पेसिफायर की आदत कहीं छीन न ले बच्चों की मुस्कान की खुबसूरती

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट दिसम्बर 13, 2019 . 4 मिनट में पढ़ें
अब शेयर करें

बच्चों के पैदा होने के लगभग चार से पांच महीने के बाद ही उन्हें कुछ चूसने की आदत लग जाती है। इसी के चलते बच्चों को पेसिफायर की आदत भी बचपन से ही लग जाती है। पेसिफायर की आदत, जहां एक तरफ बच्चे को होती है, वहीं माता-पिता को भी बच्चों को पेसिफायर देने की जरूरत महसूस होती है। पेसिफायर बच्चे को घंटों शांत बनाए रखने में मदद कर सकता है। शिशुओं के पास अपनी जिज्ञासा को कंट्रोल करने के लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं होता। वे अपनी परेशानी को कम करने के लिए किसी से बात नहीं कर सकते, अगर उन्हें ठंड लग रही है, तो वे आपसे बोल कर कंबल नहीं मांग सकते, वे चीजों को कंट्रोल करने के लिए अपने हाथों का उपयोग नहीं कर सकते। पेसिफायर की आदत उन्हें खुद को शांत करने का एक तरीका होता है।

यह भी पढ़ेंः बच्चों में भाषा के विकास के लिए पेरेंट्स भी हैं जिम्मेदार

बच्चे को पेसिफायर दें या न दें वे किसी अन्य चीज को चूसना जारी ही रखेंगे। अब वह चाहें अंगूठा हो, उंगली हो, बोतल या ब्रेस्टफिडिंग उनके लिए चूसना उनको खुद को शांत रखने का एकमात्र तरीका है। ऐसे में बच्चों को पेसिफायर देना नई मम्मियों को अपने लिए थोड़ा समय निकालने का मौका देता है। साथ ही बच्चे को भी उनके हिस्से की शांति मिलती है।

अपने बच्चे की पेसिफायर की आदत को रोकने के लिए आप इन चीजों को ध्यान में रख सकते हैं

सही समय पर पेसिफायर की आदत को छुड़ाएं

पेसिफायर की आदत बच्चों में  सडन इंफेंट डेथ सिंड्रॉम  (Sudden Infant Death Syndrome, SIDS) की आशंका को कम कर सकती है। इसलिए यह जरूरी है कि जब तक वह छह महीने का नहीं हो जाता, तब तक अपने बच्चे को पेसिफायर की आदत लगाएं। जब SIDS का खतरा कम हो जाता है, तो उसे पेसिफायर की आदत को धीरे-धीरे कम करने की कोशिश करें। अपने बच्चे को पेसिफायर की आदत को सही समय पर कम करना जरूरी है। लेकिन, अगर आप अपने बच्चे के रुटिन में कोई नया बदलाव करते हैं, तो उसे पेसिफायर दे सकते हैं, क्योंकि यह उसे एक्सट्रा केयर और आराम देता है।

यह भी पढ़ेंः जुड़वां बच्चों की देखभाल के दौरान क्या करें और क्या न करें? जानें जरूरी टिप्स

दो साल तक के बच्चों को पेसिफायर की आदत

आमतौर पर दो साल से पहले आपके बच्चे को दांत की कोई समस्या नहीं होती। पेसिफायर के इस्तेमाल से होने वाली कोई भी परेशानी पेसिफायर का इस्तेमाल छोड़ने के छह महीने के अंदर ठीक हो जाती है। दो साल के बाद बच्चों में पेसिफायर की आदत की वजह से बच्चों के टिथ अलाइमेंट की परेशानी हो सकती है। अगर बच्चों में पेसिफायर की आदत चार साल के बाद भी जारी रहती है। जब उनके पर्मानेंट टिथ आने लगते हैं तो यह उनके दांतों में लंबी परेशानी खड़ी कर सकते हैं।

12 महीने तक छुड़ाएं पेसिफायर की आदत

कुछ एक्सपर्ट कहते हैं कि 12 महीने के बाद बच्चों को बार-बार पेसिफायर देना उनकी भाषा के विकास में रुकावट हो सकती है। इसका सबसे मुख्य कारण है कि अगर बच्चे के मुंह में हमेशा पेसिफायर होगा, तो वह कुछ बोलने की प्रेक्टिस ठीक से नहीं कर पाएगा। इसके अलावा अगर वह बोलने की कोशिश कर रहा है और साथ में रोता है तो उसे पेसिफायर की आदत लगाना उसके बोलने की आदत को खत्म कर सकता है। साथ ही अगर बच्चे  को पेसिफायर की आदत हमेशा होती है, तो उसके होंठ और जीभ के विकास में परेशानी हो सकती है। पेसिफायर का बहुत ज्यादा इस्तेमाल बच्चे की होंठ, जीभ और दांत के विकास के बीच में आ सकता है।

यह भी पढ़ेंः बच्चों का खुद से बात करना है एक अच्छा संकेत, जानें क्या हैं इसके फायदे

पेसिफायर की आदत छुड़ाने के लिए इमोशन्स को कहें बाय

हो सकता है बच्चे की पेसिफायर की आदत को छुड़ाने में आपके कुछ समय लगे। लेकिन पेसिफायर की आदत का छूटना आपके बच्चे के विकास के लिए हमेशा अच्छा होता है। आपका बच्चा अपने पेसिफायर को बहुत पसंद करता होगा लेकिन पेसिफायर की आदत को छुड़ाना जरूरी है। पेसिफायर की आदत को छोड़ने के लिए बच्चे को एकदम से फोर्स न करें बल्कि उसे धीरे-धीरे इससे दूर लाएं।

पेसिफायर की आदत के बारे में औरों को भी बताएं

हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि आपके साथ-साथ आपके घर में सबको आपके प्लान के बारे में पता हो। जैसे आप अपने बच्चे को हैंडल करते हैं, वैसे उसके बारे में सबको पता होना चाहिए। जिस समय पर आप अपने बच्चे को पेसिफायर देते हैं, उसी समय पर उसे देने की बात औरों से भी कहें। अगर आपका बच्चा डे-केयर जा रहा, या उसकी दादी उसे संभाल रहीं, तो उन्हें पहले से इसके बारे में बताएं। अगर आपके बच्चे को सुलाते समय पेसिफायर की आदत है, तो उसको पेसिफायर केवल उसी समय दें।

यह भी पढ़ेंः बच्चों में फोबिया के क्या हो सकते हैं कारण, डरने लगते हैं पेरेंट्स से भी!

पेसिफायर की आदत छुड़ाने के लिए उन्हें कंफर्ट दें

जब आप अपने बच्चे से पेसिफायर को दूर करते हैं, तो उन्हें शांत करने के लिए आपको कुछ और करने की जरूरत हो सकती है। बच्चें को गोद में लेकर सुलाना, लोरी गाना या मसाज करना उन्हें उनकी पेसिफायर की आदत को कम करने में मदद कर सकता है। पेसिफायर से बच्चों का जुड़ाव गहरा होता है क्योंकि यह उन्हें आराम और शांत करने के काम आता है। आपके बच्चे को पेसिफायर की आदत छुड़ाने के लिए आपको थोड़ी मेहनत करनी पड़ सकती है। आप उन्हें किसी सॉफ्ट टॉय या किसी सॉफ्ट कंबल की आदत लगा सकते हैं, जो उन्हें कंफर्ट और आराम दे सकें

पेसिफायर से बच्चे को अलग करें मगर प्यार से

अगर आपको बच्चे में पेसिफायर की आदत को एकदम से नहीं दूर करना तो धीरे-धीरे उसे इससे दूर करें। पहले उसके पेसिफायर के इस्तेमाल के समय को कम करें। जैसे उसे केवल रात को सोते समय पेसिफायर दें। उसके कुछ हफ्तों बाद उसको रात को भी पेसिफायर देना बंद करें। पेसिफायर की जगह बच्चे को कोई खिलौना दें या उसे अच्छा महसूस कराने के लिए कुछ और करें। एक बार जब आपके बच्चे को दिन में पेसिफायर के बिना सोने की आदत हो जाती है तब आपको उसके बेडटाइम के बारे में चिंता करने की जरूरत है। अपने बच्चे को पेसिफायर सोते समय देने के बाद जैसे ही आपका बच्चा सोए उसके बाद तुरंत पेसिफायर हटा दें। इससे बच्चे को खुद से सोने की आदत होगी। देखते ही देखते बच्चे में पेसिफायर की आदत छूट जाएगी।

यह भी पढ़ेंः पेरेंट्स का बच्चों के साथ सोना बढाता है उनकी इम्यूनिटी

आप अपने बच्चे की पेसिफायर की आदत छुड़ाना मुश्किल हो सकता है क्योंकि पेसिफायर का इस्तेमाल करने से आपको अपने बच्चे को रोते हुए देखने की आदत नहीं थी। लेकिन एक बार जब बच्चे से पेसिफायर हटाते हैं, तो उन्हें इसके बिना मैनेज करने में परेशानी होती है। हालांकि पेसिफायर की आदत छुड़ाना उनके स्वास्थ्य के लिए बेहतर साबित हो सकता है लेकिन ऐसा करने के लिए आपको अधिक समय और कोशिश करने की जरूरत पड़ेगी।

और पढ़ेंः

बच्चों के लिए सेंसरी एक्टिविटीज हैं जरूरी, सीखते हैं प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल

बच्चों में फोबिया के क्या हो सकते हैं कारण, डरने लगते हैं पेरेंट्स से भी!

बच्चों के लिए सेंसरी एक्टिविटीज हैं जरूरी, सीखते हैं प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल

‘बेबी वियरिंग’ से गहरा होता है मां और बच्चे का रिश्ता

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

संबंधित लेख:

    क्या यह आर्टिकल आपके लिए फायदेमंद था?
    happy unhappy"
    सूत्र

    शायद आपको यह भी अच्छा लगे

    Child Tantrums: बच्चों के नखरे का कारण कैसे जानें और इसे कैसे हैंडल करें

    बच्चों के नखरे का कारण कुछ भी हो सकता है। वे किसी भी वजह से जिद और नखरे दिखा सकते हैं। ऐसा मानिसक और शारीरिक स्थिति दोनों की वजह से हो सकता है। इस आर्टिकल में जानें बच्चों के नखरे दिखाने का कारण और इससे निपटने के आसान टिप्स

    चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Hemakshi J
    के द्वारा लिखा गया Surender Aggarwal
    पेरेंटिंग टिप्स, पेरेंटिंग जनवरी 14, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें

    बच्चों में फूड एलर्जी का कारण कहीं उनका पसंदीदा पीनट बटर तो नहीं

    बच्चों में फूड एलर्जी के कारण, बच्चों में फूड एलर्जी क्यों होता है, फूड एलर्जी के लिए क्या करें, कैसे पहचाने फूड एलर्जी kids Food Allergy, जानें और

    चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
    के द्वारा लिखा गया Lucky Singh
    बच्चों का पोषण, पेरेंटिंग दिसम्बर 13, 2019 . 4 मिनट में पढ़ें

    अपनी प्लेट उठाना और धन्यवाद कहना भी हैं टेबल मैनर्स

    बच्चों को टेबल मैनर्स कैसे सिखाएं, Table Manners in kids, टेबल मैनर्स क्यों जरुरी है, बच्चों को बाहर खाना सिखाएं, क्यों सिखाएं बच्चों को बाहर खाना

    चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
    के द्वारा लिखा गया Lucky Singh
    बच्चों का पोषण, पेरेंटिंग दिसम्बर 13, 2019 . 4 मिनट में पढ़ें

    बच्चों को खड़े होना सीखाना है, तो कपड़ों का भी रखें ध्यान

    बच्चों को खड़े होना सीखाना टिप्स क्यों जरूरी है, बच्चों को खड़े होना सीखाना कैसे आसान बनाएं, बच्चों को खड़े होने के लिए जरूरी टिप्स

    चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
    के द्वारा लिखा गया Lucky Singh
    पेरेंटिंग टिप्स, पेरेंटिंग दिसम्बर 13, 2019 . 4 मिनट में पढ़ें

    Recommended for you

    पैसिफायर-या-अंगूठा-चूसना

    पैसिफायर या अंगूठा चूसना बच्चे के लिए क्या दोनों गलत है?

    चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
    के द्वारा लिखा गया Shivam Rohatgi
    प्रकाशित हुआ अप्रैल 27, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
    शिशुओ-को-घमौरी

    जानें शिशुओं को घमौरी होने पर क्या करनी चाहिए?

    चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
    के द्वारा लिखा गया Shivam Rohatgi
    प्रकाशित हुआ अप्रैल 14, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
    Roseola- रास्योला

    Roseola: रोग रास्योला?

    के द्वारा लिखा गया Kanchan Singh
    प्रकाशित हुआ अप्रैल 11, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
    डाउन सिंड्रोम की समस्या

    डाउन सिंड्रोम की समस्या से जूझ रहे लोगों के सामने जानिए क्या होते हैं चैलेंजेस

    चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
    के द्वारा लिखा गया Bhawana Awasthi
    प्रकाशित हुआ मार्च 23, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें