नाइट शिफ्ट में काम करने से हो सकती हैं ये समस्याएं, हो जाएं सावधान

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट दिसम्बर 20, 2019 . 4 मिनट में पढ़ें
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हमारा शरीर किसी मशीन की तरह ही काम करता है। अगर आप अपने शरीर को बिना आराम दिए इस्तेमाल करते रहेंगे तो फिर इसमें कई तरह की समस्याएं पैदा होने लगती हैं। नाइट शिफ्ट में काम करने पर भी कई सारी शारीरिक समस्या शुरू हो सकती है। भाग-दौड़ भरी इस जिंदगी में कई बार हम  शरीर और दिमाग दोनों का ख्याल रखना कम कर देते हैं, जिसके परिणाम कुछ समय बाद नजर आने लगते हैं। ऐसा नहीं है की हम आपको नाइट शिफ्ट नहीं करने की सलाह दे रहें हैं बल्कि अगर नाईट शिफ्ट करना है तो अपने लाइफस्टाइल में बदलाव लाएं।

कोई भी वयक्ति हेल्दी डायट फॉलो करें, नियमित एक्सरसाइज करें लेकिन, सोने का समय निश्चित न हो और 7 से 8 घंटे की नींद पूरी न होने की स्थिति में कई सारी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

नाइट शिफ्ट में काम करने के नकारात्मक प्रभाव

बिगड़ी हुई स्लीप साइकिल

हर शरीर का एक रिदम होता है। अगर आप उस रिदम को बिगाड़ते हैं, तो आपको नींद न आने की परेशानी हो सकती है। जब आप सोते हैं तो आपका शरीर दिनभर की टॉक्सिन, चोट और पीड़ा से आराम पा जाता है। दूसरी ओर अगर आप सोते नहीं हैं तो आपके शरीर को आराम करने का समय नहीं मिलता है जिसकी वजह से समस्याएं आ सकती है। स्लीप साइकिल बिगड़ने से नींद न आने की समस्या, डिप्रेशन(Depression) या फिर एन्जाइटी(anxiety) की भी समस्या आ सकती है।

ब्रेस्ट कैंसर की संभावनाएं

अगर आप महिला हैं और आप  लगातार नाइट शिफ्ट में काम करती हैं, तो आपको ब्रैस्ट कैंसर होने की संभावना बढ़ सकती है। दरअसल ब्रेस्ट में गांठ, स्किन में बदलाव, निप्पल के आकार में बदलाव, स्तन का सख्त होना, स्तन के आस-पास (अंडर आर्म्स) गांठ होना, निप्पल से रक्त या तरल पदार्थ का आना या स्तन में दर्द महसूस होना ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है। ऐसा एल्कोहॉल या सिगरेट का सेवन करना, पहले गर्भधारण में देरी होना, बच्चों को स्तनपान न करवाना, शरीर का वजन अत्यधिक बढ़ना, बदलती लाइफस्टाइल जैसे नाइट शिफ्ट में काम करना, गर्भनिरोधक दवाईयों का सेवन करना या जेनेटिकल (परिवार में अगर किसी को ब्रेस्ट कैंसर हुआ हो) कारणों की वजह से भी कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

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हार्ट अटैक होने की संभावना

ब्रिटिश मेडिकल जर्नल की रिपोर्ट के आधार पर ये कहा जा सकता है कि रोजाना नाइट शिफ्ट करने की वजह से आपको हार्ट अटैक आने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। रात को जागते रहने की वजह से आपके ब्लड प्रेशर और खून के बहाव पर असर पड़ता है, जिसकी वजह से हार्ट अटैक होने की संभावना लगभग 7 प्रतिशत बढ़ जाती है। हार्ट अटैक को ऐसे समझें की  कोरोनरी आर्ट्रीज में फैट जमा होने की वजह से ब्लड फ्लो ठीक तरह से नहीं होने के कारण हार्ट में ब्लड फ्लो बंद हो जाता है, जिससे हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती है।  हृदय की ये बीमारी महिलाओं के लिए घातक मानी जाती है।

बढ़ सकता है डिप्रेशन

बहुत से शोधों में पाया गया है कि नाइट शिफ्ट में काम करने वाले लोगों में या बहुत देर तक जागते रहने पर आपको डिप्रेशन यानि अवसाद की परेशानी हो सकती है। डिप्रेशन जिसे मेजर डिप्रेसिव डिसॉर्डर और क्लिनिकल डिप्रेशन के तौर पर भी जाना जाता है। यह एक तरह का मूड डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति लगातार उदास रहता है और उसका बाकी चीजों से दिल हटने लगता है। डिप्रेशन के कारण व्यक्ति के मन में सुसाइड करने तक के भी ख्याल आने लगते हैं।

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मेटाबॉलिज्म में बदलाव

लेप्टिन हॉर्मोन (Leptin Hormone) आपके ब्लड शुगर और इन्सुलिन(Insulin) को नियंत्रित करता है। रात को न सोने पर इस हॉर्मोन की मात्रा कम हो जाती है, जिसकी वजह से बहुत सी परेशानियां हो सकती हैं। शरीर का वजन अगर बढ़ने या घटने लगता है तो ऐसी स्थिति में अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ने लगता है। इसलिए अगर आप नाइट शिफ्ट में काम करते हैं तो दिन में अपनी नींद पूरी करें। अगर आप ऐसा करने में सक्षम नहीं हो पाते हैं तो डायबिटीज जैसी अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

बढ़ा हुआ वजन और डायबिटीज

रात को न सोने पर हॉर्मोनल डिस्बैलेंस हो जाता है, जिसकी वजह से डायबिटीज और बढ़े हुए वजन की भी समस्या हो तेजी से बढ़ सकती है।

नींद है आपकी अच्छी सेहत की कुंजी इसलिए नाइट शिफ्ट में काम करने से बचें। हालांकि कई ऐसे मीडिया इंडस्ट्री और भारत में रह कर दूसरे देशों के लिए काम करते हैं उन्हें मजबूरन नाइट शिफ्ट में काम करना पड़ता है। ऐसे ही पुणे में रहने वाले 31 साल के अंकित मल्होत्रा से जब हमने बात की तो उनका कहना था कि उनका वर्किंग समय ही भारत के समय अनुसार (IST) शाम 7 बजे से शुरू होता है और सुबह 3 से 4 बजे तक खत्म होता है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर होने के नाते उन्हें इसी समय काम करना पड़ता है। अंकित कहते हैं की जब वो ऑफिस से अपने घर सुबह 4 से 5 बजे तक पहुंचते हैं तो फ्रेश होने के बाद वो फ्रूट्स या अंकुरित अनाज खाते हैं और फिर सोते हैं। 7 से 8 घंटे की पूरी नींद के बाद वो फ्रेश और अच्छा महसूस करते हैं।

वहीं मीडिया इंडस्ट्री में काम करने वाली 26 वर्षीय तन्नू भाटिया दिल्ली में रहती हैं। जब हमने उनसे जानने की कोशिश की कि वो कैसे अपने हेल्थ को फिट रखती हैं, तो तन्नू कहती हैं कि ‘उनके ऑफिस शिफ्ट एक सप्ताह या 15 सप्ताह में बदलते रहते हैं। ऐसे में उनकी नींद ठीक तरह से पूरी नहीं हो पाती है लेकिन, उन्होंने ने अब यह तय कर लिया है की ऑफिस से आने के बाद वो थकी होती हैं। इसलिए आने के बाद फ्रेश होती हैं और फिर सो जाती हैं। ऐसा करने से उन्हें नाइट शिफ्ट या किसी भी शिफ्ट में काम करने के बाद अच्छी नींद आ जाती है। ‘

अंकित और तन्नू की तरह अगर आपभी नाइट शिफ्ट करती हैं या करते हैं तो डेली रूटीन में बदलाव कर शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है। रिसर्च के अनुसार अगर आप नाइट शिफ्ट में काम करते हैं तो कुछ बातों का ख्याल रखना चाहिए।

कैसे बचें नाइट शिफ्ट के नकारात्मक प्रभाव से?

अगर आप भी नाइट शिफ्ट में काम करते हैं फिट नहीं रह पा रहें हैं तो इससे जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

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