डायबिटिक या नॉन डायबिटिक लोगों में भी हो सकती है लो या हाय शुगर की बीमारी!

    डायबिटिक या नॉन डायबिटिक लोगों में भी हो सकती है लो या हाय शुगर की बीमारी!

    नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इनफॉरमेशन (National Center for Biotechnology Information) में पब्लिश्ड साल 2019 के रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार भारत में 77 मिलियन डायबिटीज के पेशेंट रजिस्टर किये गए हैं। आने वाले वक्त में ये आंकड़ा और बढ़ सकता है। ऐसे में डायबिटीज (Diabetes) से जुड़ी हर हेल्थ कंडिशन (Health condition) को समझना जरूरी है। इसलिए डायबिटीज से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियों को समझना आवश्यक है। आज इस आर्टिकल में हायपरग्लाइसीमिया और हायपोग्लाइसेमिया (Hyperglycemia vs Hypoglycemia) एवं हायपरग्लाइसीमिया और हायपोग्लाइसेमिया के लक्षण और इलाज के साथ-साथ इससे जुड़ी अन्य जानकारियां भी करेंगे शेयर।

    • हायपरग्लाइसीमिया और हायपोग्लाइसेमिया क्या है?
    • हायपरग्लाइसीमिया और हायपोग्लाइसेमिया के लक्षण क्या हैं?
    • हायपरग्लाइसीमिया और हायपोग्लाइसेमिया की समस्या के कारण क्या हैं?
    • हायपरग्लाइसीमिया और हायपोग्लाइसेमिया का इलाज कैसे किया जाता है?

    चलिए अब एक-एक कर हायपरग्लाइसीमिया और हायपोग्लाइसेमिया (Hyperglycemia and Hypoglycemia) से जुड़े इन सवालों का जवाब जानते हैं।

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    हायपरग्लाइसीमिया और हायपोग्लाइसेमिया (Hyperglycemia and Hypoglycemia) क्या है?

    हायपरग्लाइसीमिया हाय ब्लड शुगर (High blood sugar) की समस्या को दर्शाता है। वही अगर शरीर में किसी कारण से ब्लड शुगर लेवल कम (Low Blood sugar level) हो जाए, तो ऐसी स्थिति हायपोग्लाइसेमिया कहलाती है। बॉडी में ब्लड शुगर लेवल बढ़ना (Blood sugar level high) या सामान्य से कम होना, दोनों ही हानिकारक है। इसलिए ब्लड शुगर लेवल को बैलेंस में रखना आवश्यक माना जाता है। ऐसी धारणा है कि ब्लड शुगर लेवल बढ़ना या कम होना सिर्फ डायबिटीज पेशेंट के साथ ही होता है, लेकिन यह नॉन डायबिटिक (Non-diabetic) पेशेंट के साथ भी हो सकता है। इसलिए हायपरग्लाइसीमिया और हायपोग्लाइसेमिया (Hyperglycemia vs Hypoglycemia) दोनों ही स्थिति को समझना बेहद जरूरी है। आर्टिकल में आगे हाइपरग्लाइसीमिया और हायपोग्लाइसेमिया के लक्षण को समझेंगे।

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    हायपरग्लाइसीमिया और हायपोग्लाइसेमिया के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of Hyperglycemia vs Hypoglycemia)

    हायपरग्लाइसीमिया और हायपोग्लाइसेमिया के लक्षण निम्नलिखित हैं।

    हायपरग्लाइसीमिया के लक्षण (Symptoms of Hyperglycemia)

    • बार बार भूख (Hunger) लगना
    • चिड़चिड़ापन (Irritability) महसूस होना।
    • ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होना।
    • थकान (Fatigue) महसूस होना।
    • अत्यधिक पसीना (Sweating) आना।
    • भ्रम (Confusion) में रहना।
    • दिल की धड़कन तेज (Fast heartbeat) होना।
    • हाथ कांपना (Shaking)।
    • सिरदर्द (Headache) होना।
    • नर्व डैमेज (Nerve damage) होना।
    • स्किन (Skin) से जुड़ी परेशानी होना।

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    हायपोग्लाइसेमिया के लक्षण (Symptoms of Hypoglycemia)

    • मुंह सूखना (Dry mouth)।
    • कमजोरी (Weakness) महसूस होना।
    • सिरदर्द (Headache) होना।
    • बार बार टॉयलेट (Frequent urination) जाना।
    • देखने में कठिनाई (Blurry vision) होना।
    • जी मिचलाने (Nausea) की समस्या होना।
    • भ्रम (Confusion) में रहना।
    • सांस लेने में कठिनाई (Shortness of breath) होना।

    हायपरग्लाइसीमिया और हायपोग्लाइसेमिया के लक्षण को अगर ध्यान से समझा जाए, तो दोनों में फर्क आसानी से महसूस किया जा सकता है। हालांकि हायपरग्लाइसीमिया और हायपोग्लाइसेमिया (Hyperglycemia vs Hypoglycemia) दोनों में ही लापरवाही किसी गंभीर स्थिति को दावत देने में सक्षम मानी जाती है।

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    हायपरग्लाइसीमिया और हायपोग्लाइसेमिया की समस्या के कारण क्या हैं? (Cause of Hyperglycemia and Hypoglycemia)

    हायपरग्लाइसीमिया और हायपोग्लाइसेमिया दोनों एक जैसे शब्द लग सकते हैं, लेकिन दोनों ही अलग-अलग कारणों से होने वाली बीमारी है।

    हायपरग्लाइसीमिया के कारण (Cause of Hyperglycemia)-

    • जरूरत से ज्यादा इंसुलिन (Insulin) का सेवन करना।
    • डायबिटीज की दवाओं का सेवन करना।
    • कम खाना या खाने के बीच ज्यादा गैप होना।
    • हेल्दी डायट फॉलो किये बिना एक्सरसाइज करना।
    • कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम लेना।
    • असंतुलित आहार का सेवन करना।
    • अत्यधिक एल्कोहॉल का सेवन करना।
    • एस्प्रिन (Aspirin) का सेवन करना।
    • बर्थ कंट्रोल पिल्स (Birth control pills) लेना।
    • स्टेरॉयड (Steroids) का सेवन करना।
    • ब्लड प्रेशर (Blood pressure) की दवाओं का सेवन करना।
    • एंटीबायोटिक्स (Antibiotics) का सेवन करना।

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    हायपोग्लाइसेमिया के कारण (Cause of Hypoglycemia)-

    नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार डायबिटीज की समस्या होने पर अगर इन्सुलिन का सेवन जरूरत से ज्यादा किया जाए, तो ऐसी स्थिति में हायपोग्लाइसेमिया का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए इन्सुलिन (Insulin) या डायबिटीज की दवाओं (Diabetes medicine) का सेवन करते हैं, तो समय-समय पर डॉक्टर से कंसल्टेशन करना चाहिए। वहीं दवा या इन्सुलिन की डोज भी प्रिस्क्रिप्शन के अनुसार ही लेना चाहिए।

    हायपरग्लाइसीमिया और हायपोग्लाइसेमिया का इलाज कैसे किया जाता है? (Treatment for Hyperglycemia and Hypoglycemia)

    हायपरग्लाइसीमिया का इलाज (Treatment for Hyperglycemia)-

    अगर आपको डायबिटीज नहीं है, तो हायपरग्लाइसीमिया का इलाज निम्नलिखित तरह से किया जा सकता है। जैसे:

    • आधे घंटे के लिए नियमित एक्सरसाइज (Workout) या योग (Yoga) करें।
    • अगर आप एक्सरसाइज या योग नहीं कर पा रहें हैं, तो नियमित रूप से आधे घंटे के लिए टहलें (Walk)।
    • संतुलित आहार (Balanced diet) का सेवन करें।
    • वजन संतुलित (Balanced weight) रखें।
    • स्मोकिंग (Smoking) और एल्कोहॉल (Alcohol) से दूर रहें।

    इन बातों का ध्यान रखें और डॉक्टर से कंसल्टेशन में रहें।

    हायपोग्लाइसेमिया का इलाज (Treatment for Hypoglycemia)

    अगर आपको डायबिटीज पेशेंट हैं या नहीं हैं, तो हायपरग्लाइसीमिया का इलाज निम्नलिखित तरह से किया जा सकता है। जैसे:

    अगर आपको डायबिटीज नहीं है, तो ऐसी स्थिति में हायपरग्लाइसीमिया का इलाज ऊपर बताये हायपरग्लाइसीमिया के टिप्स अनुसार किया जा सकता है। हायपरग्लाइसीमिया डायग्नोस होने के बाद डॉक्टर से संपर्क में रहें और ब्लड शुगर लेवल जांच (Blood sugar level check) करते रहें।

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    अगर आपको डायबिटीज पेशेंट हैं, तो हायपरग्लाइसीमिया के इलाज के लिए नीचे दिए टिप्स को फॉलो करें।

    • ब्लड शुगर लेवल चेक करते रहें।
    • फिजिकल एक्टिविटी ज्यादा करें।
    • कार्बोहायड्रेट के सेवन के बारे में डॉक्टर से सलाह लें।

    नोट: अगर आपका शुगर लेवल अचानक से कम होता है, तो ऐसी स्थिति में ब्लड शुगर लेवल (Blood sugar level) बैलेंस करने के लिए डॉक्टर टेबलेट प्रिस्क्राइब कर सकते हैं। अपनी मर्जी से किसी भी दवा का सेवन ना करें।

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    स्वस्थ्य रहने के लिए नियमित योग (Yoga) करें। योग आपके मन और तन दोनों को स्वस्थ रखने में सहायक है। योग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी और योग करने का सही तरीका जानिए नीचे दिए इस वीडियो लिंक में।

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    हायपरग्लाइसीमिया या हायपोग्लाइसेमिया की स्थिति कब गंभीर हो सकती है?

    निम्नलिखित स्थितियों में पेशेंट की हालत बिगड़ सकती है। जैसे:

    • सांस (Breath) में अत्यधिक कठिनाई महसूस होना।
    • हमेशा भ्रम (Confusion) में रहना।
    • कोमा (Coma) की स्थिति होना।
    • जी मिचलाना (Nausea) और उल्टी (Vomiting) होना।

    अगर आप ऊपर बताई गई स्थितियों में से कोई भी परेशानी महसूस कर रहें हैं, तो डॉक्टर से जल्द से जल्द कंसल्टेशन करें।

    अगर आप हायपरग्लाइसीमिया और हायपोग्लाइसेमिया (Hyperglycemia vs Hypoglycemia) से जुड़ी किसी तरह की कोई जानकारी पाना चाहते हैं, तो हमें कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं हमारे हेल्थ एक्सपर्ट आपके सवालों का जवाब देंगे। हालांकि अगर आप डायबिटीज की समस्या से परेशान हैं, तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर से कंसल्ट करें। क्योंकि डॉक्टर ब्लड शुगर यानी डायबिटीज की समस्या को ध्यान में रखकर इलाज शुरू करते हैं।

    डायबिटीज से जुड़ी आपकी नॉलेज कितनी है सही? अपना स्कोर और सही जवाब जानने के लिए नीचे दिए इस क्विज को खेलिए।

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    लेखक की तस्वीर badge
    Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 09/02/2022 को
    Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड