‘डिजिटल डिटॉक्स’ भी है जरूरी, इलेक्ट्रॉनिक्स फ्री विकेंड है अच्छा विकल्प

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Update Date जनवरी 24, 2020 . 6 मिनट में पढ़ें
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‘डिजिटल डिटॉक्स’ शब्द आजकल बहुत चलन में है। हम में से बहुत से लोग होंगे, जिन्होंने यह शब्द तो सुना होगा। लेकिन, कई लोगों को इसका मतलब नहीं पता होता। डिजिटल डिटॉक्स का मतलब है किसी भी अन्य बुरी आदत की तरह डिजिटल डिवाइसेज से भी दूरी बनाना। डिजिटल डिटॉक्स उस समय को कहते हैं, जब एक व्यक्ति कुछ समय के लिए टेक डिवाईसेज का इस्तेमाल न करे। डिजिटल डिटॉक्स का एक ही नियम है कि इस दौरान स्मार्टफोन, टीवी, कंप्यूटर, टैबलेट और सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करना होता। डिजिटल डिवाइस से डिटॉक्सिंग का मतलब है, जब आप टेक्नोलॉजी से दूरी बनाते हैं, तो रियल लाइफ की परेशानियों और बातों पर ध्यान दे पाते हैं। डिजिटल डिवाइस से दूर होने पर वर्चुअल वर्ल्ड से बाहर निकलते हैं और अपने बारे में ज्यादा सोच पाते हैं।

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हालांकि, आज के दौर में डिजिटल स्क्रीन से दूरी बनाना बहुत मुश्किल काम है। आज लगभग सभी की जेबों में फोन होते हैं, वेटिंग रूम में टीवी लगाए जाते हैं, स्कूलों तक में टैबलेट और स्मार्टफोन का इस्तेमाल हो रहा है। जैसे-जैसे तकनीक का विकास हो रहा है और स्क्रीन लोगों की जिंदगी का हिस्सा बनता जा रहा है। कुछ लोगों को यह निर्णय लेने में परेशानी हो रही है कि बच्चों को अपने इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ कितना समय देना चाहिए।

बच्चों के लिए जरूरी है डिजिटल डिटॉक्स

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स ने भी अपने पुराने निर्देशों को बदल दिया है। उन्होंने बच्चों के लिए हर रोज दो घंटे से कम स्क्रीन टाइम का निर्देश दिया था। लेकिन जैसे-जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स तेजी से बढ़ रहे हैं, उन्होंने माना है कि इन समय सीमाओं को लागू करना कितना मुश्किल हो सकता है। अगर बच्चा अपनी पढ़ाई स्मार्टफोन से कर रहा है, तो आप उसके स्क्रीन टाइम को कम नहीं कर सकते।

कुछ परिवारों पर डिजिटल मीडिया इतना हावी हो गया है कि उनकी जिंदगी फोन और लैपटॉप की होकर रह गई है। बच्चे अपना पूरा समय इलेक्ट्रॉनिक्स को दे रहे हैं और इस चक्कर में वह अपने आस-पस की चीजों को पूरी तरह अनदेखा कर देते हैं।

अगर आपके परिवार ने कुछ अनहेल्दी आदतों को विकसित किया है, तो डिजिटल डिटॉक्स आपकी मदद कर सकता है। जैसा कि नाम से पता चलता है आपको कुछ समय के लिए अपने इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन से बचने की जरूरत होगी। आपको टेक्नोलॉजी से एक ब्रेक लेना होगा, जिससे आपको कुछ स्वस्थ आदतों को विकसित करने में मदद मिल सकती है।

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कब होती है डिजिटल डिटॉक्स की जरूरत

बहुत अधिक मीडिया का उपयोग कुछ व्यवहारिक और भावनात्मक समस्याएं खड़ी कर सकता है। यहां कुछ बातें बताई गई है, जिससे आपको अपने बच्चे के व्यवहार को समझने में मदद मिलेगी और आप समझ पाएंगे कि आपके परिवार को डिजिटल डिटॉक्स की जरूरत है।

बच्चे एंटरटेनमेंट के लिए टेक्नोलॉजी पर हैं निर्भर

अध्ययन कहते हैं कि एक बच्चा औसतन हर रोज सात घंटे इलेक्ट्रॉनिक्स का इस्तेमाल करते हैं। अगर आपका बच्चा घंटों तक वीडियो गेम खेलना चाहता है या वह हर दिन घंटों टीवी देखता है, तो एक डिजिटल डिटॉक्स उसे मनोरंजन के लिए दूसरे ऑप्शन दे सकता है। डिजिटल डिटॉक्स बच्चों को अपने मनोरंजन के लिए बहुत से आसान ऑप्शन देगा, जिससे वह स्वस्थ और खुश रह सकता है।

इलेक्ट्रॉनिक्स के कारण बच्चों का बढ़ता गुस्सा

अगर बच्चे इलेक्ट्रॉनिक्स की वजह से आपस में लड़ रहे हैं, तो यह आपके लिए वॉर्निंग साइन है। अगर आपके टीवी या फोन ऑफ करने की बात पर आपका बच्चा आपसे बहस करता है, तो उसे डिजिटल डिटॉक्स की जरूरत है। इलेक्ट्रॉनिक्स से एक ब्रेक उसे ज्यादा आज्ञाकारी बनाने में मदद कर सकता है। डिजिटल डिटॉक्स बच्चों को अनुशासित बनाता है और परिवार को करीब लाने में  मदद करता है।

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इलेक्ट्रॉनिक्स की वजह से बुरी आदतें विकसित होना

रात का खाना खाते समय टीवी देखना, आमने-सामने बात करने के बजाए दूसरे कमरे से एक-दूसरे को टेक्स्टिंग करना, बिस्तर के बगल में स्मार्टफोन के साथ सोना या सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने के लिए एक-दूसरे को अनदेखा करना कुछ परिवारों में बुरी आदतों के उदाहरण हैं। डिजिटल डिटॉक्स के दौरान अपने बच्चे को अनुशासन और बुरी आदतों के नुकसान के बारे में बताएं। ऐसा करना उनके व्यवहार में बदलाव लाएगा।

स्क्रीन टाइम से बिहेवियर प्रॉब्लम

शोधकर्ता अलग-अलग अध्ययन में बताते हैं कि स्क्रीन टाइम बच्चों के विकास और व्यवहार को किस तरह से प्रभावित करता है। जैसे-जैसे नई तकनीक सामने आती है यह बच्चों के स्क्रीन से टाइम और उनके इस्तेमाल के तरीकों को बदलता है। पोर्टेबल वीडियो गेम से बच्चों चलते-चलते भी स्क्रीन का यूज करते हैं। स्मार्टफोन के दौर में बच्चे अपने हर छोटे बड़े काम के लिए इसी का प्रयोग करते हैं।

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डिजिटल डिटॉक्स से जुड़े शोध

शोधकर्ताओं ने पाया है डिजिटल डिटॉक्स से बच्चों की भावनात्मक स्तर को बढ़ाया जा सकता है और उनकी दूसरों को समझने की क्षमताओं में भी सुधार हो सकता है। 11 से 13 साल के बच्चों  से फोटो और वीडियो में दूसरों की भावनात्मक अभिव्यक्तियों को पहचानने से स्टडी की शुरुआत की गई। आधे समूह को एक बाहरी कैंप में भेजा गया जहां उन्हें अपने इलेक्ट्रॉनिक्स का इस्तेमाल करने की परमिशन नहीं थी। बाकी आधे ने स्क्रीन टाइम का उपयोग करना जारी रखा।

पांच दिनों के बाद दोनों समूहों को फिर से दूसरे लोगों की भावनाओं को पढ़ने की उनकी क्षमता पर परीक्षण किया गया। जिस समूह ने अपने डिजिटल उपकरणों का उपयोग जारी रखा था, उसमें कोई सुधार नहीं हुआ। हालांकि कैंप में भाग लेने वाले समूह में दूसरों की भावनाओं को पहचानने की क्षमता में काफी सुधार देखा गया।

शोधकर्ताओं ने बताया कि बच्चों के सामाजिक कौशल के लिए आमने-सामने का इंटरेक्शन जरूरी है। थोड़े समय के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स से दूरी बनाने से बच्चों को दूसरे के भावों को समझने में मदद मिलती है।

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डिजिटल डिटॉक्स के फायदे

डिजिटल डिटॉक्स न केवल बच्चों के लिए बल्कि माता-पिता के लिए भी जरूरी है। ऐसा करने से माता-पिता  बच्चों के साथ ज्यादा अच्छे से कनेक्ट कर पाते हैं।

डिजिटल डिटॉक्स के लिए आउटडोर टाइम है जरूरी

इंटरनेट और वीडियो गेम के बढ़े चलन से पहले बच्चे अपने एंटरटेनमेंट के लिए बाहर खेलते थे। लेकिन, अब नई टेक्नोलॉजी का लालच बहुत से बच्चों को खाली समय में बाहर जाने की बजाए स्क्रीन पर आंखे गड़ाने को मजबूर करता है। अगर आप इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइसेज को दूर ले जाते हैं, तो आपका बच्चा कुछ और करने के बारे में सोच सकता है। इलेक्ट्रॉनिक्स के बिना बच्चों की बोरियत उन्हें बाहर खेलने के लिए मजबूर कर सकती है।

शोध में बताया गया है कि घास में या पेड़ों के आस-पास खेलना बच्चों में अटेंशन स्किल को बढ़ता है और तनाव कम करता है। दूसरे अध्ययनों ने आउटडोर प्ले को बेहतर बताया है क्योंकि बच्चा इससे प्रॉब्लम सॉल्विंग, क्रिएटिविटी और सेफ्टी स्किल को सीखता है।

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डिजिटल डिटॉक्स बुरी आदतों का करता है खत्म

कई माता-पिता के लिए घर के अंदर घूसते ही टीवी ऑन करना या सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना एक बुरी आदत बन जाता है। बच्चे अक्सर स्कूल जाने से पहले वीडियो गेम खेलना या कंप्यूटर पर बैठकर वीडियोज देखना अपने माता-पिता से सीखते हैं। ऐसा करने से बच्चों को अनहेल्दी स्क्रीन टाइम की आदत लग जाती है।

डिजिटल डिटॉक्स के माध्यम से उन बुरी आदतों को छोड़ा जा सकता है। जब बच्चे अपने इलेक्ट्रानिक्स के इस्तेमाल से बाहर निकलते है और अपने आस-पास के वातावरण में देखते हैं, तो उनके पास नई आदतें विकसित करने का मौका होता है।

डिजिटल डिटॉक्स के लिए प्लानिंग

डिजिटल डिटॉक्स बनाने के लिए यहां कुछ रणनीतियां बताई गई हैं:

डिजिटल डिटॉक्स में इलेक्ट्रॉनिक्स से ब्रेक

कैंपिंग ट्रिप, फैमिली हॉलिडे या कहीं ऐसी जगह जाना जहां नेटवर्क ना आता है पूरे परिवार को  इलेक्ट्रॉनिक्स से दूर रख सकता है। टेक्नोलॉजी से दूर होकर जब आप डिजिटल डिटॉक्स करते हैं, तो अपने परिवार के साथ अच्छा समय बिताते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक फ्री विकेंड –

अगर आप लंबी छुट्टी नहीं ले सकते हैं या आपके बहुत काम हैं, तो हफ्ते के अंत में अनप्लगिंग कर सकते हैं। डिजिटल डिटॉक्स के लिए ज्यादा समय न होने पर आप हर विकेंड अपने और बच्चों के लिए डिजिटल डिटॉक्स का नियम बनाएं।

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महीने का एक दिन स्क्रीन फ्री रखें –

महीने का पहला शनिवार या महीने का आखिरी रविवार एक फैमिली डे हो सकता है, इसे आप डिजिटल डिटॉक्स के लिए इस्तेमाल करें। हर महीने में एक पूरा दिन आप इलेक्ट्रॉनिक्स का इस्तेमाल न करें और अपने परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं।

बेशक, जब इलेक्ट्रॉनिक्स की बात आती है, तो बच्चों के लिए एक अच्छा रोल मॉडल होना जरूरी है। अगर आप अपने बच्चे को खुद कंप्यूटर के सामने बैठ कर इलेक्ट्रॉनिक्स का इस्तेमाल करने से मना करते हैं, तो शायद वह आपको न समझें। इससे बेहतर विकल्प है कि अपने साथ अपने बच्चों के लिए डिजिटल डिटॉक्स के बारे में बात करें। पूरा परिवार एक साथ मिलकर जब डिजिटल डिटॉक्स करता है, तो सबके पास एक दूसरे को सुनने और समझने का मौका होता है।

अगर आप भी अपने बच्चों के स्क्रीन टाइम से परेशान हैं तो डिजिटल डिटॉक्स के माध्यम से अपने परिवार में आई दूरियों को कम करें।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

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हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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