ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर (ODD) के कारण भी हो जाते हैं बच्चे जिद्दी!

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट मई 21, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
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बच्चों को संभालना और उनके व्यवहार को समझना पेरेंट्स के लिए आसान नहीं होता। अक्सर बच्चे कुछ ऐसा कर देते हैं या कह देते हैं कि जिसका पेरेंट्स को अनुमान भी नहीं होता। क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप जो बच्चों को कहते हैं, वह बच्चे सिरे से नकार देते हैं? वो आपकी बात नहीं मानते, तो इसके पीछे भी एक कारण हो सकता है। ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर (Oppositional Defiant Disorder) बच्चों में एक व्यवहारिक समस्या है, जिसकी वजह से बच्चा आपकी बात नहीं सुनता और अपने हिसाब से चीजें करता है।

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ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर (ODD) क्या है?

ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर (ODD) बचपन की एक व्यवहारिक समस्या है।

ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर (ODD) वाले बच्चे में लक्षण :

  • जो लोग कहते हैं वह कभी नहीं करता
  • सोचता है कि वह जो उसे करने को कहा जा रहा वो गलत है
  • चीजों को करने के लिए कहा जाए, तो वह गुस्सा और चिड़चिड़ा हो जाता है

बच्चे कभी-कभी माता-पिता की बात नहीं मानते हैं। खासकर तब जब वे थके हुए, परेशान या निराश हो। लेकिन, जिस बच्चे को ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर है वह बच्चा ऐसा व्यवहार आमतौर पर करता है। इसके अलावा कुछ बच्चों में ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर व्यवहार इतना गंभीर होता है कि बच्चे को साधारण रोजमर्रा के काम करने में भी परेशानी होती है।

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ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर का डायग्नोस

ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर को डायग्नोस करना इसलिए आसान होता है क्योंकि इससे पीड़ित बच्चा लगातार गुस्सा और बेचैने रहता है। इस तरह की साइकोलॉजी के साथ-साथ बच्चा नकारात्मक व्यवहार भी करने लगता है, जो दूसरों के लिए परेशानी बन जाता है। ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्ड को डायग्नोस करने के लिए देखें कि बच्चे में निम्न में से कम से कम चार लक्षण होने चाहिए।

अगर आपका बच्चा:

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ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर के लक्षण कब दिखते हैं:

ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर को लक्षण पेरेंट्स आसानी से पहचान सकते हैं। कब दिखते हैं इसके लक्षण:

  • बार-बार
  • एक तरह से जो उनकी हर रोज की एक्टिविटी में इंटरफियर करें
  • कम से कम छह महीने के लिए।

अगर आपको लगता है कि आपके बच्चे में ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर हो सकता है, तो अपने फिजिशयन के साथ बाल रोग विशेषज्ञ, मनोचिकित्सक या मनोवैज्ञानिक से बात करें। ये स्वास्थ्य ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्ड (ODD) को डायग्नोस कर सकते हैं। हो सकता है आपका डॉक्टर आपके बच्चे के लिए मानसिक स्वास्थ्य के इलाज की बात करें। साथ ही यह भी जान लें कि डॉक्टर से इलाज कराने का मतलब हमेशा यह नहीं होता है कि आपके बच्चे को कोई गंभीर समस्या है।

कैसे मैनेज करें ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर

बच्चों में ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर (ODD) को मैनेज करना तब आसान हो जाता है, जब माता-पिता यह मान लेते हैं कि उनके बच्चे को यह डिसऑर्डर है। इसके लिए माता-पिता का उनके व्यवहार को लेकर अपने अंदर सहनशक्ति लानी पड़ती है। उन्हें यह मानना पड़ेगा कि बच्चा चुनौतीपूर्ण तरीकों से व्यवहार करेगा

इसके बाद पेरेंट्स के लिए अगला कदम होगा कि वे हेल्थ प्रोफेशनल  बिहेवियर मैनेजमेंट प्लान बनाने के लिए काम करें, जो पेरेंट्स के लिए बच्चों के व्यवहार को संभालना आसान बना सकता है।

एक अच्छा प्लान आपके ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर वाले बच्चे की मदद करेगी:

  • उसके व्यवहार को सुधारना सीखें और समझें कि यह दूसरे लोगों को कैसे प्रभावित करता है
  • गुस्सा और चिंता जैसी भावनाओं को मैनेज करें
  • जिस तरह से वह समस्याओं को हल करता है, उसे सुधारता है और दूसरे बच्चों के साथ बात करता है।

ये बातें आपके बच्चे को दोस्त बनाने और उनके साथ रहने में मदद करेगी। इस तरह से ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर से लड़ रहे बच्चे को लोगों के साथ रहने में और उनके साथ बात करने में मदद मिलेगी।

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ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर के लिए बिहेवियर मैनेजमेंट प्लान

एक अच्छा बिहेवियर मैनेजमेंट प्लान भी आपकी मदद करने के साथ आपके बच्चे के चुनौतीपूर्ण व्यवहार का सामना करने में मदद करेगा:

  • अपने बच्चे के व्यवहार के कारणों को समझें
  • यह सुनिश्चित करें कि आप अपने बच्चे के सकारात्मक व्यवहार को कैसे बढ़ा सकते हैं और उसके चुनौतीपूर्ण व्यवहार को कैसे मैनेज कर सकते हैं
  • आपके बच्चे की भावनाओं को मैनेज करना और सोशल स्किल में सुधार करने में मदद करना
  • अपने पारिवारिक संबंधों को मजबूत बनाने पर काम करें।

यह आशा करना बहुत सामान्य है कि आपका बच्चा ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर से निजात पा लेगा। लेकिन, ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर खुद से ठीक नहीं होता। आपके बच्चे को जल्द ही इसके डायग्नोसिस और इलाज की जरूरत होती है। यह आपके बच्चे को उन कौशलों को विकसित करने में मदद करेगा, जो उसे दोस्त बनाने, लोगों से मिलने और उनसे संबंध बनाए रखने में मदद करेगा। साथ ही जीवन में बाद के दिनों में बच्चे को अपनी चीजें मैनेज करने में मदद मिलेगी।

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ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर पर कैसे काम करें

घर पर अपने बच्चे के ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर व्यवहार पर काम करने के लिए कुछ टिप्स इस तरह से हैः

  • ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर से पीड़ित बच्चों में पॉजिटिव व्यवहार को मोटिवेट करने के लिए उनकी तारीफ करें।
  • ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर से पीड़ित बच्चों के व्यवहार में बदलाव के लिए उन्हें रिवॉर्ड दें। ये काम विशेष रूप से तीन-आठ साल की उम्र के बच्चों के लिए अच्छा है।
  • ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर वाले बच्चों से सीधे बात करें, उन्हें किसी चीज के लिए प्रेशर न दें
  • नकारात्मक रिजल्ट का उपयोग करने से बचने की कोशिश करें। इसलिए अगर आपका बच्चा वह नहीं करता है, जो आप पूछते हैं, तो उसे कहें, ‘यह आखिरी बार है जब मैं आपको बताने जा रहा हूं’।

आपके बच्चे को यह जानना होगा कि वह आपके लिए महत्वपूर्ण है। इस बात को अपने बच्चे को बताने के सबसे अच्छे तरीकों में से एक सबसे पॉजिटिव पार्ट होगा अपने बच्चे के साथ समय बिताना और वो करना जो आपका बच्चा पसंद करता है। यह आपके बच्चे के साथ अपने रिश्ते को मजबूत करने में मदद करेगा।

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पेरेंट्स की भी देखभाल जरूरी

ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर से पीड़ित बच्चे के साथ आपकी खुद की देखभाल भी जरूरी है। यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं कि पेरेंट्स अपनी देखभाल कैसे कर सकते हैं:

  • किताब पढ़ें, टीवी शो देखने या टहलने जाने के लिए हर दिन कुछ समय अपने लिए निकालें।
  • दोस्तों या परिवार के सदस्यों से अपने बच्चे की थोड़ी देर देखभाल करने के लिए कहें ताकि आपके पास खुद के लिए कुछ समय बच सके।
  • कुछ शारीरिक गतिविधि के लिए समय बनाएं – उदाहरण के लिए, चलना, योग या तैराकी। थोड़ा सा व्यायाम आपको अपने बच्चे के साथ काम करने के लिए अधिक एनर्जी दे सकता है।
  • अपने पार्टनर के साथ एक्टिविटीज के लिए कुछ समय निकालें। ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर की वजह से आपके बच्चे का  व्यवहार आपके रिश्ते के लिए तनावपूर्ण हो सकता है खासकर अगर आप और आपका साथी इस बात से सहमत नहीं हैं कि आपके बच्चे के व्यवहार को कैसे संभालना है।
  • अगर आपको लगता है कि आप अपने बच्चे की समस्या का सामना नहीं कर सकते हैं, तो अपने डॉक्टर से बात करें।

ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर से जूझ रहे बच्चों के माता-पिता से सलाह और अनुभव लेना एक बड़ी मदद हो सकता है।

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ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर के रिस्क

यह कहना कठिन है कि बच्चों में ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर क्यों विकसित होता है। यह किसी एक कारण से नही होता। लेकिन, कुछ रिस्क जो ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर से जुड़े हैं:

  • टेंम्परामेंट – चाहे बच्चे सहज हों या नियमों को बहुत ज्यादा पसंद ना करते हो
  • बच्चों और माता-पिता के बीच संबंध – अगर बच्चे और माता-पिता के बीच ज्यादा प्यार न हो
  • स्कूल में परफॉर्मेंस – अगर बच्चों को सीखने में कठिनाई होती है
  • रोजमर्रा की जिंदगी में बोलने और भाषा की समस्याएं
  • सोशल स्किल, प्रॉब्लम सॉल्विंग और याद रखने में परेशानी
  • पालन-पोषण और पारिवारिक समस्या, अनुशासन और बहुत अधिक पारिवारिक तनाव

ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर से पीड़ित बच्चों में अक्सर लर्निंग डिसेबिलिटी, अटेंशन डिफिसिट हाइपर एक्टिविटी, एंग्जायटी डिसऑर्डर, मूड स्विंग या बोलने में परेशानी हो सकती है।

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