पुरुषों में होने वाली जानलेवा बीमारियां, जान लें इनके बारे में

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट सितम्बर 15, 2020 . 8 मिनट में पढ़ें
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महिलाओं के स्वास्थ्य के बारे में बहुत बातें होती हैं, लेकिन क्या पुरुष सच में स्ट्रॉन्ग होते हैं, जिनके स्वास्थ्य के लिए हम ज्यादा बात नहीं करते। पुरुषों में जानलेवा बीमारी कई होती हैं। इस बात से घबराने की जरूरत नहीं है कि पुरुषों को होने वाली बीमारी से उनकी जान जा सकती है। हमेशा याद रखें कि जानकारी और बचाव किसी भी बीमारी का सबसे पहला इलाज है। इस आर्टिकल में आप ऐसी ही जानलेवा बीमारी और उनके इलाज के बारे में जानेंगे।

पुरुषों में होने वाली जानलेवा बीमारी क्या हैं ?

क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (Chronic Obstructive Pulmonary Disease(COPD))

सीओपीडी

क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) एक बीमारी नहीं है, बल्कि यह बीमारियों का एक समूह है। जिसमें व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होती है। इसमें मरीज को हमेशा खांसी आती है। सीओपीडी खराब हवा और जलने वाले ईंधन से धुएं को सूंघने की वजह से होता है। केवल 20 से 30 प्रतिशत क्रोनिक धूम्रपान करने वालों को सीओपीडी हो सकता है। हालांकि, जो लोग लंबे समय से धूम्रपान करते आ रहे हैं उन्हें फेफड़ों में दूसरी परेशानी हो सकती हैं। इसलिए इसे जानलेवा बीमारी कहना गलत नहीं होगा।

सीओपीडी में दो बीमारियां होती हैं :

क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस : ब्रोंकाइटिस डिजीज, श्वास नलियों की सतह पर आई हुई सूजन को कहते हैं। इसकी वजह से ब्रोंकियल ट्यूब में रेडनेस, सूजन और बलगम भर जाता है। यह बलगम व्यक्ति की सांस की नलियों को ब्लॉक करता है, जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है।

एंफीसीमा : इसमें फेफड़ों की वायु थैली (एल्वियोली) को नुकसान पहुंचता है, जिससे सांस लेने में और तकलीफ होती है और एल्वियोली प्रभावित हो जाती है। इससे आपके रक्त में ऑक्सिजन और कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालना मुश्किल हो जाता है। एंफीसीमा जानलेवा बीमारी की लिस्ट में शुमार है।

COPD के लक्षण

सीओपीडी जैसी जानलेवा बीमारी के अन्य लक्षणों ये हो सकते हैं:

  • सांस की तकलीफ, खासकर शारीरिक गतिविधियों के दौरान सांस लेने में परेशानी होना
  • घरघराहट महसूस होना
  • सीने में जकड़न होना
  • पुरानी खांसी के कारण बलगम (थूक) बनना, जो सफेद, पीले या हरे रंग का हो सकता है
  • होंठ या नाखूनों के रंग में बदलाव या नीलापन (साइनोसिस) होना
  • बार-बार सांस संबंधी संक्रमण की परेशानी होना
  • शरीर में ऊर्जा की कमी
  • वजन में कमी होना
  • टखनों या पैरों में सूजन की समस्या होना

और पढ़ेंः क्या फाइब्रॉएड एक कैंसर हैं?

सीओपीडी का इलाज

COPD का अभी तक कोई इलाज नहीं है। सीओपीडी से निपटने का सबसे अच्छा तरीका रोकथाम है। सीओपीडी में ब्रोंकोडायलेटर्स, कॉम्बिनेशन ब्रोंकोडायलेटर्स प्लस इनहेल्ड ग्लूकोकार्टिकोस्टेरॉयड जैसी दवाएं दी जाती हैं। वहीं, फ्लू, न्यूमोकोकल आदि के टीके लगाए जाते हैं। जरूरत पड़ने पर सर्जरी भी की जाती है। जैसे- बुलेक्टोमी रिमूवल, लंग वॉल्यूम रिडक्शन सर्जरी और लंग ट्रांसप्लांट किया जाता है। सिगरेट छोड़ना एक बेहतर रोकथाम है।

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पुरुषों में होने वाली जानलेवा बीमारी : हार्ट डिजीज

heart attack symptoms

दिल पूरे शरीर को खून और ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। अगर दिल धड़कना बंद कर दे तो आपके कोशिकाओं तक पोषक तत्व नहीं पहुंच पाएंगे। पुरुषों में महिलाओं की तुलना में हार्ट डिजीज ज्यादा होती हैं। पुरुषों में जानलेवा बीमारी में हार्ट डिजीज भी एक बड़ी बीमारी है। हार्ट डिजीज में कई तरह की बीमारियां होती हैं :

एंजाइना (Angina)

दिल में ब्लड फ्लो कम होने की वजह से चेस्ट में दर्द या बेचैनी महसूस होती है, जिसे एंजाइना कहते हैं। यह आमतौर पर शरीर में ब्लड वेसल्स में ब्लॉकेज की वजह से होता है। ब्लड के माध्यम से हार्ट तक ऑक्सिजन पहुंचती है। कम मात्रा में ब्लड पहुंचने की वजह से हार्ट तक ऑक्सिजन भी ठीक तरह से नहीं पहुंच पाती है। इस वजह से हार्ट ठीक से पंप नहीं कर पाता है। एंजाइना तीन तरह के होते हैं:

  • स्टेबल एंजाइना: स्टेबल एंजाइना सबसे सामान्य है। यह तब होता है जब दिल सामान्य से अधिक मेहनत कर रहा होता है। स्टेबल एंजाइना का एक नियमित पैटर्न होता है। हालांकि, आराम और दवाओं से यह ठीक हो सकता है।
  • अनस्टेबल एंजाइना: अनस्टेबल एंजाइना सबसे खतरानक माना जाता है। यह किसी एक तरह से नहीं होता है और न ही शारीरिक परेशानी के कारण। अनस्टेबल एंजाइना आराम करने से ठीक नहीं हो सकता है और न ही यह दवाओं से ठीक होता है। ऐसी परिस्थिति में हार्ट अटैक भी आ सकता है।  
  • वेरिएंट एंजाइना: यह बहुत कम होता है। ऐसा आराम करने के दौरान होता है, जो दवा से ठीक हो सकती है।

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एंजाइना के लक्षण

एंजाइना जैसी पुरुषों में जानलेवा बीमारी के लक्षण निम्न हैं :

एंजाइना का इलाज

हार्ट तक ब्लड फ्लो ठीक करने की कोशिश की जाती है। मरीज को आराम से साथ-साथ काम भी कम करने की सलाह दी जाती है। प्रायः ब्लड फ्लो को ठीक करने के लिए एस्प्रिन दी जाती है। नाइट्रोग्लिसरीन जैसे नाइट्रेट, डेलेशन जैसी दवाओं से ब्लड फ्लो ठीक किया जाता है। बीटा-ब्लॉकर्स जैसी अन्य दवाएं हृदय गति को धीमा कर देती हैं, जिससे हृदय पर दवाब कम पड़ता है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर स्टेंट सर्जरी भी होती है।

पुरुषों में खतरनाक बीमारी:  हार्ट अटैक (Heart Attack)

हार्ट अटैक आज के दौर में महिलाओं में ही नहीं बल्कि पुरुषों में जानलेवा बीमारी में सबसे सामान्य बीमारी है। हार्ट अटैक में हृदय में रक्त का प्रवाह रुक जाता है। ज्यादातर मामलों में हार्ट अटैक के कारण जानलेवा देखें जाते हैं। इसकी स्थिति रक्त वाहिकाओं में फैट, कोलेस्ट्रॉल और अन्य द्रव्यों के जम जाने से पैदा होती है। ये सभी चीजें हृदय में खून के प्रवाह में रुकावट पैदा करती हैं। आमतौर पर हृदय में रक्त पहुंचाने वाली रक्त वाहिकाएं यानी कोरोनरी आर्टरीज  (coronery arteries) में ये समस्या उत्पन्न होती है। खून में ऐसी रुकावट की वजह से ये हृदय को पूरी तरह से या आंशिक रूप से क्षति पहुंचती है। यह एक जानलेवा समस्या है। हालांकि, मेडिकल साइंस ने इसके उपचार में नई उपलब्धियां हासिल कर ली हैं। इसी वजह से वर्तमान में दिल का दौरा आने पर भी लोगों की जान बचाई जा सकती है। 

हार्ट अटैक के लक्षण

जानलेवा बीमारी माने जाने वाले हार्ट अटैक के निम्न लक्षण हैं : 

हार्ट अटैक का इलाज

हार्ट अटैक (Heart Attack) के दौरान या उसके बाद एस्प्रिन (aspirin),  थ्रॉमबॉलिटिक्स(thrombolytics), क्लोपिडॉगरिल (clopidogrel), हिपैरिन (heparin) आदि दवाईयां दी जा सकती हैं, जिनमें से कई ब्लड थिनर का काम कर रक्त प्रवाह सामान्य बनाती हैं, तो कई ब्लड क्लॉट होने से बचाती हैं। इसके अलावा सर्जरी में बाइपास सर्जरी भी की जाती है।

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पुरुषों में होने वाली जानलेवा बीमारी: कार्डिएक अरेस्ट (cardiac arrest)

जानलेवा बीमारी हार्ट अटैक से ज्यादा खतरनाक कार्डिएक अरेस्ट है। कार्डिएक अरेस्ट भी जानलेवा बीमारी इसलिए है क्योंकि इसमें हमारा दिल अचानक से शरीर के विभिन्न हिस्सों में खून पहुंचाना बंद कर देता है और हृदय का धड़कना बंद हो जाता है। इससे व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है, जब हृदय के अंदर वेंट्रीकुलर फाइब्रिलेशन पैदा होता है। हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के बीच सबसे बड़ा अंतर यह है कि हार्ट अटैक में भले ही हृदय की धमनियों में खून का प्रवाह नहीं हो, पर हृदय की धड़कन चलती रहती है। जबकि कार्डियक अरेस्‍ट में दिल की धड़कन बंद हो जाती है।

कार्डिएक अरेस्ट के लक्षण

इसके लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं। जैसे-

  • हृदय की गति का रुक जाना।
  • अचानक से बेहोश हो होना।
  • घबराहट और बेचैनी महसूस होना।
  • सांस लेने में दिक्क्त महसूस होना और धीरे-धीरे सांस की गति धीमी होते जाना।

कार्डिएक अरेस्ट का इलाज 

सीपीआर के द्वारा कार्डिएक अरेस्ट का प्राथमिक इलाज किया जाता है। इसके अलावा एंटी-अरिदमयिक दवाएं दी जाती हैं। सर्जरी की जरूरत पड़ने पर कोरोनरी एंजियोप्लास्टी और कोरोनरी बाइपास सर्जरी की जाती है। 

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कैंसर (Cancer)

oral cancer

पुरुषों में जानलेवा बीमारी जैसे लंग कैंसर महिलाओं की तुलना में ज्यादा होता है। इसके अलवा पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर भी होता है।

पुरुषों में खतरनाक बीमारी :  लंग कैंसर (Lung Cancer)

फेफड़े का कैंसर (Lung Cancer) तब होता है, जब फेफड़ों के टिशू असामान्य गति से बढ़ते हुए एक ट्यूमर का निर्माण करते हैं। शरीर में फेफड़े सांस लेने में मदद करते हैं और आपके शरीर के बाकी हिस्सों को ऑक्सिजन (Oxygen) पहुंचाते हैं। WHO के अनुसार, कैंसर से होने वाली मौतों का आमतौर से पाया जाने वाला कारण फेफड़ों का कैंसर है। फेफड़ों का कैंसर रोगी को कमजोर और बीमार बना देता है।

हम आपको बताते चले कि पुरुषों में जानलेवा बीमारी लंग कैंसर की समस्या होने का मुख्य कारण स्मोकिंग और टबैको का सेवन करना है। पुरुष महिलाओं की अपेक्षा अधिक स्मोकिंग करते हैं, जिसके कारण उन्हें फेफड़ों का कैंसर होने की संभावना भी अधिक रहती है। यहीं कारण है कि लंग कैंसर से पुरुषों की अधिक मृत्यु होती है। अगर व्यक्ति अपनी जीवनशैली में बदलाव करता है तो वो लंग कैंसर के खतरे से बच सकता है।  लंग कैंसर के लक्षण सांस लेने के दौरान होने वाले इंफेक्शन के समान ही होते हैं। हो सकता है कि किसी व्यक्ति को लंग कैंसर के लक्षण न दिखाई दें। लंग कैंसर के लक्षणों का पता लगने के बाद उसका ट्रीटमेंट और बीमारी से निजात व्यक्ति को मिल सकती है, लेकिन कैंसर स्टेज का समय पर पता चलना बहुत जरूरी होता है। अगर कैंसर के लक्षण समय पर नहीं पता चल पाएं तो व्यक्ति को बचाना मुश्किल हो जाता है। अगर किसी भी व्यक्ति को उपरोक्त दिए गए लक्षण नजर आएं तो उसे तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए और दिए गए निर्देशों को मानना भी चाहिए। आप इस बारे में जानकारी के लिए डॉक्टर से जरूर परामर्श करें।

लंग कैंसर के लक्षण

लंग कैंसर के लक्षण निम्न हैें :

  • भूख कम लगना
  • लिम्फ नोड्स में सूजन 
  • आवाज में परिवर्तन आ जाना
  • आवाज का बैठ जाना या फिर सही से आवाज नहीं निकलना
  • चेस्ट में ब्रोंकाइटिस या निमोनिया की समस्या हो जाना, इंफेक्शन हो जाना
  • खांसी की समस्या हो जाना
  • सांस की दर में कमी महसूस होना
  • बिना किसी कारण के सिरदर्द महसूस होना
  • सांस लेने के दौरान घरघराहट महसूस होना

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लंग कैंसर का इलाज

कैंसर के संक्रमण को खत्म करने के लिए रेडिएशन थेरिपी का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा कैंसर को कम करने के लिए विशेष दवाओं का उपयोग किया जाता है। ये दवाइयां आपके द्वारा ली जाने वाली गोलियां या आपकी नसों में दी जाने वाली दवाएं या कभी-कभी दोनों हो सकती हैं। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर कैंसर के स्टेज के हिसाब से सर्जरी भी की जा सकती है।

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पुरुषों में होने वाली जानलेवा बीमारी: प्रोस्टेट कैंसर (Prostate cancer)

पुरुषों में होने वाली जानलेवा बीमारी में प्रोस्टेट कैंसर भी शामिल है। प्रोस्टेट कैंसर प्रोस्टेट ग्रंथि का कैंसर है। प्रोस्टेट ग्रंथि एक अखरोट के आकार की ग्रंथि है जो केवल पुरुषों में मौजूद होती है, जो मूत्राशय के नीचे पाई जाती है। ज्यादातर वयस्कों में प्रोस्टेट कैंसर होता है। प्रोस्टेट ग्रंथि मूत्रमार्ग (उस ट्यूब जिसके माध्यम से मूत्र शरीर से बाहर निकलता है) के चारों ओर लपेटता है और मलाशय के सामने स्थित होता है। प्रोस्टेट ग्रंथि के तरल भाग का हिस्सा स्रावित करती है, जो शुक्राणु को बहा ले जाती है, जो द्रव प्रजनन के लिए आवश्यक है। 65 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों में इस बीमारी के साठ प्रतिशत मामले सामने आते हैं। 40 वर्ष से कम उम्र के पुरुषों में यह बीमारी होना न के बराबर है।

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प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण

प्रोस्टेट कैंसर जब ज्यादा बढ़ जाता है, तब कुछ निम्न लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन शुरुआत में इसके लक्षण सामने नहीं आते हैं। जैसे :-

  • पेशाब करने में परेशानी
  • पेशाब का फ्लो कम हो जाना
  • स्पर्म में ब्लड आना
  • पेल्विक एरिया में दर्द
  • स्तंभन दोष या इरेक्टाइल डिफंक्शन (Erectile dysfunction)

प्रोस्टेट कैंसर का इलाज क्या है?

प्रोस्टेट कैंसर का इलाज रेडिएशन थेरिपी, कीमोथेरिपी या दवाओं के द्वारा किया जाता है। ये कैंसर के स्टेज पर निर्भर करता है। प्रोस्टेट कैंसर का ट्रीटमेंट टेस्ट के बाद किया जाता है। डॉक्टर पहले जांच करता है कि बीमारी कितनी फैली है। अगर कैंसर का शुरूआती चरण है तो डॉक्टर कुछ थेरिपी दे सकते हैं। कैंसर की अवस्था के अनुसार डॉक्टर सर्जरी, रेडिएशन, कीमोथेरिपी और हार्मोन थेरिपी आदि दे सकते हैं। यदि कैंसर ज्यादा फैलनेवाला नहीं है तो आपका डॉक्टर कुछ सावधानी बरतने के लिए कहेगा। वहीं डॉक्टर लाइफस्टाइल में बदलाव की सलाह भी देते हैं।

आपको बताते चले कि कैंसर का एक कारण खराब लाइफस्टाइल भी है। जो लोग रोजाना व्यायाम नहीं करते हैं या फिर खानपान में पौष्टिक आहार नहीं लेते हैं, उन्हें कैंसर की बीमारी हो सकती है। अगर व्यक्ति अपनी लाइफस्टाइल में सुधार करें और खाने में फलों और सब्जियों के साथ ही पौष्टिक आहार शामिल करें तो बीमारी की संभावना कम की जा सकती है। आपको भविष्य में प्रोस्टेट कैंसर न हो, इसके लिए आपको पहले से सावधानी रखनी चाहिए और किसी भी तरह से लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। आप उस बारे में अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से जरूर सालह लें।

हम आशा करते हैं कि आपको पुरुषों में होने वाली जानलेवा बीमारी के बारे में इस आर्टिकल के माध्यम से जरूरी जानकारी मिली होगी। अगर डॉक्टर से आप इस बारे में जानकारी लेंगे तो आपके लिए बेहतर होगा। आप स्वास्थ्य संबंधि अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं।

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