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Inositol: इनोसिटॉल क्या है? जानिए इसके उपयोग, साइड इफेक्ट्स और सावधानियां

Inositol: इनोसिटॉल क्या है? जानिए इसके उपयोग, साइड इफेक्ट्स और सावधानियां

परिचय

इनोसिटॉल (Inositol) क्या है?

इनोसिटॉल विटामिन की तरह एक पदार्थ है। यह कई प्रकार के पौधों और जानवरों में पाया जाता है। यह मानव शरीर में भी बनता है और प्रयोगशाला में भी इसे बनाया जाता है। इनोसिटॉल कई रूपों में पाया जाता है, जिन्हें इसोमर्स (isomers) कहते हैं। इसकी सबसे सामान्य फॉर्म मायो-इनोसिटॉल (myo-inositol) और डी-चिरो-इनोसिटॉल (D-chiro-inositol) है।

उपयोग

इनोसिटॉल (Inositol) का इस्तेमाल किस लिए होता है?

कुछ लोग डायबिटीज और इससे जुड़ी हुई नर्व की दिक्कत और प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज, मेटाबॉलिक सिंड्रोम और ओव्यूलेशन करने में विफलता, हाई ब्लड प्रेशर, हाई ट्राइग्लिसराइड और हाई टेस्टोस्टेरॉन को मिलाकर पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) में इसका इस्तेमाल किया जाता है।

इसके साथ ही यह ऑटिज्म, अल्जाइमर, ध्यान न केंद्रित कर पाने, बिपोलर (bipolar) की समस्या, मनोग्रस्ति बाध्यता विकार (obsessive compulsive disorder (OCD)), ट्रीकोटिलोमनिया, बेचैनी की समस्या, आपदा के बाद होने वाले तनाव (स्ट्रैस) और एंजाइटी की समस्या में भी इसका इस्तेमाल होता है। हालांकि इन समस्याओं में यह कितना मददगार साबित होता है, इसके सीमित सुबूत हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान न्यूरल ट्यूब बर्थ डिफेक्ट्स (जन्म से ही दिमाग और स्पाइन कॉर्ड में दोष होना) (neural tube birth defects) को रोकने और लीथियम के साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।

मैं इनोसिटॉल (Inositol) को कैसे इस्तेमाल करूं?

इनोसिटॉल को स्टोर करने का सबसे बेहतर तरीका है इसे कमरे के तापमान पर रखना। इसे सूर्य की सीधी किरणों और नमी से दूर रखें। दवा को खराब होने से बचाने के लिए आपको इनोसिटॉल को बाथरूम या फ्रीजर में नहीं रखना है। इनोसिटॉल के अलग-अलग ब्रांड्स को अलग तरीकों से स्टोर किया जाता है। इसे रखने से पहले सबसे बेहतर होगा कि आप दवा के पैकेज पर छपे निर्देशों को पढ़ लें या फार्मासिस्ट से पूछें। सुरक्षा की दृष्टि से सभी दवाइयों को अपने बच्चों और पेट्स से दूर रखें। जब तक कहा ना जाए तब तक सुरक्षा की दृष्टि से आपको इनोसिटॉल को टॉयलेट या नाली में नहीं बहाना है। आवश्यकता न रहने या एक्सपायरी की स्थिति में दवा का समुचित तरीके से निस्तारण जरूरी है। सुरक्षित तरीके से इसका निस्तारण करने के लिए अपने फार्मासिस्ट से सलाह लें।

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साइड इफेक्ट्स

इनोसिटॉल (Inositol) से क्या साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं?

मौखिक रूप से सेवन: ज्यादातर अडल्ट्स के लिए मौखिक रूप से इनोसिटॉल का सेवन करना सुरक्षित माना जाता है, लेकिन इससे उबकाई, पेट दर्द, कमर का दर्द, थकावट, सिर दर्द और चक्कर आ सकते हैं।

विशेष सावधानियां और चेतावनी

प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग: गर्भावस्था के दौरान इनोसिटॉल का मौखिक रूप से सेवन सुरक्षित हो सकता है। वहीं, स्तनपान के दौरान यह सुरक्षित है या नहीं, इस संबंध में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नही है। सुरक्षा की दृष्टि से इसका सेवन करने से बचें।

बच्चों: 5-12 साल के उम्र के बच्चों में 12 हफ्तों तक इनोसिटॉल का मौखिक रूप से सेवन सुरक्षित हो सकता है। इसके अतिरिक्त, अस्पतालों में प्रीमेच्योर बच्चों में अचानक फेफड़ों की गंभीर समस्या में 10 दिन तक इसका इस्तेमाल सुरक्षित हो सकता है। हालांकि, 10 दिन से अधिक समय तक फेफड़ों की गंभीर समस्या से पीढ़ित प्रीमेच्योर बच्चों में इसका सेवन असुरक्षित हो सकता है।

डायबिटीज: इनोसिटॉल ब्लड शुगर और हीमोग्लोबिन A1c के लेवल को कम कर सकती है। यदि आपको डायबिटीज है और आप इनोसिटॉल का इस्तेमाल करते हैं तो हाइपोग्लाइसीमिया (लो ब्लड शुगर) (hypoglycemia) के लक्षणों को मॉनीटर करें।

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रिएक्शन

इनोसिटॉल (Inositol) से मुझे क्या रिएक्शन हो सकते हैं?

इनोसिटॉल आपकी मौजूदा दवा या मेडिकल कंडिशन के साथ रिएक्शन कर सकता है। इसका इस्तेमाल करने से पहले अपने डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लें।

डोसेज

इनोसिटॉल (Inositol) का अडल्ट्स के लिए सामान्य डोज क्या है?

प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज के इलाज के लिए दो ग्राम इनोसिटॉल की कुछ फॉर्म (मायो-इनोसिटॉल) के साथ 200 mg फोलिक एसिड प्रेग्नेंसी के शुरुआती पहले ट्रैमेस्टर में दिन में दो बार।

लीथियम से जुड़े सोराइसिस के इलाज के लिए: छह ग्राम इनोसिटॉल दिन में इस्तेमाल किया जा चुका है।

मेटाबॉलिक सिंड्रोम (metabolic syndrome): दो ग्राम इनोसिटॉल की कुछ फॉर्म (आइसोमर मायो-इनोसिटॉल) का सेवन एक वर्ष तक दिन में दो बार किया जा चुका है।

भय संबंधी समस्याएं (panic disorder): 12-18 ग्राम इनोसिटॉल प्रतिदिन सेवन किया जा चुका है।

पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम: इनोसिटॉल की कुछ फॉर्म (आसोमर- डी-चिरो-इनोसिटॉल) 1000-1200 mg का इस्तेमाल किया जा चुका है। 4 ग्राम इनोसिटॉल (इसोमर मायो-इनोसिटॉल) वाले प्रोडक्ट के साथ 400 mcg फोलिक एसिड का छह महीने तक प्रतिदिन इस्तेमाल किया जा चुका है। मायो- इनोसिटॉल वाले विशेष प्रोडक्ट और 13.8 mg डि-चिरो-इनोसिटॉल को दिन में दो बार छह महीने तक लिया जा चुका है।

प्रेग्नेंसी के दौरान आने वाली जटिलताओं के लिए: इनोसिटॉल की कुछ फॉर्म (इसोमर मायो-इनोसिटॉल) के साथ 200 mg फोलिक एसिड का प्रेग्नेंसी के शुरुआत में पहले ट्रैमेस्टर के दौरान दिन में दो बार इस्तेमाल किया गया है।

बच्चों के लिए

रेस्पिरेटरी की समस्या: नवजात शिशुओं में सांस लेने संबंधी समस्या, जिसे रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (respiratory distress syndrome) कहा जाता है। इसमें 120-160 mg इनोसिटॉल या 2500 mcmol/L इनोसिटॉल का इस्तेमाल अस्पतालों में किया जा चुका है।

इंजेक्शन के जरिए बच्चों में इनोसिटॉल का उपयोग (INTRAVENOUS)

नवजात शिशुओं में सांस लेने संबंधि समस्या, जिसे रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (respiratory distress syndrome) कहा जाता है। इसमें 80-160 mg इनोसिटॉल का इस्तेमाल अस्पतालों में किया जा चुका है।

यह भी पढ़ें: ऑटिज्म और इम्यूनिटी में क्या संबंध है?

इनोसिटॉल (Inositol) किन रूपों में उपलब्ध है?

  • इनोसिटॉल टैबलैट और पाउडर के रूप में उपलब्ध है।

ओवरडोज या आपात स्थिति में मुझे क्या करना चाहिए?

आपात या ओवरडोज की स्थिति में तुरंत अपने नजदीकी डॉक्टर या आपातकालीन सेवा से संपर्क करें।

इनोसिटॉल (Inositol) का डोज मिस हो जाए तो क्या करूं?

इनोसिटॉल का डोज मिस हो जाता है तो जल्द से जल्द इसे लें। हालांकि, यदि आपका अगली खुराक का समय नजदीक आ गया है तो भूले हुए डोज को न खाएं। पहले से तय नियमित डोज को लें। एक बार में दो खुराक न खाएं।

हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या इलाज मुहैया नहीं कराता।

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Sunil Kumar द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 15/06/2020 को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड