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क्रॉनिक लोनलीनेस क्या है? ओल्ड ऐज में इससे कैसे बचें?

क्रॉनिक लोनलीनेस क्या है? ओल्ड ऐज में इससे कैसे बचें?

क्रॉनिक लोनलीनेस वृद्धावस्था के अकेलेपन को कहा जाता है। अकेलापन जीवन के किसी भी पड़ाव पर परेशान कर सकता है और अगर बात वृद्धावस्था की करें तो यह स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है। अकेलापन बुर्जुगों के स्वास्थ्य जोखिमों को भी बढ़ा देता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज कई बुर्जुग अकेले रहते हैं। ऐसे में अकेलापन बुरी तरह उन्हें परेशान करता है। जिसका सीधा प्रभाव शीरीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। आइए जानते हैं हैलो स्वास्थ्य के इस आर्टिकल में क्रॉनिक लोनलीनेस से बचने के लिए हम अपनी और अपनों की मदद कैसे कर सकते हैं।

क्रॉनिक लोनलीनेस के लक्षण (signs of chronic loneliness)

वृद्धावस्था में अकेलापन धूम्रपान से होने वाले दुष्प्रभाव से भी अधिक खतरनाक होता है। अकेलेपन की गंभीर स्थिति आत्महत्या (suicide) की प्रवृत्ति, अल्जाइमर रोग और अन्य मनोभ्रंश (डेमेंशिया) को प्रभावित करती है। क्रॉनिक लोनलीनेस के निम्नलिखित लक्षण हो सकते हैं-

  • ऊर्जा में कमी (energy loss)
  • ध्यान केंद्रित न कर पाना
  • अनिद्रा, बाधित नींद या नींद की अन्य समस्याएं (sleep problems)
  • कम भूख लगना
  • आत्म-संदेह, निराशा या बेकार की भावनाएं
  • बार-बार बीमार होना
  • शरीर में दर्द होना
  • बेचैनी लगना
  • ड्रग्स लेना
  • बिंज ईटिंग या बिंज वाचिंग (लगातार टीवी या कोई सीरीज देखना)

ऊपर बताए गए क्रॉनिक लोनलीनेस लक्षणों के अलावा भी कुछ लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसलिए, किसी भी असामान्य परिवर्तन को नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें।

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डॉक्टर को दिखाएं अगर :

  • अकेलेपन की भावनाएं ज्यादा बढ़ती जा रही हैं। किसी मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना अच्छा रहेगा।
  • अकेलेपन की भावनाएं यदि आपके रोजमर्रा के कामों पर नकारात्मक असर डाल रही हैं या उन चीजों को करने में कठिनाई आ रही हैं जिन्हें आप करना चाहते हैं।
  • आपका मूड न होना या अवसाद (depression) की भावनाएं हैं।
  • आप पहले से ही मानसिक स्वास्थ्य से ग्रस्त हैं जैसे-चिंता या अवसाद (depression)
  • क्रोनिक अकेलेपन से शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। शारीरिक लक्षण कुछ हफ्तों के बाद दूर नहीं होते हैं, खराब हो जाते हैं या आपके दैनिक जीवन को प्रभावित करते हैं।

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क्रॉनिक लोनलीनेस से कैसे बचाव करें?

क्रॉनिक लोनलीनेस से बचने के लिए निम्न उपाय किए जा सकते हैं-

सोशल इंटरेक्शन से दूर करें क्रॉनिक लोनलीनेस

अकेले होने का मतलब हमेशा घर पर अकेले रहना नहीं होता। दरअसल क्रॉनिक लोनलीनेस (chronic loneliness) आप पर तब बुरी तरह हावी होता है जब बात करने के लिए घर के बाहर भी कोई नहीं मिलता। इसलिए अगर आप भी अकेले रहते हैं तो कोशिश कीजिए कि पास के लोगों से अच्छी जान पहचान बनाकर रखें। इससे बोरियत भी महसूस नहीं होगी साथ ही अगर वक्त-बेवक्त कोई जरूरत पड़ जाए तो मदद के लिए भी लोग पास रहेंगे।

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सोशल वर्क (social work) करें

सोशल वर्क आपकी कनेक्टिविटी बढ़ाने में बहुत मदद करता है। अगर आप स्वस्थ्य हैं और खुद को व्यस्त रखने में सक्षम हैं तो सोशल वर्क वॉलेंटियर बन सकते हैं। जिसके लिए सप्ताह में 2 से 3 घंटे भी काफी हैं। ऐसा करने से वृद्धावस्था में भी सेल्फ कॉफिडेंस (self confidence) कम नहीं होगा। साथ ही साथ अकेलापन भी नहीं लगेगा।

इमोशनल स्किल्स (emotional skills) डेवलप करें

बहुत लोग तनाव को सही से डील नहीं कर पाते हैं और भावुक हो जाते हैंइमोशनल स्किल्स (emotional skills) आपको विपरीत परिस्थितियों में संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैंइसके लिए आप स्ट्रेस मैनेजमेंट (stress management) करना सीखें

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बाहर का आनंद लें

सूरज की रोशनी आपके शरीर में सेरोटोनिन को बढ़ाने में मदद कर सकती है, जो आपके मूड को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है। इसके लिए सुबह के समय गार्डन में टहल सकते हैं या घर के गार्डन में भी समय बिता सकते हैं। शोध बताते हैं कि नेचर में समय बिताना अवसाद, चिंता और तनाव की भावनाओं को दूर करने में मदद कर सकता है। ग्रुप वॉक (group walk) या टीम स्पोर्ट (team support) में शामिल होने से आपको उसी समय दूसरों से जुड़ने में भी मदद मिल सकती है।

व्यायाम करें

उम्र चाहे जो हो सेहत से समझौता बिल्कुल भी ठीक नहीं है और बढ़ती उम्र के साथ तो यह और भी जरूरी हो जाता है। अगर आप अकेले रहते हैं तो कोशिश करें कि योग करें या मॉर्निंग वॉक के लिए जाएं। योगा आपके स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ -साथ आपको दिन भर एनर्जेटिक भी रखता है।

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टेक्नोलॉजी से मात दें क्रॉनिक लोनलीनेस को

आज की लाइफस्टाइल में क्रॉनिक लोनलीनेस से लड़ने में टेक्नोलॉजी काफी मददगार है क्योंकि आज जिसे देखो वह टाइम पास के लिए मोबाइल और कंप्यूटर में लगा रहता है। टेक्नोलॉजी आपको सोशल नेटवर्किंग में बहुत मदद करती है क्योंकि इसके जरिए आप कभी भी अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से बात कर सकते हैं। आज कल कई सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म हैं जिनके साथ आप लोगों से कनेक्ट हो सकते हैं।

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घर में एक पालतू जानवर भी है जरूरी

जब आप अकेले रहते हैं तो मन लगाने के लिए किसी और की मौजूदगी बहुत जरूरी है। ऐसे में घर में पैट बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसा कई बार देखा गया है कि अगर आप घर में कोई पालतू जानवर रखते हैं तो वह घर के माहौल को खुशनुमा बना देता है। कुछ लोग इसके लिए घर में कुत्ते या बिल्ली को पालते हैं क्योंकि उनके साथ खेलने और उनकी देखभाल करने में वक्त बहुत अच्छा गुजरता है।

हालांकि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोगों को वृद्धावस्था में अकेले रहना पड़ता है जबकि इसी उम्र में साथ और देखभाल की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। वृद्धावस्था में अकेलेपन से लड़ने के लिए आप इन बातों को फॉलो कर सकते हैं। और अगर आपका कोई अपना ऐसी स्थिति से लड़ रहा है तो उन्हें भी अकेलेपन से लड़ने के लिए इन बातों को ​फॉलो करने के लिए प्रोत्साहित करें। ऊपर बताए गए टिप्स आपको अकेलेपन से बचा सकते हैं। उम्मीद करते हैं कि आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा। हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताएं। साथ ही अगर आपका इस विषय से संबंधित कोई भी सवाल या सुझाव है तो वो भी हमारे साथ शेयर करें।

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लेखक की तस्वीर
Dr. Pooja Bhardwaj के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Priyanka Srivastava द्वारा लिखित
अपडेटेड 03/07/2019
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