आपके मोटापे से आर्थराइटिस की परेशानी है जुड़ी, जानें कैसे?

Medically reviewed by | By

Update Date दिसम्बर 5, 2019
Share now

मोटापे से आर्थराइटिस एक आम समस्या है। मोटापा एक मान्यता प्राप्त ग्लोबल महामारी है। 2008 के डब्ल्यूएचओ के अनुमानों से पता चलता कि 1.4 बिलियन से अधिक एडल्ट ज्यादा वजन वाले हैं और इनमें से 200 मिलियन से अधिक पुरुष और 300 मिलियन से अधिक महिला व्यस्क हैं। पिछले 30 सालों में, दुनिया भर में मोटापा दोगुना से अधिक हो गया है। मोटापा पुराने रोगों की  जोखिम से जुड़ा हुआ है। अधिक वजन बढ़ जाना  अर्थराइटिस (गठिया) के दर्द से जुड़ा होता है, वजन कम होना गठिया के लक्षणों को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

ये भी पढ़ेंः बादाम, अखरोट से काजू तक, गर्भावस्था के दौरान बेदह फायदेमंद हैं ये नट्स

मोटापा अर्थराइटिस (गठिया) के कारणों को प्रभावित करता है। मोटापा आपके जोड़ों पर अतिरिक्त भार,दर्द और परेशानी का कारण बन सकता है।  लेकिन शायद इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि फैट में मिलने वाले तत्व सूजन पैदा करने का कारण बनते हैं और यह पैर के दर्द में बड़ी भूमिका निभाते हैं। ऑस्टियोअर्थराइटिस हाथों, घुटनों, कूल्हों, पीठ और गर्दन में लक्षणों के साथ सबसे आम बीमारी है। स्पष्ट रूप से, अधिक वजन होने से घुटने के जोड़ों पर पड़ने वाला भार बढ़ जाता है, जिससे घुटनों में तनाव बढ़ता है। उदाहरण के लिए, यह अनुमान लगाया जाता है कि किसी व्यक्ति के शरीर का लगभग तीन से छह गुना तक चलते समय घुटनों पर वजन पड़ता है; शरीर का वजन बढ़ना उस दबाव को और बढ़ाता है।

ये भी पढ़ेंः मोटापा छुपाने के लिए पहनते थे ढीले कपड़े, अब दिखते हैं ऐसे

मोटापा और अर्थराइटिस एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। अतिरिक्त वजन बढ़ने से आपके जोड़ों पर अधिक तनाव पड़ता है और अर्थराइटिस यानि की घुटनों में दर्द की परेशानी शुरु हो सकती है। लेकिन फिजिकल एक्सरसाइज वजन घटाने के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन अर्थराइटिस (गठिया) से जुड़े जोड़ों का दर्द उस बढ़े हुए वजन  को घटाना और भी मुश्किल बना सकता है। अर्थराइटिस के साथ एक्सरसाइज संभव है, लेकिन आपको इसके लिए एक प्रोफेशनल ट्रेनर या फिडिकल थेरेपिस्ट की मदद की जरुरत हो सकती है।

आपके शरीर का वजन आपके जोड़ों पर कितना दबाव डालता है, इससे आप आश्चर्यचकित हो सकते हैं। जॉन्स हॉपकिंस अर्थराइटिस सेंटर के अनुसार, आपके द्वारा लिए जाने वाले हर 10 किलो अतिरिक्त वजन के लिए, हर एक कदम के साथ 30 से 60 किलो का अतिरिक्त बल आपके घुटनों पर पड़ता है। इसी स्रोत का कहना है कि सामान्य वजन वाले पुरुषों के मुकाबले अधिक वजन वाले पुरुषों को घुटने के अर्थराइटिस विकसित होने की संभावना पांच गुना ज्यादा है।वहीं अधिक वजन वाली महिलाओं को घुटने का दर्द विकसित होने की संभावना चार गुना ज्यादा होती है।

अधिक वजन होना ऑस्टियोअर्थराइटिस (OA) के विकास के लिए एक खतरनाक कारण है। अलग-अलग अध्यनों से पता चलता है कि मोटापे और घुटने के अर्थराइटिस एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। पहले राष्ट्रीय स्वास्थ्य और पोषण परीक्षा सर्वेक्षण (First National Health and Nutrition Examination Survey,HANES I) के आंकड़ों से पता चलता है कि मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में गैर-मोटापे से ग्रस्त महिलाओं की तुलना में घुटने का आर्थराइटिस का जोखिम लगभग 4 गुना ज्यादा था; जबकि पुरुषों में जोखिम लगभग 5 गुना अधिक था।

ये भी पढ़ेंः पुरानी एक्सरसाइज से हो गए हैं बोर तो ट्राई करें केलेस्थेनिक्स वर्कआउट

व्यायाम के लाभ
कैलोरी बर्निंग कार्डियोवस्कुलर एक्सरसाइज और मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाले व्यायाम मिलकर अर्थराइटिस के प्रभावों का मुकाबला कर सकते है। अधिक व्यायाम और कम कैलोरी का सेवन वजन घटाने में मदद कर सकता है।

अतिरिक्त वजन कम करने से आपके जोड़ों पर दबाव हटाने में मदद मिलती है। ये गतिविधियाँ अर्थराइटिस के विकास के आपके जोखिम को कम करने में मदद कर सकती हैं, या कम से कम लक्षणों में कमी का कारण बन सकती हैं।

जोड़ों के आसपास की मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम भी अर्थराइटिस की शुरुआत में आपकी मदद करेंगे और स्थिति को बेहतर ढंग से सामना करने के लिए आपको पहले से तैयार करेंगे।

थोड़ा वजन घटाने में मदद करता है
वजन कम करने में समय लग सकता है, लेकिन धीरे-धीरे कम होने वाला वजन अर्थराइटिस की असुविधा को कम कर सकता है, और इसे विकसित करने के आपके जोखिम को भी कम कर सकता है। वजन घटाने से डाटबिटीज, हृदय रोग और कुछ कैंसर के विकास के आपके जोखिम को कम करने में मदद मिलती है। बढ़ी हुई शारीरिक गतिविधि और कम कैलोरी के सेवन के माध्यम से एक से दो किलो वजन घटाने का लक्ष्य निर्धारित करें। आपके जोड़ों और आपके शरीर के बाकी हिस्से आपको धन्यवाद देंगे।

अर्थराइटिस के लिए वजन कम करने के पांच फायदेः
बेहतर ज्वाइंट फंक्शनः वजन में कमी से ज्वाइंट फंक्शन में सुधार दिखाई देता है। अपने JAMA अध्ययन में लोसर ने पाया कि घुटने के जोड़ के अंदर दबाव वजन घटाने के साथ बेहतर हुआ। हालांकि सबसे अच्छा परिणाम तब आया जब व्यायाम और डायट दोनों शामिल थे, बस वजन कम करने से घुटने के कार्य में काफी सुधार हुआ।अपनी रिसर्च में डॉ लोसर कहते हैं कि अगर आप अधिक वजन वाले हैं और अर्थराइटिस है तो कैलोरी और फैट का सेवन कम करना जरुरी है। एक सप्ताह में एक से दो किलो कम करने के लिए, खुद को समय दें, छह महीने एक सही समय सीमा वजन कम करने के लिए। सबसे महत्वपूर्ण बात, पर्मानेंट राहत के लिए आपको अपनी जीवन शैली को बदलने की जरुरत है।
बेहतर महसूस करनाः डायट और व्यायाम के माध्यम से वजन कम करने के बाद, ना केवल शरीर में सुधार आता है बल्कि दर्द पैदा करने वाले सूजन में भी कमी आती है। अपने डाटय चार्ट को ठीक तरह से फॉलो करने की ज़रूरत नहीं है, जिसमें हफ्ते में तीन बार एरोबिक्स और वेट ट्रेनिंग शामिल है। बल्कि, आप पूरे सप्ताह में बराबर मात्रा में एक्सरसाइज कर सकते हैं।

ये भी पढ़ेंः क्या ग्रीन-टी या कॉफी थायरॉइड पेशेंट्स के लिए फायदेमंद हो सकती है?

सूजन में कमीः  जब आप अधिक वजन हैं और अर्थराइटिस होता है, तो आपके पूरे शरीर में सूजन के लक्षण दिखाई देते हैं, जो रासायनिक मार्कर बनाता है जिससे शोधकर्ता यह पता लगाने के लिए ट्रैक कर सकते हैं कि आपके पैर में कितनी सूजन है। इन मार्करों में से एक इंटरल्यूकिन -6 (IL-6) है। लोसर और उनके साथी शोधकर्ता यह देखने में सक्षम थे कि IL-6 का स्तर प्रतिभागियों के 18 महीने के व्यायाम और वजन घटाने के दौरान कम हो गया था। लेप्टिन एक और कारण है जिसके बारे में शोधकर्ता बारीकी से जांच कर रहे हैं।
बेहतर हृदय स्वास्थ्यः ओक्लाहोमा सिटी के ओक्लाहोमा मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन के फ्री रेडिकल बायोलॉजी एंड एजिंग प्रोग्राम के शोधकर्ता टिम ग्रिफिन, पीएचडी के अनुसार, शोधकर्ता अर्थराइटिस, वजन और मेटाबॉलिक सिंड्रोम के बीच के संबंधों के बारे में बताते हैं।

अब तक जो निष्कर्श निकाला गया है वह यह है कि मोटापा अर्थराइटिस को बढ़ाने में योगदान देता है,और इसका सबसे ज्यादा असर घुटने पर होता है।  वजन घटाने से अर्थराइटिस के दोनों लक्षणों में सुधार होता है और यह रोग के असर को धीमा कर सकता है। तो अगर आप मोटापे से ग्रसित हैं तो जल्द ही अपनी डायट और एक्सरसाइज के माध्यम से मोटापे पर कंट्रोल कर सकते हैं।

और पढ़ेंः

Reactive Arthritis : रिएक्टिव अर्थराइटिस क्या है?

Osteoarthritis :ऑस्टियोअर्थराइटिस क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

Rheumatoid arthritis : रयूमेटाइड अर्थराइटिस क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

इस एक्सरसाइज से आसानी से मजबूत होती हैं मसल्स, जानें आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज के फायदे 

संबंधित लेख:

    क्या यह आर्टिकल आपके लिए फायदेमंद था?
    happy unhappy"
    सूत्र

    शायद आपको यह भी अच्छा लगे

    Ma huang: मा हुआंग क्या है?

    जानिए मा हुआंग की जानकारी in hindi, फायदे, लाभ, मा हुआंग उपयोग, इस्तेमाल कैसे करें, कब लें, कैसे लें, कितना लें, खुराक, डोज, ओवरडोज, साइड इफेक्ट्स, नुकसान, दुष्प्रभाव और सावधानियां।

    Medically reviewed by Dr. Hemakshi J
    Written by Anu Sharma

    मेल ब्रेस्ट कैंसर के क्या हैं कारण, जानिए लक्षण और बचाव

    मेल ब्रेस्ट कैंसर की जानकारी हिंदी में. ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण, कारण और ट्रीटमेंट। पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर एज फैक्टर, एस्ट्रोजन के एक्पोजर के साथ ही अन्य कारणों से हो सकता है। Male breast cancer

    Medically reviewed by Dr. Pranali Patil
    Written by Bhawana Awasthi

    Acemiz Plus: एसमीज प्लस क्या है? जानिए इसके उपयोग, साइड इफेक्ट्स और सावधानियां

    Acemiz Plus: एसमीज प्लस की जानकारी, लाभ, फायदे, उपयोग, खुराक, नुकसान, साइड इफेक्ट्स Acemiz Plus ke use, fayde, upyog, dose, side effects in Hindi

    Medically reviewed by Dr. Pranali Patil
    Written by Mona Narang

    Indocap SR: इंडोकेप एस आर क्या है? जानिए इसके उपयोग, साइड इफेक्ट्स और सावधानियां

    जानिए इंडोकेप एस आर की जानकारी in hindi, फायदे, लाभ, इंडोकेप एस आर उपयोग, इस्तेमाल कैसे करें, कब लें, कैसे लें, कितना लें, खुराक, Indocap SR डोज, ओवरडोज, साइड इफेक्ट्स, नुकसान, दुष्प्रभाव और सावधानियां।

    Medically reviewed by Dr. Pranali Patil
    Written by Mona Narang