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एक्टिव एजिंग : क्या है बढ़ती उम्र में एक्टिव और स्वस्थ रहने का राज, जानिए

एक्टिव एजिंग : क्या है बढ़ती उम्र में एक्टिव और स्वस्थ रहने का राज, जानिए

उम्र के बढ़ना एक ऐसी चीज है, जिसे हम रोक नहीं सकते। बढ़ती उम्र के साथ आती हैं कई शारीरिक, भावनात्मक, सेक्शुअल, समाजिक और मानसिक चुनौतियां। एक्टिव एजिंग (Active Ageing) का अर्थ है उम्र के बढ़ने पर भी एक्टिव और स्वस्थ रहना। हम अक्सर एजिंग को नकारात्मक रूप में लेते हैं। लेकिन, याद रखें कि जब उम्र बढ़ती है तो उस दौरान होने वाले परिवर्तन सकारात्मक और नकारात्मक दोनों हो सकते हैं। ऐसे में, एजिंग को हेल्दी और एक्टिव एजिंग (Active Ageing) बनाना पूरी तरह से मुमकिन है। हेल्दी लाइफस्टाइल एक्टिव एजिंग (Active Ageing) की कुंजी है।

विभिन्न प्रकार के पौष्टिक खाद्य पदार्थों का सेवन, अपनी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि को शामिल करना, खुश और सकारात्मक रहना जैसे आसान बदलाव करके आप उम्र की इस पारी को आसान बना सकते हैं। जानिए हेल्दी और एक्टिव एजिंग (Active Ageing) में छुपे राज के बारे में।

हेल्दी एजिंग (Healthy Ageing) पुरुषों और महिलाओं में कैसे अलग है?

इसमें कोई संदेह नहीं है कि महिलाओं और पुरुषों के शरीर, लाइफस्टाइल, न्यूट्रिशन आदि में फर्क होता है। ऐसे में, उनकी हेल्दी और एक्टिव एजिंग (Active Ageing) में भी फर्क होगा। न केवल पुरुष और महिला के शरीर उम्र बढ़ने के लिए अलग-अलग प्रतिक्रिया देते हैं, बल्कि इनकी साइकॉलॉजी भी बहुत अलग होती है। पुरुषों और महिलाओं के लिए उम्र बढ़ना एक पूरी तरह से अलग अनुभव हो सकता है। जानिए कैसे:

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उम्र (Age)

ऐसा माना जाता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं की उम्र औसतन अधिक होती है। इसके सही कारण के बारे में कोई जानकारी मौजूद नहीं है। लेकिन, कुछ लोग इसका कारण यह मानते हैं कि महिलाओं की तुलना में पुरुष ऐसे काम या नौकरी करते हैं जिनमें जान का जोखिम अधिक होता है।

एक्टिव एजिंग

सेक्स (Sex)

एक्टिव एजिंग (Active Ageing) के इस टॉपिक में अगला है सेक्शुअल फंक्शन। सेक्शुअल फंक्शन और एजिंग (Sexual function and Ageing) का प्रभाव भी महिलाओं और पुरुषों में अलग होता है। एक महिला का शरीर उम्र बढ़ने पर मेनोपॉज़ के रूप में प्रतिक्रिया देता है। समय के साथ, हर व्यक्ति यौन समस्याओं का सामना करता है, जैसे महिलाएं योनि में रूखापन और पुरुष स्तंभन दोष आदि।

हॉर्मोन (Hormone)

उम्र बढ़ने पर पुरुषों और महिलाओं में विभिन्न हार्मोन प्रभावित होते हैं। जैसे एजिंग (Ageing) से महिलाओं में एस्ट्रोजन लेवल बढ़ता है और पुरुषों के टेस्टोस्टेरोन लेवल में बदलाव आता है

दिमाग (Mind)

ऐसा माना जाता है कि एजिंग (Ageing) का महिलाओं और पुरुषों के दिमाग में अलग बदलाव आता है। ऐसे पुरुष जिनका वजन अधिक होता है और जिन्हें शुगर या एक स्ट्रोक होता हैं। उनमें कॉग्निटिव इम्पेयरमेंट (Cognitive Impairment) की संभावना अधिक होती है। जबकि, महिलाओं में कॉग्निटिव इम्पेयरमेंट (Cognitive Impairment) होने की संभावना अधिक तब होती है जब वो रोजाना के काम के लिए दूसरों पर निर्भर होती हैं और जिनका सोशल नेटवर्क कम होता है।

पुरुषों में एजिंग (Ageing in men) के दौरान किन फैक्टर्स पर ध्यान देना जरूरी है?

एक्टिव एजिंग (Active Ageing) के लिए पुरुषों को बहुत से फैक्टर्स पर ध्यान देना चाहिए। यह सब पुरुषों को अच्छे स्वास्थ्य और कई बीमारियों के जोखिम को कम करने के लिए जरूरी है जैसे हार्ट सम्बन्धी बीमारियां (Heart Problems), हाय ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure), डायबिटीज (Diabetes) आदि। यह फैक्टर्स इस प्रकार हैं:

  • हेल्दी आहार लें
  • अपने वजन का ध्यान रखें
  • सात से आठ घंटे की नींद लें
  • शारीरिक रूप से एक्टिव रहें
  • स्मोकिंग न करें
  • अल्कोहल का सेवन सीमित करें
  • नियमित टेस्ट और डॉक्टरी जांच कराएं

एक्टिव एजिंग

महिलाओं में एजिंग (Ageing in women) के दौरान किन फैक्टर्स पर ध्यान देना जरूरी है?

एक्टिव एजिंग (Active Ageing) के लिए अपनी आदतों में बदलाव जरूरी है। महिलाओं को भी अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव करने चाहिए। ताकि, वो हेल्दी एजिंग (healthy aging) का आनंद लें सकें, जैसे:

  • संतुलित आहार लें
  • सही दवाइयों को सही समय पर लें
  • बीमारियों से बचने के लिए समय-समय पर चेकअप और टेस्ट कराएं
  • सक्रिय रहें और शारीरिक गतिविधियों को अपने जीवन का मुख्य हिस्सा बना लें
  • एक्टिव एजिंग (Active Ageing) के लिए तनाव से बचें

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कौन-कौन सी तकलीफें बढ़ती उम्र में आपको परेशान कर सकती हैं?

उम्र के बढ़ने पर शरीर और दिमाग कमजोर हो जाता है। इस दौरान, उम्र के बढ़ने पर होने वाली बीमारियां (Diseases in Ageing) इस प्रकार हैं:

शरीर के संतुलन के न बनने के कारण गिरना (Fall due to non-balance of body)

उम्र के बढ़ने साथ शरीर का संतुलन बिगड़ना सामान्य है। ऐसा मांसपेशियों के कमजोर होने के कारण होता है। हालांकि, इसके कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं जैसे कोई बीमारी या किसी दवा का साइड इफेक्ट। कई बार गिरने से कुछ गंभीर परेशानियां भी हो सकती हैं जैसे चोट लगना आदि। एक्टिव एजिंग (Active Ageing) के लिए इस समस्या को आप शारीरिक रूप से एक्टिव रह कर और व्यायाम कर के दूर कर सकते हैं।

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याददाश्त का कमजोर होना (Memory weakness)

याददाश्त कमजोर होना या कुछ याद न होना उम्र के बढ़ने के साथ सामान्य है। एजिंग (Ageing) के साथ सोचने की क्षमता भी कम हो जाती है। दवा के दुष्प्रभाव या थायराइड के कारण भी ऐसा हो सकता है। इसके लिए आप मेंटल एक्सरसाइजेज कर सकते हैं या डॉक्टर की सलाह ले सकते हैं।

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डिप्रेशन (Depression)

आमतौर, पर उम्र के बढ़ने पर यह समस्या कम होती है। लेकिन, यह उन लोगों में सामान्य है जो किसी रोग से पीड़ित हैं या अकेले हैं। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए आपको खुश और सकारात्मक रहना चाहिए। अधिक लोगों से मिलें और अपने जीवन में कुछ सकारात्मक बदलाव लाएं।

यूरिनरी इंकॉन्टीनेंस (Urinary incontinence)

एक्टिव एजिंग (Active Ageing) का अगला रोग है, मूत्र को नियंत्रित करने की समस्या। जो उम्र के बढ़ने के साथ-साथ बदतर हो जाती है। यह पुरुषों और महिलाओं दोनों को प्रभावित करता है, हालांकि इसके अलग-अलग अंडरलाइंग कारण हो सकते हैं, जैसे पुरुषों में प्रोस्टेट का बढ़ना आदि।

दर्द (Pain)

शोध के मुताबिक साठ से अधिक आयु वर्ग के बुजुर्ग हर महीने शरीर में कहीं न कहीं दर्द का अनुभव करते हैं। हमेशा रहने वाली दर्द कम शारीरिक गतिविधि, तनाव और खुद की कम देखभाल के कारण हो सकती है। यह दर्द एक नई स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है।

अलगाव और अकेलापन (Isolation and loneliness)

अलगाव और अकेलापन भी एक्टिव एजिंग (Active Ageing) की समस्याओं में से एक है। जो बुजुर्ग अकेले रहते हैं खासतौर पर जो किसी हेल्थ प्रॉब्लम से गुजर रहे हैं, उनमें यह समस्या अधिक देखी गई है।

हेल्दी एजिंग

पॉलिफार्मेसी (Polypharmacy)

पॉलिफार्मेसी का अर्थ है कई दवाएं लेना। यह मुख्य रूप से एक समस्या है क्योंकि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है वैसे ही दवा के साइड-इफेक्ट या इंटरैक्शन से नुकसान का जोखिम बढ़ जाता है। इसके साथ ही पॉलिफार्मेसी में सभी दवाओं को खरीदना भी महंगा हो सकता है और हर दिन कई बार दवाएं लेना एक वास्तविक परेशानी का कारण बन सकता है।

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हेल्दी एजिंग (Healthy Aging) के लिए किन डायट्स को फॉलो करना चाहिए?

स्वस्थ भोजन किसी भी उम्र में महत्वपूर्ण है, लेकिन एक्टिव एजिंग (Active Ageing) के लिए यह और भी जरूरी हो जाता है। इस उम्र में आहार में वैरायटी और गुणवत्ता ही जरूरी नहीं होती। बल्कि और भी कई चीजों का ध्यान रखना जरूरी है। जानिए, आपकी एक्टिव एजिंग के लिए डायट (Diet for Active Aging) कैसी होनी चाहिए:

  • हेल्दी और एक्टिव एजिंग (Active Ageing) के लिए प्राकृतिक आहार का अधिक और प्रोसेस्ड भोजन का कम सेवन करना जरूरी है। हमारा शरीर विभिन्न आहार के लिए अलग रेस्पॉन्ड करता है। इसके लिए जेनेटिक्स और अन्य स्वास्थ्य कारक जिम्मेदार है।
  • अधिक से अधिक फल और सब्जियां खाएं। इसके साथ ही आहार और भोजन के रंगों में भी विभिन्नता लाएं। जब सब्जियों की बात आती है, तो एंटीऑक्सिडेंट युक्त सब्जियों जैसे पालक और ब्रोकली के साथ-साथ रंगीन सब्जियां जैसे गाजर और लौकी आदि को चुनें। रोजाना इनका सेवन करें।
  • हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए कैल्शियम का सेवन करना न भूले। एक्टिव एजिंग (Active Ageing) के लिए यह बहुत जरूरी है क्योंकि उम्र के बढ़ने के साथ बोन फ्रैक्चर (Bone fracture) और ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) जैसी समस्याएं हो सकती है। दूध, दही, पनीर के साथ ब्रोकली, बादाम आदि भी इसका अच्छा स्त्रोत हैं।

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  • अपने आहार में वसा (Fats) को शामिल न करने से अच्छा है, अच्छी वसा को लेना। हेल्दी फैट जैसे ओमेगा 3s (Omega 3s) को अपने आहार में शामिल करें ताकि आप अपने शरीर को बीमारियों से बचा सके। इसके साथ ही दिमागी फंक्शन और मूड को भी सुधार सकें।
  • एक्टिव एजिंग (Active Ageing) के लिए प्रोटीन को लेना भी जरूरी है। अगर आप प्रोटीन (Protine) की पर्याप्त मात्रा लेंगे तो आपको तनाव, एंग्जायटी आदि से छुटकारा मिलेगा। हालांकि, प्रोटीन (Protine) के लिए प्रोसेस्ड मीट प्रोडक्टस का अधिक सेवन करने से आपको अन्य समस्याएं होने का जोखिम भी रहेगा जैसे हार्ट संबंधी परेशानियां। ऐसे में अपने आहार में प्रोटीन के लिए अंडे, मेवे, सीड्स, बींस आदि को शामिल करें।
  • अधिक से अधिक फाइबर (Fiber) लें। इससे दिल संबंधी समस्याएं (Heart Problems), स्ट्रोक (Stroke), डायबिटीज (Diabetes) का जोखिम और आपका वजन भी कम होगा। उम्र के बढ़ने पर पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है। ऐसे में आपके लिए पर्याप्त फाइबर लेना आवश्यक है।
  • एक्टिव एजिंग (Active Ageing) के लिए कार्बोहाइड्रेट्स को भी सोच समझ कर चुने। जैसे साबुत आनाज चुने जबकि चीनी और रिफाइंड कार्ब्स को कम कर दें।

हेल्दी एजिंग

हेल्दी एजिंग (Healthy ageing) के लिए किन एक्सरसाइज को करना चाहिए?

वैसे तो एक्सरसाइज और शारीरिक गतिविधियां हर किसी के लिए अच्छी हैं और बढ़ती उम्र में इन्हें करने से आपको कई लाभ हो सकते हैं। एक्टिव एजिंग (Active Ageing) के लिए आपको इन व्यायामों को नियमित रूप से अपने जीवन का हिस्सा बना लेना चाहिए। ताकि, आपको अधिक लाभ मिल सके। एक्टिव एजिंग के लिए एक्सरसाइज (exercise for active ageing) इस प्रकार हैं:

  • एंडोरंस (Endurance) या एरोबिक : यह गतिविधियां आपकी हार्ट रेट बढ़ाने में मदद करेंगी। जॉगिंग, स्विमिंग और बाइकिंग इसके उदहारण हैं।
  • स्ट्रेंथ एक्सरसाइज (Strenth Exercise): स्ट्रेंथ एक्सरसाइज से आपकी मांसपेशियां मजबूत होंगे। वजन उठाना या रेजिस्टेंस बंद का प्रयोग करना स्ट्रेंथ एक्सरसाइज के प्रकार हैं।
  • बैलेंस एक्सरसाइज (Balance Exercise): बैलेंस एक्सरसाइज जैसे वृक्षासन, वाल पुशअप्स, हील राइजेज आदि करने से आपको शरीर का संतुलन बनाने में मदद मिलेगी जिससे गिरने की संभावना कम होगी।
  • फ्लेक्सिबिलिटी एक्सरसाइज (Flaxibility Exercise): फ्लेक्सिबिलिटी एक्सरसाइज जैसे स्ट्रेचिंग, कोबरा पोज, बटरफ्लाई स्ट्रेच करने से आपकी मांसपेशियां खुलेंगी जिससे पोस्चर और बैलेंस सुधरने में मदद मिलती है।

लाइफस्टाइल का हेल्दी एजिंग (Healthy ageing) पर क्या प्रभाव पड़ता है?

हमारा व्यवहार, आदतें और विश्वास हमारे लाइफस्टाइल में शामिल हैं। हम में से कई लोग ऐसा सोचते हैं कि उम्र के बढ़ने का अर्थ है आप अपनी क्षमता, एक्टिविटीज और पैशन को कम या पूरी तरह से खत्म कर दें। लेकिन, इन सब चीजों के परिणामस्वरूप कई लोगों के लिए उम्र बढ़ने की प्रक्रिया केवल अपने मरने का इंतज़ार करने तक ही सीमित रह जाती है। यह केवल हमारे और समाज के सोचने का एक तरीका हो सकता है। लेकिन अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो आप जीवन को खुल कर नहीं जी पाएंगे। ऐसे में इन विचारों को दिमाग में न आने दें। ऐसा करने पर न केवल आप एक हेल्दी और एक्टिव एजिंग (active ageing) जी पाएंगे बल्कि आप खुद को यंग भी महसूस करेंगे।

जब हम यंग होते हैं तो हमें जीवन फ्रेश और अच्छा लगता है। लेकिन, उम्र के बढ़ने पर इसी जीवन को हम बोझ मानने लगते हैं। एक्टिव लाइफ जीने में आपके लाइफस्टाइल, सोच आदि का बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। हमारे विचार, सोच और लाइफस्टाइल हमारे जीवन को बदल सकते हैं और हमें एक्टिव लाइफ की तरफ अग्रसर कर सकते हैं।

यह बात पूरी तरह से साबित हो चुकी है कि ऐसे कई लाइफस्टाइल फैक्टर्स हैं जो उम्र को बढ़ने से रोकने में मदद कर सकते हैं जैसे संतुलित आहार, सही व्यायाम, पर्याप्त नींद, सही समय पर दवाई लेना, सामाजिक रूप से सक्रिय रहें आदि

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उम्र का बढ़ना अटल है, लेकिन कुछ लोग एजिंग (Ageing) से होने वाले परिवर्तनों का सामना करने से घबराते हैं। अगर आप अपने स्वास्थ्य के बारे में चिंतित हैं या आपको सकारात्मक महसूस करने में परेशानी हो रही है तो आपको तुरंत मदद की जरूरत है। इसके बारे में अपने परिवार के सदस्य, दोस्त या प्रियजन से बार करें। डॉक्टर या काउंसलर से भी मदद ली जा सकती है।

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सूत्र

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लेखक की तस्वीर
Dr. Pranali Patil के द्वारा मेडिकल समीक्षा
AnuSharma द्वारा लिखित
अपडेटेड 16/02/2021
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