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टर्नर सिंड्रोम और प्रेग्नेंसी के बारे में यह जानकारी बचा सकती है कई कॉम्प्लीकेशन्स से!

टर्नर सिंड्रोम और प्रेग्नेंसी के बारे में यह जानकारी बचा सकती है कई कॉम्प्लीकेशन्स से!

टर्नर सिंड्रोम (Turner syndrome) महिलाओं और लड़कियों में होने वाला एक इंफ्रीक्वेंट जेनेटिक डिसऑर्डर (Infrequent genetic disorder) है। जिससे हर 2000 में से एक फीमेल बेबीज जन्म के दौरान प्रभावित होती हैं। इस सिंड्रोम का कारण पार्शियली और पूरी तरह से एक्स क्रोमोसोम (X chromosome) का मिसिंग होना माना गया है। इस रोग के होने के कारण प्रभावित महिला का डील-डौल छोटा होता है। इसके साथ ही उनकी ब्रेस्ट डेवलपमेंट और पीरियड्स में भी समस्या होती है। इसके उपचार में हॉर्मोन थेरेपी शामिल हैं। इस लेख के माध्यम से हम आपको टर्नर सिंड्रोम और प्रेग्नेंसी (Turner syndrome and Pregnancy) के बारे में जानकारी देने वाले हैं। टर्नर सिंड्रोम और प्रेग्नेंसी (Turner syndrome and Pregnancy) के बारे में जानने से पहले टर्नर सिंड्रोम के बारे में जान लेते हैं।

टर्नर सिंड्रोम किसे कहा जाता है? (Turner syndrome)

टर्नर सिंड्रोम (Turner syndrome) को कई बार कंजेनिटल ओवेरियन हायपोप्‍लेसिया सिंड्रोम (Congenital ovarian hypoplasia syndrome) भी कहा जाता है। जो एक जेनेटिक डिसऑर्डर है। यह सबसे सामान्य सेक्स क्रोमोसोमल अब्नोर्मलिटी है, जो महिलाओं और लड़कियों को प्रभावित करती है। सबसे सामान्यतया यह एक या दो एक्स क्रोमोसोम्स (X chromosomes) से जुडी समस्या है, जो सेल्स में एक थ्रेड लाइक स्ट्रक्चर है। यह डीएनए (DNA) से बने होते हैं। हमें डीएनए अपने पेरेंट्स में मिलते हैं। डीएनए में कुछ खास इंस्ट्रक्शंस होते हैं जो हर क्रिएचर को यूनिक बनाते हैं।

टर्नर सिंड्रोम एक कंजेनिटल कंडीशन है यानी यह वो स्थिति है, जिसके साथ मनुष्य जन्म लेता है हम में से हर व्यक्ति दो क्रोमोसोम्स के साथ जन्म लेता है। अगर आप फीमेल हैं, तो आपमें जन्म के समय दो एक्स क्रोमोसोम्स होंगे। लेकिन, अगर आप मेल हैं, तो आपमें जन्म के समय एक एक्स और एक वाई क्रोमोसोम होगा (X and Y chromosomes)। टर्नर सिंड्रोम (Turner syndrome) की समस्या तब होती है, जब फीमेल में एक क्रोमोसोम मिसिंग होता है। यह क्रोमोसोम पार्शियली या पूरी तरह से मिसिंग हो सकता है।

टर्नर सिंड्रोम (Turner syndrome) से प्रभावित महिलाओं और लड़कियों का डील-डौल छोटा होता है। इस समस्या को आमतौर पर बच्चे के पांच साल की उम्र के होने पर पहचाना जा सकता है। हालांकि, इस सिंड्रोम के कारण प्रभावित व्यक्ति की इंटेलिजेंस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। लेकिन, इसके कारण उसकी डेवलपमेंट में देरी हो सकती है। इसमें हार्ट प्रॉब्लम भी सामान्य है। इस रोगी के कारण लाइफ एक्सपेक्टेंसी कम हो सकती है। लेकिन, सही स्क्रीनिंग और उपचार से हेल्थ संबंधी कई समस्याओं से बचा जा सकता है। अब जानिए टर्नर सिंड्रोम और प्रेग्नेंसी (Turner syndrome and Pregnancy) में क्या संबंध है?

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टर्नर सिंड्रोम और प्रेग्नेंसी के बीच में क्या लिंक है? (Turner syndrome and Pregnancy)

टर्नर सिंड्रोम और प्रेग्नेंसी (Turner syndrome and Pregnancy) के बारे में यह जानना बेहद जरूरी है कि टर्नर सिंड्रोम आमतौर पर इनहेरिटेड नहीं है, लेकिन यह जेनेटिक है। यह रोग एक रेंडम एरर (Random Error) के कारण होता है, जिसके कारण पैरेंट के स्पर्म और एग में एक्स क्रोमोजोम की कमी हो जाती है। बहुत कम प्रेग्नंसीस जिसमें फीटल को टर्नर सिंड्रोम (Turner syndrome) होता है, वो सर्वाइव कर पाते हे। इस सिंड्रोम के कारण गर्भावस्था में शुरुआती चरण में ही प्रेग्नेंसी लॉस हो सकता है। यही नहीं, अधिकतर महिलायें जो टर्नर सिंड्रोम से पीड़ित होती है, वो प्राकृतिक रूप से प्रेग्नेंट नहीं हो पाती हैं। एक शोध के मुताबिक टर्नर सिंड्रोम (Turner syndrome) से पीड़ित लगभग चालीस प्रतिशत महिलाएं डोनेट किए एग्स के प्रयोग से गर्भवती होती हैं। हालांकि, टर्नल सिंड्रोम से पीड़ित गर्भवती महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान है ब्लड प्रेशर का जोखिम बढ़ जाता है, जिसके कारण कई अन्य जटिलताएं भी हो सकती हैं। जिसमें प्रीटर्म बर्थ और फीटल ग्रोथ में समस्या आदि शामिल है।

टर्नर सिंड्रोम से पीड़ित महिलाओं को गर्भावस्था में एओर्टिक डिसेक्शन (Aortic dissection) का जोखिम भी हो सकता है। एओर्टिक डिसेक्शन एओर्टा की इनर वॉल के डैमेज होने की परेशानी को कहा जाता है। एओर्टा वो मेजर आर्टरी है, जो हार्ट तक खून को कैरी करती है। एओर्टा की इनर वॉल के डैमेज होने से खून एओर्टा की लायनिंग में तेजी से प्रवाहित होता है। इसके कारण यह एओर्टा के माध्यम से ब्लड फ्लो प्रतिबंधित हो सकता है। यह ऐसी स्थिति है जो एन्यूरिज्म (Aneurysm) का कारण बन सकती है। एन्यूरिज्म एक जानलेवा समस्या है।

टर्नर सिंड्रोम और प्रेग्नेंसी (Turner syndrome and Pregnancy) के संबंध में यह भी कहा जाता है कि टर्नर सिंड्रोम (Turner syndrome) वाली महिलाएं आमतौर पर इंफर्टाइल होती हैं। जिसका अर्थ है कि वे गर्भवती नहीं हो सकती हैं। लेकिन, इस स्थिति में महिलाएं विशेष फर्टिलाइजेशन टेक्निक्स (Fertilization techniques) का उपयोग करके गर्भवती हो सकती हैं। अब जानते हैं कि इस समस्या का कारण क्या है?

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टर्नर सिंड्रोम के कारण क्या है? (Cause of Turner syndrome)

जैसा की आप यह जानते ही हैं कि यह सिंड्रोम तब होता जब फीमेल बेबी के दो एक्स क्रोमोसोम्स में से एक मिसिंग या इन्कम्प्लीट होता है। हालांकि, इसके बारे में अभी जानकारी नहीं है कि यह समस्या क्यों होती है। जानिए क्या हैं इसके लक्षण?

टर्नर सिंड्रोम और प्रेग्नेंसी

टर्नर सिंड्रोम और प्रेग्नेंसी: टर्नर सिंड्रोम के लक्षण (Symptoms of Turner syndrome)

टर्नर सिंड्रोम (Turner syndrome) का मुख्य लक्षण है छोटा डील-डौल है। इसके साथ ही इस सिंड्रोम से पीड़ित महिलाएं और लड़कियां बचपन और किशोरावस्था के दौरान अपने साथियों की तुलना में अधिक धीरे-धीरे बढ़ती हैं। जानिए इसके अन्य लक्षणों के बारे में:

टर्नर सिंड्रोम (Turner syndrome) से पीड़ित महिलाएं और लड़कियां युवावस्था में देरी महसूस करते हैं। जिसके परिणामस्वरूप इस समस्या से पीड़ित वयस्क की सामान्यतया ऊंचाई 4 फीट, 8 इंचहो सकती है। हालांकि, अगर इसका निदान जल्दी हो जाए, तो इसके रोगी सामान्य हाइट तक पहुंच सकते हैं। आमतौर पर इसके सामान्य लक्षण सेक्शुअल डेवेलपमेंट से भी जुड़े होते हैं। इससे पीड़ित फीमेल में यह लक्षण भी नजर आ सकते हैं:

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छोटे डील-डौल के साथ ही टर्नर सिंड्रोम से प्रभावित फीमेल में नजर आने वाले कुछ अन्य शारीरिक लक्षण इस प्रकार हैं:

टर्नर सिंड्रोम (Turner syndrome) से पीड़ित फीमेल में नार्मल इंटेलिजेंस होती है। लेकिन, उन्हें विजुअल मोटर और विजुअल स्पेशल स्किल्स (Visual spatial skills )में समस्या होती है। यानी उन्हें देखने में परेशानी होती है। यानी, इस समस्या से पीड़ित लोगों के लिए ड्राइविंग करना मुश्किल हो सकता है। टर्नर सिंड्रोम और प्रेग्नेंसी (Turner syndrome and Pregnancy) के बारे अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से अवश्य सलाह लें। अब जानते हैं कि इस समस्या का निदान कैसे हो सकता है?

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टर्नर सिंड्रोम का निदान कैसे संभव है? (Diagnosis of Turner syndrome)

आमतौर पर माता-पिता अपने बच्चों में टर्नर सिंड्रोम (Turner syndrome) के लक्षणों को नोटिस करते हैं। कई बार यह निदान जल्दी हो सकता है, जबकि कई बार इसमें कई साल भी लग सकते हैं। इसके लक्षणों में प्रभावित फीमेल के डील-डौल का कम होना, ब्रेस्ट डेवलपमेंट और पीरियड्स में समस्या, हाथों या पैरों में सूजन आदि परेशानियां हो सकती हैं। इस समस्या के निदान के लिए डॉक्टर सबसे पहले इसके लक्षणों को जानेंगे। इसके अलावा अन्य टेस्ट भी किए जा सकते हैं, जैसे:

  • इसके निदान के लिए एक जेनटिक टेस्ट किया जाता है। जिसे कैरियोटाइप टेस्ट (Karyotype Test) कहा जाता। इस टेस्ट के लिए प्रभावित व्यक्ति का ब्लड लिया जाता है। जिससे इस बात को जाना जा सकता है कि रोगी में एक्स क्रोमोसोम्स में से एक पूरी तरह से या पार्शियली मिसिंग है या नहीं? कई बार यह स्थिति जन्म से पहले भी भ्रूण में देखी जा सकती है।
  • इसके अलावा, इसके निदान के लिए प्रेग्नेंसी मेटरनल सीरम स्क्रीनिंग (Maternal serum screening) भी ब्लड टेस्ट से की जा सकती है। यह स्क्रीनिंग उन महिलाओं में अधिक आम है, जो अधिक उम्र में गर्भवती होती हैं। अगर टर्नर सिंड्रोम और प्रेग्नेंसी (Turner syndrome and Pregnancy) के बारे में अधिक जानकारी चाहती हैं तो किसी विशेषज्ञ से बात करें।
  • एमनियोसेंटेसिस (Amniocentesis) और कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (chorionic villus sampling) प्लेसेंटा से एमनियोटिक फ्लूइड या टिश्यू की जांच करते हैं। डॉक्टर रोगी के फ्लूइड और टिश्यूज का कैरियोटाइप एनालिसिस (Karyotype analysis) करते हैं। इसके रिजल्ट से टर्नर सिंड्रोम के बारे में पता चल सकता है।
  • टर्नर सिंड्रोम और प्रेग्नेंसी (Turner syndrome and Pregnancy) के दौरान अल्ट्रासाउंड से भी इस समस्या का निदान हो सकता है।

कई बच्चों में इसका निदान लक्षणों के कारण जन्म के बाद या छोटी उम्र में हो जाता है। लेकिन, कुछ लोगों में इसका निदान युवावस्था तक नहीं हो पाता। इसका जल्दी निदान आवश्यक है। ताकि समय पर उपचार हो सके। अब जानिए कैसे किया जाता है इसका उपचार?

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टर्नर सिंड्रोम का उपचार (Treatment of Turner syndrome)

उम्मीद है कि टर्नर सिंड्रोम और प्रेग्नेंसी (Turner syndrome and Pregnancy) के बारे में आप जान ही चुके होंगे। लेकिन, इस समस्या के निदान के बाद इसका तुरंत उपचार जरूरी है। इसके उपचार में आमतौर पर हॉर्मोन्स पर फोकस किया जाता है। टर्नर सिंड्रोम के ट्रीटमेंट में यह सब शामिल है:

  • ह्यूमन ग्रोथ हॉर्मोन (Human growth hormone): प्रभावित महिलाओं या लड़कियों को हाइट को बढ़ाने के लिए ह्यूमन ग्रोथ हॉर्मोन के इंजेक्शन दिए जाते हैं। अगर यह उपचार जल्दी शुरू हो जाए, तो उससे कई इंच की हाइट बढ़ सकती है।
  • एस्ट्रोजन थेरेपी (Estrogen therapy): इस समस्या से पीड़ित फीमेल को एस्ट्रोजन की जरूरत होती है। जो एक फीमेल हॉर्मोन है। इस तरह के हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (Hormone replacement therapy) से फीमेल के ब्रेस्ट डेवलपमेंट और पीरियड्स को शुरू होने में मदद मिलती है। यही नहीं, इससे यूटरस की ग्रोथ में भी सहायता मिलती है। एस्ट्रोजन रिप्लेसमेंट ब्रेन डेवलपमेंट को भी सुधारती है। इसके साथ ही इससे हार्ट फंक्शन, लिवर फंक्शन आदि के लिए भी मददगार है।
  • साइक्लिक प्रोजेस्टिन्स (Cyclic progestins): इन हॉर्मोन्स को अक्सर 11 या 12 साल की उम्र की लड़कियों में ऐड किया जाता है अगर उनके ब्लड टेस्ट से इस समस्या का पता चलता है। इस उपचार से उनके मासिक धर्म की समस्या दूर होती है। इस ट्रीटमेंट की शुरुआत थोड़ी डोज से की जाती है और उसके बाद उसे धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है।

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टर्नर सिंड्रोम और प्रेग्नेंसी: टर्नर सिंड्रोम से कैसे बचा जा सके? (Prevention of Turner syndrome)

हालांकि, इस समस्या से बचाव संभव नहीं है। यह एक जन्मजात समस्या है, जो एक्स क्रोमोजोम के मिसिंग या पूरे न होने के कारण होती है। हालांकि, माता पिता अपने बच्चों में यह समस्या होने से रोकने के लिए कुछ भी नहीं कर सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि टर्नर सिंड्रोम (Turner syndrome) से पीड़ित लोगों की लाइफ छोटी हो सकती है। लेकिन, सही उपचार और निदान से इस समस्या से पीड़ित महिलाएं सामान्य जीवन जी सकती हैं। इस समस्या का जल्दी निदान जरूरी है। इसके लिए माता-पिता को अपने बच्चे की ग्रोथ पर ध्यान देना चाहिए। अगर आपको लगता है कि आपके बच्चे की ग्रोथ सही से नहीं हो रही है, तो आपको तुरंत डॉक्टर से बात करनी चाहिए। हॉर्मोन थेरेपी जैसे उपचार को जल्दी शुरू करना चाहिए। इसके साथ ही इस समस्या से पीड़ित बच्चों की नियमित उपचार और चेकअप भी जरूरी है।

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यह तो थी टर्नर सिंड्रोम और प्रेग्नेंसी (Turner syndrome and Pregnancy) के बारे में जानकारी। टर्नर सिंड्रोम (Turner syndrome) सबसे सामान्य क्रोमोसोमल डिसऑर्डर (Chromosomal disorder) है, जो लड़कियों और महिलाओं को प्रभावित करता है। हालांकि, यह एक दुर्लभ समस्या है, इस रोग से बचने के लिए कुछ भी नहीं किया जा सकता है। लेकिन, जल्दी से जल्दी इस समस्या का निदान करने से प्रभावित फीमेल एक अच्छा और सामान्य जीवन जी सकती है। अगर आपके बच्चे के विकास में कोई भी समस्या आ रही है या आपको इस सिंड्रोम का कोई भी लक्षण नजर आता है, तो तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें।

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AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ हफ्ते पहले को
Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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