों के लिए रेबीज वैक्सिनेशन के बारें में जानें सब-कुछ यहां!

रेबीज एक जानलेवा वायरस है, जो इंफेक्टेड जानवरों से मनुष्यों में फैलता है। रेबीज वायरस आमतौर पर जानवरों की एक बाईट के माध्यम से फैल सकता है। कुत्ता, रकून, चमगादड़ आदि कुछ जानवर हैं, जो इस रोग का कारण बन सकते हैं। इस रोग के लक्षण नजर आने तक यह समस्या गंभीर हो चुकी होती है। इसलिए, इसकी पहले ही वैक्सिनेशन की सलाह दी जाती है, ताकि आप इससे सुरक्षित रह सके। आज हम बात करने वाले हैं रेबीज और रेबीज इंजेक्शन टाइम पीरियड (Rabies Injection Time Period) के बारे में। जानिए क्या है रेबीज इंजेक्शन टाइम पीरियड (Rabies Injection Time Period)। यानी किस समय रेबीज का इंजेक्शन लगवाना चाहिए, ताकि गंभीर स्थितियों से बचा जा सके। लेकिन, पहले जान लेते हैं क्या हैं इस समस्या के लक्षण?

रेबीज इंफेक्शन के लक्षण (Symptoms of Rabies infection)

रेबीज इंफेक्शन (Rabies infection) रेबीज वायरस के कारण होता है जो इंफेक्टेड एनिमल्स के सलाइवा से फैलता है। दुर्लभ कारणों में यह वायरस तब भी फैल सकता है, जब संक्रमित लार एक खुले घाव या म्यूकस मेमब्रेन्स (Mucous membranes), जैसे मुंह या आंखों में चली जाती है। रेबीज के पहले लक्षण फ्लू के समान ही हो सकते हैं और कई दिनों तक रह सकते हैं। बाद में, इसके यह लक्षण पैदा हो सकते हैं :

  • बुखार (Fever)
  • सिरदर्द (Headache)
  • जी मचलाना (Nausea)
  • उल्टी आना (Vomiting)
  • घबराहट (Agitation)
  • एंग्जायटी (Anxiety)
  • भ्रम (Confusion)
  • हायपरएक्टिविटी (Hyperactivity)
  • निगलने में समस्या (Difficulty swallowing)
  • अत्यधिक लार आना (Excessive salivation)
  • अनिद्रा (Insomnia)
  • पार्शियल पैरालिसिस (Partial paralysis)
  • मतिभ्रम (Hallucinations)

इन लक्षणों के अलावा भी प्रभावित व्यक्ति कुछ अन्य लक्षणों का अनुभव कर सकता है। रेबीज वायरस के कारण सेंट्रल नर्वस सिस्टम (Central nervous system) प्रभावित होता है। अगर रोगी को सही उपचार न मिले तो यह वायरस ब्रेन के रोग का कारण बन सकता है। जिससे रोगी की मृत्यु भी हो सकती है। अब जानते हैं रेबीज वैक्सीन और रेबीज इंजेक्शन टाइम पीरियड (Rabies Injection Time Period) के बारे मैं।

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रेबीज वैक्सीन क्या है? (Rabies Vaccine)

रेबीज वैक्सीन एक एक्टिव इम्युनायजिंग एजेंट (Active immunizing agent )है। जिसका प्रयोग इंफेक्शन को दूर करने में किया जाता है जो रेबीज वायरस का कारण होता है। यह वैक्सीन आपके शरीर को रेबीज वायरस के खिलाफ अपनी प्रोटेक्शन (एंटीबॉडी) बनाने के लिए प्रेरित करती है। रेबीज वैक्सीन का प्रयोग दो तरह से किया जाता है। यह वैक्सीन उस व्यक्ति को दी जाती है जो जानवर के बाईट, स्क्रैच या लीक के संपर्क में आए हों या किसी को ऐसा संदेह हो कि उन्हें रेबीज है। यह वैक्सीन उस व्यक्ति को भी दी जा सकती है जिसे लगता है कि उसे रेबीज वायरस होने की संभावना अधिक है।

इनमें जानवरों के डॉक्टर, एनिमल हैंडलर्स या ट्रेवलर्स जो उन स्थानों पर जाते हैं। जहां जानवरों की उपस्थिति के कारण रेबीज होने की संभावना अधिक होती है। वो लोग भी इस वैक्सीन को ले सकते हैं जो वाइल्ड एरिया में काम करते है या रहते हैं और उनका जंगली जानवरों के संपर्क में आने की संभावना अधिक होती है। इसे प्री-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (Pre-exposure Prophylaxis) कहा जाता है।

रेबीज के उच्च जोखिम वाले लोगों को रेबीज का टीका दिया जाता है ताकि वे एक्सपोज्ड होने पर उनकी रक्षा कर सकें। अगर इसे किसी व्यक्ति को एक्सपोज्ड होने के बाद दिया जाता है, तो भी यह प्रोटेक्शन के लिए प्रभावी साबित हो सकता है। रेबीज वैक्सीन को किल्ड यानी मरे हुए रेबीज वायरस से बनाया जाता है। इससे रेबीज नहीं हो सकता। जानिए किस स्थिति में यह वैक्सीन है जरूरी।

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किन स्थितियों में जरूरी है रेबीज वैक्सीन और रेबीज इंजेक्शन टाइम पीरियड के बारे में जानकारी?

रेबीज इंजेक्शन टाइम पीरियड (Rabies Injection Time Period) से पहले यह जान लें कि किन स्थितियों में इस वैक्सीन का प्रयोग बेहद जरूरी है। कुत्ता पालतू हो या जंगली, लेकिन अगर काट ले तो ऐसा माना जाता है कि 72 घंटे के भीतर रोगी को रेबीज इंजेक्शन (Rabies Injection) लगवाना जरूरी है। अगर ऐसा न हो तो यह स्थिति भयानक हो सकती है। जब बच्चा रेबीज वायरस के संपर्क में आता है तो उसे तुरंत वैक्सीन देनी चाहिए जिससे बच्चे को इम्युनिटी प्राप्त हो। अगर आपको संदेह है कि आपका बच्चा रेबीज वायरस के संपर्क में आया हैं, तो इसका उपचार इम्यून ग्लोब्युलिन (Immune Globulin) से किया जाता है। तुरंत उसी समय बच्चे को इसकी एक डोज दी जाती है। उसके बाद दो हफ़्तों तक इसका उपचार रेबीज वैक्सीन के कई शॉट्स के साथ कराया जाता है।

प्री एक्सपोज़र रेबीज वैक्सीन (Pre-exposure Rabies Vaccine) का प्रयोग बच्चों को इसके अधिक जोखिम से बचाने के प्रयोग किया जा सकता है। बच्चों को इसके बारे में डॉक्टर से बात करें। अगर किसी अज्ञात जानवर ने बच्चे को काटा हो या उसके नाख़ून आपके बच्चे को लगे हों। तो सबसे पहले उस जगह को पानी और साबुन की मदद से साफ करना जरूरी है। इसके बाद तुरंत बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाएं। ताकि, डॉक्टर इस बात के बारे में निर्धारित कर सकें कि आपके बच्चे को एंटी रेबीज उपचार की जरूरत है या नहीं। अब जानिए रेबीज इंजेक्शन टाइम पीरियड (Rabies Injection Time Period) के बारे में।

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रेबीज इंजेक्शन टाइम पीरियड क्या है? (Rabies Injection Time Period)

अगर आपके बच्चे को किसी जानवर ने काटा है जिससे रेबीज हो सकता है या आपको संदेह है कि आपके बच्चे को रेबीज हो सकता है। तो बच्चों में लक्षण नजर आने का इन्तजार न करें बल्कि तुरंत मेडिकल हेल्प लें। अगर रेबीज का उपचार न किया जाए तो जानलेवा हो सकता है। बच्चे के रेबीज इंजेक्शन टाइम पीरियड (Rabies Injection Time Period)के बारे में जानकारी होना भी आपके लिए जरूरी है। अगर आपके बच्चे को इसकी पहले इसकी वैक्सीन न लगी हो, तो डॉक्टर उनके उपचार के बारे में निर्धारित करेंगे और उन्हें पांच इंजेक्शन दिए जा सकते हैं। बच्चे जो इम्यूनोसप्रेस्ड हैं, उन्हें इसके छे इंजेक्शंस की जरूरत हो सकती है।

रेबीज इम्यून ग्लोब्युलिन (Rabies Immune Globulin) उन बच्चों को दी जाती हैं जिन्हें पहले यह वैक्सीन न दी गयी हैं। रेबीज इम्यून ग्लोब्युलिन (Rabies Immune Globulin) के बारे में पहले ही पूरी जानकारी प्राप्त कर लें। इसकी पहली चार रेबीज शॉट्स की तरह ही उसी टाइम पीरियड पर दी जाती है। यह डोजेज शुरू के तीन दिनों में जब बच्चा इस संक्रमण के संपर्क में आया होता है तब दी जाती है। जिन बच्चों को पहले रेबीज इम्यून ग्लोब्युलिन (Rabies Immune Globulin) दिया गया है। उन्हें केवल चार ही वैक्सीन्स की जरूरत होती है। इन सभी रेबीज की बॉक्सिन्स को दो हफ़्तों के भीतर देना चाहिए।

अपने बच्चे को इंफेक्शन और रेबीज से बचाने के लिए यह सभी टीके लगाना जरूरी है। रेबीज इंजेक्शन टाइम पीरियड (Rabies Injection Time Period) में दो हफ्ते बेहद महत्वपूर्ण होते हैं जिनमें यह इंजेक्शन लगाए जाते हैं। एंटी रेबीज वैक्सीन तीन साल तक काम करती है। यानी, अगर इन सालों में को जानवर काट लेता है तो इंफेक्शन का डर नहीं रहता है। जो लोग जंगल में रहते हैं या जिन्हें यह इंफेक्शन होने का खतरा अधिक रहता है वो पहले ही एंटी रेबीज इंजेक्शन लगा लेते हैं। यह तो थी रेबीज इंजेक्शन टाइम पीरियड (Rabies Injection Time Period) के बारे में जानकरी अब जान लेते हैं इसके साइड इफेक्ट्स के बारे में।

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रेबीज वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स (Rabies Vaccine Side Effects)

रेबीज वैक्सीन लेने के बाद कुछ लोग साइड इफेक्ट्स का अनुभव कर सकते हैं। हालांकि, ऐसा जरूरी नहीं है कि हर किसी को इस वैक्सीन को लेने के बाद साइड इफेक्ट्स नजर आएं। इसके कुछ सामान्य साइड इफेक्ट्स इस प्रकार हैं

  • इंफेक्शन वाली जगह पर दर्द (Pain)
  • जोड़ों में दर्द (Joint Pain)
  • इंजेक्शन वाली जगह लालिमा (Redness)
  • इंजेक्शन वाली जगह सूजन (Swelling)
  • लिम्फ नोड्स में सूजन (Swelling in Lymph nodes)

यह हल्के साइड इफेक्ट्स अधिकतर नियमित इस दवा को लेने के बाद खुद ही दूर हो जाते हैं। सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Centers for Disease Control and Prevention) के अनुसार रेबीज वैक्सीन के प्रयोग के बाद कुछ लोग सिरदर्द, पेट में दर्द, मसल्स में दर्द, जी मचलना जैसी समस्याओं का अनुभव भी कर सकते हैं। यही नहीं, दुर्लभ मामलों में उन्हें नर्वस सिस्टम डिसऑर्डर्स (Nervous System Disorders) जैसे गिलेन बार सिंड्रोम (Guillain-Barré Syndrom) की समस्या भी हो सकती है। लेकिन अगर यह परेशानियां गंभीर हों, तो डॉक्टर की सलाह लेना न भूलें। अब जानिए किस तरह से हो सकता है रेबीज से बचाव?

रेबीज इंजेक्शन टाइम पीरियड

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रेबीज से बचाव कैसे संभव है? (Prevention of Rabies)

अपने आसपास मौजूद जानवरों से सुरक्षित रहिए, चाहे वो आपका पालतू जानवर ही क्यों न हों, इससे एनिमल बाइट्स के जोखिम को कम किया जा सकता। इसके साथ ही इस इंफेक्शन से बचने के लिए रेबीज इंजेक्शन टाइम पीरियड (Rabies Injection Time Period) के बारे में सही जानकारी होना भी जरूरी है।। जानवरों के बाइट्स और रेबीज के जोखिम को कम करने के सामान्य तरीके इस प्रकार हैं:

  • अगर आप पालतू जानवर रखना चाहते हैं तो सोच समझ कर इसका चुनाव करें। ऐसे जानवर का चुनाव करें जो बच्चों के लिए सुरक्षित हो
  • अपने बच्चे को कभी भी पालतू जानवर के साथ अकेला न छोड़ें।
  • अपने पालतू जानवरों की पहले ही सभी वैक्सीन्स लगवाना जरूरी है।
  • अपने पालतू जानवरों को अन्य जंगली जानवरों के संपर्क में ना आने दें।
  • बच्चों को मरे हुए जानवरों से छूने से मना करें।
  • अपने बच्चों को एनिमल सेफ्टी के बारे में सिखाएं इससे भी वो एनिमल बाइट्स से बच सकते हैं। जैसे जानवरों को कभी खाते हुए न छेड़ें। किसी भी जंगली जानवरों से अपने बच्चों को न खेलने दें।

अपने बच्चे को समझाएं कि अगर गलती से भी आपका पालतू जानवर उसे काट लेता है या स्क्रैच करता है तो वो तुरंत आपको बताएं। क्योंकि, हो सकता है कि हलकी चोट या स्क्रैच को बच्चा गंभीरता से न लें। ऐसे में संक्रमण बढ़ सकता है।

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प्रेग्नेंसी में टीकाकरण की क्यों होती है जरूरत ?

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यह तो थी रेबीज से बचाव और रेबीज इंजेक्शन टाइम पीरियड (Rabies Injection Time Period) के बारे में जानकारी। रेबीज एक वायरल इंफेक्शन है जो नर्वस सिस्टम पर अटैक करता है। इसके लक्षण जब दिखाई देते हैं तो यह आमतौर पर घातक होता है। इसलिए इसका जल्दी से जल्दी उपचार जरूरी है। रेबीज का वायरस शरीर में किसी भी कट, स्क्रैच, बाईट या मुंह और आंखों के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकता है। ऐसे में सबसे जरूरी है अपने बच्चों को जानवरों के कॉन्टेक्ट में आने से बचाएं या उन्हें अपनी सुरक्षा करना सिखाएं। ताकि रेबीज इंफेक्शन का खतरा कम हो सकता है।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 10/08/2021 को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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