बेबी प्लानिंग से पहले आर्थिक मोर्चे पर मजबूत होना क्यों है जरूरी?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट अगस्त 27, 2020 . 6 मिनट में पढ़ें
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माता पिता बनना कोई आसान कार्य नहीं है। गर्भधारण से लेकर डिलिवरी के बाद तक यह पूरी प्रक्रिया कई मामलों में कुछ आर्थिक जिम्मेदारियां लेकर आती हैं। परिवार बढ़ाने की योजना में आपकी आर्थिक स्थिति काफी अहम होती है। प्रेग्नेंसी के दौरान डॉक्टर के खर्चों से लेकर बच्चे के बड़े होने तक उसकी देखभाल में एक मोटी रकम के निवेश की जरूरत होती है। ऐसे में बेबी प्लानिंग कैसे करें? इस बारे में आपको जानकारी होना अति आवश्यक है। एक बेबी प्लानिंग में अनेकों कारकों का ध्यान रखना पड़ता है। कई बार गलत तरह से बेबी प्लानिंग करने पर आपकी लाइफ और मुश्किलों में फंस जाती है। आज हम आपको इस आर्टिकल में बेबी प्लानिंग के आर्थिक पक्ष के बारे में बताने जा रहे हैं। यह कुछ ऐसे मूलभूत बिंदु हैं, जिनका ध्यान रखा जाना जरूरी है।

कर्ज मुक्त होना जरूरी

प्रेग्नेंसी की शुरुआत के बाद आपको चिकित्सा सुविधाओं में एक मोटी रकम की जरूरत होती है। डिलिवरी के बाद आपकी आर्थिक जरूरतों में इजाफा हो जाता है। यदि आपने किसी बैंक या जानकार से कर्ज लिया है तो बेबी के परिवार में अपना कदम रखने से पहले उसे चुका दें। यदि आपका अपना घर है और आपने कुछ इक्विटी बना रखी है तो उसे अपने व्हीकल का लोन चुकाने में लगा दें या आपने होम लोन लिया है तो उसे ब्याज मुक्त अवधि के दौरान चुका दें। इससे आप मासिक ब्याज दर के भारी भरकम बोझ से काफी हद तक बच जाएंगे।

घर का बजट तय करें

यदि आपने अभी तक अपने घर के खर्च का बजट या सीमा तय नहीं की है तो इसे तुरंत निर्धारित करें। आपके शिशु के साथ अनेकों आर्थिक जिम्मेदारियां भी आएंगे, ऐसे में आपके पास अन्य देनदारियों के मुकाबले शिशु के लिए बेहतर आर्थिक संसाधन उपलब्ध होने चाहिए। घर के बजट को निर्धारित करने के लिए अपने पार्टनर के साथ चर्चा करें और देखें कि आप मासिक रूप से कितना कम रहे हैं और कितना रुपया खर्च कर रहे हैं।

बजट में इन बातों का रखें ध्यान

जरूर चीजों (किराया, यूटिलिटी बिल्स, इंश्योरेंस कॉस्ट, चाइल्ड केयर) की लागत की सीमा तय करें। छोटे खर्चों की राशि को निर्धारित करना बेहद ही जरूरी है। आप महीने में फूड, पेट्रोल, मोबाइल फोन बिल्स, सलून और जिम पर कितना रुपया बहाते हैं, इसका आंकलन करना और इसे निर्धारित करना बेहद ही जरूरी है।

महीने में आप अपनी लग्जरी जरूरतें यानिकी पार्टी, बाहर खाना पीना, सैर सपाटा और सिनेमा पर कितना रुपया खर्च करते हैं, इसे निर्धारित करना बेहद ही जरूरी है। कोशिश करें कि इन चीजों में निवेश होने वाला धन कम से कम हो, जिससे आपको बचत करने में आसानी होगी।

बच्चे के लिए बचत करें

मासिक बचत के बाद यदि आपके पास कुछ अतिरिक्त रकम बचती है तो आप किसी बेबी फंड में इसे लगा सकते हैं। शुरुआती दिनों में बेबी फंड में निवेश करना एक बेहतर आइडिया होगा। इसके लिए अपने अकाउंट को इस बेबी फंड से लिंक करा दें, जिससे हर महीने निर्धारित राशि आपके बैंक खाते से इस फंड में ट्रांसफर हो जाए। इस फंड में जितनी मोटी रकम आप बचाएंगे आपके लिए उतना ही बेहतर होगा। कई मामलों में पैसा आने पर वह सही जगह खर्च होने के बाद अन्य खर्चों में निवेश हो जाता है।

एक महीने की आय को बचाएं

यदि आप अपने खर्चों में कटौती करके एक की महीने की इनकम बचाकर रख सकते हैं तो कोशिश करें। पैसा बचाने का यह तरीका यदि काम नहीं करता है तो देखें कि खर्चों में कहां पर कटौती की जा सकती है। यदि आप एककी महीने की इनकम को बचाने में कामयाब रहते हैं तो यह आपके लिए एक बड़ी उपलब्धी और बचत भी होगी।

सिर्फ ब्याज में ही खर्च करें

शिशु के घर में आने के बाद यदि आप खर्चों में बढ़ोतरी करना चाहते हैं तो इसे सिर्फ होम लोन की रकम को चुकाने में लगाएं। घर का लोन चुकाते वक्त इस बात का ध्यान रखें कि आपकी प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ रही हो न की घट रही हो।

सूझबूझकर खर्च करें

बच्चे के आने के बाद एक परिवार में लाखो रुपया खर्च हो जाता है। हालांकि इस खर्च में भी कटौती की जा सकती है। आप इस खर्च में कटौती करके इसे न्यूनतम सीमा पर ले आएं। इस अवधि के दौरान कुछ ऐसे छोटे-छोटे खर्च होते हैं, जो आपके बजट को हजारों में पहुंचा देते हैं जैसे कार को चाइल्ड फ्रेंडली बनाने में आपका अच्छा खासा पैसा खर्च करना पड़ता है। इस मामले में दूर दृष्टिता का ध्यान रखें, ऐसी गाड़ी खरीदें, जिसकी सीट कनवर्टेबल हो। बच्चों के महंगे कपड़े और खिलौना पर पानी की तरह पैसा बहाने की बजाय, गुणवत्ता पूर्ण चीजों पर पैसा खर्च करें।

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आपातकालीन फंड को जरूर बनाएं

अपनी महीने की तनख्वाह में से कुछ पैसा एक इमर्जेंसी फंड के लिए बचा कर रखें। यह इमर्जेंसी फंड अचानक पैदा होने वाली मेडिकल या अन्य समस्याओं में काम आ सकता है। इसके लिए आप तीन से छह महीने की अवधि का चुनाव कर सकते हैं। प्रेग्नेंट होने की खबर मिलते ही यदि इस फंड को बना लिया जाए तो ज्यादा बेहतर होगा। इस फंड के लिए मासिक राशि सुनिश्चित करें। आप इसके लिए एक आसान बैंक अकाउंट भी खुलवा सकते हैं। इसे ऑटो डिडक्शन पर रखें ताकि हर महीने यह पैसा अपने आप इस खाते में जमा हो जाए। शिशु की डिलिवरी के बाद कई बार समस्याएं पैदा हो जाती हैं, जिसमें आपको औचक पैसों की जरूरत पड़ जाती है।

चाइल्ड केयर पर करें रिसर्च

कपल्स के लिए माता पिता बनने से पहले चाइल्ड केयर के बारे में विस्तृत रिसर्च करना बेहद ही जरूरी है। आगामी समय में शिशु के साथ कौन से नए खर्चे आपके घर आएंगे, जिसमें आपको अतिरिक्त रूप से पैसा खर्च करना पड़ेगा। डे केयर चाइल्ड या बेबीसिटर का खर्च इस रिसर्च में जरूर शामिल करें। यदि दोनों ही वर्किंग है तो शिशु के जन्म लेने के बाद कौन नौकरी छोड़कर उसका ध्यान रखेगा और इस स्थिति में इनकम के होने वाले नुकसान को कैसे संतुलित किया जाएगा, इस संबंध में जानकारी इक्कट्ठा करना बेहद ही जरूरी है।

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बच्चे के जन्म का इंतजार करें

ज्यादातर कपल्स शिशु के जन्म लेने से पहले ही उसके साजो सामान में एक भारी भरकम राशि निवेश कर देते हैं। इस स्थिति में आपको जल्दबाजी नहीं दिखानी है। कपड़ों से लेकर उसके खिलौनों तक में आपको अत्यधिक पैसा खर्च नहीं करना है। शिशु के घर में आने के बाद ही उसके हिसाब से इस प्रकार की चीजों में पैसा लगाया जाना चाहिए। यदि आपने लड़की के लिए शॉपिंग की है और घर में लड़के का जन्म होता है तो काफी हद तक आपको नुकसान उठाना पड़ेगा।

बेबी प्लानिंग से पहले कंपनी की पॉलिसी एक बार देखें

जिस कंपनी में आप काम कर रहे हैं उस कंपनी की चाइल्ड केयर से लेकर क्या नीतियां हैं, इसका अध्ययन जरूर करें। अक्सर लोग मेटरनिटी के फायदों के बारे में खुलकर बात नहीं करते। कुछ लोगों को लगता है कि मेटरनिटी के लिए ली गई छुट्टियों का पैसा नहीं मिलता है, जो कि हककीत नहीं है। इसके अतिरिक्त, आप अपनी कंपनी की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को जरूर देख लें। पॉलिसी में आपके बच्चे के कवर प्लान के लिए क्या-क्या फायदे हैं, इनकी जानकारी जुटाना बेहद ही जरूरी है। इससे बच्चों की हेल्थ पर खर्च होने वाली भारी भरकम रकम की बचत हो सकती है। आप इसकी अधिक जानकारी के लिए अपने ह्यूमन रिसोर्स (एचआर) से भी चर्चा कर सकते हैं।

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बेबी प्लानिंग से पहले चाइल्ड केयर में निवेश रहे प्राथमिकता

कुछ लोग बेबी के दौरान अपने अन्य सेविंग्स या पेंशन में निवेश जारी रखते हैं, जो कि गलत है। चाइल्ड केयर के दौरान इस प्रकार के फंड्स या स्कीम में कम से कम पैसा लगाएं जब तक कि इसका मुख्य उद्देश्य आपका बच्चा न हो। चाइल्ड केयर की लागत में कमी आने पर आप इस धन को दोबारा इन स्कीम्स में निवेश कर सकते हैं।

आर्थिक रूप से सक्षम होने पर करें बेबी प्लानिंग

जब तक आप आर्थिक रूप से मजबूत नहीं हो जाते तब तक बेबी प्लानिंग में जल्द बाजी न करें। आर्थिक मजबूती के बिना शिशु की जिम्मेदारी और आर्थिक जरूरतों को पूरा करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। इससे आपकी जिंदगी और परेशानियों में पड़ सकती है। बेहतर होगा कि आप आर्थिक रूप से स्थिरता की स्थिति में आ जाएं फिर बेबी प्लानिंग करें।

बेबी प्लानिंग से पहले इंश्योरेंस को सुनिश्चित करें

माता पिता बनने से पहले आपके पास एक अच्छा इंश्योरेंस होना बेहद ही जरूरी है। इस मामले में ज्यादातर परिवारों का रवैया लचर होता है। यदि आपको कुछ हो जाए तो आपके परिवार या पत्नी का सहारा कौन बनेगा? इस सवाल का जवाब देना कई मामलों में मुश्किल होता है। इस स्थिति में आपके परिवार या पत्नी की आर्थिक काफी खराब होने की संभावना हो सकती है। इस प्रकार की अप्रिय घटनाओं की भविष्यवाणी करना या अंदाजा लगाना एक मुश्किल काम है। हालांकि आपकी कंपनी के माध्यम से आपको कुछ सुविधाएं या विकलांगता के फायदे मिल सकते हैं। इससे न ही आपकी जरूरतें पूरी होंगी और न ही विपत्ति की घड़ी में आपके परिवार को सहारा मिलेगा। इस प्रकार के हालातों से निपटने के लिए बेहतर होगा कि आप एक इंश्योरेंस पॉलिसी ले लें। इसके लिए आप एक इंश्योरेंस प्रोफेशनल की मदद ले सकते हैं।

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बेबी प्लानिंग में फाइनेंशियल गोल्स के लिए सेविंग जारी रखें

जिंदगी में परिवार होना काफी अहम है, लेकिन उतना ही जरूर घर खरीदना या बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी उठाना है। साथ ही रिटायरमेंट के बाद के दिनों के लिए पैसा बचाना भी एक जरूरी काम है। ऐसे में आप बेबी कैसे प्लान करेंगे और वह आपकी आर्थिक योजनाओं को कैसे प्रभावित करेगा, इसके बारे में जानना बेहद ही जरूरी होता है।

रिटायरमेंट से पहले यदि आप अधिक पैसा बचा लेते हैं तो सेवानिवृत होने के बाद आपको कम सेविंग्स करने की जरूरत होगी। ऐसे में बच्चों के लालन पालन में अत्यधिक खर्च करने के बजाय आप इन चीजों के लिए भी पैसा बचाकर रखें। इससे आप रिटायरमेंट के दौरान शिशु की उच्च शिक्षा का खर्च भी उठा पाएंगे। हालांकि इसमें कोई दोहराय नहीं कि माता पिता बनना काफी खर्चीला होता है। इसलिए बेबी प्लानिंग से पहले आर्थिक मोर्चे पर अपने आपको मजबूत करना काफी अहम है। तैयार के साथ बेबी प्लानिंग करने से आप माता पिता बनने का मजा भी उठा सकते हैं। आर्थिक रूप से जब आपको महसूस होता है कि आप आर्थिक क्षेत्र में मजबूत हो चुके हैं तभी बेबी प्लानिंग करें।

अंत में हम यही कहेंगे कि बेबी प्लानिंग आपकी जिंदगी का एक बड़ा निर्णय है। इसे सूझबूझ कर ही लें। कई बार जल्दीबाजी में किए गए फैंसले आगे की लाइफ में अनेकों परेशानियां खड़ी कर देते हैं। ऐसे में आपको इसके हर पहलू पर विचार करना चाहिए।

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