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पेसिफायर की आदत कहीं छीन न ले बच्चों की मुस्कान की खुबसूरती

पेसिफायर की आदत कहीं छीन न ले बच्चों की मुस्कान की खुबसूरती

बच्चों के पैदा होने के लगभग चार से पांच महीने के बाद ही उन्हें कुछ चूसने की आदत लग जाती है। इसी के चलते बच्चों को पेसिफायर की आदत (Pacifier Habit) भी बचपन से ही लग जाती है। पेसिफायर की आदत, जहां एक तरफ बच्चे को होती है, वहीं माता-पिता को भी बच्चों को पेसिफायर देने की जरूरत महसूस होती है। पेसिफायर बच्चे (Pacifier Habit) को घंटों शांत बनाए रखने में मदद कर सकता है। शिशुओं के पास अपनी जिज्ञासा को कंट्रोल करने के लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं होता। वे अपनी परेशानी को कम करने के लिए किसी से बात नहीं कर सकते, अगर उन्हें ठंड लग रही है, तो वे आपसे बोल कर कंबल नहीं मांग सकते, वे चीजों को कंट्रोल करने के लिए अपने हाथों का उपयोग नहीं कर सकते। पेसिफायर की आदत (Pacifier Habit) उन्हें खुद को शांत करने का एक तरीका होता है।

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बच्चे को पेसिफायर दें या न दें वे किसी अन्य चीज को चूसना जारी ही रखेंगे। अब वह चाहें अंगूठा हो, उंगली हो, बोतल या ब्रेस्टफिडिंग (Breastfeeding) उनके लिए चूसना उनको खुद को शांत रखने का एकमात्र तरीका है। ऐसे में बच्चों को पेसिफायर देना नई मम्मियों को अपने लिए थोड़ा समय निकालने का मौका देता है। साथ ही बच्चे को भी उनके हिस्से की शांति मिलती है।

अपने बच्चे की पेसिफायर की आदत को रोकने के लिए आप इन चीजों को ध्यान में रख सकते हैं

सही समय पर पेसिफायर की आदत (Pacifier Habit) को छुड़ाएं

पेसिफायर की आदत बच्चों में सडन इंफेंट डेथ सिंड्रॉम (Sudden Infant Death Syndrome, SIDS) की आशंका को कम कर सकती है। इसलिए यह जरूरी है कि जब तक वह छह महीने का नहीं हो जाता, तब तक अपने बच्चे को पेसिफायर की आदत लगाएं। जब SIDS का खतरा कम हो जाता है, तो उसे पेसिफायर की आदत को धीरे-धीरे कम करने की कोशिश करें। अपने बच्चे को पेसिफायर की आदत (Pacifier Habit) को सही समय पर कम करना जरूरी है। लेकिन, अगर आप अपने बच्चे के रुटिन में कोई नया बदलाव करते हैं, तो उसे पेसिफायर दे सकते हैं, क्योंकि यह उसे एक्सट्रा केयर और आराम देता है।

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दो साल तक के बच्चों को पेसिफायर की आदत (2 Years baby Pacifier Habit)

आमतौर पर दो साल से पहले आपके बच्चे को दांत (Childs teeth) की कोई समस्या नहीं होती। पेसिफायर के इस्तेमाल से होने वाली कोई भी परेशानी पेसिफायर का इस्तेमाल छोड़ने के छह महीने के अंदर ठीक हो जाती है। दो साल के बाद बच्चों में पेसिफायर की आदत (Pacifier Habit) की वजह से बच्चों के टिथ अलाइमेंट की परेशानी हो सकती है। अगर बच्चों में पेसिफायर की आदत चार साल के बाद भी जारी रहती है। जब उनके पर्मानेंट टिथ आने लगते हैं तो यह उनके दांतों में लंबी परेशानी खड़ी कर सकते हैं।

12 महीने तक छुड़ाएं पेसिफायर की आदत (1 Year baby Pacifier Habit)

कुछ एक्सपर्ट कहते हैं कि 12 महीने (12 Month) के बाद बच्चों को बार-बार पेसिफायर या चुसनी देना उनकी भाषा के विकास में रुकावट हो सकती है। इसका सबसे मुख्य कारण है कि अगर बच्चे के मुंह में हमेशा पेसिफायर होगा, तो वह कुछ बोलने की प्रेक्टिस ठीक से नहीं कर पाएगा। इसके अलावा अगर वह बोलने की कोशिश कर रहा है और साथ में रोता है तो उसे पेसिफायर की आदत लगाना उसके बोलने की आदत को खत्म कर सकता है। साथ ही अगर बच्चे को पेसिफायर की आदत हमेशा होती है, तो उसके होंठ और जीभ के विकास में परेशानी हो सकती है। पेसिफायर (Pacifier) का बहुत ज्यादा इस्तेमाल बच्चे की होंठ (Lip), जीभ (Tongue) और दांत के विकास के बीच में आ सकता है।

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पेसिफायर की आदत (Pacifier Habit) छुड़ाने के लिए इमोशन्स को कहें बाय

हो सकता है बच्चे की पेसिफायर की आदत को छुड़ाने में आपके कुछ समय लगे। लेकिन पेसिफायर की आदत का छूटना आपके बच्चे के विकास के लिए हमेशा अच्छा होता है। आपका बच्चा अपने पेसिफायर को बहुत पसंद करता होगा लेकिन पेसिफायर की आदत को छुड़ाना जरूरी है। पेसिफायर की आदत को छोड़ने के लिए बच्चे को एकदम से फोर्स न करें बल्कि उसे धीरे-धीरे इससे दूर लाएं।

पेसिफायर की आदत (Pacifier Habit) के बारे में औरों को भी बताएं

हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि आपके साथ-साथ आपके घर में सबको आपके प्लान के बारे में पता हो। जैसे आप अपने बच्चे को हैंडल करते हैं, वैसे उसके बारे में सबको पता होना चाहिए। जिस समय पर आप अपने बच्चे को पेसिफायर देते हैं, उसी समय पर उसे देने की बात औरों से भी कहें। अगर आपका बच्चा डे-केयर (Day Care) जा रहा, या उसकी दादी उसे संभाल रहीं, तो उन्हें पहले से इसके बारे में बताएं। अगर आपके बच्चे को सुलाते समय पेसिफायर की आदत है, तो उसको पेसिफायर केवल उसी समय दें।

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पेसिफायर की आदत (Pacifier Habit) छुड़ाने के लिए उन्हें कंफर्ट दें

जब आप अपने बच्चे से पेसिफायर को दूर करते हैं, तो उन्हें शांत करने के लिए आपको कुछ और करने की जरूरत हो सकती है। बच्चें को गोद में लेकर सुलाना, लोरी गाना या मसाज करना उन्हें उनकी पेसिफायर की आदत को कम करने में मदद कर सकता है। पेसिफायर या चुसनी से बच्चों का जुड़ाव गहरा होता है क्योंकि यह उन्हें आराम और शांत करने के काम आता है। आपके बच्चे को पेसिफायर की आदत छुड़ाने के लिए आपको थोड़ी मेहनत करनी पड़ सकती है। आप उन्हें किसी सॉफ्ट टॉय या किसी सॉफ्ट कंबल की आदत लगा सकते हैं, जो उन्हें कंफर्ट और आराम दे सकें

पेसिफायर से बच्चे को अलग करें मगर प्यार से

अगर आपको बच्चे में पेसिफायर की आदत (Pacifier Habit) या चुसनी को एकदम से नहीं दूर करना तो धीरे-धीरे उसे इससे दूर करें। पहले उसके पेसिफायर के इस्तेमाल के समय को कम करें। जैसे उसे केवल रात को सोते समय पेसिफायर दें। उसके कुछ हफ्तों बाद उसको रात को भी पेसिफायर देना बंद करें। पेसिफायर की जगह बच्चे को कोई खिलौना दें या उसे अच्छा महसूस कराने के लिए कुछ और करें। एक बार जब आपके बच्चे को दिन में पेसिफायर के बिना सोने की आदत हो जाती है तब आपको उसके बेडटाइम के बारे में चिंता करने की जरूरत है। अपने बच्चे को पेसिफायर सोते समय देने के बाद जैसे ही आपका बच्चा सोए उसके बाद तुरंत पेसिफायर हटा दें। इससे बच्चे को खुद से सोने की आदत होगी। देखते ही देखते बच्चे में पेसिफायर की आदत (Pacifier Habit) छूट जाएगी।

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आप अपने बच्चे की पेसिफायर की आदत (Pacifier Habit) छुड़ाना मुश्किल हो सकता है क्योंकि पेसिफायर का इस्तेमाल करने से आपको अपने बच्चे को रोते हुए देखने की आदत नहीं थी। लेकिन एक बार जब बच्चे से पेसिफायर हटाते हैं, तो उन्हें इसके बिना मैनेज करने में परेशानी होती है। हालांकि पेसिफायर की आदत छुड़ाना उनके स्वास्थ्य के लिए बेहतर साबित हो सकता है लेकिन ऐसा करने के लिए आपको अधिक समय और कोशिश करने की जरूरत पड़ेगी।

हम उम्मीद करते हैं कि आपको पेसिफायर की आदत (Pacifier habit) से संबंधित ये आर्टिकल पसंद आया होगा। अगर आपके मन में कोई प्रश्न हो, तो डॉक्टर से जरूर पूछें। आप स्वास्थ्य संबंधी अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है, तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं और अन्य लोगों के साथ साझा कर सकते हैं।

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सूत्र

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 15/07/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड