‘मकबूल एक्टर’ इरफान खान का निधन, मुंबई में ली आखिरी सांस

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट मई 27, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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बॉलीवुड के चहेते, मशहूर और ‘मकबूल एक्टर’ इरफान खान का आज यानी 29 अप्रैल को निधन हो गया है। उन्होंने मुंबई के कोकिलाबेन धीरुभाई अंबानी अस्पताल में आखिरी सांस ली। जहां उन्हें 28 अप्रैल को कोलन इंफेक्शन की वजह से आईसीयू में भर्ती करवाया गया था। आपको बता दें कि, तीन दिन पहले ही उनकी मां का भी देहांत हो गया था और मौजूदा लॉकडाउन की वजह से वह अपनी मां के पार्थिव शरीर को सिर्फ वीडियो कॉल के जरिए देख पाए थे। इस जानकारी के दो दिन बाद 28 अप्रैल तक इरफान के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं थी, कि वह कहां हैं। इरफान के निधन पर बॉलीवुड और अन्य जगत के कई लोगों ने शोक व्यक्त किया है।

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अभिनेता इरफान खान का निधन- आखिरी बार ‘अंग्रेजी मीडियम’ में आए थे नजर

53 वर्षीय इरफान खान कुछ महीने पहले ही विदेश से न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर का ट्रीटमेंट करवाकर भारत लौटे थे। इरफान खान ने इस बीमारी की जानकारी अपने फैन्स को मैसेज देकर दी थी। आपको बता दें कि, इरफान खान का निधन होने से पहले उन्होंने आखिरी बार अंग्रेजी मीडियम मूवी में अभिनय किया था, जिसकी आय को लॉकडाउन की वजह से काफी झटका लगा था। इरफान ने बॉलीवुड समेत हॉलीवुड में भी कई फिल्में की और उन्हें एक संपूर्ण एक्टर माना जाता था। उन्होंने मकबूल, पान सिंह तोमर, हासिल, द लंच बॉक्स, हैदर, गुंडे, पीकू, तल्वार और हिंदी मीडियम में दमदार अभिनय के जरिए लोगों का दिल जीता। हालांकि, उनकी शानदार एक्टिंग की लिस्ट टेलीविजन शो से शुरू होकर कई फिल्मों तक जाती है।

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निधन से पहली रात को स्पोक्सपर्सन ने बताया था मृत्यु की खबरों को अफवाह (Irrfan Khan Death)

28 अप्रैल को इरफान खान को कोलन इंफेक्शन की शिकायत पर अस्पताल के आईसीयू में भर्ती करवाया गया था। जिसके बाद उनके स्पोक्सपर्सन ने कहा था कि, ‘हां यह सच है कि इरफान खान को कोलोन इंफेक्शन की वजह से मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल के आईसीयू में भर्ती करवाया गया है और वह डॉक्टर की निगरानी में हैं। हम उनके जल्द ही स्वस्थ होने की कामना करते हैं।’ लेकिन इसी दिन देर रात को अभिनेता के निधन की खबर चलने लगी। जिसपर उनके स्पोक्सपर्सन ने इन बातों को अफवाह बताकर कहा था कि वह अभी वेंटिलेटर पर हैं। उन्होंने कहा कि, ‘यह काफी निराशाजनक है कि इरफान के स्वास्थ्य के बारे में इस तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हम लोगों की चिंता का सम्मान करते हैं, लेकिन यह दिल दुखाने वाली बात है कि कुछ स्त्रोत इस तरह की अफवाहें फैलाकर पैनिक सिचुएशन क्रिएट कर रहे हैं। इरफान खान काफी मजबूत व्यक्ति हैं और वह अभी भी लड़ाई लड़ रहे हैं।’ हालांकि, 29 अप्रैल को इरफान खान की मृत्यु की आधिकारिक जानकारी दे दी गई।

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न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर क्या होता है? (What is Neuroendocrine Tumor)

न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर शरीर के न्यूरोएंडोक्राइन सिस्टम की विशेष सेल्स (कोशिकाओं) में शुरू होता है। जब इन कोशिकाओं का विकास असामान्य रूप से होने लगता है, तो वह ट्यूमर का रूप ले लेता है। न्यूरोएंडोक्राइन सिस्टम की यह कोशिकाएं हॉर्मोन उत्पादित करने वाली कोशिकाओं और नर्व सेल्स की तरह होती हैं। यह ट्यूमर काफी दुर्लभ होता है और शरीर के किसी भी हिस्से में विकसित हो सकता है, जैसे- फेफड़े, पैंक्रियाज, रेक्टम, छोटी आंत, अपैंडिक्स आदि। न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर होने की वजह से मुख्यतः इन कोशिकाओं में दो तरह के परिवर्तन होते हैं, पहला हॉर्मोन को अत्याधिक उत्पादित करना और दूसरा हॉर्मोन का उत्पादन कम या बिल्कुल न होना। वैसे इसके प्रकारों में एड्रेनल कैंसर, पैंक्रियाटिक न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर आदि शामिल हैं।

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न्यूरोएंडोक्राइन कैंसर के लक्षण क्या होते हैं?

न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर होने पर शुरुआत में शरीर में कोई लक्षण या संकेत नहीं दिखते हैं। जब यह कैंसर थोड़ा विकसित हो जाता है, तो धीरे-धीरे शरीर में लक्षण दिखने शुरू होते हैं, जैसे-

  • ट्यूमर की वजह से दर्द
  • शारीरिक थकान
  • वजन घटना या बढ़ना
  • डायरिया
  • चक्कर आना
  • बार-बार पेशाब आना
  • त्वचा में लालपन या खुजली
  • स्किन रैशेज, आदि

जरूरी नहीं कि सभी मरीजों में यह लक्षण दिखें, हो सकता है किसी-किसी मरीज में अलग तरह के लक्षण भी दिख सकते हैं। इसके अलावा इन लक्षणों के साथ कई अन्य तरह के भी लक्षण दिख सकते हैं। सही और पर्याप्त जानकारी के लिए किसी डॉक्टर से परामर्श लें।

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इस ट्यूमर के होने के कारण क्या हैं? (Causes of Neuroendocrine Tumor)

न्यूरोएंडोक्राइन टयूमर होने के पीछे का वास्तविक कारण तो सही तरह से बताया नहीं जा सकता। न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर की शुरुआत तब होती है, जब न्यूरोएंडोक्राइन सेल्स के डीएनए में बदलाव की वजह से उसका विकास प्रभावित होता है।लेकिन, विशेषज्ञ इसके पीछे आपको या आपकी फैमिली में किसी को निम्नलिखित बीमारियां होने की वजह मानते हैं। जैसे-

  • वॉन हिप्पल-लिंडाउ सिंड्रोम (Von Hippel-Lindau Syndrome) की वजह से शरीर में ट्यूमर बनने लगता है और शरीर के कई हिस्सों में फ्लूड से भरी सैक (थैली) बनने लगती है। यह एक नॉन-फंक्शनिंग ट्यूमर होता है और धीरे-धीरे विकसित होता है।
  • मल्टीपल एंडोक्राइन नियोप्लाजिया टाइप 1 (Multiple Endocrine Neoplasia Type 1) की वजह से पैंक्रियाज, पैराथायरॉइड ग्लैंड, पिट्यूटरी ग्लैंड  व अन्य शारीरिक अंगों में ट्यूमर विकसित होने लगता है।
  • न्यूरोफाइब्रोमेटोसिस टाइप 1 (Neurofibromatosis Type 1) की वजह से आपकी एड्रेनल ग्लैंड में ट्यूमर का विकास होने लगता है।

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किन टेस्ट की मदद से होती है इस ट्यूमर की जांच?

न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर की जांच या उसका पता लगाने के लिए डॉक्टर कई तरह के टेस्ट करवा सकता है, जिससे वह इसके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर सके। जैसे-

  1. सीटी स्कैन की मदद से शरीर के अंदर का बारीक एक्सरे मिल जाता है।
  2. खून और पेशाब की जांच से आपके शरीर में उत्पादित होने वाले हॉर्मोन की जांच की जाती है, कि क्या उनके उत्पादन में किसी तरह की बढ़ोतरी या कमी तो नहीं आई है।
  3. एक्सरे की मदद से रेडिएशन की कम मात्रा के साथ आपके अंदरुनी शरीर की तस्वीर ली जाती है।
  4. एमआरआई में मैगनेट और रेडियो वेव्स की मदद से शरीर के अंगों की तस्वीर ली जाती है।
  5. बायोप्सी की मदद से डॉक्टर आपके शरीर से छोटा-सा टिश्यू निकालकर माइक्रोस्कॉप की मदद से ट्यूमर सेल्स की जांच करता है।

न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर का ट्रीटमेंट

न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर का ट्रीटमेंट उसकी स्टेज पर निर्भर करता है। डॉक्टर ट्यूमर के विकास और स्टेज की जांच करके उचित ट्रीटमेंट करते हैं। इस ट्यूमर के ट्रीटमेंट से पहले ट्यूमर के प्रकार, इसके कैंसरीकृत होने या न होने या इसके शरीर में इसके प्रसार के बारे में पता किया जाता है। जिसके बाद इसकी सर्जरी, हॉर्मोन थेरिपी, रेडिएशन थेरिपी, कीमोथेरिपी, एंबोलाईजेशन थेरिपी, टारगेटेड थेरिपी आदि की सहायता ली जाती है।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

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