बच्चों के इशारे कैसे समझें, होती है उनकी अपनी अलग भाषा

Medically reviewed by | By

Update Date अप्रैल 7, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
Share now

आपने कभी सोचा है कि आपका बच्चा क्या सोचता है या उसके दिमाग में क्या चलता है? बच्चे जब बड़े हो रहे होते हैं, तो बच्चों के इशारे कैसे समझेने हैं ये आपके लिए परेशानी बन का सबब बन सकता है। जिस उम्र में बच्चे ज्यादा बोल नहीं पाते, तो उनके इशारे ही अपनी बात कहने के लिए काफी होते हैं। आज हम आपको बताएंगे कि आप अपने बच्चों के इशारें कैसे समझ सकते हैं। आमतौर पर जब बच्चा एक साल का हो जाता है, तो वह आपके पीछे आने की कोशिश करता है। हर बार जब आपकी नजर उस पर पड़ती हैं, तो वे मुस्कुराते हैं और आपकी बात सुनने के लिए उत्सुक दिखते हैं। हालांकि, कुछ महीनों में ही चीजें बदलने लगती हैं और आपको लगता है कि उनके नखरे आपके धैर्य की परीक्षा लेने लगे हैं। निम्नलिखित टिप्स से समझें बच्चों के इशारे कैसे समझें

ये भी पढ़ेंः कहीं आपका बच्चा तो नहीं हो रहा चाइल्ड एब्यूज का शिकार? ऐसे करें पेरेंटिंग

बच्चों के इशारे कैसे समझें: आपकी नजर से बचते हैं

जब बच्चा आपकी नजर से बचने की कोशिश करे

मतलब: मैं शर्मिंदा हूँ!

बच्चे ऐसा कुछ गलती करने के बाद करते हैं, जिसके लिए वह गिल्टी फील करते हैं। आपका बच्चा यह तब करेगा जब वह समझेगा कि उसने कुछ गलत किया है। ज्यादातर मामलों में यह बिना सोचे कुछ कर जाने के कारण होता है। जिसके लिए वह बाद में दोषी महसूस करता है।

क्या करें: उनकी शर्मिंदगी को स्वीकार करें लेकिन इसे बदतर न बनाएं। जैसे कि अगर वह किताब के पेज को फाड़ते हैं, तो उसे दृढ़ता और स्पष्ट रूप से बताएं कि यह ठीक नहीं है और फिर पेज को दोबारा चिपकाने में उसे इंवॉल्व करें। हर कोई गलतियां करता है लेकिन जरूरी है कि उन गलतियों को सुधारा जाए।

बच्चों के इशारे कैसे समझें: बच्चे का नखरे दिखाना

जब बच्चा आपको नखरें दिखाए

मतलब: मुझे बदलाव चाहिए!

कभी-कभी आपका मासूम बच्चा अचानक चीजों को इधर-उधर फेंकना शुरू कर देता है और आपको इसका कारण का पता नहीं होता। ज्यादातर मामलों में बच्चे यह सिर्फ बोरियत की वजह से करते हैं। कुछ मामलों में यह भूख भी हो सकती है।

क्या करें: यदि ऐसा होने पर आप अपने फोन में व्यस्त रहते हैं, तो अपने इलेक्ट्रॉनिक्स को दूर रख दें। इसके बजाए अपने बच्चे की एक्टिविटी में हिस्सा लें। अपने बच्चे को उसकी बातें शब्दों में व्यक्त करने के लिए कहें क्योंकि बच्चे इसी कारण सबसे अधिक नखरे दिखाते  हैं। उसे धीरे-धीरे कुछ शब्द बोलना सिखाएं जैसे भूख, गुस्सा, उदास, नींद, बोरियत आदि। जब वह नखरें दिखाएं तो उनसे पूछें कि उन्हें क्या चाहिए। वे खुद बताएंगें कि उनका मूड क्यों खराब है

ये भी पढ़ेंः जानें पॉजिटिव पेरेंटिंग के कुछ खास टिप्स

बच्चों के इशारे कैसे समझें: बच्चे का जिद करना

ज्यादातर बच्चे अगर भूखे होते हैं या फिर बहुत ज्यादा थक जाते हैं, बीमार हैं या फिर किसी वजह से अनकम्फर्टेबल महसूस कर रहा हैं तब ज्यादा रोते, चिल्लाते और मारने के लिए हाथ उठाते हैं। कुछ गुस्से में दांत काटने लगते हैं, जमीन पर लेटने लगते हैं या फिर अपनी सांस रोकने की कोशिश करते हैं और किसी की कोई बात नहीं सुनते। बच्चे का इस तरह का बर्ताव किसी भी पैरंट के लिए गुस्सा और निराश करने वाला हो सकता है। खासतौर पर तब जब बच्चे इस तरह का व्यवहार पब्लिक प्लेस पर करें। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि बच्चों का इस तरह नखरा करना उनकी सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद है। जब आपका बच्चा रोता है तो वह अपने शरीर में मौजूद स्ट्रेस हॉर्मोन कॉर्टिसोल को रिलीज करने की कोशिश करता है क्योंकि अगर यह हॉर्मोन शरीर के अंदर रह जाएगा तो यह शरीर के अहम अंगों और ब्रेन टिशूज को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे बच्चे में स्ट्रेस कम होता है और उसके मन से नकारात्मक भावनाएं भी निकल जाती हैं।

बच्चों के इशारे कैसे समझें: मांग पूरी होने पर भी धैर्य खोना

बच्चा जो मांगता है उसे वह न मिलने के बाद भी अगर बच्चा नखरें दिखाए

मतलब: मैं इसे चाहता हूं!

कुछ बच्चों में आदत होती है कि वह काम को पूरा होने तक धैर्य नही रखतें। जैसे अगर बच्चे का पसंदीदा खिलौना उनसे दूर कर दिया जाए, तो वह गुस्सा करते हैं। खैर बच्चे अधीर होते हैं। माता-पिता के रूप में उनका धैर्य रखना सीखाना पेरेंट्स का काम है।

क्या करें:  डिस्ट्रेक्शन का उपयोग करें। छोटी उम्र में वे सरल सवालों को समझते हैं। इससे भी बेहतर वे गेम खेलना पसंद करते हैं। इसलिए अगर आप उनके लिए कुछ काम कर रहे हैं, तो उन्हें किसी और चीज में व्यस्त रखें। इस तरह से उनके अंदर धैर्य आएगा और वह अपनी चीजों के लिए उताबले नहीं होंगे।

बच्चों के इशारे कैसे समझें: किसी अजनबी से अपना चेहरा छिपाते है

अगर बच्चा किसी अजनबी से मिलते समय अपना चेहरा छुपाता है

मतलब: वे चिंतित महसूस कर रहे हैं।

हम सभी ही अजनबियों के आसपास थोड़ा असहज महसूस करते हैं। उम्र के साथ  हम ऐसी स्थितियों से निपटने में बेहतर हो जाते हैं। हालांकि, जब बच्चों की बात आती है, तो वे नादान होते है और इसलिए सबसे अच्छी बात यह है कि वे आपके पीछे छिप सकते हैं या कमरे के अंदर जा सकते हैं।

क्या करें: बच्चा आपसे सीखता है इसलिए नए लोगों के आस-पास रिलेक्स रहें। उनसे  हाथ मिलाएं और अपने बच्चे को यह तय करने दें कि वह क्या करना चाहता है। यह अजनबी लंबे समय के बाद आपके बच्चे से मिलने वाला आपका कोई दोस्त हो सकता है। ऐसे मामलों में अपने बच्चे के साथ व्यक्ति के बारे में कोई एक किस्सा साझा करें।

ये भी पढ़ेंः ब्रेन एक्टिविटीज से बच्चों को बनाएं क्रिएटिव, सीखेंगे जरूरी स्किल्स

बच्चों के इशारे कैसे समझें: किसी और का करीब आना बच्चों को नहीं आता पसंद

अक्सर देखा जाता है कि किसी और का पेरेंट्स के करीब आना बच्चों को नहीं आता पसंद

मतलब: मैं असुरक्षित महसूस करता हूं।

बच्चे अपने माता-पिता को लेकर काफी पजेसिव हो जाते हैं। ऐसे उदाहरण भी हैं जब माता-पिता एक-दूसरे के भी करीब आते हैं, तो उन्हें बुरा लगता है।

क्या करें:  ऐसी स्थिति में जान लें कि आपका बच्चा असुरक्षित है इसलिए केवल एक चीज, जो आप कर सकते हैं, वह है उसे सुरक्षित महसूस कराना। एक तरीका यह है कि आप अपने बच्चे को अन्य बच्चों के साथ बातचीत में शामिल करें। इसलिए अगर आप अपने दोस्त के बच्चे को गोद में उठा रहे हैं और यह बच्चे को असुरक्षित बना रहा है, तो अपने बच्चे को बताएं कि इस उम्र में यह होना स्वाभिक है। उन्हें इस बात को मानने के लिए समय दें कि आपका उनके साथ-साथ दूसरों के साथ भी समय बिताना जरूरी है।

बच्चों की उम्र के साथ केवल एक चीज जो बदलती है कि उन्हें खुद को व्यक्त करना आ जाता है। इसलिए उन्हें ‘शरारती कहकर अपने से दूर करने के बजाय उन्हें समझने की कोशिश करें। समय के साथ आप बच्चे के इशारे समझने लगेंगे और चीजें ठीक हो जाएंगी।

और पढ़ेंः

स्मार्ट पेरेंटिंग टिप्स अपनाकर बन जाएं सुपर पेरेंट

पेरेंटिंग स्टाइल पर भी निर्भर है आपके बच्चे का विकास

बच्चों को खुश रखने के लिए फॉलो करें ये पेरेंटिंग टिप्स, बनेंगे जिम्मेदार इंसान

स्पेशल चाइल्ड की पेरेंटिंग में ये 7 टिप्स करेंगे मदद

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

संबंधित लेख:

    क्या यह आर्टिकल आपके लिए फायदेमंद था?
    happy unhappy"
    सूत्र

    शायद आपको यह भी अच्छा लगे

    शिशु को तैरना सिखाने के होते हैं कई फायदे, जानें किस उम्र से सिखाएं और क्यों

    शिशु को तैरना सिखाना महज फैशन भर नहीं है बल्कि कई फायदे हैं। बच्चे को शारीरिक और मानसिक रूप से दूसरों बच्चों से आगे करता है। शिशु को तैरना सिखाना in Hindi.

    Medically reviewed by Dr. Pranali Patil
    Written by Ankita Mishra
    पेरेंटिंग टिप्स, पेरेंटिंग मई 4, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

    बच्चों में कान के इंफेक्शन के लिए घरेलू उपचार

    छोटे बच्चों में कान के इंफेक्शन in Hindi. कान का संक्रमण होने के कारण जानें। कान के संक्रमण से राहत पाने के सुरक्षित उपाय।

    Medically reviewed by Dr. Pranali Patil
    Written by Ankita Mishra
    बच्चों की देखभाल, पेरेंटिंग अप्रैल 30, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

    बच्चों की हैंड राइटिंग कैसे सुधारें?

    बच्चों की गंदी हैंड राइटिंग हर पेरेंट्स के लिए एक सिरदर्द होती है। अगर आप भी बच्चों की हैंड राइटिंग सुधारना चाहते हैं, तो इन तरीकों को ट्राई कर सकते हैं।

    Medically reviewed by Dr. Pranali Patil
    Written by Ankita Mishra
    पेरेंटिंग टिप्स, पेरेंटिंग अप्रैल 28, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

    बच्चों के लिए मोबाइल गेम्स खेलना फायदेमंद है या नुकसानदेह

    जानें बच्चों पर मोबाइल गेम्स का क्या प्रभाव पड़ता है। क्या बच्चों में गेमिंग एडिक्शन को कम किया जा सकता है? Side effects of mobile games in hindi.

    Medically reviewed by Dr. Pranali Patil
    Written by Shivam Rohatgi
    पेरेंटिंग टिप्स, पेरेंटिंग अप्रैल 28, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें

    Recommended for you

    बच्चे को बीजी रखने के टिप्स-how to keep kids busy

    जानें बच्चे को बिजी रखने के टिप्स, आसानी से निपटा सकेंगी अपना काम

    Medically reviewed by Dr. Shruthi Shridhar
    Written by Kanchan Singh
    Published on मई 15, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
    बच्चे का टूथब्रश-children's toothbrush

    बच्चे का टूथब्रश खरीदते समय किन जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए?

    Medically reviewed by Dr. Pranali Patil
    Written by Ankita Mishra
    Published on मई 12, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
    लॉकडाउन में पेरेंटिंग टिप्स

    लॉकडाउन के दौरान पेरेंट्स को डिसिप्लिन का तरीका बदलने की है जरूरत

    Medically reviewed by Dr. Pranali Patil
    Written by Mona Narang
    Published on मई 5, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
    हेलीकॉप्टर पेरेंट्स

    कहीं आप तो नहीं हैं हेलीकॉप्टर पेरेंट्स?

    Medically reviewed by Dr. Pranali Patil
    Written by Shikha Patel
    Published on मई 4, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें